Showing posts with label काव्य. Show all posts
Showing posts with label काव्य. Show all posts

Monday, May 28, 2018

खुद से वादा

 

जीतू मै, खुद से वादा करों,
जितना सोचते हो,
कोशिश उससे ज्यादा करों,
तकदीर भी रूठे पर हिम्मत न टूटे,
मजबूत इतना अपना इरादा करो.

Tuesday, March 20, 2018

ज्ञान के प्रकाश की ले मशाल हाथ में




ज्ञान के प्रकाश की ले मशाल हाथ में
शील की पवित्रता है हमारे साथ में
एकता के स्वर उठे छूने को ये आसमाँ

Saturday, May 7, 2016

काव्य संग्रह ’बिखरने से बचाया जाए’ का लोकार्पण


दिल्ली के कन्सटीट्यूशन क्लब (डिप्टी चेयरमैन हॉल) में आज शाम लेखिका श्रीमती अलका सिंह के काव्य संग्रह ’बिखरने से बचाया जाए’ का लोकार्पण प्रख्यात साहित्यकार एवं आलोचक डॊ. नामवर सिंह ने किया. इस मौक़े पर उन्होंने कहा कि हिंदी में ग़ज़ल लिखना मुश्किल काम है. बहुत कम लोग ही लिखते हैं, लेकिन अलका सिंह की किताब एक उम्मीद जगाती है कि कविता, ग़ज़लें और मुक्तक को आने वाली पीढ़ी ज़िंदा रखेंगी. यह अनूठा काव्य संग्रह है. उन्होंने कहा कि लोकार्पण कार्यक्रम में इतने लोगों का जुटना अपने आप में मायने रखता है. राजनीति करने वालों ने दिल्ली को उजाड़ दिया है, यह केवल राजधानी बन कर न रहे, बिखरने से बचे. इसके लिए कविताएं ज़रूरी हैं. ’ज़रूरी तो नहीं खुशियां ही मिलें दामन में, कुछ ग़मो को भी तो सीने से लगाया जा’ बेहतरीन शेअर है.

समीक्षक अनंत विजय ने कहा कि यह संग्रह कॉकटेल है, जिसमे ग़ज़लें, कविताएं और मुक्तक हैं. हिंदी साहित्य में प्रेम का भाव है, लेकिन इस संग्रह ने नई उम्मीद जगाई है. रिश्तों को लेकर लेखिका की बेचैनी साफ़ झलकती है.
’दाग़ अच्छे है’ में अंग्रेज़ी के शब्दो का प्रयोग धूप में मोती की तरह है. आधुनिक युग की त्रासदी ’सुख बेच दिए, सुविधाओं की ख़ातिर’ में साफ़ झलकती है. शब्दों के साथ ठिठोली क़ाबिले-तारीफ़ है.

कवयित्री अनामिका ने कहा कि लेखिका की सोच व्यापक है, समावेशी है समेटने की कोशिश है. स्पष्ट और मुखर होकर बेबाकी से हर बात कही गई है. कई आयामों को छूती ये रचनाएं सीधे मन को छूती हैं.
अमरनाथ अमर ने कहा की कविता कई सवाल उठाती है और समाधान देती है. "अपना कफ़न ओढ़ कर सोने लगे हैं लोग" विश्व स्थिति को व्यक्त करती है. मंच संचालन माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल में सहायक प्राध्यापक डॊ. सौरभ मालवीय ने किया. सार्थक पहल का यह आयोजन प्रवक्ता डॉट कॉम तथा नया मीडिया मंच के संयुक्त तत्वावधान में हुआ. इस अवसर पर साहित्य और पत्रकारिता के क्षेत्र की जानी मानी हस्तियां मौजूद थीं.
लोकार्पण समारोह की एक झलक
 
 
 
आयोजन के व्यवस्था पक्ष में पीछे खड़े अनिल पांडेय जी साथ ही प्रवक्ता डॉट काम के भारत भूषण और संजीव सिन्हा साथ ही सामाजिक कार्यकर्ता अमरनाथ झा सहित अन्य साथी.

Sunday, March 15, 2015

जिन दीपों ने हमें जलाया था आज उन्ही के गुण गाते है

जिन दीपों ने हमें जलाया था आज उन्ही के गुण गाते है
और उन्ही के पद चिन्हों पर चल कर के चलते जाते है
अंधकार का वक्ष चिर कर नूतन पथ दर्शन करते है 
अरे विश्व तू भूल न जाना दीप नहीं जीवन जलते है

Wednesday, January 12, 2011

हम सब वंदन करते है


जिस विवेक की शुभ वाणी ने, धरती को आनंद दिया
हिन्दू धर्म हुंकार उठा, पाखंडवाद को बंद किया
युवा संत के जनम पर्व पर, हम सब वंदन करते है
भारत माता दिग्विजयी हो यह अभिनन्दन करते है
-डॊ. सौरभ मालवीय

Saturday, September 12, 2009

पूज्य भागवत जी के जन्म दिवस पर समर्पित


जग प्रपंच से मोह नहीं है तभी कहलाते हो मोहन
भारत चिन्मय आदि शक्ति है परम भागवत त्वं स्वोहम

केशव माधव मधुकर रज्जू दिब्य सुदर्शन की माला
राष्ट्र देवी के सुभ्र चरणों में शोभित मोहन मणि माला

अमिय पियो शत् शरद जियो वैभव का पावन शिखर चढो
भारत को जगत गुरु करने हम साथ तुम्हारे तीव्र बढो

Saturday, November 8, 2008

श्री लालकृष्ण आडवाणी जी को समर्पित


श्री लालकृष्ण आडवाणी जी के जन्मदिन पर आप सभी पाठको को समर्पित
भारत को अभिमान तुम्हीं पर
भारतीय संस्कृति तव प्राण।

भारतीय जनता की आशा
राष्ट्र भाव का कर दो त्राण।।

झुलेलाल कृपा पूरित तुम
सिद्ध भारती तेरे द्वार।

अनुपम वाक्, लेखनी, चिन्तन,
या, चाल, चलन, आचार।। 2।।

विद्या, वाणिज केंद्र कराची
पश्चिम के भारत की शान।

सहस्रािब्द तक गर्वित भारत
जिसके कारण बना महान।। 3।।

उसी कराची से पाई थी
तुमने भारत का परिचय।

संस्कृत, संस्कृति, राष्ट्र चिरंतन
अटक-कटक है एक दय।। 4।।

मूढ़ नेतृ के दुरभिसंधि ने
तुमसे छिनी कराची थी।

दोनों हाथ कटे भारत के
घोर दर्द उपजाती थी।। 5।।

चार लाख जन के हत्या की
आंखें तेरी साक्षी हैं।

उनके परिजन के आंसू को
तुमने उर में राखी है।। 6।।

हे जसुमति के लालकृष्ण अब
मांग रहा भारत वरदान।

हमें दिला दो सिंध, कराची
हिगुलाज, लाहौर महान।। 7।।

तक्षशिला चाणक्य षिका,
हिन्दुकुश, खैबर, गंधार।

कुभा, सिंधु का समागान तट,
रेशम पथ, पाणिनि आगार ।। 8।।

तेरे माथे दिव्य कीर्ति बन
यह उपलब्धि आएगी।

सावधान! संघर्ष दोहरा
कुंदन सा चमकाएगी।। 9।।

मल्टीनेशनल, सेकुलर,
माक्र्स, मीडिया पाखंडी।

मुल्ला, माओ, मैकालों को
लाल दिखाओ अब झंडी।।10।।

दििग्वजयी अभियान में तेरे
घर के भेदिये घातक हैं।

इन्हें ठिकाने शीघ्र लगा दो।
बाह्य शत्रु शरणागत हैं।। 11।।

लालकृष्ण के यश सौरभ से
भारत मां हरषाएगी।

पुष्टिकरी नवनीत खिलाकर
नव इतिहास बनाएगी।। 12।।

Saturday, May 12, 2007

श्री चिरंजीव सौरभ के मंगल परिणय पर सस्नेह समर्पित


ब्रजेन्द्र कुमार मालवीय
अयि सुमन: सुमन: सुमन: सुमन: सुमनोहर कान्तियुते,
श्रित रजनीरज-नीरज-नीरजनी-रजनीकर वक्त्रयुते।
सुनयन विभ्रम-रभ्र-मर-भ्रमर-भ्रम-रभ्रमराधिपते,
जय जय हे महिषासुर मार्दिनि रम्य कपर्दिनि शैल सुते॥
- जगद्गुरू श्रीशंकराचार्य

काशी गौरीशंकर पद में
हैं दुर्बलसुत वन्दन करते।
हम हैं राम भरोसे के तो
राम रक्ष में रत रहते॥1॥
हे देव तुम्हारी अमित कृपा से
सुमनों को सौरभ मिलता।
शंकर चरणों में चढ़ने पर
भक्तों का जीवन खिलता॥2॥

सुमन जीव, सौरभ शिव हैं
यह जगत् ब्रह्म का नाता है।
जब तक देही देह सहित है
तब तक ही जग भाता है॥3॥

सुमन तुम्हारी सार्थकता है
सौरभ साथ निभाने में।
बिन सौरभ तुम प्राणहीन हो
हो बिनमोल जमाने में॥4॥

सौरभ भी तो हैं अनंद
रति सुमन संग उसका परिचय।
उससे ही वह चर्चित होते
अन्यथा लुप्त होते निश्चय॥5॥

जब भी सुमन देखता कोई
कहता कहां सुरभि इसकी।
सुरक्षित पवन देव को पाकर
सुमन खोजती मति सबकी॥6॥

यद्यपि चन्दन सौरभयुत है।
देव शीश पर चढ़ता है।
फिर भी सुमन हीन होने की
पीड़ा में ही रहता है॥7॥

स्वर्ण सुमन की यही वेदना
उसको सौरभ नहीं मिला।
कनक चाहता जग जी भर
पर उसे ब्रह्म से यही मिला॥8॥

सौरभ सुमन साथ रहकर ही
करते हैं जग को सन्दर।
छोटा-बड़ा नहीं है कोई
एक से एक उभय बढ़कर॥9॥

सुमन युक्त होवें सौरभ से
सौरभ भी होवें सुमन।
श्रीश ब्रजेन्द्र पीयूष कृपा से
करें सृजित सुन्दर जीवन॥10॥
भारत की राष्‍ट्रीयता हिंदुत्‍व है