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Saturday, July 11, 2026

विश्व रंग मंच में डिजिटल मीडिया और भारतीय ज्ञान परम्परा पर मंथन




रबीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय, भोपाल में 9 से 11 जुलाई 2026 तक आयोजित विश्व रंग मंच के अंतर्गत हिन्दी पत्रकारिता विषयक तीन दिवसीय कार्यक्रम सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ। इस आयोजन में देशभर से आए पत्रकारों, शिक्षाविदों, साहित्यकारों एवं शोधार्थियों ने हिन्दी पत्रकारिता की दो शताब्दियों की गौरवशाली यात्रा, वर्तमान चुनौतियों तथा भविष्य की संभावनाओं पर व्यापक विचार-विमर्श किया।

कार्यक्रम के समापन सत्र में डॉ. सौरभ मालवीय ने "डिजिटल मीडिया और भारतीय ज्ञान परम्परा" विषय पर वक्ता के रूप में अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान परम्परा के मूल्यों को डिजिटल मीडिया के माध्यम से वैश्विक स्तर तक प्रभावी ढंग से पहुँचाया जा सकता है। उन्होंने तथ्यपरक, मूल्यनिष्ठ और समाजोन्मुख डिजिटल पत्रकारिता की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि तकनीक तभी सार्थक है, जब वह सत्य, संवेदना और सामाजिक उत्तरदायित्व के साथ जुड़ी हो।

इस सत्र की अध्यक्षता वरिष्ठ पत्रकार राजेश बादल ने की। उन्होंने पत्रकारिता को लोकतंत्र का सशक्त आधार बताते हुए बदलते मीडिया परिदृश्य में हिन्दी पत्रकारिता की भूमिका पर प्रकाश डाला। जयदीप करणीक अमर उजाला डिजिटल के संपादक, ने भी अपने विचार रखते हुए डिजिटल युग में विश्वसनीय पत्रकारिता, तथ्य-जांच और नई मीडिया तकनीकों के महत्व पर विस्तार से चर्चा की।

विश्व रंग, रबीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय की एक प्रमुख सांस्कृतिक एवं बौद्धिक पहल है, जो साहित्य, कला, संस्कृति, शिक्षा और मीडिया के विविध आयामों पर राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संवाद का प्रभावी मंच प्रदान करती है।

समापन सत्र में वक्ताओं ने हिन्दी पत्रकारिता को नई तकनीकों के साथ जोड़ते हुए उसकी विश्वसनीयता, जनपक्षधरता और सामाजिक उत्तरदायित्व को और अधिक सुदृढ़ बनाने का आह्वान किया।

इस अवसर पर श्री संतोष चौबे का सान्निध्य मिला।

Sunday, June 7, 2026

छात्र संवाद



रविवार - गोमती नगर स्थित लखनऊ पब्लिक काॅलेज ऑफ प्रोफेशनल स्टडीज के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के विद्यार्थियों के साथ संवाद स्थापित किया। अपने वायवा प्रजेंटेशन में भावी मीडिया साथियों ने एक से बढ़कर एक नवाचार साझा किये। 
इस दौरान विभाग के अध्यक्ष डॉ. नीरज सिंह एवं सहायक प्रोफेसर डॉ. प्रियंका सिंह से भी कई समसामयिक विषयों पर चर्चा हुई।

Sunday, April 12, 2026

हिंदी पत्रकारिता ने ही स्वाभिमान का भाव जगाया : प्रो. सौरभ मालवीय









वाराणसी, बीएचयू।
काशी हिंदू विश्वविद्यालय में आयोजित “हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्ष : ऐतिहासिकता, परिवर्तन और चुनौतियां” विषयक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के द्वितीय दिवस के प्रथम सत्र में लखनऊ विश्वविद्यालय के पत्रकारिता विभागाध्यक्ष प्रो. सौरभ मालवीय मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
अपने संबोधन की शुरुआत उन्होंने बाबा काशी विश्वनाथ और महामना पंडित मदन मोहन मालवीय को नमन करते हुए कहा कि हिंदी पत्रकारिता ने ही हमारे भीतर स्वाभिमान का भाव उत्पन्न किया है। जो समाज अपनी सभ्यता और संस्कृति से कट जाता है, वह अंततः नष्ट हो जाता है। उन्होंने युवाओं को प्रेरित करते हुए कहा कि जिस देश की युवा पीढ़ी अपनी संस्कृति पर गर्व करती है, वह देश कभी अस्थिर या कमजोर नहीं हो सकता।
हिंदी पत्रकारिता की ऐतिहासिक भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इसने भारत को समृद्ध बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। महात्मा गांधी, बाल गंगाधर तिलक, महामना मालवीय, गणेश शंकर विद्यार्थी, विष्णु पराड़कर और भारतेंदु हरिश्चंद्र जैसे महान पत्रकारों और विचारकों ने पत्रकारिता के माध्यम से जनजागरण किया और स्वतंत्रता आंदोलन को जन आंदोलन में परिवर्तित कर दिया। स्वतंत्रता आंदोलन का सबसे बड़ा हथियार हिंदी पत्रकारिता थी, जिसने समाज के सभी वर्गों में चेतना जागृत कर कुप्रथाओं के खिलाफ आवाज उठाई और देश को स्वतंत्रता के लिए तैयार किया।
काशी की पत्रकारिता परंपरा का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि पत्रकारिता का काशी घराना हमेशा से समृद्ध और प्रभावशाली रहा है। भारतीय चिंतन की विशेषता को रेखांकित करते हुए कहा कि “जहां सत्य है, सुंदर है, वहीं भारत है।” उन्होंने ‘राम राज्य’ की अवधारणा का जिक्र करते हुए कहा कि सभी को साथ लेकर चलने की भावना भारत की पहचान है।
वर्तमान पत्रकारिता पर टिप्पणी करते हुए कहा कि आज भारत में दो प्रकार की पत्रकारिता देखने को मिल रही है, एक ‘भारत’ की पत्रकारिता और दूसरी ‘इंडिया’ की पत्रकारिता। उन्होंने इसे दृष्टिकोण और विचारधारा के स्तर पर उभरती हुई दो अलग धाराएं बताया।

Wednesday, February 11, 2026

भारतीय ज्ञान परम्परा विषय पर व्याख्यान











वाराणसी। महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग द्वारा आयोजित शोध कार्यशाला में “भारतीय ज्ञान परम्परा” विषय पर विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यशाला में देश के विभिन्न राज्यों से आए शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की हैं l

इस अवसर पर डॉ. सौरभ मालवीय ने भारतीय ज्ञान परम्परा की ऐतिहासिक, दार्शनिक एवं सांस्कृतिक आधारभूमि पर विस्तार से प्रकाश डाला। भारतीय ज्ञान परम्परा केवल अतीत की विरासत नहीं, बल्कि वर्तमान और भविष्य के लिए मार्गदर्शक सिद्धांत है। वेद, उपनिषद, पुराण, लोकपरम्पराएँ, आयुर्वेद, योग, ज्योतिष, साहित्य और दर्शन—इन सभी ने विश्व को मानवीय मूल्यों, समरसता और वैज्ञानिक दृष्टि का संदेश दिया है।

डॉ. मालवीय ने पत्रकारिता के विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे भारतीय ज्ञान परम्परा के मूल्यों को समझते हुए समकालीन मीडिया विमर्श में सकारात्मक और तथ्यपरक दृष्टिकोण अपनाएँ। वैश्विक परिप्रेक्ष्य में भारतीय चिंतन की प्रासंगिकता आज और अधिक बढ़ गई है।

Friday, February 6, 2026

फैक्ट चेकिंग पर कार्यक्रम






लखनऊ। पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग, लखनऊ विश्वविद्यालय में आज डीपफेक, एआई टूल्स एवं फैक्ट चेकिंग विषय पर एक विशेष सत्र का आयोजन किया गया। इस अवसर पर पीटीआई के चीफ सब-एडिटर श्री गौरव ललित शर्मा ने विद्यार्थियों को समसामयिक डिजिटल चुनौतियों से अवगत कराया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए विभागाध्यक्ष डॉ. सौरभ मालवीय ने कहा कि फेक न्यूज न केवल व्यक्ति बल्कि समाज और संस्थानों की छवि को भी धूमिल करती है। उन्होंने विद्यार्थियों से आग्रह किया कि वे पत्रकारिता के क्षेत्र में सत्य, नैतिकता और जिम्मेदारी को सर्वोपरि रखें तथा किसी भी सूचना को प्रसारित करने से पूर्व उसका तथ्यात्मक सत्यापन अवश्य करें।

मुख्य वक्ता श्री गौरव ललित शर्मा ने सरल शब्दों में बताया कि डीपफेक क्या है और एआई की मदद से फर्जी ऑडियो-वीडियो कैसे तैयार किए जाते हैं। उन्होंने छात्रों को Resemble (Voice Cloner), Eleven Labs, Ghostarchive, Archive Today और Wayback Machine जैसे उपयोगी टूल्स की जानकारी दी, जिनकी सहायता से डिजिटल सामग्री को सुरक्षित रखने और फैक्ट चेकिंग में मदद मिलती है।

उन्होंने फैक्ट चेकिंग के आवश्यक बिंदुओं तथा चरणबद्ध प्रक्रिया को भी विस्तार से समझाया। सत्र के दौरान विद्यार्थियों ने सक्रिय सहभागिता की और इसे अत्यंत ज्ञानवर्धक एवं उपयोगी बताया।
कार्यक्रम के अंत में विभाग की ओर से अतिथि वक्ता का आभार व्यक्त किया गया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. कृतिका अग्रवाल ने किया.

Thursday, February 5, 2026

मीडिया अवेयरनेस कार्यक्रम






लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग में एक विशेष मीडिया अवेयरनेस कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें वरिष्ठ पत्रकार डॉ. सर्वेश तिवारी ने डिजिटल मीडिया और टीवी मीडिया के बदलते स्वरूप पर विस्तार से जानकारी साझा की। इस सत्र का मुख्य उद्देश्य मीडिया के छात्रों और नवोदित पत्रकारों को व्यावहारिक एवं पेशेवर ज्ञान प्रदान करना था।
अपने संबोधन के दौरान डॉ. तिवारी ने डिजिटल एवं टीवी मीडिया में “ब्लैंक स्क्रीन” की स्थिति पर गंभीरता से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि यदि एंकर या रिपोर्टर के पास विषय की स्पष्ट समझ, कंटेंट क्लैरिटी और पर्याप्त तैयारी नहीं होती, तो इसका सीधा प्रभाव उसकी विश्वसनीयता और पेशेवर प्रगति पर पड़ता है।
कार्यक्रम में एंकरिंग और रिपोर्टिंग के व्यावहारिक पहलुओं पर भी विशेष चर्चा की गई। डॉ. तिवारी ने कहा कि एक अच्छा एंकर केवल समाचार पढ़ने वाला नहीं होता, बल्कि समाचार को समझकर, विश्लेषण करते हुए और दर्शकों से जुड़ाव बनाकर प्रस्तुत करता है।
इसके साथ ही उन्होंने डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म्स, टीवी जर्नलिज़्म, कंटेंट प्रेज़ेंटेशन, भाषा की स्पष्टता, बॉडी लैंग्वेज तथा स्क्रीन प्रेज़ेंस जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने छात्रों को नियमित अभ्यास, सतत अवलोकन और आत्म-सुधार पर निरंतर कार्य करने की सलाह दी। सत्र के अंत में प्रश्नोत्तर हुआ जिसमें प्रतिभागियों ने अपने प्रश्नों के समाधान प्राप्त किए।
विभागाध्यक्ष डॉ सौरभ मालवीय ने सत्र को अत्यंत उपयोगी, ज्ञानवर्धक एवं प्रेरणादायक बताया। संचालन डॉ. कृतिका अग्रवाल ने किया. कार्यक्रम में विभाग के सभी शोधार्थी एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।

Friday, October 31, 2025

संवादात्मक सत्र



लखनऊ विश्वविद्यालय के पत्रकारिता और जनसंचार विभाग में दिनांक 1 नवम्बर 2025 को हर शनिवार के दिन होने वाले शनिवार संवाद कार्यक्रम के तहत एक संवादात्मक सत्र का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में दूरदर्शन के प्रसिद्ध टीवी एंकर श्री संतोष चौधरी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।

श्री चौधरी ने विद्यार्थियों से अपने पत्रकारिता अनुभव साझा करते हुए मीडिया की विश्वसनीयता, नैतिकता और प्रश्न पूछने की प्रवृत्ति को बनाए रखने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता में नैतिकता और विश्वसनीयता का बहुत महत्व है और पत्रकारों को हमेशा सच की खोज में रहना चाहिए।

विभागाध्यक्ष डॉ. सौरभ मालवीय ने श्री चौधरी का स्वागत पुस्तक और शॉल भेंट कर किया। विभाग के शिक्षकगण एवं छात्र-छात्राओं ने बड़ी संख्या में भाग लेकर संवाद में सक्रिय सहभागिता की। इस दौरान डॉ कृतिका अग्रवाल, डॉ नीलू शर्मा भी उपस्थित रहीं ।

इस कार्यक्रम की अध्यक्षता विभागाध्यक्ष डॉ. सौरभ मालवीय ने किया। कार्यक्रम के अंत में प्रश्नोत्तर सत्र हुआ, जिसमें विद्यार्थियों ने समाचार प्रस्तुति और सार्वजनिक प्रसारण माध्यमों की बदलती भूमिका पर चर्चा की। मुख्य रूप से बदलते समय में पत्रकारिता पर चर्चा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का पत्रकारिता में उपयोग, फेंक न्यूज़ से बचने का तरीका, डिजिटल चैनल की भूमिका, एंकर बनने का तरीका, पत्रकारिता में नैतिकता, इत्यादि पर चर्चा हुई।

इस कार्यक्रम में उपस्थित सभी लोगों ने श्री चौधरी के अनुभव और ज्ञान से बहुत कुछ सीखा और उनके प्रति आभार व्यक्त किया।


Saturday, October 11, 2025

पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग में शनिवार संवाद कार्यक्रम




लखनऊ विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग द्वारा आयोजित शनिवार संवाद कार्यक्रम में "Navigating the Challenges of AI in Journalism: The ChatGPT Blunder in the Newsroom" विषय पर चर्चा हुई। मुख्य वक्ता द टाइम्स ऑफ इंडिया, लखनऊ की प्रिंसिपल करेसपॉन्डेंट सुश्री मोहिता तिवारी ने एआई के पत्रकारिता में उपयोग, अवसरों और चुनौतियों पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम की अध्यक्षता विभागाध्यक्ष डॉ. सौरभ मालवीय ने की। सुश्री तिवारी ने बताया कि एआई, जैसे चैट-जीपीटी समाचार संकलन, तथ्य-जाँच और कंटेंट निर्माण में सहायक है, लेकिन फेक न्यूज और नैतिकता की चुनौतियाँ भी लाता है। उन्होंने इंटर्नशिप के महत्व, पत्रकारिता में विशिष्टता, और खोजी, खेल, डिजिटल जैसे विभिन्न प्रकार की पत्रकारिता पर चर्चा की। उन्होंने सत्य, निष्पक्षता और पारदर्शिता जैसे नैतिक सिद्धांतों पर जोर दिया। डॉ. कृतिका अग्रवाल, डॉ. नीलू शर्मा सहित अन्य की उपस्थिति में छात्रों ने एआई और पत्रकारिता में करियर पर सवाल पूछे, जिससे कार्यक्रम जीवंत रहा।

Monday, September 22, 2025

जागरूकता कार्यक्रम






लखनऊ विश्वविद्यालय के जनसंचार एवं पत्रकारिता विभाग में आज “डिजिटल बैंकिंग एवं साइबर धोखाधड़ी : जोखिम एवं समाधान” विषय पर एक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया।
 यह कार्यक्रम एवोक इंडिया फाउंडेशन द्वारा भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के तत्वावधान में आयोजित किया गया था।
कार्यक्रम विशेष रूप से एमए जनसंचार एवं पत्रकारिता (प्रथम एवं तृतीय सेमेस्टर) के विद्यार्थियों के लिए आयोजित किया गया, जिसका मुख्य उद्देश्य सुरक्षित डिजिटल बैंकिंग प्रथाओं एवं साइबर सुरक्षा जागरूकता को बढ़ावा देना था।
कार्यक्रम की शुरुआत विभाग की सहायक प्रोफेसर डॉ कृतिका अग्रवाल ने अतिथियों के स्वागत से किया। इसके बाद एवोक इंडिया फाउंडेशन के संस्थापक एवं अध्यक्ष प्रवीन कुमार द्विवेदी ने स्वागत भाषण दिया और डिजिटल बैंकिंग की बढ़ती आवश्यकता एवं नागरिकों की जिम्मेदारी पर प्रकाश डाला।
प्रबीर दास (वित्तीय शिक्षक, एवोक इंडिया फाउंडेशन) ने साइबर सुरक्षा और RBI मॉड्यूल्स पर विस्तृत सत्र प्रस्तुत किया। उन्होंने डिजिटल बैंकिंग उपयोगकर्ताओं द्वारा झेले जाने वाले सामान्य साइबर खतरों, उनके बचाव उपायों और नियामक ढाँचे की भूमिका पर जानकारी दी।
रवजीत महाजन (असिस्टेंट वाइस प्रेसिडेंट, ट्रेनिंग – एवोक इंडिया फाउंडेशन) ने वित्तीय जागरूकता फैलाने में संचार की भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने छात्रों से समाज को सुरक्षित डिजिटल प्रथाओं के प्रति जागरूक करने का आह्वान किया।
विभाग की प्रतिक्रिया
विभागाध्यक्ष डॉ सौरभ मालवीय ने कहा कि “मीडिया छात्रों के लिए वित्तीय साक्षरता और साइबर जागरूकता समय की आवश्यकता है।”
कार्यक्रम में RBI जागरूकता मॉड्यूल्स पर इंटरैक्टिव सत्र भी आयोजित किए गए। विद्यार्थियों ने सक्रिय भागीदारी करते हुए साइबर धोखाधड़ी की पहचान, सुरक्षा उपाय और समाधान से संबंधित व्यावहारिक जानकारी प्राप्त की। अंत में प्रबीर दास ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। 
छात्रों ने कहा कि इस कार्यशाला से उन्हें डिजिटल वित्तीय तंत्र में स्वयं को सुरक्षित रखने की व्यवहारिक जानकारी प्राप्त हुई।


Monday, December 19, 2022

राष्ट्रधर्म ही मीडिया का धर्म है : मनोजकांत








आज दिनांक 18/12/2022 को उत्तर प्रदेश पर्यटन भवन लखनऊ के प्रेक्षागृह में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पूरब भाग के प्रचार विभाग द्वारा सोशल मीडिया मीट 2022 का कार्यक्रम आयोजित किया गया कार्यक्रम का शुभारंभ भारत माता आद्य पत्रकार देवर्षि नारद के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया। कार्यक्रम के प्रथम सत्र सोशल मीडिया का सामाजिक दायित्व एवं चुनौतियां विषय पर राष्ट्रीय स्वंसेवक संघ के सह क्षेत्र प्रचार प्रमुख मनोजकांत ने अपने उद्बोधन में कहा कि भारत में संचार माध्यमों का सर्वप्रथम अविष्कार हुआ था. देवऋषि नारदजी को आद्य पत्रकार माना जाता है. उन्होने जो सूत्र निर्धारित किए वह आज भी प्रासंगिक हैं. इसके अंतर्गत सोशल मीडिया भी शामिल है। मुख्य वक्ता संघ के सह क्षेत्र प्रचार प्रमुख डॉ मनोजकांत ने कहा कि मीडिया या सोशल मीडिया को लेकर अनेक प्रश्न उभरते हैं. इसके कई प्रकार हैं. वर्तमान समय में इसका विस्तृत स्वरूप है. न्यूज चैनल से आगे बढ़कर अब सोशल मीडिया भी संचार माध्यमो में जुड़ गया हैं. इसे लेकर व्यापक स्वरूप दिखाई देता हैं.
इस पर विमर्श की आवश्यकता हैं। प्रो मनोज अग्रवाल ने कहा संचार तथ्य एवंसत्य पर आधारित होना चाहिए. हम मानुष हैं. इसलिए तथ्यों में मानव कल्याण का भाव भी होना चाहिए. भारतीय संस्कृति में आदर्श जीवन मूल्यों को बहुत महत्त्व दिया गया. तथ्यों में जीवन मूल्यों की झलक भी होनी चाहिए.माँ और मदर शब्द भावना के आधर पर अलग है. अनुवाद की द्रष्टि से यह सही है. लेकिन इन शब्दों में अलग अलग संस्कृति का बोध है. माँ शब्द में भारतीय जीवन मूल्यों का बोध है. इसी प्रकार वरिष्ठ पत्रकार एवं सोशल मीडिया इनफ्लुअंसर शिल्पी सेन ने ग्राम स्वराज और नेशन और राष्ट्र में अन्तर है बताया. भारत के राष्ट्र में शास्वत संस्कृति का समावेश है.
वरिष्ठ पत्रकार एवं विश्लेषक हषर्वर्धन त्रिपाठी  ने कहा कि न्युज और व्यूज पर विमर्श आवश्यक है. उन्होने उदाहरण एक न्युज का उदाहरण दिया. न्युज यह थी कि एक बालक को हांथ में रक्षा सूत्र कलावा बांधने के कारण फुटबाल खेलने से रोक दिया गया. बालक ने कलावा हटाने से मना कर दिया. यह न्युज है. इसका व्यूज यह कि एक तरफ संकुचित मत के लोग है. वह अपने विचार दूसरों पर थोपना चाहते है. दूसरी तरफ प्रलोभन को ठुकरा कर अपनी अस्था पर विश्वास पर रखने वाले लोग भी हैं. संविधान में अधिकारों के साथ कर्तव्यों का भी उल्लेख है. हम सभी लोगों को अधिकारों के साथ कर्तव्य के प्रति भी सजग रहना चाहिए.
इससे श्रेष्ठ समाज का निर्माण होता हैं. मीडिया को इसमें भूमिका निभानी चाहिए. मीडिया और समाज, मीडिया और राष्ट्र आदि की अवधारणा पर विचार करना चाहिए. फिल्म मनोरंजन का माध्यम है. लेकिन इसका भी विकृत रूप दिखाई दे रहा है.भारतीय संस्कृति के प्रतीकों अमर्यादित रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है. सबरी माला मन्दिर पर निर्णय हुआ. लेकिन इसमें पीड़ित का कोई पता नहीं है. जिन्होंने यह मुद्दा उठाया उन्हें यहां की पूजा से कोई मतलब ही नहीं था.
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे क्षेत्र प्रचार प्रमुख नरेंद्र सिंह ने कहा कि मीडिया की भूमिका शिक्षण, भारतीय जीवन मूल्यों, राष्ट्रीय चिंतन से प्रेरित होनी चाहिए. इससे समाज राष्ट्र और मानवता का कल्याण होगा. साँस्कृतिक शब्दावली होती है. उसका ज्ञान होना चाहिए. कार्यक्रम में राष्ट्रीय कवि कमलेश मृदु, प्रांत प्रचार प्रमुख डॉ अशोक दुबे, विभाग कार्यवाह अमितेश, ब्रजेश, भाग संघ चालक प्रभात, सोशल मीडिया यूजर्स मिडिया के छात्र व शिक्षक उपस्थित रहे।
 कार्यक्रम का संचालन भाग प्रचार प्रमुख बालभाष्कर एवं डॉ सौरभ मालवीय जी ने किया. धन्यवाद ज्ञापन भाग कार्यवाह ज्योति प्रकाश ने किया। कार्यक्रम का समापन वंदे मातरम् गीत से हुआ !

भारत की राष्‍ट्रीयता हिंदुत्‍व है