Tuesday, May 26, 2026

समाचार पत्रों में

 









नवचयनित आचार्य प्रशिक्षण वर्ग














विद्या भारती द्वारा संचालित ज्वाला देवी सरस्वती विद्या मंदिर प्रयागराज में आयोजित पंद्रह दिवसीय नवचयनित आचार्य प्रशिक्षण वर्ग में शिक्षण, संस्कार एवं भारतीय जीवन मूल्यों पर आधारित विविध सत्रों का आयोजन किया जा रहा है।

इस अवसर पर मुख्य वक्ता डॉ. सौरभ मालवीय (क्षेत्रीय मंत्री, विद्या भारती) ने “भारतीय ज्ञान परम्परा” विषय पर प्रेरक एवं विचारोत्तेजक मार्गदर्शन प्रदान किया। उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान परम्परा केवल शिक्षा का माध्यम नहीं, बल्कि जीवन को संस्कारित करने वाली समग्र दृष्टि है, जो मानवता, कर्तव्यबोध, राष्ट्रचेतना एवं विश्वकल्याण का मार्ग प्रशस्त करती है।

उन्होंने आचार्यों से आह्वान किया कि वे शिक्षा को केवल जानकारी तक सीमित न रखकर संस्कार, संवेदना और चरित्र निर्माण का माध्यम बनाएं। भारतीय संस्कृति, वेद-उपनिषद, गुरु-शिष्य परम्परा तथा राष्ट्रनिष्ठ शिक्षा व्यवस्था को वर्तमान समय की आवश्यकता बताते हुए उन्होंने नवचयनित आचार्यों को विद्यार्थियों के समग्र व्यक्तित्व निर्माण हेतु समर्पित भाव से कार्य करने की प्रेरणा दी।

इस सघन प्रशिक्षण वर्ग में नवचयनित आचार्य बंधु-भगिनी उत्साहपूर्वक सहभागिता कर रहे हैं तथा विविध शैक्षिक, सांस्कृतिक एवं व्यवहारिक गतिविधियों के माध्यम से अपने व्यक्तित्व एवं शिक्षण कौशल का विकास कर रहे हैं।

Monday, May 25, 2026

मेधावी छात्र-छात्राएं हुए सम्मानित











भारतीय शिक्षा समिति पूर्वी उत्तर प्रदेश, काशी प्रान्त के तत्वावधान में आज ’’ज्वाला देवी सरस्वती विद्या मन्दिर इण्टर कॉलेज’’ के विशाल सभागार में ’’प्रान्तीय मेधा अलंकरण समारोह’’ का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उत्तर प्रदेश सरकार की माध्यमिक शिक्षा मंत्री श्रीमती गुलाब देवी उपस्थित रहीं। कार्यक्रम की अध्यक्षता विद्या भारती पूर्वी उ.प्र. के क्षेत्रीय मंत्री डॉ. सौरभ मालवीय ने की। विशिष्ट अतिथि के रूप में प्रयागराज के महापौर श्री गणेश केसरवानी, विद्या भारती पूर्वी उ.प्र. के क्षेत्रीय सह संगठन मंत्री डॉ. राम मनोहर एवं काशी प्रान्त के प्रदेश निरीक्षक श्री शेषधर द्विवेदी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का विधि-विधान से शुभारम्भ माँ सरस्वती के सम्मुख दीप प्रज्ज्वलन एवं पुष्पार्चन के साथ हुआ। इसके बाद प्रदेश निरीक्षक श्री शेषधर द्विवेदी ने नवागंतुक अतिथियों का परिचय कराया तथा स्मृति चिन्ह एवं अंगवस्त्रम भेंट कर उनका आदर-सत्कार किया।

कार्यक्रम की प्रस्ताविकी प्रस्तुत करते हुए डॉ. सौरभ मालवीय ने विद्या भारती के वैश्विक और राष्ट्रीय योगदान पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा आज देश में विद्या भारती ही एकमात्र ऐसी संस्था है जो बालकों को मूल्य आधारित एवं संस्कारयुक्त शिक्षा देने का महती कार्य कर रही है। वर्तमान में विद्या भारती के विद्यालय देश के 684 जनपदों में संचालित हैं, जिनमें लगभग 43 लाख छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं। हमारा उद्देश्य केवल किताबी ज्ञान देना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों में राष्ट्रप्रेम की भावना जागृत करना है। आज जहाँ विश्व में युद्ध और अशांति का माहौल है, वहीं विद्या भारती मातृ सम्मेलन और कुटुम्ब प्रबोधन जैसे रचनात्मक कार्यक्रमों के माध्यम से समाज और राष्ट्र में प्रेम व समरसता का भाव भर रही है।

समारोह के मुख्य चरण में यूपी बोर्ड की हाईस्कूल एवं इण्टरमीडिएट परीक्षा में प्रदेश तथा जनपद की मेरिट सूची में स्थान बनाने वाले मेधावी छात्र-छात्राओं को सम्मानित किया गया। इसके साथ ही, विगत दो वर्षों में प्रशासनिक सेवा, इंजीनियरिंग, चिकित्सा और खेल जगत में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर काशी प्रान्त का नाम रोशन करने वाले पूर्व भैया-बहनों को भी स्मृति चिन्ह और पुरस्कार देकर उनका सम्मान किया गया। 

मुख्य अतिथि श्रीमती गुलाब देवी (माध्यमिक शिक्षा मंत्री, उ.प्र.) ने अपने ओजस्वी उद्बोधन में मेधावियों और शिक्षकों को बधाई देते हुए कहा कि किसी भी छात्र की सफलता के पीछे उसके शिक्षक का सबसे बड़ा योगदान होता है। उन्होंने विद्या भारती के कार्यपद्धति की सराहना करते हुए कहा बालक का सर्वांगीण विकास केवल विद्या भारती जैसे पवित्र शिक्षण संस्थानों में ही संभव है। आज के आधुनिक युग में समाज से जो मानवीय और नैतिक संस्कार लुप्त होते जा रहे हैं, उन्हें पुनर्जीवित करने का बीड़ा केवल विद्या भारती के विद्यालयों ने उठा रखा है। छात्र-छात्राओं को जीवन की हर चुनौती को सहर्ष स्वीकार करते हुए आगे बढ़ना चाहिए।

इस गरिमामयी समारोह में कंचन सिंह, भगवती सिंह, पी.एन. सिंह, शरद गुप्त, रघुराज सिंह, आर.एन. विश्वकर्मा सहित विद्या भारती के अनेक क्षेत्रीय एवं प्रान्तीय पदाधिकारीगण, प्रबन्ध समिति के सदस्य, प्रबुद्ध नागरिक, अभिभावक और मीडिया के बंधु भारी संख्या में उपस्थित रहे। 

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26 मई 2014 को Narendra मोदी जी ने भारत के प्रधानमंत्री पद की शपथ लेकर एक नए राजनीतिक युग का आरम्भ किया।
इन 12 वर्षों में भारत ने विकास, सुशासन, राष्ट्रीय सुरक्षा, वैशिक प्रतिष्ठा, आधारभूत संरचना, डिजिटल क्रांति और आत्मनिर्भरता के अनेक आयामों को नई गति दी।
“12 साल बेमिसाल” केवल एक राजनीतिक नारा नहीं, बल्कि जनविश्वास, निर्णायक नेतृत्व और राष्ट्र प्रथम की कार्यशैली का प्रतीक बन चुका है।
इन वर्षों की प्रमुख विशेषताएँ —
गरीब कल्याण और जनधन योजनाएँ
डिजिटल इंडिया और स्टार्टअप संस्कृति का विस्तार
आतंकवाद एवं नक्सलवाद पर कठोर नीति
महिला सशक्तिकरण और उज्ज्वला जैसी योजनाएँ
विश्व मंच पर भारत की मजबूत पहचान
राम मंदिर निर्माण से सांस्कृतिक चेतना का पुनर्जागरण
आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया का संकल्प
आधुनिक एक्सप्रेसवे, वंदे भारत ट्रेन और इंफ्रास्ट्रक्चर विकास
2014 Indian General Election के बाद प्रारम्भ हुई यह यात्रा आज विकसित भारत के संकल्प की दिशा में निरंतर आगे बढ़ रही है।
“सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास” के मंत्र के साथ मोदी सरकार ने सेवा, सुशासन और गरीब कल्याण को अपनी प्राथमिकता बनाया।

Sunday, May 24, 2026

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