Sunday, September 6, 2026

'श्रेष्ठ भारत : आत्मबोध से राष्ट्रबोध' का अवलोकन





मेरे द्वारा लिखित पुस्तक ‘श्रेष्ठ भारत : आत्मबोध से राष्ट्रबोध’ का उत्तर प्रदेश सरकार के माननीय कैबिनेट मंत्री श्री स्वतंत्रदेव सिंह जी द्वारा आत्मीयता एवं रुचिपूर्वक अवलोकन।

यह मेरे लिए अत्यंत सुखद और गौरवपूर्ण क्षण है। पुस्तक के माध्यम से आत्मबोध से राष्ट्रबोध की यात्रा और श्रेष्ठ भारत के निर्माण की भारतीय दृष्टि को समाज के सामने रखने का प्रयास किया गया है।

Saturday, September 5, 2026











लखनऊ। शिक्षक दिवस के अवसर पर महामना सरस्वती विद्या मंदिर में शिक्षक सम्मान एवं समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. सौरभ मालवीय ने कहा कि शिक्षक केवल विद्यार्थियों को विषय का ज्ञान देने का कार्य नहीं करते, बल्कि वे उनके व्यक्तित्व निर्माण, संस्कार और चरित्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
उन्होंने कहा कि शिक्षा मनुष्य को ज्ञान देती है, जबकि शिक्षक उस ज्ञान को जीवन के उद्देश्य से जोड़ने का कार्य करता है। शिक्षक विद्यार्थियों को कर्तव्य पथ पर आगे बढ़ने, चुनौतियों का सामना करने और समाज एवं राष्ट्र के प्रति अपने दायित्वों का निर्वहन करने की प्रेरणा देता है।
डॉ. मालवीय ने कहा कि आज शिक्षा के क्षेत्र में तकनीक, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डिजिटल माध्यमों का प्रभाव तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे समय में शिक्षक की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। तकनीक ज्ञान का माध्यम हो सकती है, लेकिन संस्कार, संवेदना, विवेक और जीवन-मूल्यों का निर्माण शिक्षक ही कर सकता है।
उन्होंने कहा कि भारतीय शिक्षा परंपरा में गुरु का स्थान सदैव सर्वोच्च रहा है। हमारी शिक्षा व्यवस्था का उद्देश्य केवल रोजगार प्राप्त करना नहीं, बल्कि ऐसे नागरिक तैयार करना होना चाहिए जो ज्ञानवान होने के साथ-साथ संवेदनशील, संस्कारवान और राष्ट्र के प्रति समर्पित हों।
कार्यक्रम में विद्यालय के आचार्यों का सम्मान किया गया। विद्यार्थियों ने शिक्षक दिवस के महत्व पर अपने विचार व्यक्त किए तथा सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं। विद्यालय परिवार की ओर से शिक्षकों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए उनके योगदान को सराहा गया।

हज नीति : महिलाएं अकेले हज करेंगी


किसी भी धर्म के लोगों की इच्छा होती है कि वे अपने तीर्थों की यात्रा पर जाएं। केन्द्र सरकार सभी की धार्मिक भावनाओं को ध्यान में रखते हुए उन्हें तीर्थ यात्रा पर भेजने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है। ये केन्द्र सरकार के प्रयासों का ही परिणाम है कि इस वर्ष 2018 में जहां रिकॉर्ड संख्या में यात्री हज पर जा रहे हैं, वहीं महिलाएं भी बिना पुरुष साथी के हज पर जा रही हैं। भारत से प्रति वर्ष लगभग 1।70 लाख लोग हज यात्रा पर जाते हैं। सऊदी अरब ने पांच हज़ार और यात्रियों की अनुमति दे दी है। इसलिए इस साल यह संख्या 1.75 लाख हो गई है। 

केंद्रीय अल्पसंख्यक मामले मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी के अनुसार आजादी के बाद पहली बार इस वर्ष भारत से रिकॉर्ड 1,75,025 मुस्लिम तीर्थयात्री हज पर जाएंगे और वह भी बिना किसी अनुदान के। केन्द्र  सरकार भारत का हज कोटा लगातार दूसरे वर्ष बढ़ा पाने में कामयाब हो पाई है।
हज के लिए कुल 3,55,604 आवेदन प्राप्त हुए थे, जिनमें 1,89,217 पुरुष एवं 1,66,387 महिला आवेदक शामिल थे। इस वर्ष कुल 1,28,002 मुस्लिम तीर्थयात्री भारत की हज समिति के माध्यम से हज पर जाएंगे, जिनमें 47 प्रतिशत महिलाएं शामिल हैं। 47,023 हज तीर्थयात्री निजी टूर ऑपरेटरों के माध्यम से हज पर जाएंगे।
इसके अतिरिक्त भारत से पहली बार, मुस्लिम महिलाएं बिना ‘मेहराम‘ (पति, पिता या भाई) के हज यात्रा पर जाएंगी। कुल 1308 महिलाओं ने बिना मेहराम के हज यात्रा के लिए आवेदन किया है और इनमें से सभी महिलाओं को लॉटरी स्स्टिम से छूट दे दी गई है और हज पर जाने की अनुमति दी गई है।

उल्लेखनीय है कि अब किसी मुस्लिम महिला को बिना किसी मेहरम (पति, पिता या भाई) के स्वतंत्र रूप से हज यात्रा की अनुमति होगी। सऊदी अरब 45 और इससे अधिक उम्र की महिलाओं को हज के लिए प्रवेश की अनुमति देता है। 45 साल की उम्र पार चुकी 4 या उससे अधिक मुस्लिम महिलाएं एक साथ हज यात्रा पर जा सकती हैं। इससे पहले कोई भी मुस्लिम महिला मेहरम (पति, पिता या भाई) अर्थात अपने खून के रिश्ते वाले रिश्तेदार के बिना हज पर नहीं जा सकती थी। 

केंद्र सरकार ने हज यात्रा के बारे में नई नीति बनाने के लिए पूर्व सिविल अधिकारी अफजल अमानुल्लाह की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया है। इस छह सदस्यीय हज समिति ने 2018 से 2022 के लिए एक मसौदा तैयार किया है। इसमें कुछ सुझाव दिए गए हैं, जैसे 45 वर्ष की आयु से अधिक महिला को मेहरम के बिना हज यात्रा करने की अनुमति दी जाए और हज सब्सिडी समाप्त की जाए। इन सुझावों को केंद्र सरकार ने स्वीकार कर लिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने मन की बात में इस निर्णय की घोषणा की थी। इससे मुस्लिम महिलाओं में प्रसन्नता की लहर दौड़ गई थी। 
  
केंद्र सरकार की पारदर्शिता के प्रति प्रतिबद्धता एवं किराये में अनुचित बढ़ोतरी रोकने के लिए एयरलाइंस को दिए गए कठोर आदेश से यह सुनिश्चित हुआ है कि हज 2018 के हवाई जहाज के किराये में इस वर्ष उल्लेखनीय कमी आई है।

हज प्रक्रिया को पूरी तरह ऑनलाइन/डिजिटल बनाए जाने से पूरी हज प्रक्रिया पारदर्शी और हज तीर्थयात्रियों के अनुकूल बन गई है। नई हज नीति के अनुसार यात्रियों को देश में बेहतर सुविधाएं दिए जाने पर बल दिया गया है। इसके लिए हज रवानगी स्थलों की संख्या 21 से घटाकर नौ कर दी गई, जिनमें दिल्ली, लखनऊ, कोलकाता, अहमदाबाद, मुंबई, चेन्नई, हैदराबाद, बेंगलुरू और कोच्चि शामिल हैं।

केन्द्र सरकार की नई हज नीति के अच्छे परिणाम सामने आ रहे हैं। अब वे महिलाएं भी हज यात्रा कर सकेंगी, जो अकेली रहती हैं या जिनके परिवार में कोई पुरुष नहीं है।



(डॉ सौरभ मालवीय की पुस्तक- 'विकास के पथ पर भारत' से)

Friday, September 4, 2026

शादी शगुन योजना : लड़कियां खुशहाल होंगी


मुस्लिम समाज में लड़कियों की स्थिति दयनीय है. शिक्षा के मामले में भी उनकी स्थिति अच्छी नहीं है.  गरीबी के कारण भी मुस्लिम लड़कियां अपनी शिक्षा जारी नहीं रख पातीं. किसी भी समाज की समृद्धि के लिए शिक्षा अति आवश्यक है. केन्द्र सरकार मुस्लिम लड़कियों को शिक्षित करना चाहती है, ताकि उनके जीवन स्तर में सुधार हो सके. 

मुस्लिम लड़कियों को उच्च शिक्षा के लिए प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने एक योजना को स्वीकृति दी है. शादी शगुन नामक इस योजना के अंतर्गत सभी ग्रेजुएट मुस्लिम लड़कियों को 51 हजार रुपये तक की आर्थिक सहायता विवाह के उपहार के रूप में प्रदान की जाएगी। यह योजना देश के सभी राज्यों में लागू की गई है। मुस्लिम लड़कियां जो अपनी शादी से पहले किसी भी वर्ग में अपनी ग्रेजुएट स्तर की पढ़ाई पूरी कर लेती हैं, वे इस शादी शगुन योजना का लाभ उठाने के लिए योग्य होंगी। ऐसी मुस्लिम वर्ग की लड़कियां जिन्होंने स्नातक स्तर की परीक्षाएं छोड़ दी हैं। उन्हें भी इस योजना का लाभ नहीं मिल पाएगा।

उल्लेखनीय है कि केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय की अधीनस्थ संस्था ‘मौलाना आजाद एजुकेशन फाउंडेशन’ द्वारा सरकार को शादी शगुन योजना का प्रस्ताव दिया गया था। इस योजना को अल्पसंख्यक मंत्रालय से भी स्वीकृति मिल गई है। इस योजना का उद्देश्य अल्पसंख्यक समूहों में उच्च शिक्षा को प्रोत्साहित करना है। केन्द्र सरकार की यह योजना विशेष रूप से मुस्लिम समुदाय की लड़कियों को उच्च शिक्षा के लिए प्रेरित करने के लिए एक अच्छा कदम है। अल्पसंख्यक समुदायों में से कई लड़कियां अपनी ग्रेजुएट स्तर की पढ़ाई पूरी करने का अवसर प्राप्त नहीं कर पाती हैं और 18 वर्ष की आयु पूरी करने से पहले शादी कर लेती हैं। मुस्लिम लड़कियों की शिक्षा को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने मौलाना आजाद शिक्षा फाउंडेशन की सिफारिश पर शादी शगुन योजना को प्रारंभ करने का निर्णय लिया है।

मुस्लिम लड़कियों में शिक्षा की स्थिति अच्छी नहीं है, लेकिन मौलाना आजाद शिक्षा फाउंडेशन और केंद्र सरकार के इस कदम से इस लक्ष्य को हासिल करने में सहायता मिलेगी। शादी शगुन योजना मौजूदा बेगम हजरत महल छात्रवृत्ति में एक अतिरिक्त लाभ है, जो छह अधिसूचित अल्पसंख्यक समुदायों– मुस्लिम, ईसाई, सिख, बौद्ध, जैन और पारसी से संबंधित छात्रों को दी जाती है।
इस योजना के योग्य होने के लिए मुस्लिम लड़कियों को शादी से पहले अपनी ग्रेजुएशन की शिक्षा पूरी करनी होगी। इस योजना के लिए एक मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय या  कॉलेज से उत्तीर्ण ग्रेजुएट डिग्री आवश्यक है। मौलाना आजाद फाउंडेशन द्वारा वित्त पोषित बेगम हजरत महल छात्रवृत्ति का लाभ लेने वाली लड़कियां भी इस योजना के लिए योग्य हैं। शादी शगुन योजना का लाभ लेने के लिए ऑनलाइन भी आवेदन किया जा सकता है. 

गरीबी के कारण भी मुस्लिम लड़कियां विद्यालय नहीं जा पातीं. जो लड़कियां विद्यालय जाती हैं, उन्हें भी बीच में पढ़ाई छोड़नी पड़ती है. ऐसे में वे चाहकर भी उच्च शिक्षा प्राप्त नहीं कर पातीं. उल्लेखनीय है कि कुछ समय पूर्व अल्पसंख्यक कार्य मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी की अध्यक्षता में हुई मौलाना आजाद शिक्षा फाउंडेशन  की बैठक में लड़कियों को दी जाने वाली छात्रवृत्ति के संदर्भ में कुछ निर्णय किए गए, जिनमें शादी शगुन योजना प्रमुख है। इसके अतिरिक्त यह भी निर्णय लिया गया कि अब नौंवी और दसवीं कक्षा में पढ़ाई करने वाली मुस्लिम बच्चियों को 10 हजार रूपये की राशि प्रदान की जाएगी। अब तक ग्यारहवीं और बारहवीं कक्षा में पढ़ाई करने वाली मुस्लिम लड़कियों को 12 हजार रूपये की छात्रवृत्ति मिल रही थी।

इस योजना से उन समुदायों की लड़कियों में शिक्षा को प्रोत्साहन मिलेगा, जो अब तक शिक्षा से वंचित थीं. इतना ही नहीं, लड़कियों के विवाह के समय उनके माता-पिता को आर्थिक सहायता भी प्राप्त होगी. देश मंा ऐसी योजनाओं की अति आवश्यकता है.


(डॉ सौरभ मालवीय की पुस्तक- 'विकास के पथ पर भारत' से)

बैठक




भोपाल। जन्माष्टमी के पावन अवसर पर विद्या भारती, प्रचार विभाग की केंद्रीय टोली की एक दिवसीय बैठक का आयोजन प्रज्ञादीप, भोपाल में सम्पन्न हुआ।
बैठक में प्रचार-प्रसार की आगामी कार्ययोजना, संगठनात्मक गतिविधियों तथा समसामयिक संचार माध्यमों के प्रभावी उपयोग पर सार्थक चर्चा हुआ। भारतीय संस्कृति, शिक्षा और राष्ट्र निर्माण के संदेश को समाज के व्यापक वर्ग तक पहुंचाने के लिए योजनाओं को और प्रभावी बनाने पर विशेष जोर दिया गया।

सुखद एवं आत्मीय मुलाकात


भोपाल। प्रो. संजय द्विवेदी जी से आत्मीय संवाद का अवसर मिला। वे भारतीय जनसंचार संस्थान, नई दिल्ली के पूर्व महानिदेशक तथा वर्तमान में माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल में वरिष्ठ प्रोफेसर हैं।
पत्रकारिता, जनसंचार और समकालीन मीडिया विषयों पर उनसे हुई सार्थक चर्चा सदैव की तरह सुखद और प्रेरणादायी रही।

Thursday, September 3, 2026

  



श्रीराम मंदिर ट्रस्ट की नवगठित कार्यकारिणी का अभिनंदन
श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के सुचारु संचालन, विकास और व्यवस्थाओं को नई गति देने के लिए गठित श्रीराम मंदिर ट्रस्ट की नयी कार्यकारिणी का हार्दिक अभिनंदन एवं शुभकामनाएँ।
नवनियुक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) का स्वागत है।
प्रभु श्रीराम की पावन नगरी अयोध्या में आपके नेतृत्व में मंदिर की व्यवस्थाएँ और अधिक सुदृढ़ हों तथा रामभक्तों की सेवा का यह पुनीत कार्य निरंतर नई ऊँचाइयों को प्राप्त करे—इसी मंगलकामना के साथ।
भारत की राष्‍ट्रीयता हिंदुत्‍व है