Wednesday, April 22, 2026
अमृत सरोवर योजना : जल संरक्षण से बदलेगी स्थिति
पृथ्वी दिवस 22 अप्रैल पर विशेष
-डॉ. सौरभ मालवीय
पृथ्वी हमारा निवास स्थान है। मनुष्य सहित सभी प्राणी इसी धरती पर जन्म लेते हैं और इसी पर जीवन यापन करते हैं। पृथ्वी हमारे जीवन का आधार है। पृथ्वी से हमें वायु, जल और भोजन प्राप्त होता है। यह कहना अतिश्योक्ति नहीं होगी कि पृथ्वी ने मनुष्य व अन्य सभी प्राणियों को जीवन प्रदान किया है। किन्तु मनुष्य ने पृथ्वी को क्या दिया? इस प्रश्न का उत्तर यही है कि मनुष्य ने पृथ्वी को कुछ नहीं दिया, अपितु उसे दूषित करने का कार्य किया है। वायु प्रदूषित होकर विषैली हो गई है और जल भी दूषित हो रहा है। स्थिति इतनी भयंकर है कि यमुना सहित अनेक नदियों का जल पीने योग्य नहीं है। केंद्रीय भूजल बोर्ड के एक अध्ययन के अनुसार 25 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 221 जिलों के कुछ स्थानों का जल आर्सेनिक युक्त पाया गया है।
दूषित पेयजल के सेवन से उनके स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है। ऐसे क्षेत्रों के लोग दूषित जलजनित रोगों की चपेट में आ जाते हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार भूजल संकट के कारण देश के लगभग 50 प्रतिशत ग्रामीण परिवारों को आज भी स्वच्छ पेयजल उपलब्ध नहीं है। ऐसे में वे दूषित जल पीने को विवश हैं। देश में लोगों को पर्याप्त जल नहीं मिल पा रहा है। देश में प्रति व्यक्ति पानी की वार्षिक 1700 घन मीटर से कम उपलब्धता है। अंतरिक्ष से लिए गए आंकड़ों के आधार पर देश में पानी की उपलब्धता का पुनर्मूल्यांकन के अध्ययन के आधार पर आशंका व्यक्त की गई है कि वर्ष 2031 के लिए प्रति व्यक्ति पानी की औसत वार्षिक उपलब्धता घटकर 1367 घन मीटर रह जाएगी, जिससे जल संकट और गंभीर हो जाएगा।
एक रिपोर्ट के अनुसार देश में कुल वैश्विक जल स्रोत का मात्र 4 प्रतिशत ही उपलब्ध है, जबकि यहां विश्व की कुल वैश्विक जनसंख्या का 18 प्रतिशत भाग निवास करता है। केंद्रीय जल आयोग की एक रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2010 में देश में उपलब्ध कुल जल स्रोतों में से 78 प्रतिशत का उपयोग सिंचाई के लिए किया जा रहा था। जल संकट के कारण वर्ष 2050 तक यह दर घटकर लगभग 68 प्रतिशत रह जाएगी। यह शुभ संकेत नहीं है।
उल्लेखनीय है कि देश के लगभग 198 मिलियन हेक्टेयर कृषि योग्य क्षेत्र के लगभग आधे भाग की सिंचाई के साधन उपलब्ध हैं। इसमें से 63 प्रतिशत क्षेत्र में भूमिगत जल से सिंचाई की जाती है, जबकि 24 प्रतिशत क्षेत्र की सिंचाई के लिए नहरों के जल का उपयोग किया जाता है। इसमें 2 प्रतिशत क्षेत्र की सिंचाई तालाब एवं कुंओं के जल से की जाती है तथा 11 प्रतिशत क्षेत्र की सिंचाई के लिए अन्य स्रोत का उपयोग किया जाता है। इससे स्पष्ट हो जाता है कि भारतीय कृषक आज भी सिंचाई के लिए भूमिगत जल पर निर्भर करते हैं। इसलिए भूजल का अत्यधिक दोहन किया जाता है। इससे भूमिगत जल स्तर निरंतर गिरता जा रहा है। जल प्राणियों के जीवन का आधार है। जल के बिना कोई भी प्राणी जीवित नहीं रह सकता। सूखे एवं भूमि का जल स्तर नीचे गिरने के कारण अनेक क्षेत्रों में जल संकट व्याप्त हो गया है। इससे निपटने के लिए जल संरक्षण अति आवश्यक है। भीषण गर्मी के समय देश के प्राय: समस्त क्षेत्रों में विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में जल की समस्या उत्पन्न हो जाती है। तालाब भी शुष्क हो जाते हैं। कुंओं का जल बहुत नीचे उतर जाता है अथवा वे भी सूख जाते हैं।
इसके कारण ग्रामीणों को उपयोग के लिए पर्याप्त जल प्राप्त नहीं होता है। इस समस्या के दृष्टिगत केंद्र सरकार ने अमृत सरोवर योजना प्रारम्भ की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 24 अप्रैल 2022 को आजादी के अमृत महोत्सव के उपलक्ष्य में इसका शुभारंभ किया था। इस योजना का उद्देश्य देश के प्रत्येक जिले में कम से कम 75 जल निकायों का विकास एवं कायाकल्प करना है। देशव्यापी इस योजना के अंतर्गत प्रत्येक राज्य के प्रयेक जिले में 75 से अधिक तालाबों का निर्माण करवाना है।
अमृत सरोवर योजना से राज्यों को अनेक प्रकार के लाभ प्राप्त हो सकेंगे। तालाबों का निर्माण होने तथा पुराने तालाबों का जीर्णोद्धार होने से क्षेत्रीय लोगों की जल की समस्या का समाधान हो सकेगा। इससे गर्मी के समय भूजल स्तर को बनाए रखने में सहायता प्राप्त हो सकेगी। इन तालाबों के जल का उपयोग कृषि कार्यों के लिए किया जा सकेगा। इसके अतिरिक्त पशु पालन में भी इस जल का उपयोग हो पाएगा। आवारा पशुओं एवं पक्षियों को भी पीने के लिए जल उपलब्ध हो सकेगा। इसके अतिरिक्त तालाबों का निर्माण होने से उस स्थान पर सुंदरीकरण होगा। तालाबों के तट पर पीपल, बरगद, नीम, अशोका, सहजन, महुआ, जामुन एवं कटहल आदि के पौधे लगाए जाएंगे। इससे जहां पर्यावरण स्वच्छ होगा तथा हरियाली में वृद्धि होगी, वहीं इससे पर्यटन को भी बढ़ावा मिल सकेगा। इससे ग्रामीण क्षेत्र में अर्थव्यवस्था सुदृढ़ हो सकेगी। इन तालाबों का उपयोग मछली पालन, मखाने एवं सिघाड़े की खेती में भी किया जा सकेगा।
इस योजना के अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्रों में 50 हजार से अधिक तालाबों का निर्माण करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। प्रत्येक तालाब एक एकड़ क्षेत्र में होगा, जिसमें 10 हजार घन मीटर पानी की धारण करने की क्षमता होगी। इस बात का विशेष ध्यान रखा जाएगा कि इसमें वर्ष भर जल भरा रहे। इस अमृत सरोवर योजना के माध्यम से ग्रामीण वासियों को मनरेगा योजना के अंतर्गत रोजगार उपलब्ध करवाया जा सकेगा। इससे बेरोजगारों को रोजगार उपलब्ध होगा।
विगत दिनों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमृत सरोवर योजना के अंतर्गत विगत 11 माह में लगभग 40 हजार तालाबों को विकसित करने की उपलब्धि की सराहना की है। उन्होंने ट्वीट में लिखा कि 'बहुत-बहुत बधाई! जिस तेजी से देशभर में अमृत सरोवरों का निर्माण हो रहा है, वो अमृतकाल के हमारे संकल्पों में नई ऊर्जा भरने वाली है।‘. केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने एक ट्वीट करके जानकारी दी कि देश में अभी तक 40 हजार से अधिक अमृत सरोवर राष्ट्र को समर्पित किए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि 15 अगस्त 2023 तक 50 हजार अमृत सरोवर बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
उल्लेखनीय है कि पर्यावरण संरक्षण के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए प्रत्येक वर्ष 22 अप्रैल को विश्वभर में पृथ्वी दिवस मनाया जाता है। उल्लेखनीय है कि अमेरिका के पर्यावरणविद जेराल्ड नेल्सन ने 22 अप्रैल 1970 को इसका शुभारम्भ किया था। वह विस्कॉन्सिन के एक अमेरिकी राजनेता थे. उन्होंने संयुक्त राज्य के सीनेटर और गवर्नर के रूप में कार्य किया। वह पृथ्वी दिवस के संस्थापक थे। उन्होंने पर्यावरण सक्रियता के एक नये अभियान का प्रारम्भ किया था। वर्ष 1969 में सैन फ्रांसिस्को में यूनेस्को सम्मेलन के दौरान 22 अप्रैल को पृथ्वी दिवस मनाने की घोषणा की गई थी। इसके पश्चात से यह दिवस मनाया जा रहा है। अब इसे विश्व के 192 से अधिक देशों में मनाया जाता है। इस अवसर पर कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है, जिसमें पृथ्वी के समक्ष उत्पन्न समस्याओं को उठाया जाता है तथा इनके समाधान के बारे में चर्चा होती है। आज जब पर्यावरण के समक्ष अनेक प्रकार के संकट उत्पन्न हो गए हैं, ऐसी स्थिति में इसका महत्त्व और अधिक बढ़ जाता है।
उल्लेख करने योग्य बात यह भी है कि देशभर में पृथ्वी दिवस के उपलक्ष्य में अनेक कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। इसमें सरकारी स्तर के कार्यक्रम भी हैं तथा पर्यावरण के क्षेत्र में कार्य कर रही स्वयंसेवी संस्थाओं के कार्यक्रम भी सम्मिलित हैं।
नि:संदेश केंद्र सरकार की अमृत सरोवर योजना जल संरक्षण के क्षेत्र में सफलता प्राप्त करेगी। इससे जल संरक्षण के अभियान को प्रोत्साहन भी मिलेगा। अपनी पृथ्वी को बचाने के लिए हम सबको मिलकर कार्य करना होगा।
Tuesday, April 21, 2026
साधारण सभा की बैठक
लखनऊ। विद्या भारती, भारती शिक्षा समिति उत्तर प्रदेश की साधारण सभा की बैठक का आयोजन लखनऊ में संपन्न हुआ। इस महत्वपूर्ण बैठक में विभिन्न शैक्षिक, संगठनात्मक एवं भावी योजनाओं पर व्यापक चर्चा की गई।
बैठक में प्रदेश भर से आए पदाधिकारियों एवं सदस्यों ने भाग लिया तथा शिक्षा के क्षेत्र में भारतीय संस्कृति, संस्कारयुक्त शिक्षा एवं गुणवत्ता वृद्धि के विषयों पर अपने विचार व्यक्त किए।
इस अवसर पर क्षेत्रीय मंत्री डॉ. सौरभ मालवीय ने संबोधित करते हुए कहा कि वर्ष 2027 में विद्या भारती अपनी स्थापना के 75 वर्ष पूर्ण करेगा। इस ऐतिहासिक अवसर को ध्यान में रखते हुए संगठन द्वारा पूरे वर्ष अमृत महोत्सव के रूप में विविध कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
उन्होंने कहा कि विद्या भारती का लक्ष्य केवल शिक्षा प्रदान करना नहीं, बल्कि समाज में संस्कारयुक्त शिक्षा का प्रसार करना है। इसी उद्देश्य से प्रत्येक गांव में विद्यालय स्थापित करने की दिशा में ठोस प्रयास किए जाएंगे, ताकि देश का हर बालक संस्कार और गुणवत्ता युक्त शिक्षा प्राप्त कर सके। विद्या भारती का उद्देश्य केवल शिक्षा प्रदान करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों में राष्ट्रभाव, चरित्र निर्माण एवं समग्र व्यक्तित्व विकास का निर्माण करना है। उन्होंने आगामी कार्ययोजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करने पर बल दिया।
डॉ. मालवीय ने वर्तमान समय की चुनौतियों का उल्लेख करते हुए कहा कि व्यसनमुक्त समाज का निर्माण और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है। विद्या भारती इन दोनों विषयों पर समाज में व्यापक जनजागरण अभियान चलाएगी।
उन्होंने सभी प्रधानाचार्यों से आह्वान किया कि वे अपने-अपने विद्यालयों के माध्यम से इन लक्ष्यों को धरातल पर उतारने में सक्रिय भूमिका निभाएं।
अंत में उन्होंने कहा कि विद्या भारती संस्कारयुक्त, राष्ट्रनिष्ठ और समर्पित पीढ़ी के निर्माण के लिए पूर्णतः कृतसंकल्पित है।
बैठक में संगठन के विस्तार, विद्यालयों की गुणवत्ता उन्नयन तथा नवीन शैक्षिक पहल को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय भी लिए गए।
Saturday, April 18, 2026
नानी के घर की सुखद स्मृति
नाना-नानी के घर जाने का उत्साह तो अलग ही होता है—वहाँ की कहानियाँ, प्यार भरा दुलार, और बिना किसी रोक-टोक के खेलने की आज़ादी बच्चों के मन को एक अलग ही आनंद देती है। पुराने आंगन, मिट्टी की खुशबू और पारिवारिक अपनापन मिलकर ऐसी यादें बनाते हैं, जो जीवन भर साथ रहती हैं।
सच में, गर्मी की छुट्टियाँ सिर्फ समय का एक हिस्सा नहीं, बल्कि बचपन की सबसे खूबसूरत अनुभूतियों का खज़ाना होती हैं।
पढ़े मेरा लेख 🙏
स्वयं से भेंट
कभी-कभी अपने ही पुराने चित्र को देखना एक तरह से खुद से मुलाक़ात करने जैसा होता है।
लंबे अंतराल के बाद जब हम खुद को देखते हैं, तो सिर्फ चेहरे का बदलाव नहीं दिखता, बल्कि सोच, अनुभव और समय की छाप भी नजर आती है। वही तस्वीर हमें याद दिलाती है कि हम कितनी दूर आ चुके हैं—कठिनाइयों से, सीखों से और छोटे-छोटे बदलावों से।
ऐसे पल मन को सुकून इसलिए देते हैं क्योंकि वे हमें ठहरकर अपने सफ़र को महसूस करने का अवसर देते हैं। साथ ही यह भी सिखाते हैं कि परिवर्तन स्वाभाविक है, और हर बदलाव अपने भीतर एक नई कहानी लेकर आता है।
Friday, April 17, 2026
संस्कारयुक्त शिक्षा के केन्द्र हैं विद्या भारती के विद्यालय : सौरभ मालवीय
बस्ती। सरस्वती विद्या मंदिर वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, रामबाग-बस्ती में आज शिशु शिक्षा समिति गोरक्ष प्रांत द्वारा आयोजित तीन दिवसीय प्रधानाचार्य कार्ययोजना बैठक सम्पन्न हुई।
वर्ग के अन्तिम दिन शिशु शिक्षा समिति और जन शिक्षा समिति गोरक्ष प्रान्त के प्रधानाचार्य, प्रधानाचार्याओं की संयुक्त बैठक से प्रारम्भ हुआ। मंच पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ गोरक्ष प्रान्त के प्रान्त प्रचारक मा. रमेश जी, गोरक्ष प्रांत के प्रांतीय सेवा शिक्षा प्रमुख मा. योगेश जी, जन शिक्षा समिति गोरक्ष प्रान्त के अध्यक्ष श्री विनोद कांत मिश्र के साथ जन शिक्षा समिति गोरक्ष प्रान्त के मंत्री श्री दुर्गा प्रसाद अस्थाना की भी गरिमामयी उपस्थिति रही। विद्यालय के प्रधानाचार्य गोविंद सिंह जी द्वारा मंचासीन अतिथियों का परिचय एवं सम्मान कराया गया। विभिन्न क्षेत्रों में विशेष उपलब्धि प्राप्त विद्यालयों के प्रधानाचार्यों को सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम के अन्त में शिशु शिक्षा समिति गोरक्ष प्रान्त के मन्त्री डॉ. शैलेश कुमार सिंह ने सभी आगन्तुक प्रधानाचार्य बन्धुओं और अन्य सभी के प्रति आभार प्रदर्शन किया। बैठक का समापन शान्ति मन्त्र के साथ हुआ।
Thursday, April 16, 2026
सृजन समय का मीडिया एवं पत्रकारिता विशेषांक
इस अंक के प्रकाशन हेतु सृजन समय पत्रिका के संपादकीय मंडल का हार्दिक आभार। आशा है कि यह प्रयास निश्चित ही मीडिया एवं पत्रकारिता के क्षेत्र में सार्थक संवाद को आगे बढ़ाने में सहायक सिद्ध होगा।
सचित्र मिश्रा
Monday, April 13, 2026
आया बैसाखी का पावन पर्व
डॊं. सौरभ मालवीय
बैसाखी ऋतु आधारित पर्व है. बैसाखी को वैसाखी भी कहा जाता है. पंजाबी में इसे विसाखी कहते हैं. बैसाखी कृषि आधारित पर्व है. जब फ़सल पक कर तैयार हो जाती है और उसकी कटाई का काम शुरू हो जाता है, तब यह पर्व मनाया जाता है. यह पूरी देश में मनाया जाता है, परंतु पंजाब और हरियाणा में इसकी धूम अधिक होती है. बैसाखी प्रायः प्रति वर्ष 13 अप्रैल को मनाई जाती है, किन्तु कभी-कभी यह पर्व 14 अप्रैल को भी मनाया जाता है.
यह सिखों का प्रसिद्ध पर्व है. जब मुगल शासक औरंगजेब ने अन्याय एवं अत्याचार की सभी सीमाएं तोड़कर श्री गुरु तेग बहादुरजी को दिल्ली में चांदनी चौक पर शहीद किया था, तब इस तरह 13 अप्रैल,1699 को श्री केसगढ़ साहिब आनंदपुर में दसवें गुरु गोविंद सिंह जी ने अपने अनुयायियों को संगठित कर खालसा पंथ की स्थापना की थी. सिखो के दूसरे गुरु, गुरु अंगद देव का जन्म इसी महीने में हुआ था. सिख इसे सामूहिक जन्मदिवस के रूप में मनाते हैं. गोविंद सिंह जी ने निम्न जाति के समझे जाने वाले लोगों को एक ही पात्र से अमृत छकाकर पांच प्यारे सजाए, जिन्हें पंज प्यारे भी कहा जाता है. ये पांच प्यारे किसी एक जाति या स्थान के नहीं थे. सब अलग-अलग जाति, कुल एवं अलग स्थानों के थे. अमृत छकाने के बाद इनके नाम के साथ सिंह शब्द लगा दिया गया.
इस दिन श्रद्धालु अरदास के लिए गुरुद्वारों में जाते हैं. आनंदपुर साहिब में मुख्य समारोह का आयोजन किया जाता है. प्रात: चार बजे गुरु ग्रंथ साहिब को समारोहपूर्वक कक्ष से बाहर लाया जाता है. फिर दूध और जल से प्रतीकात्मक स्नान करवाया जाता है. इसके पश्चात गुरु ग्रंथ साहिब को तख्त पर बिठाया जाता है. इस अवसर पर पंज प्यारे पंजबानी गाते हैं. दिन में अरदास के बाद गुरु को कड़ा प्रसाद का भोग लगाया जाता है. प्रसाद लेने के बाद श्रद्धालु गुरु के लंगर में सम्मिलत होते हैं. इस दिन श्रद्धालु कारसेवा करते हैं. दिनभर गुरु गोविंदसिंह और पंज प्यारों के सम्मान में शबद और कीर्तन गाए जाते हैं.
शाम को आग के आसपास इकट्ठे होकर लोग नई फ़सल की की खुशियां मनाते हैं और पंजाब का परंपरागत नृत्य भांगड़ा और गिद्दा किया जाता है.
बैसाखी के दिन सूर्य मेष राशि में प्रवेश करता है. हिन्दुओं के लिए भी बैसाखी का बहुत महत्व है. पौराणिक कथा के अनुसार ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना इसी दिन की थी. इसी दिन अयोध्या में श्रीराम का राज्याभिषेक हुआ था. राजा विक्रमादित्य ने विक्रमी संवत का प्रारंभ इसी दिन से किया था, इसलिए इसे विक्रमी संवत कहा जाता है. बैसाखी के पावन पर्व पर पवित्र नदियों में स्नान किया जाता है. महादेव और दुर्गा देवी की पूजा की जाती है. इस दिन लोग नये कपड़े पहनते हैं. वे घर में मिष्ठान बनाते हैं. बैसाखी के पर्व पर लगने वाला बैसाखी मेला बहुत प्रसिद्ध है. जगह-जगह विशेषकर नदी किनारे बैसाखी के दिन मेले लगते हैं. हिंदुओं के लिए यह पर्व नववर्ष की शुरुआत है. हिन्दू इसे स्नान, भोग लगाकर और पूजा करके मनाते हैं.
मेरे प्रेरणास्रोत: स्वामी विवेकानंद
डॉ. सौरभ मालवीय
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