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Saturday, March 21, 2026

समाचार पत्रों में

  डॉ.सौरभ मालवीय की पुस्तक "भारत बोध" का लोकार्पण








Monday, August 19, 2024

पुस्तक भेंट




रक्षाबन्धन के पावन पर्व पर महामहिम राज्यपाल, उत्तर प्रदेश का आर्शीवाद प्राप्त हुआ।
इस अवसर पर मैंने अपनी पुस्तक 'भारत बोध', 'भारतीय राजनीति के महानायक नरेन्द्र मोदी भेंट की'।

Saturday, October 21, 2023

पुस्तक भेंट



चिंतक,विचारक, स्तम्भकार और राजनेता श्री हृदयनारायण दीक्षित हिन्दी जगत के हस्ताक्षर है। श्री दीक्षित जी अपनी पुस्तक आशीर्वाद स्वरूप सप्रेम दिए और मुझे भी अपनी पुस्तक 'भारत बोध भेट करने का अवसर प्राप्त हुआ।

Thursday, October 12, 2023

हिन्दुत्व एक जीवन दर्शन है

हिन्दू शब्द का प्रयोग कब प्रारंभ हुआ यह बताना कठिन है. परंतु यह सत्य है कि हिन्दू शब्द अत्यंत प्राचीन वैदिक वाङ्मय के ग्रन्थों मे साक्षात् नहीं पाया जाता है. परन्तु यह भी निर्विवाद है कि हिन्दू शब्द का मूल निश्चित रूप से वेदादि प्राचीन ग्रन्थों में विद्यमान है.
भारत में हिन्दू नाम की उपासना पद्धति है ही नही यहां तो कोई वैष्णव है या शैव अथवा शक्य है कबीरपंथी है सिख है आर्यसमाजी है जैन और बौद्ध है. वैष्णवों में भी उपासना के अनेक भेद हैं. अर्थात् जितने व्यक्ति उपासना और आस्था की उतनी ही विधियां हर विधि को समाज से स्वीकारोक्ति प्राप्त है. पश्चिम के राजनीतिज्ञ व समाजशात्री  भारतीय संस्कृति और समाज के इस पक्ष को या तो समझ ही नहीं सके या उन्होने पश्चिमी अवधारणाओं के बने सांचों में ही भारत को ढ़ालने का प्रयास किया.

अनेक सज्जनों द्वारा विभिन्न प्रकार की व्याख्याओं से यह शब्द भी विवादित हो गया है. यद्यपि यह शब्द भारत का ही पर्याय है और यह जीवन पद्धति की ओर इंगित करता है. विख्यात स्तम्भकार पद्म श्री मुजफ्फर हुसैन कहते हैं -
‘‘भारतीयता तो भारत की नागरिकता है, भारत की राष्ट्रीयता हिन्दुत्व है.’’
ऐसा भी प्रचारित किया गया है कि हिन्दू नाम अपमानजनक   है जैसा कि भारतीय फारसी के शब्दकोशों में मिलता है. इनमें हिन्दू का अर्थ द्वेषवश, काला, चोर आदि किया गया है जो कि पूर्णतया असत्य है. अरबी व फारसी भाषा में ‘हिन्द’ का अर्थ है ‘सुन्दर’ एवं ‘भारत का रहने वाला’ आदि. हिंदू चिंतक श्री कृष्णवल्लभ पालीवाल बताते हैं कि जब 1980-82 में, मैं बगदाद में ईराक सरकार का वैज्ञानिक सलाहकार था तो मुझे वहां यह देखकर आश्चर्य हुआ कि अनेक युवक व युवतियों के नाम ‘अलहिन्द’ व ‘विनत हिन्द’ थे. तो मैंने आश्चर्यवश उनसे पूछा कि ये नाम तो हिन्दुओं जैसे लगते है जिसका अर्थ है ‘सुन्दर’ और इसी भाव में हमारे ये नाम है.
कुछ लोगों ने अपने को ‘हिन्दू’ न कहकर ‘आर्य‘ कहना ज्यादा उचित समझा है, किंतु रामकोश में सुस्पष्ट लिखा है कि-
हिन्दूर्दुष्टो न भवति नानार्याे न विदूषकः।
सद्धर्म पालको विद्वान् श्रौत धर्म परायणः।।
यानी ‘‘हिन्दू दुष्ट, दुर्जन व निन्दक नहीं होता है. वह तो सद्धर्म का पालक, सदाचारी, विद्वान, वैदिक धर्म में निष्ठावान और आर्य होता है.“ अतः हिन्दू ही आर्य है और आर्य ही हिन्दू है. समय की मांग है कि हम इस विवाद को भूलकर मिल जुलकर हिन्दू धर्म व हिन्दू संस्कृति को उन्नत करने और हिन्दू राज्य स्थापित करने प्रयास करें.

स्वामी विज्ञानानन्द ने हिन्दू नाम की उत्पति के विषय में कहा कि हमारा हिन्दू नाम हजारों वर्षों से चला आ रहा है जिसके वेदो संस्कृत व लौकिक साहित्य में व्यापक प्रमाण मिलते है. अतः हिन्दू नाम पूर्णतया वैदिक, भारतीय और गर्व करने योग्य है. वस्तुतः यह नाम हमें विदेशियों ने नहीं दिया है बल्कि उन्होंने अपने अरबी व फारसी भाषा के साहित्य में उच्च भाव में प्रयोग किया है.
शताब्दियों से सम्पूर्ण भारतीय समाज ‘‘हिन्दू“ नाम को अपने धार्मिक, सांस्कृतिक, राष्ट्रीय एवं जातिय समुदाय के सम्बोधन के लिए गर्व से प्रयोग करता रहा है. आज भारत ही नहीं, विश्व के कोने-कोने में बसे करोड़ों हिन्दू अपने को हिन्दू कहने में गर्व अनुभव करते हैं. वे जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में अपने धर्म एवं संस्कृति से प्रेरणा पाकर असीम सफलता प्राप्त कर रहे हैं. वे हिन्दू जीवन मूल्यों से स्फूर्ति पाकर समता और कर्मठता के आधार पर, भारत में ही नहीं, विदेशों में भी, अपनी श्रेष्ठता का परिचय दे रहे हैं. वे श्रेष्ठ मानवीय जीवन मूल्यों के आधार पर समाज में प्रतिष्ठित भी हो रहे है.

हिन्दू पुनर्जागरण के पुरोधा महर्षि दयानन्द सरस्वती, युवा हिन्दू सम्राट स्वामी विवेकानन्द, स्वामी श्रद्धानन्द, योगी श्री अरविंद, भाई परमानन्द, स्वातान्त्र्य वीर विनायक दामोदर सावरकर आदि महापुरुषों ने ‘हिन्दू’ नाम को गर्व के साथ स्वीकार कर आदर प्रदान किया है. स्वामी विवेकानन्द एवं स्वातन्त्र्य वीर सावरकर ने हिन्दू नाम के विरूद्ध चलाए जा रहे मिथ्या कुप्रचार का पूर्ण सामथ्र्य से विरोध किया. सावरकर जी ने प्राचीन भारतीय शास्त्रों के आधार पर इस नाम की मौलिकता को बड़ी प्रामाणिता के साथ पुनः स्थापित किया तथा बल देकर सिद्ध किया कि ‘‘हिन्दू नाम पूर्णतया भारतीय है जिसका मूल वेदों का प्रसिद्ध ‘सिन्धु’ शब्द है.’
हिन्दू शब्द का प्रयोग कब प्रारम्भ हुआ, इसकी निश्चित तिथि बताना कठिन अथवा विवादास्पद होगा. परन्तु यह सत्य है कि हिन्दू शब्द अत्यन्त प्राचीन वैदिक वाङ्मय के ग्रन्थों में साक्षात् नहीं पाया जाता है. परन्तु यह भी निर्विवाद है कि हिन्दू शब्द का मूल निश्चित रूप से वेदादि प्राचीन ग्रन्थों में विद्यमान है. औपनिषदिको काल के प्राकृत, अपभ्रंश, संस्कृत एवं मध्यकालीन साहित्य में हिन्दू शब्द पार्यप्त मात्रा में मिलता है. अनेक विद्वानों का मत है कि हिन्दू शब्द प्राचीन काल से सामान्य जनों की व्यावहारिक भाषा में प्रयुक्त होता रहा है. जब प्राकृत एवं अपभ्रंश शब्दों का प्रयोग साहित्यिक भाषा के रूप में होने लगा, उस समय सर्वत्र प्रचलित हिन्दू शब्द का प्रयोग संस्कृत ग्रन्थों में होने लगा. ब्राहिस्र्पत्य कालिका पुराण, कवि कोश, राम कोश, कोश, मेदिनी कोश, शब्द कल्पद्रुम, मेरूतन्त्र, पारिजात हरण नाटक, भविष्य पुराण, अग्निपुराण और वायु पुराणादि संस्कृत ग्रंन्थों में हिन्दू शब्द जाति अर्थ में सुस्पष्ट मिलता है.

इससे यह स्पष्ट होता है कि इन संस्कृत ग्रन्थों के रचना काल से पहले भी हिन्दू शब्द का जन समुदाय में प्रयोग होता था.
संस्कृत साहित्य में ‘हिन्दू’ शब्द
संस्कृत साहित्य में पाए गए हिन्दू शब्द प्रस्तुत है-
हिंसया दूयते यश्च सदाचरण तत्परः।
वेद… हिन्दू मुख शब्दभाक्।।
(वृद्ध स्मृति)
‘‘जो सदाचारी वैदिक मार्ग पर पर चलने वाला, हिंसा से दुःख मानने वाला है, वह हिन्दू है.“
बलिना कलिनाच्छन्ने धर्मे कवलिते कलौ।
यावनैर वनीक्रान्ता, हिन्दवो विन्ध्यमाविशन्।।
(कालिका पुराण)
‘जब बलवान कलिकाल ने सबको प्रच्च्छन्न कर दिया और धर्म उसका ग्रास बन गया तथा पृथ्वी यवनों से आक्रान्त हो गई, तब हिन्दू खिसककर विन्ध्याचल की ओर चले गए.’’
इसी प्रकार का भाव यह श्लोक भी प्रकट करता हैः
यवनैरवनी क्रान्ता, हिन्दवो विन्ध्यमाविशन्।
बलिना वेदमार्र्गायं कलिना कवलीकृतः।।
(शार्ङ्धर पद्धति)
‘यवनों के आक्रमण से हिन्दू विन्ध्याचल पर्वत की ओर चले गए.’
हिन्दूः हिन्दूश्च प्रसिद्धौ दुष्टानां च विघर्षणे.
(अमर कोश)
‘हिन्दू’ और ‘हिन्दू’ दोनों शब्द दुष्टों को विघर्षित करने वाले अर्थ में प्रसिद्ध हैं.’
‘‘हिन्दू सद्धर्म पालको विद्वान् श्रौत धर्म परायणः।
(राम कोश)
हिन्दूः हिन्दूश्च हिन्दवः।
(मेदिनी कोश)
“हिन्दू, हिन्दू और हिन्दुत्व तीनों एकार्थक है.’
हिन्दू धर्म प्रलोप्तारौ जायन्ते चक्रवर्तिनः।
हीनश्च दूषयप्येव स हिन्दूरित्युच्यते प्रिये।।
(मेरु तन्त्र)
‘‘हे प्रिये! हिन्दू धर्म को प्रलुप्त करने वाले चक्रवर्ती राजा उत्पन्न हो रहे हैं. जो हीन कर्म व हीनता का त्याग करता है, वह हिन्दू कहा जाता है.’’
हिनस्ति तपसा पापान् दैहिकान् दुष्टमानसान्।
हेतिभिः शत्रुवर्गः च स हिन्दूः अभिधीयते।।
(परिजातहरण नाटक)
‘जो अपनी तपस्या से दैहिक पापों को दूषित करने वाले दोषों का नाश करता है, तथा  अपने शत्रु समुदाय का भी संहार करता है, वह हिन्दू है.’
हीनं दूषयति इति हिन्दू जाति विशेषः
(शब्द कल्पद्रुमः)
‘हीन कर्म का त्याग करने वाले को हिन्दू कहते हं.’
इन प्रमाणों से यह स्पष्ट है कि प्राचीन एवं अर्वाचीन संस्कृत साहित्य में हिन्दू शब्द का पर्याप्त उल्लेख के साथ  साथ हिन्दू के लक्षणों को भी दर्शाया गया है.

*लेखक ने सांस्कृतिक राष्ट्रवाद पर शोध किया है। 

Tuesday, September 6, 2022

पुस्तक भेंट

 

सुखद मुलाक़ात!
आ.मनोज कांत जी
सह प्रचार प्रमुख
पूर्वी क्षेत्र- लखनऊ

पुस्तक भेंट अंत्योदय को साकार करता उत्तर प्रदेश और भारत बोध

Tuesday, April 12, 2022

डॉ. सौरभ मालवीय की पुस्तक भारत बोध

 


अकारण ही मुझे स्नेह करने वाले, अग्रज भ्राता एवं मार्गदर्शक डॉ सौरभ मालवीय जी की पुस्तक भारत बोध पढ़ने का सुयोग मिला। 
बहुत ही उत्कृष्ट वैचारिक मञ्जूषा के रूप में पिरोये गए एक एक सुन्दर लेख इस पुस्तक में पढ़ने को मिला। पुस्तक पढ़ते हुए बहुत सारे विचार मन की उर्वरा भूमि पर अंकुरित हुए जो स्वाभाविक भी थे क्यों की डॉ मालवीय जी का शोध ही "सांस्कृतिक राष्ट्रवाद" पर है उनके जीवन का अधिकांश समय ही इसी वैचारिक प्रज्ञा के अंतर्दहन में गया है। 
मुझे यह कहते अति प्रसन्नता है की इस पुस्तक से मैंने राष्ट्रबोध के साङ्गोपाङ्ग यात्रा को जाना और समझा और यह पुस्तक भविष्य के मेरे चेतना बोध का एक महत्वपूर्ण अंग बन गया है। 
कुछ लेखा जैसे भारतीयता बनाम सांस्कृतिक राष्ट्रवाद,  भारतीय समाज और मीडिया तथा सांस्कृतिक राष्ट्रवाद एवं मीडिया आदि लेख उनके लम्बे अनुभव, विमर्श का परिणाम है। 
बहुत बहुत धन्यवाद एक उत्कृष्ट कार्य हेतु!
-शिवेश प्रताप 

Wednesday, December 29, 2021

पुस्तकें भेंट


सुखद सानिध्य
प्रो. अखिलेश सिंह जी
कुलपति
प्रो.राजेन्द्र सिंह (रज्जू भैया) विश्वविद्यालय- प्रयाग
इस अवसर पर उन्हें अपनी पुस्तकें  'भारत बोध' और 'भारत बोध,पुस्तक- भारतीय राजनीति के महानायक नरेन्द्र मोदी' भेंट कीं.

Tuesday, November 23, 2021

उत्तर प्रदेश सरकार में प्रतिनियुक्ति



माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय में प्राध्यापक और वर्तमान में उत्तर प्रदेश सरकार में प्रतिनियुक्ति (Deputation) पर शिक्षा विभाग में विशेषज्ञ के रूप में अपनी सेवाएँ दे रहे श्री सौरभ मालवीय जी की संगति सदैव सुखद होती है...आप मेरे गृह जनपद देवरिया के ही रहने वाले हैं।
एक लेखक के तौर पर आपकी कई पुस्तकें आज उपलब्ध हैं। आपके सौजन्य से आपकी पुस्तक 'भारत बोध' की प्रति मुझे भी प्राप्त हुई। अंत्योदय पर आपकी नवीनतम पुस्तक का विमोचन हाल में ही माननीय गृह मंत्री भारत सरकार श्री अमित शाह जी के द्वारा सम्पन्न हुआ था।
धन्यवाद ज्ञापन के साथ साथ आपके कृतित्व में उत्तरोत्तर प्रगति की शुभकामनाएँ.
Ashta Nanda Pathak

Saturday, August 21, 2021

पुस्तक भेंट





आत्मीय मुलाकात!
श्री शलभ मणि त्रिपाठी (मीडिया सलाहकार, मा. मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश)
श्री रंजीव तिवारी (सचिव, महामना शिक्षण संस्थान, भाऊराव देवरस न्यास)
इस अवसर पर अपनी पुस्तक 'भारत बोध' भेंट की.  

Saturday, August 7, 2021

पुस्तक भेंट






सौभाग्य
संघ के वरिष्ठ प्रचारक श्री बैरिस्टर जी सहित जिला प्रचारक- सीतापुर, कुशाग्र जी एवं सलेमपुर विधानसभा के यशस्वी नेता श्री राजू पहाड़िया जी का मेरे निज निवास 'विप्रकुंज'  आगमन हुआ.

Sunday, August 1, 2021

पुस्तक भेंट

 



सुखद भेंट
श्रीमती सुषमा सिंह
उपाध्यक्ष
उ० प्र० राज्य महिला आयोग - लखनऊ

इस अवसर पर अपनी पुस्तकें 'भारत बोध' एवं 'राष्ट्रवाद और मीडिया' भेंट कीं.   

Monday, July 19, 2021

मेरी पुस्तक 'भारत बोध' की समीक्षा

  




स्वदेश ग्वालियर समूह, स्वदेश भोपाल समूह और सुबह सवेरे में प्रकाशित मेरी पुस्तक 'भारत बोध' की समीक्षा.

Saturday, July 10, 2021

सौरभ मालवीय को हार्दिक बधाई

 

प्रिय मित्र डॉ. सौरभ मालवीय उत्तर प्रदेश शासन के समग्र शिक्षा विभाग में सलाहकार नियुक्त हुए हैं।
डॉक्टर सौरभ मालवीय को हार्दिक बधाई। 
उनकी उपलब्धियों की सूची लंबी है। डॉक्टर मालवीय सुपरिचित शिक्षक, लेखक, स्तंभकार, मीडिया शोधार्थी, टेलीविजन पैनलिस्ट, राजनीतिक विश्लेषक और प्रभावी वक्ता के रूप में जाने जाते हैं।
चित्र में भारत का बोध कराने वाली अपनी नई पुस्तक "भारत बोध" प्रदान कर डॉ. सौरभ मालवीय ने मुझे भी अनुग्रहीत किया है। आपका स्नेह और अपनापन हमारी धरोहर है।
-उमाशंकर मिश्र 

Friday, June 25, 2021

पुस्तक भेंट

 

भारतीय ज्ञान परंपरा के ऋषि 
आ.हृदय नारायण दीक्षित जी को
सप्रेम भेंट पुस्तक भरतबोध'
विधानसभा
अध्यक्ष
उत्तर-प्रदेश

Sunday, June 13, 2021

भारत बोध



"दरअसल भारत का राष्ट्र जीवन सत्यकामी है। उसने पाया कि मनुष्य एक रहस्य है। तमाम आधुनिक वैज्ञानिक खोजों और विचार तथा दर्शन की हजारों व्याख्याओं के बावजूद मनुष्य एक पहेली है। एक अचरज है। एक अचंभा है। भारत सत्य का सनातन खोजी बना। सत्य की खोज भारत का स्वभाव बना। इसलिए भारत सिर्फ एक भूखंड ही नहीं है। यह सिर्फ एक संप्रभु राज्य भी नहीं है। भारत समूची सृष्टि के रहस्यों को जान लेने की सनातन अभीप्सा है।"
भारत के बारे में इतनी गूढ़ किन्तु सरल व्याख्या करने वाले माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय के प्राध्यापक डॉ सौरभ मालवीय जी से मिलकर बातें करते समय वो जितने ही सहज महसूस होते हैं, उनकी लिखी हुई पुस्तकों को पढ़ते समय उतनी ही गंभीरता महसूस होती है। 

डॉ. सौरभ जी की लिखित नई पुस्तक 'भारत बोध' का अध्ययन कर रहा था। संस्कृति,संस्कार,राष्ट्र-बोध, भारतीयता, एकात्म मानव दर्शन, उत्सव-पर्व, मीडिया,साहित्य और समाज जैसे अनेक विषयों को समाहित करने वाली यह पुस्तक सचमुच भारत का बोध कराती है।

यश पब्लिकेशंस दिल्ली से प्रकाशित इस पुस्तक का मूल्य 220 रुपये है। 
आप सभी खरीद कर पढ़ें, हालांकि मुझे यह स्नेह आशीष स्वरूप मिली है।
-राकेश त्रिपाठी 

Thursday, April 1, 2021


राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक आ.मिथिलेश जी को अपनी पुस्तक "भारत बोध" भेंट करने का सुखद अवसर।
आप बस्ती,सिद्धार्थनगर, आर्यमगढ़,प्रयागराज सहित अनेक स्थानों पर प्रचारक एवं झारखंड के प्रांत प्रचारक  रहने के बाद अभी क्षेत्रीय बौद्धिक प्रमुख एवं गंगा समग्र का कार्य देख रहे। केंद्र- लखनऊ है।

Saturday, March 27, 2021

डॉ. सौरभ मालवीय की पुस्तक 'भारत बोध' का लोकार्पण




पुस्तक का नाम : भारत बोध
लेखक :  डॉ.सौरभ मालवीय
स्थान :  परमार्थ निकेतन, ऋषिकेश
प्रकाशक :  यश पब्लिकेशन, नई दिल्ली

मंच परिचय:
परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी, देवसंस्कृति विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. चिन्मय पंड्या जी, पूज्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद जी, साध्वी भगवती सरस्वती जी, पूर्व-केंद्रीय मंत्री श्री संजय पासवान जी,  श्री कपिल मिश्रा जी, महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय, मोतिहारी के कुलपति प्रो.संजीव शर्मा सहित अनेक गणमान्य विभूतियां उपस्थित रहीं।
 "थिंक इंडिया काउंसिल" द्वारा कुम्भ कॉन्क्लेव के अंतर्गत 'धर्म-संस्कृति और विकास' विषयक व्याख्यान माला 24,25 मार्च ऋषिकेश में आयोजित हुआ। सौरभ पांडेय जी, राकेश त्रिपाठी जी का आभार!

Thursday, March 25, 2021

पुस्तक भेंट की




टीवी चैनल्स पर प्रखरता से पार्टी व सरकार का पक्ष रखने वाले प्रदेश प्रवक्ता श्री राकेश जी त्रिपाठी भाईसाहब , मुझे भाई समान स्नेह देने वाले माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय में प्रवक्ता , संघ चिंतक टीवी डिबेट्स में अक्सर दिखने वाले उत्कृष्ट लेखक डॉक्टर सौरभ जी मालवीय भाईसाहब व भाजयुमो प्रदेश कार्यसमिति सदस्य श्री अभिषेक जी मिश्र का आज हरिद्वार से वापसी के समय "नारायण निवास" पर आगमन हुआ।
आप सभी के आतिथ्य का अवसर पाकर सुखद अनुभूति हुई।
डॉक्टर सौरभ मालवीय जी ने अपनी नई पुस्तक "भारत बोध " मुझे स्मृति स्वरूप भेंट की जिसके बारे में विस्तार से पढ़ने के बाद लिखूंगा।
-प्रीतेश दीक्षित 

Sunday, March 21, 2021

सौरभ मालवीय की किताब 'भारत बोध' का लोकार्पण

 

सिद्धार्थनगर. माधव संस्कृति न्यास, नई दिल्ली और सिद्धार्थ विवि. सिद्धार्थनगर द्वारा आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी के उद्घाटन सत्र में डॉ. सौरभ मालवीय की लिखित पुस्तक भारत बोध समेत आठ पुस्तकों का लोकार्पण हुआ. ‘भारतीय इतिहास लेखन परंपरा : नवीन परिप्रेक्ष्य’ विषय पर अपनी बात रखते हुये मुख्य अतिथि बेसिक शिक्षा मंत्री डॉ. सतीश चंद्र द्विवेदी ने कहा कि आजादी के बाद इतिहास संकलन का कार्य हो रहा है. देश को परम वैभव के शिखर पर ले जाने में युवा इतिहासकारों का संकलन कारगर साबित होगा. कार्यक्रम शुभारंभ के दौरान माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, नोएडा परिसर में सहायक प्राध्यापक डॉ. सौरभ मालवीय की लिखित पुस्तक भारत बोध समेत आठ अलग-अलग लेखकों की पुस्तकों का मंत्री व कुलपति द्वारा लोकार्पण किया गया.
डॉ. द्विवेदी ने कहा कि भारत को पिछड़े और सपेरों का देश कहा गया है, इस विसंगती को दूर करने का कार्य जारी है. भारत के स्वर्णिम इतिहास का संकलन हो रहा है. महात्मा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय (वर्धा, महाराष्ट्र) के कुलपति प्रो. रजनीश कुमार शुक्ल ने कहा कि युवा इतिहासकार भारत का इतिहास लिख सकते हैं. भारत का इतिहास उत्तान पाद, राम कृष्ण, समुद्र गुप्त, चंद्रशेखर आजाद, भगत सिंह, राम- कृष्ण जैसे अनेक महापुरुषों से है. इतिहास वेद, ज्ञान, यश, कृति, पुरूषार्थ और संघर्ष का होता है. इतिहास में सच्चाई दिखने वाला होता है. आजादी के पहले कारवां चलता गया, हिंदोस्तां बढ़ता गया के आधार पर इतिहास लिखा गया. गोरी चमड़ी वाले अंग्रेज भारत कमाने आए और यहीं रह गये. बाद में हमारा इतिहास लिख दिया. वास्कोडिगामा जान अपसटल को चिट्ठी देने के लिए खोज में निकला था, जिसे लोग भारत की खोज करता बताते हैं. इसी इतिहास को युवा इतिहासकार बदलेंगे.

नालंदा विश्वविद्यालय (बिहार) के कुलपति प्रो. वैद्यनाथ लाभ ने कहा कि डार्विन की थ्यौरी में बंदर से मनुष्य बनने की कल्पना बताया गया है, जबकि ब्रह्मा से मनुष्य की रचना हुई है. भगवान हमारे इष्ट हैं. ब्रिटिश इंडिया कंपनी ने हमे विकृति मानसिकता का बना दिया. हम दिन ब दिन अंग्रेजों की बेडियों में जकड़े गये. हमें सांस्कृतिक परंपरा का बोध नहीं था. स्वतंत्रता के पश्चात हम सांस्कृतिक पुर्नउत्थान के लिए खड़े हुए हैं. अंग्रेजों ने किताबों में ऐसी बातें लिखी कि हम हीन भावना से ग्रसित हुए. हमने ग्रंथ, वेद, रामायण, पुराण पढ़ना छोड़ दिया, लेकिन हमे सारस्वत सरस्वती का बोध यहीं हुआ है. सब सास्वत है.

डॉ. सौरभ मालवीय की पुस्तक "भारत बोध" का लोकार्पण

  डॉ. सौरभ मालवीय की पुस्तक "भारत बोध" का लोकार्पण







भारत की राष्‍ट्रीयता हिंदुत्‍व है