Thursday, September 17, 2026

नरेंद्र मोदी का व्यक्तित्व अत्यंत विराट है : सौरभ मालवीय


महानायक श्री नरेन्द्र मोदी जी को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं.
पुस्तक चर्चा
नरेंद्र मोदी का व्यक्तित्व अत्यंत विराट है : सौरभ मालवीय

मीडिया गुरु के नाम से विख्यात डॉ. सौरभ मालवीय की नई पुस्तक ‘भारतीय राजनीति के महानायक : नरेन्द्र मोदी’ इन दिनों खूब चर्चा में है। इसे दिल्ली के मानसी पब्लिकेशन्स ने प्रकाशित किया है। इस चर्चा का एक कारण यह भी है कि यह ऐसे समय में आई है, जब लोकसभा चुनाव सिर पर हैं। पूर्व की भांति यह चुनाव भी श्री नरेंद्र मोदी के नाम पर ही लड़ा जाना तय है। इस पुस्तक में श्री नरेंद्र मोदी के व्यक्तित्व के साथ साथ उनके कृतित्व पर भी प्रकाश डाला गया है।
लेखक डॉ. सौरभ मालवीय का कहना है कि यह पुस्तक प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के विराट व्यक्तित्व से परिचय करवाती है। उनके व्यक्तित्व की भांति उनके कार्य भी बहुत ही महान हैं। वह भारत की गौरवशाली प्राचीन संस्कृति के संवाहक हैं। उनके कृतित्व में भारतीय संस्कृति के दर्शन होते हैं। अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण में उनकी भूमिका अत्यंत प्रशंसनीय एवं सराहनीय है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने ही देश की पौराणिक नगरी अयोध्या में भूमि पूजन कर चांदी की ईंट और चांदी के फावड़े से ‘श्री राम जन्मभूमि मंदिर’ निर्माण की आधारशिला रखी थी। जिस समय वह मंदिर में पूजा-अर्चना कर रहे थे उस समय देश के करोड़ों लोग अपने घरों में टेलीविजन पर उन्हें देख रहे थे। वे इस स्वर्णिम क्षणों के साक्षी बने थे।
यह पुस्तक समकालीन भारत का एक ऐतिहासिक प्रमाण है, जो भविष्य में लोगों को उनके व्यक्तित्व एवं केंद्र सरकार की योजनाओं और श्री नरेन्द्र मोदी जी के व्यक्तित्व से परिचित कराएगी।
इससे पूर्व भी डॉ. सौरभ मालवीय की पांच पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं, जिनमें राष्ट्रवादी पत्रकारिता के शिखर पुरुष अटल बिहारी वाजपेयी, विकास के पथ पर भारत, राष्ट्रवाद और मीडिया, भारत बोध तथा अंत्योदय को साकार करता उत्तर प्रदेश सम्मिलित हैं। वह देशभर के समाचार पत्रों एवं पत्रिकाओं के लिए लेखन करते हैं। वह खबरिया चैनलों पर भी समसामयिक व ज्वलंत विषयों में अपने विचार रखते हुए देखे जा सकते हैं। इसके अतिरिक्त वह विभिन्न कार्यक्रमों एवं गोष्ठियों में वक्ता के में रूप में बोलते हुए दिखाई देते हैं।
डॉ. सौरभ मालवीय हिन्दी पत्रकारिता के सुपरिचित हस्ताक्षर हैं। वह राष्ट्रवादी विचारों के प्रहरी हैं। उनकी लेखनी धर्म, संस्कृति, समाज, पर्यावरण, राष्ट्रबोध एवं मानवदर्शन से ओतप्रोत है। वह ईश्वर में गहरी आस्था रखते हैं, इसलिए वह अपनी प्रत्येक पुस्तक इष्टदेव के चरणों में अर्पित करते हैं। उनका कहना है कि भारत भूमि देवताओं की भूमि है। इसके कण-कण में भक्ति है। फिर वह भक्तिभाव से अछूते कैसे रह सकते हैं।
लेखक - लखनऊ विश्वविद्यालय में पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यक्ष है. 

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएँ






राष्ट्रसेवा, जनकल्याण और भारत को आत्मनिर्भर एवं विकसित राष्ट्र बनाने के संकल्प के साथ निरंतर कार्यरत प्रधानमंत्री जी के स्वस्थ, यशस्वी एवं दीर्घायु जीवन की मंगलकामना।
इस विशेष अवसर पर दूरदर्शन, लखनऊ केन्द्र में लाइव चर्चा के माध्यम से प्रधानमंत्री जी के व्यक्तित्व, कृतित्व और राष्ट्र निर्माण में उनके योगदान पर विचार रखने का अवसर प्राप्त हुआ।
राष्ट्र सर्वोपरि।

Wednesday, September 16, 2026

मध्य प्रदेश नलकूप खनन योजना : सिंचित होंगे खेत


खेतों के लिए सिंचाई जल अति आवश्यक है। जहां नहरें नहीं हैं, वहां नलकूप के माध्यम से सिंचाई की जाती है। किसानों को सिंचाई जल उपलब्ध कराने के लिए मध्य प्रदेश सरकार ने नलकूप खनन योजना आरंभ की है। इस योजना के अन्तर्गत अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के किसानों के खेतों में अशासकीय एजेंसी अथवा ठेकेदारों द्वारा नलकूप खनन कराया जाता है। नलकूप खनन उन्हीं किसानों के यहां कराया जाएगा, जिन्होंने पूर्व में नलकूप नहीं लगवाया है। अनुदान की पात्रता अनुसूचित जाति एवं जनजाति के उन्हीं किसानों को होगी, जिन्होंने सहकारी अथवा व्यवसायिक बैंको से ऋण लिया हो या स्वयं के व्यय से नलकूप खनन किया हो। उपसंचालक कृषि कार्यालय में हितग्राही का पंजीयन कराना आवश्यक है।

आवेदक द्वारा निर्धारित प्रारूप में आवेदन करने के उपरान्त ग्राम सभा एवं जिला पंचायत की कृषि स्थाई समिति से अनुमोदन पश्चात योजना के तकनीकी मापदंडों का पालन करने पर राज्य शासन से निर्धारित अनुदान दिया जाता है। सफल या असफल नलकूप खनन पर अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति के कृषकों के लिए लागत का 75 प्रतिशत अधिकतम 15 हजार रुपये जो भी कम हो अनुदान देय है। सफल नलकूप पर पंप स्थापना के लिए अनुसूचित जाति/जनजाति के किसानों के लिए लागत का 75 प्रतिशत अधिकतम 9 हजार रुपये, जो भी कम हो अनुदान देय है। अनुदान की मात्रा भिन्न हो सकती है। नलकूप खनन योजना के लिए प्रमाण-पत्र होने आवश्यक हैं, जिनमें आधार कार्ड, पहचान प्रमाण, निवास प्रमाण, आय प्रमाण पत्र, बैंक विवरण, बीपीएल राशन कार्ड यदि उपलब्ध हो, जाति प्रमाण पत्र, खेत से संबंधित पत्र सम्मिलित हैं।
राज्य के सभी किसान निवास इस योजना का लाभ उठा सकते हैं, किन्तु शाजापुर और इंदौर के किसान आवेदन करने के लिए पात्र नहीं हैं। 

राज्य के अनुसूचित जाति/जनजाति के किसान इस योजना का लाभ उठा रहे हैं। इससे उन किसानों को विशेष लाभ हो रहा है, जिनके पास सिंचाई की व्यवस्था नहीं है और जो आर्थिक स्थिति अच्छी न होने के कारण नलकूप नहीं लगवा पा रहे हैं।



(डॉ सौरभ मालवीय की पुस्तक- 'विकास के पथ पर भारत' से)

उत्तर प्रदेश किसान उदय योजना : किसानों को मिलेंगे नये कुशल ऊर्जा पम्प सेट


उत्तर प्रदेश कृषि प्रधान राज्य है। यहां की अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार कृषि ही है। इसलिए राज्य सरकार कृषि पर विशेष ध्यान दे रही है। कृषि उत्पादन बढ़ाने के लिए सरकार ने किसान उदय योजना शुरू की है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पूर्व प्रधानमंत्री, चौधरी चरण सिंह के जन्मदिन 23 दिसंबर, 2017 को बागपत में इसका शुभारंभ किया। इस योजना के अंतर्गत राज्य सरकार वित्तीय वर्ष 2022 तक किसानों को 10 लाख पंप उपलब्ध कराएगी। इस योजना के पहले चरण में गाजीपुर, गोरखपुर, वाराणसी, अम्बेडकर नगर, मथुरा और अलीगढ़ जिलों के किसान को लाबान्वित किया जाएगा।

इस योजना के अंतर्गत किसानों को विभिन्न क्षमताओं के कुशल ऊर्जा पंप सेट प्रदान किए जाएंगे। इस योजना से ऊर्जा की बचत होगी और “सभी के लिए पावर” के लक्ष्य को प्राप्त करने में सहायता मिलेगी। इस योजना से पारंपरिक बिजली पंपों पर किसानों की निर्भरता कम होगी, जो 35 प्रतिशत अधिक ऊर्जा का इस्तेमाल करते हैं। 

राज्य सरकार दो प्रकार के ऊर्जा पम्प सेट प्रदान करेगी. ये 5 हॊर्स और 7.5 हॊर्स पावर के होंगे। इनके साथ ही किसानों को स्मार्ट किट भी उपलब्ध कराई जाएगी। इसकी सहायता से किसान अपने मोबाइल फोन से पम्प को चालू कर सकते हैं और इसी से बंद भी कर सकते हैं। पम्प सेट के रखरखाव का खर्च सरकार स्वयं वहन करेगी।
 
उल्लेखनीय यह भी है कि इस योजना का लाभ उन्हीं किसानों को मिलेगा, जो उत्तर प्रदेश के निवासी हैं। केवल किसान ही पम्प के लिए आवेदन कर सकते हैं। उन्हें किसानों को इस योजना का लाभ मिलेगा, जिनके पास पहले से पम्प नहीं हैं. जिनके पास पहले से पम्प हैं, वे किसान इसका लाभ नहीं ले सकते।

इस योजना से कृषि क्षेत्र में लागत को कम किया जा सकेगा और किसानों की आय में वृद्धि होगी।



(डॉ सौरभ मालवीय की पुस्तक- 'विकास के पथ पर भारत' से)

Monday, September 14, 2026

ऋषि परम्परा की तपोस्थली नैमिष दर्शन



























नैमिषारण्य केवल एक तीर्थ नहीं, बल्कि ऋषि परम्परा, तप, ज्ञान और भारतीय आध्यात्मिक चेतना की पवित्र भूमि है। 
मान्यता है कि इसी पावन धरती पर ऋषियों ने दीर्घकाल तक तप, साधना और शास्त्र-चर्चा के माध्यम से लोकमंगल का मार्ग प्रशस्त किया।
नैमिष की पवित्र धरा पर आते ही मन में एक अद्भुत शांति और आत्मिक ऊर्जा का अनुभव होता है। चक्रतीर्थ, ऋषियों की तपस्थली और पुरातन ज्ञान परम्परा आज भी भारत की सनातन चेतना की जीवंत अनुभूति कराते हैं।
नैमिष दर्शन का सौभाग्य प्राप्त होना मेरे लिए केवल तीर्थ यात्रा नहीं, बल्कि अपनी ऋषि परम्परा, अपनी संस्कृति और अपने आत्मबोध से जुड़ने का अवसर है।
नैमिषारण्य—जहाँ तप से ज्ञान और ज्ञान से लोकमंगल की यात्रा प्रारम्भ होती है।

Sunday, September 13, 2026

संकल्प से सिद्धि : नये भारत का निर्माण होगा


देश में भ्रष्टाचार, गरीबी और निरक्षरता जैसी समस्याएं एक बड़ी चुनौती बनी हुई हैं। इससे निपटने के लिए जनता और सरकार दोनों को ही मिलकर काम करना होगा। इसी को ध्यान में रखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संकल्प से सिद्धि नामक कार्यक्रम प्रारंभ किया है। वर्ष 2017 से 2022 तक चलने वाले इस कार्यक्रम का उद्देश्य देश की अर्थव्यवस्था, नागरिक, समाज, प्रशासन, सुरक्षा और अन्य कई क्षेत्रों में सुधार लाकर देश में सकारात्मक परिवर्तन लाना है।

संकल्प से सिद्धि कार्यक्रम के अंतर्गत नये भारत आंदोलन से भारतीय नागरिकों को भेदभाव, जातिवाद, सांप्रदायिकता जैसे कई सामाजिक मुद्दों से अवगत कराने के लिए कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। यह आंदोलन भारतीय नागरिकों में सकारात्मक परिवर्तन के लिए सुधार करने की तत्काल आवश्यकता को जागृत करने के लिए प्रारंभ किया गया है। इसके द्वारा लोगों के बीच जागरूकता पैदा करके गरीबी, भ्रष्टाचार, आतंकवाद, गंदगी और अन्य कई सामाजिक मुद्दों से देश को मुक्त कराना का प्रयास किया जाएगा।

उल्लेखनीय है कि यह कार्यक्रम भारत छोड़ो आंदोलन की 75वीं वर्षगांठ के अवसर पर शुरू की गई एक नई पहल है। इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने नागरिकों को आंदोलन में शामिल होने और 2022 तक स्वतंत्रता सेनानियों के सपनों वाला भारत बनाने का एक सामूहिक प्रयास करने का आग्रह किया है।
इस अवसर पर कई मंत्रियों और अधिकारियों ने नये भारत को बनाने की प्रतिज्ञा की है। यह पहल दूसरों को प्रतिज्ञा दिलाती है और नये भारत का एक हिस्सा बनने के लिए प्रोत्साहित करती है, जो मजबूत, समृद्ध और समावेशी है।
आज देश को ऐसे ही आंदोलनों की अति आवश्यकता है, जो सामाजिक बुराइयों के विरुद्ध लोगों को जागरूक करके नये भारत का निर्माण करने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाए।
नये भारत का आंदोलन युवाओं को उनके अनमोल जीवन में कठिनाइयों से लड़ने के लिए भी प्रेरणा देगा।




(डॉ सौरभ मालवीय की पुस्तक- 'विकास के पथ पर भारत' से)

राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान : सामाजिक सौहार्द्र बढ़ेगा


जनता के कल्याण के लिए सरकार अनेक योजनाएं चला रही है, किन्तु लोगों को इनके बारे में जानकारी न होने के कारण वे इनका लाभ नहीं उठा पाते। इसीलिए जनता को जागरूक करने के लिए सरकार ने एक ऐसा अभियान प्रारंभ किया है, जिसके माध्यम से लोगों को जन कल्याणकारी योजनाओं को जानकारी दी जाएगी, ताकि वे इनसे लाभान्वित हो सकें। इस कार्यक्रम का उद्देश्य सामाजिक सौहार्द्र को बढ़ावा देना, गरीब परिवारों तक पहुंच कायम करना और केंद्र सरकार की विभिन्न जन-कल्याणकारी योजनाओं तथा कार्यक्रमों से वंचित रह गए सभी लोगों को इनके दायरे में लाकर लाभान्वित करना है। ग्राम स्वराज अभियान के दौरान 21058 गांवों के लिए विशेष पहल शुरू की जा रही है। इस अभियान के अंतर्गत गरीब समर्थक पहलों में उज्ज्वला योजना, मिशन इन्द्रधनुष, प्रधानमंत्री सौभाग्य योजना, उजाला, प्रधानमंत्री जन-धन योजना, प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना और प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना का शत प्रतिशत आच्छादन किया जाएगा।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति ने 21 अप्रैल, 2018 को पुनर्गठित केंद्र प्रायोजित योजना राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान (आरजीएसए) को स्वीकृति दे दी है। यह योजना 7255।50 करोड़ रुपये की कुल लागत के साथ 1 अप्रैल, 2018 से 31 मार्च, 2022 के दौरान लागू की जाएगी। योजना में केंद्र की हिस्सेदारी 4500 करोड़ रुपये की होगी और राज्य की हिस्सेदारी 2755।50 करोड़ रुपये की होगी। वर्ष 2018-19 में राज्य की हिस्सेदारी 585।51करोड़ रुपये होगी, जबकि 2019-20 में 877।84 करोड़ रुपये, 2020-21 में 712।63 और 2021-22 में 579।52 करोड़ रुपये होगी। इसी प्रकार वर्ष 2018-19 में केंद्रीय हिस्सा 969।27 करोड़ रुपये होगा, जबकि 2019-20 में 1407।76 करोड़ रुपये,  2020-21 में 1160।94 करोड़ रुपये और 2021-22 में 962।03 करोड़ रुपये खर्च होंगे। 

इस योजना का विस्तार देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में किया जाएगा और इसमें गैर-भाग IX में जहां पंचायतें नहीं हैं, वहां इसमें ग्रामीण स्थानीय सरकार के संस्थान शामिल होंगे। योजना में केंद्र और राज्य दोनों के घटक होंगे। केंद्रीय घटक में ‘तकनीकी सहायता के लिए राष्ट्रीय योजना’, ई पंचायत परमिशन मोड परियोजना और पंचायतों के प्रोत्साहन सहित राष्ट्रीय स्तर की गतिविधियां होंगी तथा राज्य घटक में पंचायती राज्य संस्थानों का क्षमता सृजन होगा।

राज्य धन पोषण व्यवस्था सभी राज्यों के लिए 60 : 40 होगी। पूर्वोत्तर तथा पवर्तीय राज्यों में केंद्र राज्य वित्त पोषण का अनुपात 90:10 होगा। सभी केंद्र शासित प्रदेशों के लिए केंद्रीय हिस्सेदारी 100 प्रतिशत होगी। सतत विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए योजना के क्रियान्वयन और निगरानी गतिविधयों को सामान्य रूप से आपस में जोड़ा जाएगा और मुख्य बल मिशन अंत्योदय के अंतर्गत चिन्हित पंचायतों और नीति आयोग द्वारा चिंन्हित 115 आकांक्षी जिलों पर होगा। यह योजना अन्य मंत्रायलयों के क्षमता सृजन प्रयासों को मिलाएगी और उन मंत्रालयों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा, जिन पर इस योजना का अधिक प्रभाव होगा।

राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान की स्वीकृति योजना 2।55 लाख से अधिक पंचायती राज संस्थानों को सतत विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने की शासकीय क्षमता विकसित करने में मदद देगी। यह कार्य उपलब्ध संसाधनों के अधिकतम उपयोग पर फोकस के साथ समावेशी स्थानीय शासन के माध्यम से होगा। सतत विकास लक्ष्य के ये प्रमुख सिद्धांत हैं कि किसी को पीछे नहीं छोड़ते हुए तेजी से पहले पहुंचना और इसमें प्रशिक्षण मॉड्यूल तथा सामग्रियों सहित सभी क्षमता निर्माण कार्रवाइयों में लैंगिक सामानता के साथ सार्वभौमिक कॉवरेज की डिजाइन अंतरनिहित होगी। राष्ट्रीय महत्व के विषयों को प्राथमिकता दी जाएगी, जो वंचित समूहों को प्रभावित करते हैं। इनमें यानी गरीबी,  प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा, आहार, टीकाकरण, स्वच्छता, शिक्षा, जल संरक्षण, डिजिटल लेन-देन आदि सम्मिलित है।

यह योजना मिशन अंत्योदय तथा नीति आयोग द्वारा चिन्हित 115 आकांक्षी जिलों द्वारा व्यावहारिक संमिलन को ध्यान में रखते हुए बनाई गई है। पंचायतों में अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और महिलाओं का प्रतिनिधित्व होता है और यह संस्थान जमीन से जुड़े होते हैं इसलिए पंचायतों को मजबूत बनाने से सामाजिक अया और समुदाय के आर्थिक विकास के साथ समानता और समावेशन को प्रोत्साहन मिलेगा।

पंचायती राज्य संस्थानों द्वारा ई-गवर्नेंस के बढ़ते प्रयोग से सुधरी हुई सेवा डिलीवरी और पारदर्शित हासिल करने में सहायता मिलेगी। इस योजना से ग्राम सभाओं को मजबूती मिलेगी और ग्राम सभाएं नागरिकों विशेष कर कमजोर समूहों के समाजिक समावेश के साथ कारगर संस्थान के रूप में काम करेंगी। यह योजना राष्ट्रीय राज्य और जिला स्तर पर पर्याप्त मानव संसाधन और संरचना के साथ पंचायती राज्य संस्थानों की क्षमता सृजन के लिए संस्थापक ढांचे की स्थापना करेगी। पंचायतों को राष्ट्रीय महत्वपूर्ण आधार पर प्रोत्साहन देकर मजबूत बनाया जाएगा। इससे पंचायतों में स्पर्धा की भावना बढ़ेगी। 

केंद्र सरकार और राज्य सरकारें अपनी-अपनी भूमिकाओं के लिए स्वीकृत गतिविधियों को लागू और पूरा करने के लिए कदम उठाएंगी। राज्य सरकार अपनी प्राथमिकताओं और आवश्यकता के अनुसार केंद्रीय सहायता के लिए अपना वार्षिक कार्ययोजना तैयार करेगी। यह योजना मांग प्रेरित रूप में लागू की जाएगी।

उल्लेखनीय है कि वित्त मंत्री ने वर्ष 2016-17 के अपने बजट भाषण में सतत विकास लक्ष्यों पर कार्य करने के लिए पंचायती राज संस्थानों की शासन क्षमता विकिसत करने के लिए पुनर्गठित राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान (आरजीएसए) योजना की घोषणा की थी। मंत्रालय की वर्तमान योजना को राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान के रूप में नया रूप देने के लिए नीति आयोग के उपाध्यक्ष की अध्यक्षता में एक समिति बनाई गई थी। समिति ने विभिन्न हितधारकों के साथ अनेक बैठकें की और परामर्श किया। समिति ने अनेक सिफारिशों के साथ अपनी रिपोर्ट दी, जिसे सरकार द्वारा स्वीकार किया गया और यह योजना बनाने का आधार बना। वर्ष 2017-18 के अपने बजट भाषण में वित्त मंत्री ने 50 हजार ग्राम पंचायतों को गरीबी मुक्त बनाने के लिए एक करोड़ परिवारों को गरीबी से बाहर लाने के लिए मिशन अंत्योदय की घोषणा की थी। इसी के अनुसार मिशन अंत्योदय का इस योजना के साथ एकीकरण किया गया है।

यदि ये अभियान सफ़ल हो जाता है, तो इससे लोगों को बहुत लाभ होगा। लोग सरकारी योजनाओं का लाभ उठा सकेंगे। इससे उनकी स्थिति में सुधार आएगा। हर योजना का यही उद्देश्य होता है कि लोग उससे लाभान्वित हों।




(डॉ सौरभ मालवीय की पुस्तक- 'विकास के पथ पर भारत' से)
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