विकसित उत्तर प्रदेश
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टाइम्स नाऊ नवभारत द्वारा लखनऊ में आयोजित कार्यक्रम "विकसित उत्तर प्रदेश" के
स्पेशल शो 'राष्ट्रवाद' में अपनी बात रखते हुए.
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टाइम्स नाऊ नवभारत द्वारा लखनऊ में आयोजित कार्यक्रम "विकसित उत्तर प्रदेश" के स्पेशल शो 'राष्ट्रवाद' में अपनी बात रखते हुए.
शिवाजी महाराज राष्ट्रनायक हैं, जिन्होंने स्वराज और सांस्कृतिक अस्मिता की रक्षा की।
टीपू सुल्तान को शिवाजी के समकक्ष रखना ऐतिहासिक दृष्टि से उचित नहीं है।
लखनऊ। दिव्य प्रेम सेवा मिशन (हरिद्वार) के शिल्पकार संत स्वरूप श्री आशीष गौतम जी से आज लखनऊ स्थित कुशीनगर के विधायक श्री पी. एन. पाठक जी के सरकारी आवास पर आत्मीय भेंट हुई। इस अवसर पर दिव्य सेवा संस्थान के सेवा कार्यों एवं आगामी कार्यक्रमों पर विस्तृत चर्चा हुई।
बैठक में सामाजिक समरसता, शिक्षा, स्वास्थ्य, जनकल्याण एवं लोकमंगल से जुड़े विभिन्न आयामों पर विचार-विमर्श किया गया। संत स्वरूप आशीष गौतम जी ने दिव्य सेवा प्रेम मिशन द्वारा संचालित सेवा परियोजनाओं की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए समाज के अंतिम व्यक्ति तक सेवा पहुँचाने के संकल्प को दोहराया। उन्होंने आगामी आयोजनों एवं जनजागरण अभियानों की जानकारी भी साझा की।
विधायक पी एन पाठक जी ने संस्थान के सेवा कार्यों की सराहना की। उन्होंने कहा कि समाज के उत्थान के लिए ऐसे संगठनों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।
इस अवसर पर शहर के अनेक प्रमुख नागरिक, सामाजिक कार्यकर्ता एवं गणमान्यजन उपस्थित रहे। सभी ने दिव्य सेवा संस्थान के प्रयासों की प्रशंसा करते हुए आगामी कार्यक्रमों की सफलता के लिए शुभकामनाएँ प्रेषित कीं।
वाराणसी। महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग द्वारा आयोजित शोध कार्यशाला में “भारतीय ज्ञान परम्परा” विषय पर विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यशाला में देश के विभिन्न राज्यों से आए शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की हैं l
इस अवसर पर डॉ. सौरभ मालवीय ने भारतीय ज्ञान परम्परा की ऐतिहासिक, दार्शनिक एवं सांस्कृतिक आधारभूमि पर विस्तार से प्रकाश डाला। भारतीय ज्ञान परम्परा केवल अतीत की विरासत नहीं, बल्कि वर्तमान और भविष्य के लिए मार्गदर्शक सिद्धांत है। वेद, उपनिषद, पुराण, लोकपरम्पराएँ, आयुर्वेद, योग, ज्योतिष, साहित्य और दर्शन—इन सभी ने विश्व को मानवीय मूल्यों, समरसता और वैज्ञानिक दृष्टि का संदेश दिया है।
डॉ. मालवीय ने पत्रकारिता के विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे भारतीय ज्ञान परम्परा के मूल्यों को समझते हुए समकालीन मीडिया विमर्श में सकारात्मक और तथ्यपरक दृष्टिकोण अपनाएँ। वैश्विक परिप्रेक्ष्य में भारतीय चिंतन की प्रासंगिकता आज और अधिक बढ़ गई है।
लखनऊ। पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग, लखनऊ विश्वविद्यालय में आज डीपफेक, एआई टूल्स एवं फैक्ट चेकिंग विषय पर एक विशेष सत्र का आयोजन किया गया। इस अवसर पर पीटीआई के चीफ सब-एडिटर श्री गौरव ललित शर्मा ने विद्यार्थियों को समसामयिक डिजिटल चुनौतियों से अवगत कराया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए विभागाध्यक्ष डॉ. सौरभ मालवीय ने कहा कि फेक न्यूज न केवल व्यक्ति बल्कि समाज और संस्थानों की छवि को भी धूमिल करती है। उन्होंने विद्यार्थियों से आग्रह किया कि वे पत्रकारिता के क्षेत्र में सत्य, नैतिकता और जिम्मेदारी को सर्वोपरि रखें तथा किसी भी सूचना को प्रसारित करने से पूर्व उसका तथ्यात्मक सत्यापन अवश्य करें।
मुख्य वक्ता श्री गौरव ललित शर्मा ने सरल शब्दों में बताया कि डीपफेक क्या है और एआई की मदद से फर्जी ऑडियो-वीडियो कैसे तैयार किए जाते हैं। उन्होंने छात्रों को Resemble (Voice Cloner), Eleven Labs, Ghostarchive, Archive Today और Wayback Machine जैसे उपयोगी टूल्स की जानकारी दी, जिनकी सहायता से डिजिटल सामग्री को सुरक्षित रखने और फैक्ट चेकिंग में मदद मिलती है।
उन्होंने फैक्ट चेकिंग के आवश्यक बिंदुओं तथा चरणबद्ध प्रक्रिया को भी विस्तार से समझाया। सत्र के दौरान विद्यार्थियों ने सक्रिय सहभागिता की और इसे अत्यंत ज्ञानवर्धक एवं उपयोगी बताया।
कार्यक्रम के अंत में विभाग की ओर से अतिथि वक्ता का आभार व्यक्त किया गया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. कृतिका अग्रवाल ने किया.
Tuesday, February 17, 2026
विकसित उत्तर प्रदेश
टाइम्स नाऊ नवभारत द्वारा लखनऊ में आयोजित कार्यक्रम "विकसित उत्तर प्रदेश" के स्पेशल शो 'राष्ट्रवाद' में अपनी बात रखते हुए.
श्रेष्ठ भारत : आत्मबोध से राष्ट्र बोध
श्रेष्ठ भारत का निर्माण केवल आर्थिक समृद्धि या तकनीकी प्रगति से नहीं होता, बल्कि वह आत्मबोध से उत्पन्न राष्ट्रबोध की चेतना से होता है। जब व्यक्ति स्वयं को पहचानता है, अपने मूल्यों, संस्कृति और कर्तव्यों को समझता है, तभी वह राष्ट्र के प्रति सजग और उत्तरदायी बनता है।
अपने अस्तित्व, अपनी परम्परा, अपनी शक्ति और अपनी जिम्मेदारियों को जानना। भारतीय ज्ञान परम्परा में “आत्मानं विद्धि” का संदेश यही देता है कि व्यक्ति पहले स्वयं को पहचाने। जब व्यक्ति अपने भीतर की क्षमता, नैतिकता और कर्तव्यबोध को जाग्रत करता है, तब वह केवल निजी हित तक सीमित नहीं रहता।
राष्ट्र के गौरव, उसकी एकता, अखंडता और संस्कृति के प्रति सजग होना। यदि व्यक्ति में आत्मबोध है तो वह समझता है कि उसका व्यक्तिगत आचरण ही राष्ट्र की छवि बनाता है।
ईमानदारी से कार्य करना राष्ट्र निर्माण है।
सामाजिक समरसता को बढ़ाना राष्ट्र सेवा है।
पर्यावरण संरक्षण करना भविष्य की पीढ़ियों के प्रति कर्तव्य है।
भारत में राष्ट्र केवल भौगोलिक सीमा नहीं, बल्कि सांस्कृतिक चेतना है। वेदों से लेकर उपनिषदों तक और आधुनिक युग में भी “वसुधैव कुटुम्बकम्” का विचार हमें व्यापक राष्ट्रचेतना देता है।
भगवद्गीता में श्रीकृष्ण द्वारा अर्जुन को दिया गया कर्तव्य और धर्म का उपदेश भी यही सिखाता है कि व्यक्तिगत मोह से ऊपर उठकर व्यापक हित के लिए कर्म करना ही श्रेष्ठ मार्ग है।
आज जब भारत विश्व मंच पर उभरती शक्ति के रूप में स्थापित हो रहा है, तब आवश्यक है कि प्रत्येक नागरिक अपने भीतर आत्मगौरव और अनुशासन का विकास करे। शिक्षा, शोध, संस्कृति, सेवा और नवाचार—हर क्षेत्र में आत्मबोध आधारित दृष्टि राष्ट्र को श्रेष्ठता की ओर ले जाएगी।
श्रेष्ठ भारत का सपना किसी एक व्यक्ति या सरकार से पूरा नहीं होगा। यह तब साकार होगा जब हर नागरिक अपने भीतर राष्ट्र की अनुभूति करे।
आत्मबोध से उत्पन्न राष्ट्रबोध ही भारत को न केवल शक्तिशाली, बल्कि नैतिक और सांस्कृतिक रूप से भी विश्व में आदर्श बनाएगा।
जब व्यक्ति जागेगा, तभी राष्ट्र जागेगा; और जब राष्ट्र जागेगा, तभी श्रेष्ठ भारत का उदय होगा।
Sunday, February 15, 2026
टीवी पर लाइव
शिवाजी महाराज राष्ट्रनायक हैं, जिन्होंने स्वराज और सांस्कृतिक अस्मिता की रक्षा की।
टीपू सुल्तान को शिवाजी के समकक्ष रखना ऐतिहासिक दृष्टि से उचित नहीं है।
Saturday, February 14, 2026
आत्मीय भेंट
बैठक में सामाजिक समरसता, शिक्षा, स्वास्थ्य, जनकल्याण एवं लोकमंगल से जुड़े विभिन्न आयामों पर विचार-विमर्श किया गया। संत स्वरूप आशीष गौतम जी ने दिव्य सेवा प्रेम मिशन द्वारा संचालित सेवा परियोजनाओं की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए समाज के अंतिम व्यक्ति तक सेवा पहुँचाने के संकल्प को दोहराया। उन्होंने आगामी आयोजनों एवं जनजागरण अभियानों की जानकारी भी साझा की।
विधायक पी एन पाठक जी ने संस्थान के सेवा कार्यों की सराहना की। उन्होंने कहा कि समाज के उत्थान के लिए ऐसे संगठनों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।
इस अवसर पर शहर के अनेक प्रमुख नागरिक, सामाजिक कार्यकर्ता एवं गणमान्यजन उपस्थित रहे। सभी ने दिव्य सेवा संस्थान के प्रयासों की प्रशंसा करते हुए आगामी कार्यक्रमों की सफलता के लिए शुभकामनाएँ प्रेषित कीं।
Wednesday, February 11, 2026
भारतीय ज्ञान परम्परा विषय पर व्याख्यान
वाराणसी। महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग द्वारा आयोजित शोध कार्यशाला में “भारतीय ज्ञान परम्परा” विषय पर विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यशाला में देश के विभिन्न राज्यों से आए शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की हैं l
इस अवसर पर डॉ. सौरभ मालवीय ने भारतीय ज्ञान परम्परा की ऐतिहासिक, दार्शनिक एवं सांस्कृतिक आधारभूमि पर विस्तार से प्रकाश डाला। भारतीय ज्ञान परम्परा केवल अतीत की विरासत नहीं, बल्कि वर्तमान और भविष्य के लिए मार्गदर्शक सिद्धांत है। वेद, उपनिषद, पुराण, लोकपरम्पराएँ, आयुर्वेद, योग, ज्योतिष, साहित्य और दर्शन—इन सभी ने विश्व को मानवीय मूल्यों, समरसता और वैज्ञानिक दृष्टि का संदेश दिया है।
डॉ. मालवीय ने पत्रकारिता के विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे भारतीय ज्ञान परम्परा के मूल्यों को समझते हुए समकालीन मीडिया विमर्श में सकारात्मक और तथ्यपरक दृष्टिकोण अपनाएँ। वैश्विक परिप्रेक्ष्य में भारतीय चिंतन की प्रासंगिकता आज और अधिक बढ़ गई है।
Friday, February 6, 2026
फैक्ट चेकिंग पर कार्यक्रम
लखनऊ। पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग, लखनऊ विश्वविद्यालय में आज डीपफेक, एआई टूल्स एवं फैक्ट चेकिंग विषय पर एक विशेष सत्र का आयोजन किया गया। इस अवसर पर पीटीआई के चीफ सब-एडिटर श्री गौरव ललित शर्मा ने विद्यार्थियों को समसामयिक डिजिटल चुनौतियों से अवगत कराया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए विभागाध्यक्ष डॉ. सौरभ मालवीय ने कहा कि फेक न्यूज न केवल व्यक्ति बल्कि समाज और संस्थानों की छवि को भी धूमिल करती है। उन्होंने विद्यार्थियों से आग्रह किया कि वे पत्रकारिता के क्षेत्र में सत्य, नैतिकता और जिम्मेदारी को सर्वोपरि रखें तथा किसी भी सूचना को प्रसारित करने से पूर्व उसका तथ्यात्मक सत्यापन अवश्य करें।
मुख्य वक्ता श्री गौरव ललित शर्मा ने सरल शब्दों में बताया कि डीपफेक क्या है और एआई की मदद से फर्जी ऑडियो-वीडियो कैसे तैयार किए जाते हैं। उन्होंने छात्रों को Resemble (Voice Cloner), Eleven Labs, Ghostarchive, Archive Today और Wayback Machine जैसे उपयोगी टूल्स की जानकारी दी, जिनकी सहायता से डिजिटल सामग्री को सुरक्षित रखने और फैक्ट चेकिंग में मदद मिलती है।
उन्होंने फैक्ट चेकिंग के आवश्यक बिंदुओं तथा चरणबद्ध प्रक्रिया को भी विस्तार से समझाया। सत्र के दौरान विद्यार्थियों ने सक्रिय सहभागिता की और इसे अत्यंत ज्ञानवर्धक एवं उपयोगी बताया।
कार्यक्रम के अंत में विभाग की ओर से अतिथि वक्ता का आभार व्यक्त किया गया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. कृतिका अग्रवाल ने किया.
मेरे प्रेरणास्रोत: स्वामी विवेकानंद
गिरकर उठना, उठकर चलना... यह क्रम है संसार का... कर्मवीर को फ़र्क़ न पड़ता किसी जीत और हार का... क्योंकि संघर्षों में पला-बढ़ा... संघर्ष ही मेरा जीवन है...
-डॉ. सौरभ मालवीय
डॉ. सौरभ मालवीय
अपनी बात
सामाजिक परिवर्तन और राष्ट्र-निर्माण की तीव्र आकांक्षा के कारण छात्र जीवन से ही सामाजिक सक्रियता। बिना दर्शन के ही मैं चाणक्य और डॉ. हेडगेवार से प्रभावित हूं। समाज और राष्ट्र को समझने के लिए "सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और मीडिया" विषय पर शोध पूर्ण किया है, परंतु सृष्टि रहस्यों के प्रति मेरी आकांक्षा प्रारंभ से ही है।
विषय
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लखनऊ। दिव्य प्रेम सेवा मिशन (हरिद्वार) के शिल्पकार संत स्वरूप श्री आशीष गौतम जी से आज लखनऊ स्थित कुशीनगर के विधायक श्री पी. एन. पाठक जी के स...
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श्रेष्ठ भारत का निर्माण केवल आर्थिक समृद्धि या तकनीकी प्रगति से नहीं होता, बल्कि वह आत्मबोध से उत्पन्न राष्ट्रबोध की चेतना से होता है। जब ...
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भारतीय शिक्षा समिति उत्तर प्रदेश प्रांतीय विषय संयोजक बैठक इंद्रानगर - लखनऊ संस्कारयुक्त शिक्षा विद्या भारती
संप्रति
डॉ. सौरभ मालवीय
2/564, अवधपुरी खण्ड 2
खरगापुर, निकट प्राथमिक विद्यालय, गोमतीनगर विस्तार
2/564, अवधपुरी खण्ड 2
खरगापुर, निकट प्राथमिक विद्यालय, गोमतीनगर विस्तार
लखनऊ, उत्तर प्रदेश
पिन- 226010
मो- 8750820740
पिन- 226010
मो- 8750820740
ईमेल - malviya.sourabh@gmail.com
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डॉ. सौरभ मालवीय
एसोसिएट प्रोफेसर
पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग
लखनऊ विश्वविद्यालय
लखनऊ, उत्तर प्रदेश
मो- 8750820740
ईमेल - malviya.sourabh@gmail.com
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नमो-नमो.....आंखों ने जो देखा ! - अपन गांधी, लोहिया और दीनदयाल उपाध्याय को आदर्श राजनेता मानकर राजनीति में सक्रिय हैं। सादगी, शुचिता, विनम्रता, अध्ययनशीलता...ये सब गुण ऐसे हैं, जो ज्यादा आ...12 years ago





























