Thursday, February 5, 2026

मीडिया अवेयरनेस कार्यक्रम






लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग में एक विशेष मीडिया अवेयरनेस कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें वरिष्ठ पत्रकार डॉ. सर्वेश तिवारी ने डिजिटल मीडिया और टीवी मीडिया के बदलते स्वरूप पर विस्तार से जानकारी साझा की। इस सत्र का मुख्य उद्देश्य मीडिया के छात्रों और नवोदित पत्रकारों को व्यावहारिक एवं पेशेवर ज्ञान प्रदान करना था।
अपने संबोधन के दौरान डॉ. तिवारी ने डिजिटल एवं टीवी मीडिया में “ब्लैंक स्क्रीन” की स्थिति पर गंभीरता से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि यदि एंकर या रिपोर्टर के पास विषय की स्पष्ट समझ, कंटेंट क्लैरिटी और पर्याप्त तैयारी नहीं होती, तो इसका सीधा प्रभाव उसकी विश्वसनीयता और पेशेवर प्रगति पर पड़ता है।
कार्यक्रम में एंकरिंग और रिपोर्टिंग के व्यावहारिक पहलुओं पर भी विशेष चर्चा की गई। डॉ. तिवारी ने कहा कि एक अच्छा एंकर केवल समाचार पढ़ने वाला नहीं होता, बल्कि समाचार को समझकर, विश्लेषण करते हुए और दर्शकों से जुड़ाव बनाकर प्रस्तुत करता है।
इसके साथ ही उन्होंने डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म्स, टीवी जर्नलिज़्म, कंटेंट प्रेज़ेंटेशन, भाषा की स्पष्टता, बॉडी लैंग्वेज तथा स्क्रीन प्रेज़ेंस जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने छात्रों को नियमित अभ्यास, सतत अवलोकन और आत्म-सुधार पर निरंतर कार्य करने की सलाह दी। सत्र के अंत में प्रश्नोत्तर हुआ जिसमें प्रतिभागियों ने अपने प्रश्नों के समाधान प्राप्त किए।
विभागाध्यक्ष डॉ सौरभ मालवीय ने सत्र को अत्यंत उपयोगी, ज्ञानवर्धक एवं प्रेरणादायक बताया। संचालन डॉ. कृतिका अग्रवाल ने किया. कार्यक्रम में विभाग के सभी शोधार्थी एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।

भोपाल में


सात  वर्ष पूर्व प्रिय मित्र संजीव सिन्हा जी के साथ भोपाल में।

Wednesday, February 4, 2026

सुखद भेंट


लखनऊ विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के प्रतिष्ठित शिक्षाविद् डॉ. सौरभ मालवीय से सुखद भेंट। पत्रकारिता, मीडिया और समसामयिक विषयों पर सार्थक संवाद का अवसर प्राप्त हुआ।
केबी पंत 

Tuesday, February 3, 2026

मीडिया विमर्श में लेख प्रकाशित







जनसंचार के सरोकारों पर केंद्रित त्रैमासिक पत्रिका 'मीडिया विमर्श'  ने RSS के 100 वर्षों पर केंद्रित एक संग्रहणीय विशेषांक प्रकाशित किया है। इसमें संघ से जुड़ी लगभग सभी जिज्ञासाओं और विचारों को प्रकाश में लाया गया है। 
Indian Institute of Mass Communication के पूर्व निदेशक एवं वर्तमान में माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय भोपाल में जनसंचार विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ. Sanjay Dwivedi  जी और विशेषांक के संपादक डॉ. Lokendra Singh Rajput जी का इस अंक हेतु अभिनंदन।

Sunday, February 1, 2026

रविदास जयंती पर प्रतिमा का अनावरण


उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने कहा कि संत शिरोमणि सद्गुरु रविदास जी महाराज जी का प्रकटीकरण काशी के सीर गोवर्धन में माघी पूर्णिमा के दिन हुआ था। उनकी दिव्य आभा से आलोकित होकर समाज ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ के निर्माण की दिशा में आगे बढ़ रहा है। सद्गुरु रविदास जी महाराज ने प्रत्येक नागरिक को वैष्णव परम्परा के अनुरूप जिस उपासना के लिए प्रेरित किया, वह जीवन में कर्म की प्रधानता व मन की शुद्धता को महत्व देता है तथा प्रत्येक नागरिक को लोक कल्याण के प्रति आग्रही बनाता है।

मुख्यमंत्री ने 1 फरवरी 2026 को लखनऊ में संत शिरोमणि सद्गुरु रविदास जी महाराज की 649वीं जयंती के अवसर पर सद्गुरु रविदास जी की प्रतिमा का अनावरण व सभागार का लोकार्पण किया। इस अवसर पर उन्होंने सद्गुरु रविदास जी की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें नमन किया। उन्होंने कहा कि रविदास जी का स्पष्ट मानना था कि ‘मन चंगा तो कठौती में गंगा’ अर्थात यदि आपका मन साफ है, तो सभी कुछ आपके कर्म पर निर्भर करता है। यदि आप अच्छा कर्म करेंगे, तो अच्छा फल पाएंगे तथा बुरा कर्म करेंगे, तो पाप से आपको कोई नहीं बचा सकता। जब सद्गुरु रविदास जी महाराज का इस धरा धाम पर प्रकटीकरण हुआ, वह गुलामी का कालखंड था। देश विदेशी आक्रान्ताओं से आतंकित व त्रस्त था। उस समय भी उन्होंने साधना की पवित्रता और साधना को कर्म की साधना के रूप में बदलने का कार्य किया।

उन्होंने कहा कि संत रामानंद जी से दीक्षा प्राप्त करने के उपरान्त सद्गुरु रविदास जी महाराज ने अपने कर्म की साधना के माध्यम से लोक कल्याण का मार्ग प्रशस्त किया। जगदगुरु रामानंदाचार्य ने मध्यकाल में 12 शिष्य बनाए, जो 12 अलग-अलग जातियों से थे। उन्होंने एक महिला को भी अपना शिष्य बनाया था। उस कालखंड में  भी समाज को जोड़ने का जितना बड़ा कार्य हमारे इन संतों ने किया, वह अद्भुत था। उसी नींव पर वर्तमान भारत का निर्माण हुआ है। वही प्रेरणा गुलामी के बंधन को तोड़ने में हम सभी की प्रेरणा रही है।

उन्होंने कहा कि सद्गुरु रविदास जी महाराज ने 600 वर्ष पूर्व कहा था कि राज ऐसा होना चाहिए, जहां सभी को अन्न प्राप्त हो, अर्थात कोई भूखा न सोए और प्रत्येक व्यक्ति को सम्मानजनक जीवन जीने का अवसर मिल सके। कहा जाता है कि ‘वृथा न जाहिं देव ऋषि वाणी’ अर्थात एक संत की वाणी कभी व्यर्थ नहीं होती। इस भाव को मुगलों, ब्रिटिशर्स तथा आजादी के बाद में विभिन्न सरकारों ने भुला दिया, लेकिन वर्ष 2014 में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व एवं मार्गदर्शन में सबसे पहले देश के प्रत्येक गरीब के बैंक अकाउंट खुलवाए गये, जिससे शासन की योजनओं का लाभ सीधे उनके अकाउंट में प्राप्त हो सके।

विगत 6 वर्षों से प्रत्येक जरूरतमंद को निःशुल्क राशन और स्वास्थ्य सुविधा का लाभ ‘सबका साथ और सबका विकास’ के भाव से प्रदान किया जा रहा है। यह सतगुरु रविदास जी महाराज की प्रेरणा से सम्भव हो पाया है। प्रत्येक घर में शौचालय का निर्माण कराया गया, ताकि हर व्यक्ति को सम्मानजनक जीवन जीने की प्रेरणा दी जा सके। गरीबों को अपना सिर ढकने के लिए आवास उपलब्ध कराया गया। रसोई गैस तथा बिजली के निःशुल्क कनेक्शन उपलब्ध कराए गये। आज यहां सद्गुरु रविदास जी महाराज की भव्य प्रतिमा और सभागार के लोकार्पण का अवसर प्राप्त हुआ। अब सर्दी, गर्मी, बरसात आदि किसी भी मौसम में संत रविदास सेवा समिति को कष्ट नहीं उठाना पड़ेगा। यहां पर आराम से बैठकर कार्यक्रम सम्पन्न किए जा सकेंगे। भजन मंडली तथा भक्तगण आराम से बैठ पाएंगे। वक्तागण मंच से उद्बोधन कर सकेंगे। वर्ष 2017 के पूर्व संत रविदास जी महाराज की पावन जन्मभूमि सीर गोवर्धन, काशी में जाने का रास्ता नहीं था। लंगर का हॉल नहीं था। आज वहां देश भर से लगभग दो लाख श्रद्धालु आए हैं। 

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री जी की प्रेरणा से डबल इंजन सरकार ने सद्गुरु रविदास जी महाराज की जन्मभूमि सीर गोवर्धन को चार लेन सड़क से जोड़ा है। वहां संत रविदास जी महाराज के नाम पर भूमि क्रय कर विभिन्न कार्यक्रमों के लिए जमीन उपलब्ध करवाई गयी। लंगर हॉल का निर्माण किया गया, जहां 500 लोग एक साथ लंगर प्राप्त कर सकते हैं। संत रविदास जी महाराज की भव्य प्रतिमा स्थापित की गई, जिसे पांच किलोमीटर दूर से भी देखा जा सकता है। आज सीर गोवर्धन भव्य स्वरूप युक्त धाम बन गया है। उन्होंने कहा कि हमें अपने महापुरुषों व संतों के प्रति श्रद्धा और आदर का भाव रखना चाहिए। गुलामी के कालखंड का स्मरण कर विभाजनकारी ताकतों  को फिर से सिर उठाने का अवसर नहीं देना चाहिए। हम सभी को एकजुट होकर समाज की संरचना को मजबूत करते हुए आगे बढ़ना है। हमारी एकता इन पूज्य संतों की दिव्य साधना और उससे प्राप्त सिद्धि का प्रतिफल इस देश को प्रदान करेगी। देश की एकता व सम्प्रभुता के लिए हम सभी को मिलकर कार्य करना होगा। यही सद्गुरु रविदास जी महाराज की प्रेरणा थी।

उन्होंने कहा कि डबल इंजन सरकार द्वारा प्रदेश भर में सनातन धर्म से जुड़े स्थलों के पुनरोद्धार का कार्य किया जा रहा है। इनमें लालापुर में महर्षि वाल्मीकि, राजापुर में संत तुलसीदास, चित्रकूट धाम, माँ विन्ध्यवासिनी धाम, अयोध्या धाम, नैमिषारण्य धाम, सुकतीर्थ, मथुरा- वृंदावन तथा भगवान बुद्ध से जुड़े बौद्ध सर्किट आदि 1200 से 1500 स्थानों पर किया गया कार्य सम्मिलित है। यह सभी कार्य प्रधानमंत्री जी के मंत्र ‘सबका साथ सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास’ मंत्र पर चलकर प्रदेश के प्रत्येक जनपद में बिना भेदभाव किए गये। इस मंत्र की प्रेरणा का प्रभाव आज यहां हम सभी को देखने को मिल रहा है। उन्होंने कहा कि आज माघी पूर्णिमा के पावन अवसर पर प्रयागराज त्रिवेणी में प्रातः 10 बजे तक लगभग एक करोड़ श्रद्धालु स्नान कर चुके हैं। प्रयागराज में लाखों की संख्या में कल्पवासी विगत एक माह से व्रत, साधना तथा भगवत भजन में लीन थे। आज उनकी साधना का एक माह पूर्ण हुआ है। कठिन परिस्थितियों में सर्दी, गर्मी तथा बरसात की परवाह किए बिना कठिन साधना से जूझते हुए तपा हुआ शरीर ही संकट के समय चुनौती का सामना करने के लिए स्वयं को तैयार कर पाएगा। श्रद्धालुजन माँ गंगा, माँ यमुना तथा माँ सरस्वती की त्रिवेणी में आस्था की डुबकी लगाकर अपने घर को प्रस्थान करेंगे। यह संतों की प्रेरणा तथा भारत की सनातन परम्परा है। माघी पूर्णिमा के अवसर पर दिव्य स्नान का लाभ लेने वाले श्रद्धालुजन को बधाई एवं मंगलमय शुभकामनाएं। माँ गंगा से प्रार्थना है कि वह उनकी मनोकामनाओं को पूर्ण करें। सद्गुरु रविदास जी महाराज से प्रार्थना है कि वह अपने सभी भक्तों का कल्याण करें।

उन्होंने सद्गुरु रविदास जी महाराज की दिव्य वाणी और दिव्य सिद्धि का उदाहरण देते हुए कहा कि जब रविदास जी के सहयोगी ने उनसे कहा कि चलो रविदास गंगा स्नान करते हैं, तो उन्होंने कहा कि मेरे पास आज ज्यादा काम है। इस कार्य को पूर्ण करना आवश्यक है। मेरी ओर से माँ गंगा को दमड़ी समर्पित कर देना। उनके सहयोगी संत ने माँ गंगा में स्नान कर उनकी पूजा अर्चना की, लेकिन इसका कोई प्रभाव परिलक्षित नहीं हुआ। लेकिन जैसे ही, उन्होंने रविदास जी द्वारा प्रदान की गई दमड़ी माँ गंगा को समर्पित की, तो माँ गंगा ने वह दमड़ी अपना हाथ बढ़ाकर स्वीकार की। जब उन्होंने माँ गंगा से पूछा कि यह कैसे सम्भव हुआ, तो उन्होंने उत्तर दिया कि रविदास मेरे सच्चे भक्त हैं। 

उन्होंने कहा कि माँ गंगा भी अपने सच्चे भक्तों को पहचानती हैं। कहा गया है कि ‘जैसी चाह, वैसी राह’ अर्थात
हम जैसा भाव अपने मन में रखेंगे, हमें उसी प्रकार के परिणाम प्राप्त होंगे। 
कार्यक्रम को उपमुख्यमंत्री श्री ब्रजेश पाठक ने भी सम्बोधित किया।

Saturday, January 31, 2026

हिन्दू सम्मेलन में संघ के विचारों से समाज को दिशा मिलती है : सौरभ मालवीय






गोमतीनगर (लखनऊ)। हिन्दू समाज की एकता, सांस्कृतिक चेतना और राष्ट्र के प्रति दायित्वबोध ही भारत की वास्तविक शक्ति है। संघ का कार्य व्यक्ति निर्माण से राष्ट्र निर्माण की दिशा में सतत् प्रयास है।
सौरभ मालवीय ने अपने वक्तव्य में कहा कि हिन्दू समाज एक जीवन दर्शन है, जो समरसता, सेवा, त्याग और लोकमंगल की भावना से संचालित होता है। आज आवश्यकता है कि समाज संगठित होकर अपनी सांस्कृतिक जड़ों को समझे और भावी पीढ़ी को राष्ट्रवादी संस्कार प्रदान करे।
उन्होंने कहा कि आरएसएस ने अपने शताब्दी-समीप यात्रा में बिना किसी भेदभाव के समाज के हर वर्ग को जोड़ने का कार्य किया है। सेवा कार्य, शिक्षा, सामाजिक समरसता और राष्ट्रभक्ति के क्षेत्र में स्वयंसेवकों का योगदान अतुलनीय है।
सम्मेलन में बड़ी संख्या में प्रबुद्ध नागरिक, सामाजिक कार्यकर्ता, युवा एवं मातृशक्ति उपस्थित रही। कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने हिन्दू समाज की भूमिका, सांस्कृतिक पुनर्जागरण और राष्ट्र की एकता पर अपने विचार रखे।

Thursday, January 29, 2026

टीवी पर लाइव




नमस्ते यूपी 
दूरदर्शन

भारत की राष्‍ट्रीयता हिंदुत्‍व है