Sunday, August 9, 2026

प्राक्कथन


देश के लोगों के सामाजिक, आर्थिक और शैक्षिक विकास के लिए सरकार अनेक योजनाएं चला रही है। हर योजना का उद्देश्य होता है कि उसका लाभ हर व्यक्ति तक पहुंचे। जब योजना का लाभ व्यक्ति तक पहुंचता है, वह योजना सफल होती है। इस समय देश में लगभग डेढ़ सौ योजनाएं चल रही हैं। इनमें अधिकतर पुरानी योजनाएं हैं। इनमें कई ऐसी पुरानी योजनाएं भी हैं, जिनके नाम बदल दिए गए हैं। इनमें कई ऐसी योजनाएं भी हैं, जो लगभग बंद हो चुकी थीं और उन्हें दोबारा शुरू किया गया है। इनमें कुछ नई योजनाएं भी सम्मिलित हैं। देश में दो प्रकार की सरकारी योजनाएं चल रही हैं। पहली योजनाएं वे हैं, जो केंद्र सरकार द्वारा चलाई जाती हैं। इस तरह की योजनाएं पूरे देश या देश के कुछ विशेष राज्यों में चलाई जाती हैं। दूसरी योजनाएं वे हैं, जो राज्य सरकारें चलाती हैं। इस पुस्तक के माध्यम से सरकारी की कुछ महत्वपूर्ण योजनाओं पर प्रकाश डालते हुए उन्हें पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास किया गया है। अकसर ऐसा होता है कि अज्ञानता और अशिक्षा के कारण लोगों को सरकार की जन हितैषी योजनाओं की जानकारी नहीं होती, जिसके कारण वे इन योजनाओं का लाभ उठाने से वंचित रह जाते हैं। इस पुस्तक का उद्देश्य यही है कि लोग उन सभी योजनाओं का लाभ उठाएं, जो सरकार उनके कल्याण के लिए चला रही है. 

इन योजनाओं की जानकारी संबंधित मंत्रालयों से प्राप्त जानकारी पर आधारित है. उल्लेखनीय है कि समय-समय पर योजनाओं में आंशिक रूप से परिवर्तन भी होता रहता है.  
-शिशिर सिन्हा
वरिष्ठ आर्थिक पत्रकार
 

(डॉ सौरभ मालवीय की पुस्तक- 'विकास के पथ पर भारत' से)

प्रस्तावना


यह हर्ष की बात है कि सरकार की जन कल्याणकारी योजनाओं पर आधारित पुस्तक का प्रकाशन हो रहा है. इस संग्रहणीय पुस्तक के लेखक डॊ. सौरभ मालवीय को हार्दिक धन्यवाद और बधाई कि उन्होंने इस जनोपयोगी विषय पर पुस्तक लिखी। 

देश की खाद्य सुरक्षा को सतत आधार पर सुनिश्चित करने का श्रेय किसानों को ही जाता है। आज भारत न केवल बहुत से कृषि उत्पादों में आत्मनिर्भर और आत्मसम्पन्न है, अपितु बहुत से कृषि उत्पादों का निर्यातक भी है। यह भी सच है कि किसान अपने उत्पादों का लाभकारी मूल्य नहीं पाते हैं। अत: सरकार का मानना है कि कृषि क्षेत्र का इस प्रकार चहुंमुखी विकास किया जाए कि अन्य एवं कृषि उत्पादों के भंडार के साथ किसानों की जेब भी भरे और उनकी आय भी बढ़े। सरकार का उद्देश्य कृषि नीति एवं कार्यक्रमों को ‘उत्पादन केन्द्रित’ के बजाय ‘आय केन्द्रित’ बनाने का है। 
 
सरकार का मुख्य लक्ष्य न केवल कृषि के उन संभावनाशील क्षेत्रों की पहचान करना है, जिनमें अधिक निवेश होना चाहिए वरन आय बढ़ाने के लिए उद्यानिकी, पशुपालन तथा मत्स्य पालन जैसे कृषि संबंधित क्षेत्रों के विविधीकरण पर विचार कर कृषि में जोखिम कम करने के तरीके सुझाना भी है। इसी क्रम में माननीय प्रधानमंत्री द्वारा किसानों की आय दोगुनी करने के बारे में दिए गए लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए आज कृषि मंत्रालय खेती की लागत कम करने, उत्पादकता लाभ के माध्यम से उच्च उत्पादन करने, लाभकारी प्रतिफल सुनिश्चित करने और मौसम की अनिश्चितता को देखते हुए जोखिम प्रबंधन जैसे सतत कार्यों में लगा है। जहां तक एक ओर उत्पादकता लाभ के लिए राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन जैसे योजनाएं चलाई जा रही हैं, वहीं कृषि लागत में कटौती के लिए मृदा स्वास्थ्य कार्ड व नीम लेपित यूरिया के इस्तेमाल और प्रति बूंद से अधिक फसल संबंधी योजनाओं का सफल क्रियान्वयन किया जा रहा है। जोखिम प्रबंधन एवं स्थायी पद्धतियां अपनाने हेतु प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, परंपरागत कृषि विकास योजना तथा उत्तरपूर्वी राज्यों के लिये जैविक खेती मिशन आदि के माध्यम से कृषि को बढ़ावा दिया जा रहा है। देश में आने वालों वर्षों में कृषि एवं खाद्य सुरक्षा निरंतर और सतत बनी रहेगी और सरकार किसानों की आय नियत समय के अनुसार दोगुनी करने में अवश्य सफल होगी।

सरकारी योजनाओं को सफल बनाने के लिए यह भी अति आवश्यक है कि लोग उनका समुचित लाभ उठाएं। और ऐसा तभी संभव है, जब उन्हें इन योजनाओं के बारे में जानकारी हो. सरकार अपने स्तर पर योजनाओं के प्रचार-प्रसार करती ही है। यदि लोग भी एक-दूसरे को उन योजनाओं के बारे में बताएं, तो सोने पर सुहागा ही होगा. इस संबंध में डॊ. सौरभ मालवीय की पुस्तक बहुत उपयोगी है। नि: संदेह यह पुस्तक जनकल्याण योजनाओं की जानकारी आम लोगों तक पहुंचाने में सेतु का कार्य करेगी। एक बार फिर से मालवीय जी को बहुत-बहुत बधाई।

राधा मोहन सिंह
केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री
भारत सरकार 
-डॉ. सौरभ मालवीय

(पुस्तक- 'विकास के पथ पर भारत ' से)

संवाद और विचार प्रवाह आपकी पहचान हैं


 संवाद और विचार प्रवाह आपकी पहचान हैं - 
जीवन केवल समय के गुजरने का नाम नहीं,
यह उन क्षणों को अर्थ देने की कला है जो हमारे हिस्से में आते हैं।
मनुष्य की पहचान उसकी दृष्टि की गहराई और उसके विचारों की यात्रा से होती है।
कुछ सफर मंज़िल के लिए नहीं होते,
वे स्वयं को समझने के लिए होते हैं।
“कुछ ठहराव भी यात्रा का हिस्सा होते हैं।
जहाँ मन स्वयं से संवाद करता है,
विचार अपने अर्थ तलाशते हैं
और जीवन, बीते हुए कल और आने वाले कल के बीच
एक सुंदर वर्तमान रचता है।”

Saturday, August 8, 2026

प्रचार विभाग एवं अभिलेखागार कार्यकर्ता बैठक









 विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान द्वारा प्रचार एवं अभिलेखागार कार्यकर्ताओं की दो दिवसीय अखिल भारतीय बैठक का आयोजन 8 एवं 9 अगस्त 2026 को नोएडा में किया जा रहा है।

विद्या भारती की व्यापक शैक्षिक एवं सामाजिक यात्रा, उसके विचार, कार्यपद्धति, उपलब्धियों और विविध गतिविधियों को समाज तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने में प्रचार एवं अभिलेखागार का महत्वपूर्ण योगदान है। संगठन के कार्यों का सुव्यवस्थित दस्तावेजीकरण भावी पीढ़ियों के लिए प्रेरणा और मार्गदर्शन का आधार बनता है।

बैठक में प्रचार कार्य को अधिक प्रभावी बनाने, विभिन्न गतिविधियों के दस्तावेजीकरण, अभिलेख संरक्षण, डिजिटल माध्यमों के उपयोग तथा संगठन की उपलब्धियों को व्यापक समाज तक पहुंचाने जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श एवं मार्गदर्शन प्राप्त होगा।

विद्या भारती की गौरवशाली यात्रा के अनुभवों और उपलब्धियों को सुरक्षित रखते हुए उन्हें नई पीढ़ी तक पहुंचाने का यह प्रयास निश्चित रूप से संगठन के कार्य को और अधिक प्रभावी एवं व्यापक बनाएगा।

संस्कारयुक्त शिक्षा, राष्ट्रभक्ति और समाज निर्माण के संकल्प के साथ—विद्या भारती निरंतर राष्ट्र निर्माण की दिशा में अग्रसर है।

  





मोदी सरकार के कार्यकाल में शिक्षा के क्षेत्र में संस्थागत विस्तार, नई शिक्षा नीति, डिजिटल शिक्षा, कौशल विकास और उच्च शिक्षा की पहुंच पर विशेष जोर दिया गया है.

2014 के बाद शिक्षा नीति का फोकस केवल विद्यालयों और कॉलेजों की संख्या बढ़ाने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि नई शिक्षा नीति, डिजिटल शिक्षा, कौशल, शोध, भारतीय भाषाओं, बहुविषयक शिक्षा और वैश्विक स्तर पर भारतीय संस्थानों की उपस्थिति बढ़ाने पर भी रहा।

Friday, August 7, 2026

आत्मीय मिलन





आज कुशीनगर के लोकप्रिय विधायक श्री पी. एन. पाठक जी के आवास पर पारिवारिक एवं आत्मीय वातावरण में मिलन का सौभाग्य प्राप्त हुआ।
स्नेह, आत्मीयता और पारिवारिक अपनत्व से परिपूर्ण यह भेंट सदैव स्मरणीय रहेगी। ऐसे अवसर संबंधों को और अधिक सुदृढ़ बनाने पारस्परिक विश्वास को भी नई ऊर्जा प्रदान करते हैं।
आदरणीय पाठक जी एवं उनके समस्त परिवार के स्नेहपूर्ण आतिथ्य एवं आत्मीय स्वागत के लिए हृदय से आभार।
सादर।

पुस्तक भेंट



प्रख्यात खिस्सागो एवं लखनऊ की तहज़ीब और ज़ुबान के सशक्त संवाहक श्री हिमांशु वाजपेयी से आत्मीय भेंट हुआ। 
हिमांशु जी लखनऊ की सांस्कृतिक विरासत के जीवंत प्रतिनिधि हैं। अपनी विशिष्ट लखनवी शैली, अद्भुत खिस्सागोई और दास्तानगोई के माध्यम से वे देश-दुनिया को अवध की संस्कृति, भाषा और संवेदनाओं से परिचित करा रहे हैं। पत्रकारिता में लंबे समय तक सक्रिय रहने के बाद उन्होंने स्वयं को पूर्णतः खिस्सागोई की साधना के लिए समर्पित कर दिया है।
उनके उत्कृष्ट कार्यों की सराहना माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने भी मन की बात कार्यक्रम में की है। अनेक प्रतिष्ठित सम्मानों से अलंकृत हिमांशु जी आज अपनी कला से देश-विदेश में लखनऊ का गौरव बढ़ा रहे हैं।
कल लखनऊ विश्वविद्यालय स्थित मेरे कार्यालय में उनका आगमन हुआ। विभिन्न सामाजिक, सांस्कृतिक, साहित्यिक एवं मीडिया से जुड़े विषयों पर विस्तृत और सार्थक चर्चा हुई। यह आत्मीय संवाद लंबे समय तक स्मृतियों में संजोए रखने योग्य रहेगा।
इस अवसर पर उन्हें अपनी पुस्तक 'भारतीय संत परम्परा : धर्मदीप से राष्ट्रदीप' भेंट की। 
सप्रेम शुभकामनाएँ, हिमांशु जी।

भारत की राष्‍ट्रीयता हिंदुत्‍व है