सरस्वती शिशु मंदिर, अर्जुनगंज, लखनऊ में नवीन कम्प्यूटर लैब एवं विद्यालय वेबसाइट के लोकार्पण अवसर पर उत्तर प्रदेश की महामहिम राज्यपाल श्रीमती आनन्दीबेन पटेल जी की गरिमामयी उपस्थिति प्राप्त हुई।
कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ० सौरभ मालवीय (क्षेत्रीय मंत्री, विद्या भारती पूर्वी उत्तर प्रदेश) द्वारा की गई।
माननीय राज्यपाल महोदया के करकमलों द्वारा सम्पन्न यह लोकार्पण समारोह विद्यालय के इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय के रूप में अंकित हुआ।
विद्या भारती परिवार उनके आशीर्वचनों हेतु हृदय से आभार व्यक्त करता है।
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सरस्वती शिशु मंदिर एवं विद्या मंदिर का पूर्व छात्र होने के नाते यह मेरे लिए अत्यंत गौरव एवं आत्मसंतोष का क्षण है। विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षण संस्थान निरंतर प्रगति-पथ पर अग्रसर होकर नित नई ऊँचाइयों तक पहुँच रहा है। क्षेत्रीय मंत्री, पूर्वी उत्तर प्रदेश, आदरणीय श्री सौरभ मालवीय गुरु जी के कुशल नेतृत्व, दूरदर्शी प्रबंधन तथा स्नेहिल संरक्षण में शिशु मंदिर एवं विद्या मंदिर विद्यालयों का प्रभावशाली कायाकल्प जारी है। यह परिवर्तन केवल भौतिक उन्नयन तक सीमित नहीं है, अपितु शैक्षणिक उत्कृष्टता, सांस्कृतिक चेतना और नैतिक मूल्यों की सुदृढ़ स्थापना का सशक्त प्रतीक भी है।
सचित्र मिश्रा
प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में केंद्र सरकार का प्रमुख मंत्र “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास” है।
अपने देश में AI समिट जैसे महत्वपूर्ण कार्यक्रम हो रहा, तब कांग्रेस के कार्यकर्ताओं का विरोध आयोजन स्थल पर अनुचित व्यवहार करने जैसा था, जिससे भारत की अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा धूमिल हुई। कांग्रेस ने देश की प्रतिष्ठा बढ़ाने के बजाय आयोजन में विघ्न उत्पन्न किया और कांग्रेस पार्टी राष्ट्रीय हित के बजाय राजनीतिक लाभ को प्राथमिकता देती है.
कांग्रेस पार्टी ने ऐसा विरोध किया जो भारत की छवि को नुकसान पहुँचाने जैसा था, खासकर जब वैश्विक नेता, तकनीकी विशेषज्ञ और निवेशक यहाँ आए हुए हैं.
भारत की जनता भली-भांति समझती है कि कौन देश को सशक्त बनाना चाहता है और कौन बार-बार देश की छवि को धूमिल करने का प्रयास करता है.
भारत में सभी मतावलम्बी समान रूप से भारतीय हैं। भारतीय संविधान ने हर नागरिक को समान अधिकार और सुरक्षा दी है। यही कारण है कि अनेक वैश्विक संघर्षों के बावजूद भारत में सामाजिक सौहार्द और लोकतांत्रिक ढांचा मजबूत बना हुआ है।
ऐतिहासिक दृष्टि से देखें तो भारत में इस्लाम का आगमन कई मार्गों से हुआ – व्यापार, सूफी संतों की शिक्षाओं, और विभिन्न कालखंडों के राजनीतिक परिवर्तनों के माध्यम से। इतिहासकार मानते हैं कि भारत के अधिकांश मुसलमानों के पूर्वज यहीं के मूल निवासी थे, जिन्होंने अलग-अलग समय पर इस्लाम स्वीकार किया।
किसी भी भारतीय की राष्ट्रीयता उसके धर्म से तय नहीं होती।
आस्था व्यक्तिगत विषय है, राष्ट्र सर्वोपरि सामूहिक विषय है।
सामाजिक समरसता तभी बनी रहती है जब हम अतीत को समझें, लेकिन वर्तमान में परस्पर सम्मान बनाए रखें। साथ ही समयानुसार अतीत को स्वीकार कर सकते.
संघ शताब्दी वर्ष के निमित्त राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ लखनऊ महानगर द्वारा परम पूज्य सर संघचालक मोहन भागवत जी के सान्निध्य में आयोजित प्रमुख जन गोष्ठी में प्रतिभाग किया।
टाइम्स नाऊ नवभारत द्वारा लखनऊ में आयोजित कार्यक्रम "विकसित उत्तर प्रदेश" के स्पेशल शो 'राष्ट्रवाद' में अपनी बात रखते हुए.