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अपने देश में AI समिट जैसे महत्वपूर्ण कार्यक्रम हो रहा, तब कांग्रेस के कार्यकर्ताओं का विरोध आयोजन स्थल पर अनुचित व्यवहार करने जैसा था, जिससे भारत की अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा धूमिल हुई। कांग्रेस ने देश की प्रतिष्ठा बढ़ाने के बजाय आयोजन में विघ्न उत्पन्न किया और कांग्रेस पार्टी राष्ट्रीय हित के बजाय राजनीतिक लाभ को प्राथमिकता देती है.
कांग्रेस पार्टी ने ऐसा विरोध किया जो भारत की छवि को नुकसान पहुँचाने जैसा था, खासकर जब वैश्विक नेता, तकनीकी विशेषज्ञ और निवेशक यहाँ आए हुए हैं.
भारत की जनता भली-भांति समझती है कि कौन देश को सशक्त बनाना चाहता है और कौन बार-बार देश की छवि को धूमिल करने का प्रयास करता है.
भारत में सभी मतावलम्बी समान रूप से भारतीय हैं। भारतीय संविधान ने हर नागरिक को समान अधिकार और सुरक्षा दी है। यही कारण है कि अनेक वैश्विक संघर्षों के बावजूद भारत में सामाजिक सौहार्द और लोकतांत्रिक ढांचा मजबूत बना हुआ है।
ऐतिहासिक दृष्टि से देखें तो भारत में इस्लाम का आगमन कई मार्गों से हुआ – व्यापार, सूफी संतों की शिक्षाओं, और विभिन्न कालखंडों के राजनीतिक परिवर्तनों के माध्यम से। इतिहासकार मानते हैं कि भारत के अधिकांश मुसलमानों के पूर्वज यहीं के मूल निवासी थे, जिन्होंने अलग-अलग समय पर इस्लाम स्वीकार किया।
किसी भी भारतीय की राष्ट्रीयता उसके धर्म से तय नहीं होती।
आस्था व्यक्तिगत विषय है, राष्ट्र सर्वोपरि सामूहिक विषय है।
सामाजिक समरसता तभी बनी रहती है जब हम अतीत को समझें, लेकिन वर्तमान में परस्पर सम्मान बनाए रखें। साथ ही समयानुसार अतीत को स्वीकार कर सकते.
संघ शताब्दी वर्ष के निमित्त राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ लखनऊ महानगर द्वारा परम पूज्य सर संघचालक मोहन भागवत जी के सान्निध्य में आयोजित प्रमुख जन गोष्ठी में प्रतिभाग किया।
टाइम्स नाऊ नवभारत द्वारा लखनऊ में आयोजित कार्यक्रम "विकसित उत्तर प्रदेश" के स्पेशल शो 'राष्ट्रवाद' में अपनी बात रखते हुए.
Sunday, February 22, 2026
Friday, February 20, 2026
टीवी पर लाइव
अपने देश में AI समिट जैसे महत्वपूर्ण कार्यक्रम हो रहा, तब कांग्रेस के कार्यकर्ताओं का विरोध आयोजन स्थल पर अनुचित व्यवहार करने जैसा था, जिससे भारत की अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा धूमिल हुई। कांग्रेस ने देश की प्रतिष्ठा बढ़ाने के बजाय आयोजन में विघ्न उत्पन्न किया और कांग्रेस पार्टी राष्ट्रीय हित के बजाय राजनीतिक लाभ को प्राथमिकता देती है.
कांग्रेस पार्टी ने ऐसा विरोध किया जो भारत की छवि को नुकसान पहुँचाने जैसा था, खासकर जब वैश्विक नेता, तकनीकी विशेषज्ञ और निवेशक यहाँ आए हुए हैं.
भारत की जनता भली-भांति समझती है कि कौन देश को सशक्त बनाना चाहता है और कौन बार-बार देश की छवि को धूमिल करने का प्रयास करता है.
Thursday, February 19, 2026
टीवी पर लाइव
भारत में सभी मतावलम्बी समान रूप से भारतीय हैं। भारतीय संविधान ने हर नागरिक को समान अधिकार और सुरक्षा दी है। यही कारण है कि अनेक वैश्विक संघर्षों के बावजूद भारत में सामाजिक सौहार्द और लोकतांत्रिक ढांचा मजबूत बना हुआ है।
ऐतिहासिक दृष्टि से देखें तो भारत में इस्लाम का आगमन कई मार्गों से हुआ – व्यापार, सूफी संतों की शिक्षाओं, और विभिन्न कालखंडों के राजनीतिक परिवर्तनों के माध्यम से। इतिहासकार मानते हैं कि भारत के अधिकांश मुसलमानों के पूर्वज यहीं के मूल निवासी थे, जिन्होंने अलग-अलग समय पर इस्लाम स्वीकार किया।
किसी भी भारतीय की राष्ट्रीयता उसके धर्म से तय नहीं होती।
आस्था व्यक्तिगत विषय है, राष्ट्र सर्वोपरि सामूहिक विषय है।
सामाजिक समरसता तभी बनी रहती है जब हम अतीत को समझें, लेकिन वर्तमान में परस्पर सम्मान बनाए रखें। साथ ही समयानुसार अतीत को स्वीकार कर सकते.
Wednesday, February 18, 2026
जन गोष्ठी
संघ शताब्दी वर्ष के निमित्त राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ लखनऊ महानगर द्वारा परम पूज्य सर संघचालक मोहन भागवत जी के सान्निध्य में आयोजित प्रमुख जन गोष्ठी में प्रतिभाग किया।
Tuesday, February 17, 2026
विकसित उत्तर प्रदेश
टाइम्स नाऊ नवभारत द्वारा लखनऊ में आयोजित कार्यक्रम "विकसित उत्तर प्रदेश" के स्पेशल शो 'राष्ट्रवाद' में अपनी बात रखते हुए.
श्रेष्ठ भारत : आत्मबोध से राष्ट्र बोध
श्रेष्ठ भारत का निर्माण केवल आर्थिक समृद्धि या तकनीकी प्रगति से नहीं होता, बल्कि वह आत्मबोध से उत्पन्न राष्ट्रबोध की चेतना से होता है। जब व्यक्ति स्वयं को पहचानता है, अपने मूल्यों, संस्कृति और कर्तव्यों को समझता है, तभी वह राष्ट्र के प्रति सजग और उत्तरदायी बनता है।
अपने अस्तित्व, अपनी परम्परा, अपनी शक्ति और अपनी जिम्मेदारियों को जानना। भारतीय ज्ञान परम्परा में “आत्मानं विद्धि” का संदेश यही देता है कि व्यक्ति पहले स्वयं को पहचाने। जब व्यक्ति अपने भीतर की क्षमता, नैतिकता और कर्तव्यबोध को जाग्रत करता है, तब वह केवल निजी हित तक सीमित नहीं रहता।
राष्ट्र के गौरव, उसकी एकता, अखंडता और संस्कृति के प्रति सजग होना। यदि व्यक्ति में आत्मबोध है तो वह समझता है कि उसका व्यक्तिगत आचरण ही राष्ट्र की छवि बनाता है।
ईमानदारी से कार्य करना राष्ट्र निर्माण है।
सामाजिक समरसता को बढ़ाना राष्ट्र सेवा है।
पर्यावरण संरक्षण करना भविष्य की पीढ़ियों के प्रति कर्तव्य है।
भारत में राष्ट्र केवल भौगोलिक सीमा नहीं, बल्कि सांस्कृतिक चेतना है। वेदों से लेकर उपनिषदों तक और आधुनिक युग में भी “वसुधैव कुटुम्बकम्” का विचार हमें व्यापक राष्ट्रचेतना देता है।
भगवद्गीता में श्रीकृष्ण द्वारा अर्जुन को दिया गया कर्तव्य और धर्म का उपदेश भी यही सिखाता है कि व्यक्तिगत मोह से ऊपर उठकर व्यापक हित के लिए कर्म करना ही श्रेष्ठ मार्ग है।
आज जब भारत विश्व मंच पर उभरती शक्ति के रूप में स्थापित हो रहा है, तब आवश्यक है कि प्रत्येक नागरिक अपने भीतर आत्मगौरव और अनुशासन का विकास करे। शिक्षा, शोध, संस्कृति, सेवा और नवाचार—हर क्षेत्र में आत्मबोध आधारित दृष्टि राष्ट्र को श्रेष्ठता की ओर ले जाएगी।
श्रेष्ठ भारत का सपना किसी एक व्यक्ति या सरकार से पूरा नहीं होगा। यह तब साकार होगा जब हर नागरिक अपने भीतर राष्ट्र की अनुभूति करे।
आत्मबोध से उत्पन्न राष्ट्रबोध ही भारत को न केवल शक्तिशाली, बल्कि नैतिक और सांस्कृतिक रूप से भी विश्व में आदर्श बनाएगा।
जब व्यक्ति जागेगा, तभी राष्ट्र जागेगा; और जब राष्ट्र जागेगा, तभी श्रेष्ठ भारत का उदय होगा।
Sunday, February 15, 2026
मेरे प्रेरणास्रोत: स्वामी विवेकानंद
गिरकर उठना, उठकर चलना... यह क्रम है संसार का... कर्मवीर को फ़र्क़ न पड़ता किसी जीत और हार का... क्योंकि संघर्षों में पला-बढ़ा... संघर्ष ही मेरा जीवन है...
-डॉ. सौरभ मालवीय
डॉ. सौरभ मालवीय
अपनी बात
सामाजिक परिवर्तन और राष्ट्र-निर्माण की तीव्र आकांक्षा के कारण छात्र जीवन से ही सामाजिक सक्रियता। बिना दर्शन के ही मैं चाणक्य और डॉ. हेडगेवार से प्रभावित हूं। समाज और राष्ट्र को समझने के लिए "सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और मीडिया" विषय पर शोध पूर्ण किया है, परंतु सृष्टि रहस्यों के प्रति मेरी आकांक्षा प्रारंभ से ही है।
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टाइम्स नाऊ नवभारत द्वारा लखनऊ में आयोजित कार्यक्रम "विकसित उत्तर प्रदेश" के स्पेशल शो 'राष्ट्रवाद' में अपनी बात रखते हुए.
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शिवाजी महाराज राष्ट्रनायक हैं, जिन्होंने स्वराज और सांस्कृतिक अस्मिता की रक्षा की। टीपू सुल्तान को शिवाजी के समकक्ष रखना ऐतिहासिक दृष्टि ...
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संघ शताब्दी वर्ष के निमित्त राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ लखनऊ महानगर द्वारा परम पूज्य सर संघचालक मोहन भागवत जी के सान्निध्य में आयोजित प्रमुख जन...
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अपने देश में AI समिट जैसे महत्वपूर्ण कार्यक्रम हो रहा, तब कांग्रेस के कार्यकर्ताओं का विरोध आयोजन स्थल पर अनुचित व्यवहार करने जैसा था, जिससे...
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भारत में सभी मतावलम्बी समान रूप से भारतीय हैं। भारतीय संविधान ने हर नागरिक को समान अधिकार और सुरक्षा दी है। यही कारण है कि अनेक वैश्विक संघर...
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श्रेष्ठ भारत का निर्माण केवल आर्थिक समृद्धि या तकनीकी प्रगति से नहीं होता, बल्कि वह आत्मबोध से उत्पन्न राष्ट्रबोध की चेतना से होता है। जब ...
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स्वतंत्र भारत के पहले शिक्षा मंत्री और प्रमुख शिक्षाविद् मौलाना अबुल कलाम आजाद के सम्मान में हर साल 11 नवंबर को राष्ट्रीय शिक्षा दिवस मनाय...
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उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा कृषि और बागवानी को बढ़ावा देने के क्रम में जनपद कुशीनगर के कसया स्थित राजकीय आलू फार्म पर केला टिशू कल्चर लैब की स्...
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डॉ. सौरभ मालवीय परमपावन भारत भूमि अजन्मा है यह देव निर्मित है और देवताओं के द्वारा इस धरा पर विभिन्न अवसरों पर अलग अलग प्रकार की श...
संप्रति
डॉ. सौरभ मालवीय
2/564, अवधपुरी खण्ड 2
खरगापुर, निकट प्राथमिक विद्यालय, गोमतीनगर विस्तार
2/564, अवधपुरी खण्ड 2
खरगापुर, निकट प्राथमिक विद्यालय, गोमतीनगर विस्तार
लखनऊ, उत्तर प्रदेश
पिन- 226010
मो- 8750820740
पिन- 226010
मो- 8750820740
ईमेल - malviya.sourabh@gmail.com
***
डॉ. सौरभ मालवीय
एसोसिएट प्रोफेसर
पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग
लखनऊ विश्वविद्यालय
लखनऊ, उत्तर प्रदेश
मो- 8750820740
ईमेल - malviya.sourabh@gmail.com
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