अंगारों पर सिकती मकई
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इन आँखों में भारत बोलता और भारतबोध स्वतः होता है।
मिट्टी की सौंधी खुशबू, जंगल की हरियाली और अंगारों पर सिकती मकई — यह सब
मिलकर लोकजीवन के सहज आनंद को स...
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इन आँखों में भारत बोलता और भारतबोध स्वतः होता है।
मिट्टी की सौंधी खुशबू, जंगल की हरियाली और अंगारों पर सिकती मकई — यह सब मिलकर लोकजीवन के सहज आनंद को साकार कर देते हैं।
यह केवल भोजन नहीं, बल्कि भारतीय ग्राम्य संस्कृति, प्रकृति से जुड़ाव और आत्मिक तृप्ति का उत्सव है।
प्रकृति का सान्निध्य और आत्मीय संग — यही जीवन का वास्तविक सुख है।”
इन देशज स्वादों के पीछे अनेक श्रमशील हाथों का जीवन जुड़ा होता है।
जो लोग इसे अपना रोजगार बनाकर यात्रियों और प्रकृति प्रेमियों तक पहुँचाते हैं, उनसे संवाद करना अपने आप में एक अनुभव है।
उनकी सहजता, अपनापन और जीवन दृष्टि में ही सच्चा भारत दिखाई देता है।
पटनेजी ग्राम, जनपद देवरिया, उत्तर प्रदेश
भारत की आत्मा गांवों में बसती है। गांव केवल रहने का स्थान नहीं होते, बल्कि वे हमारी संस्कृति, परंपरा, आध्यात्मिक चेतना और सभ्यता के जीवंत केंद्र होते हैं। ऐसा ही एक पावन और गौरवशाली ग्राम है — पटनेजी ग्राम, जो उत्तर प्रदेश के देवरिया जनपद में स्थित है। यह ग्राम केवल भौगोलिक पहचान नहीं, बल्कि भारतीय ऋषि परंपरा, तप, साधना और सनातन संस्कृति का जीवंत तीर्थ है।
यह भूमि देवताओं की भूमि कही जाती है। यहां की पवित्रता, प्राकृतिक सौंदर्य और आध्यात्मिक वातावरण प्रत्येक व्यक्ति के मन को श्रद्धा और भक्ति से भर देता है। ग्राम की पहचान प्राचीन ऋषियों की तपस्थली और संतों की साधना भूमि के रूप में रही है। मान्यता है कि महान योगदर्शन के प्रवर्तक ऋषि पतंजलि की तपोभूमि होने के कारण यह क्षेत्र विशेष आध्यात्मिक महत्व रखता है। योग, आयुर्वेद और भारतीय ज्ञान परंपरा की चेतना यहां के वातावरण में आज भी अनुभव की जा सकती है।
पटनेजी ग्राम की पावन धरती मौनी बाबा की साधना स्थली के रूप में भी प्रसिद्ध है। उनकी तपस्या, त्याग और आध्यात्मिक शक्ति ने इस क्षेत्र को दिव्यता से आलोकित किया। इस भूमि पर अद्भुत शांति और आत्मिक ऊर्जा का अनुभव करते हैं। यह स्थान साधकों और श्रद्धालुओं के लिए प्रेरणा का केंद्र बना हुआ है।
ग्राम के समीप बहने वाली पवित्र लीलावती नदी (गंडक) इस क्षेत्र की आध्यात्मिक गरिमा को और अधिक बढ़ाती है। नदी के शांत तट, निर्मल जल और प्राकृतिक वातावरण मन को एक अद्भुत शांति प्रदान करते हैं। इसी पावन तट पर स्थित सोहगरा धाम यहां का प्रमुख तीर्थ स्थल है। सोहगरा धाम श्रद्धा, भक्ति और आस्था का अद्भुत संगम है, जहां दूर-दूर से श्रद्धालु दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए आते हैं। यहां का वातावरण भक्तों को आध्यात्मिक अनुभूति और दिव्यता से भर देता है।
पटनेजी ग्राम भारतीय संस्कृति और सनातन मूल्यों का संरक्षक भी है। यहां के लोकजीवन में आज भी भारतीय परंपराओं, संस्कारों और सामाजिक समरसता की झलक स्पष्ट दिखाई देती है। ग्राम के त्योहार, धार्मिक अनुष्ठान, लोकगीत और सामूहिक परंपराएं हमारी सांस्कृतिक धरोहर को जीवित रखे हुए हैं। यहां के लोग सरलता, श्रद्धा, सेवा और अपनत्व की भावना से ओतप्रोत हैं।
आज जब आधुनिकता की दौड़ में गांवों की पहचान बदल रही है, तब पटनेजी ग्राम अपनी आध्यात्मिक विरासत और सांस्कृतिक मूल्यों को संजोए हुए नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का कार्य कर रहा है। यह ग्राम हमें यह संदेश देता है कि भारतीय संस्कृति की वास्तविक शक्ति गांवों की पवित्र चेतना और ऋषि परंपरा में निहित है।
पटनेजी ग्राम केवल मेरा जन्मस्थान नहीं, बल्कि मेरी आस्था, मेरी संस्कृति और मेरा गौरव है। यह मेरे लिए तीर्थ के समान पवित्र है। यहां की मिट्टी, यहां की नदी, यहां के मंदिर और यहां की आध्यात्मिक ऊर्जा मेरे जीवन को प्रेरणा और संस्कार प्रदान करते हैं।
सरस्वती बालिका विद्यालय, सूर्यकुंड, गोरखपुर में आयोजित चार दिवसीय प्रांतीय बालिका शिक्षा कार्यशाला का समापन सत्र माँ सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन, पुष्पार्चन एवं सरस्वती वंदना के साथ सम्पन्न हुआ।
इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में विद्या भारती पूर्वी उत्तर प्रदेश के मंत्री एवं अखिल भारतीय सह-प्रभारी, प्रचार विभाग प्रोफेसर सौरभ मालवीय तथा क्षेत्रीय बालिका शिक्षा प्रभारी श्री उमाशंकर जी उपस्थित रहे।
डॉ.सौरभ मालवीय ने कहा कि भारतीय शिक्षा व्यवस्था का मूल उद्देश्य संबंध मूल्यों एवं जीवन मूल्यों की स्थापना करते हुए नारी को पूज्य भाव प्रदान करना है। भारतीय जीवन शिक्षा पद्धति के माध्यम से बालिकाओं में संस्कारों का संवर्धन कर श्रेष्ठ, सशक्त एवं प्रबल भारत की संकल्पना को साकार किया जा सकता है.
🌸 संस्कारयुक्त बालिका शिक्षा ही सशक्त राष्ट्र निर्माण का आधार है।
प्रिय सुमन मालवीय!
वैवाहिक जीवन के 19 सफल, सुखमय और प्रेमपूर्ण वर्षों की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ।
ईश्वर से प्रार्थना है कि दाम्पत्य जीवन सदैव प्रेम, विश्वास, सम्मान और मधुरता से परिपूर्ण रहे। जीवन के हर पड़ाव पर खुशियों, समृद्धि और सौहार्द का प्रतीक बना रहे।
“स्नेह, समर्पण और विश्वास से सजा यह पावन बंधन
हर वर्ष और अधिक मजबूत एवं अमृतमय होता रहे।”
वैवाहिक वर्षगाँठ की हार्दिक शुभकामनाएँ। 🌹💐
आप सभी का स्नेह-प्यार सदैव बना रहें
आज लखनऊ विश्वविद्यालय लखनऊ (उत्तर प्रदेश) के पत्रकारिता एवम जनसंचार विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर, विभागाध्यक्ष (HOD),मंत्री विद्या भारती (पूर्वी उत्तर प्रदेश) एवम राजनीतिक विश्लेशक प्रोफेसर डॉक्टर श्री सौरभ मालवीय जी से सौभाग्यवश मिलने का शुभ अवसर प्राप्त हुआ.
इस अवसर पर प्रोफेसर साहब ने स्वलिखित पुस्तक 'भारतीय संत परंपरा: धर्मदीप से राष्ट्रदीप' पुस्तक उपहार स्वरूप भेंट की एवम विभिन्न विषयों पर प्रेरक सुझाव देकर उत्साहवर्धन तथा मार्गदर्शन प्रदान किया
आपके व्यक्तित्व एवं सरल स्वभाव तथा विद्वता से हम अत्यंत प्रभावित हैं .
लखनऊ। विद्या भारती पूर्वी उत्तर प्रदेश की क्षेत्रीय सम्पर्क टोली की बैठक दिनांक 11 मई 2026 को अखिल भारतीय शिक्षा शोध संस्थान में सफलतापूर्वक सम्पन्न हुई।
इस अवसर पर विद्या भारती पूर्वी उत्तर प्रदेश के क्षेत्रीय मंत्री डॉ. सौरभ मालवीय जी के मार्गदर्शन में “सम्पर्क विभाग” को निरंतर चलने वाली सशक्त प्रक्रिया के रूप में आगे बढ़ाने का प्रेरक संदेश प्राप्त हुआ। 🌿
यह बैठक संगठन, समाज और राष्ट्र के प्रति उत्तरदायित्व को और अधिक सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम रही।
Sunday, May 17, 2026
अंगारों पर सिकती मकई
इन आँखों में भारत बोलता और भारतबोध स्वतः होता है।
मिट्टी की सौंधी खुशबू, जंगल की हरियाली और अंगारों पर सिकती मकई — यह सब मिलकर लोकजीवन के सहज आनंद को साकार कर देते हैं।
यह केवल भोजन नहीं, बल्कि भारतीय ग्राम्य संस्कृति, प्रकृति से जुड़ाव और आत्मिक तृप्ति का उत्सव है।
प्रकृति का सान्निध्य और आत्मीय संग — यही जीवन का वास्तविक सुख है।”
इन देशज स्वादों के पीछे अनेक श्रमशील हाथों का जीवन जुड़ा होता है।
जो लोग इसे अपना रोजगार बनाकर यात्रियों और प्रकृति प्रेमियों तक पहुँचाते हैं, उनसे संवाद करना अपने आप में एक अनुभव है।
उनकी सहजता, अपनापन और जीवन दृष्टि में ही सच्चा भारत दिखाई देता है।
लेबल:
चित्र पेटिका से,
यात्रा संस्मरण
मेरा गांव — मेरा तीर्थ
पटनेजी ग्राम, जनपद देवरिया, उत्तर प्रदेश
भारत की आत्मा गांवों में बसती है। गांव केवल रहने का स्थान नहीं होते, बल्कि वे हमारी संस्कृति, परंपरा, आध्यात्मिक चेतना और सभ्यता के जीवंत केंद्र होते हैं। ऐसा ही एक पावन और गौरवशाली ग्राम है — पटनेजी ग्राम, जो उत्तर प्रदेश के देवरिया जनपद में स्थित है। यह ग्राम केवल भौगोलिक पहचान नहीं, बल्कि भारतीय ऋषि परंपरा, तप, साधना और सनातन संस्कृति का जीवंत तीर्थ है।
यह भूमि देवताओं की भूमि कही जाती है। यहां की पवित्रता, प्राकृतिक सौंदर्य और आध्यात्मिक वातावरण प्रत्येक व्यक्ति के मन को श्रद्धा और भक्ति से भर देता है। ग्राम की पहचान प्राचीन ऋषियों की तपस्थली और संतों की साधना भूमि के रूप में रही है। मान्यता है कि महान योगदर्शन के प्रवर्तक ऋषि पतंजलि की तपोभूमि होने के कारण यह क्षेत्र विशेष आध्यात्मिक महत्व रखता है। योग, आयुर्वेद और भारतीय ज्ञान परंपरा की चेतना यहां के वातावरण में आज भी अनुभव की जा सकती है।
पटनेजी ग्राम की पावन धरती मौनी बाबा की साधना स्थली के रूप में भी प्रसिद्ध है। उनकी तपस्या, त्याग और आध्यात्मिक शक्ति ने इस क्षेत्र को दिव्यता से आलोकित किया। इस भूमि पर अद्भुत शांति और आत्मिक ऊर्जा का अनुभव करते हैं। यह स्थान साधकों और श्रद्धालुओं के लिए प्रेरणा का केंद्र बना हुआ है।
ग्राम के समीप बहने वाली पवित्र लीलावती नदी (गंडक) इस क्षेत्र की आध्यात्मिक गरिमा को और अधिक बढ़ाती है। नदी के शांत तट, निर्मल जल और प्राकृतिक वातावरण मन को एक अद्भुत शांति प्रदान करते हैं। इसी पावन तट पर स्थित सोहगरा धाम यहां का प्रमुख तीर्थ स्थल है। सोहगरा धाम श्रद्धा, भक्ति और आस्था का अद्भुत संगम है, जहां दूर-दूर से श्रद्धालु दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए आते हैं। यहां का वातावरण भक्तों को आध्यात्मिक अनुभूति और दिव्यता से भर देता है।
पटनेजी ग्राम भारतीय संस्कृति और सनातन मूल्यों का संरक्षक भी है। यहां के लोकजीवन में आज भी भारतीय परंपराओं, संस्कारों और सामाजिक समरसता की झलक स्पष्ट दिखाई देती है। ग्राम के त्योहार, धार्मिक अनुष्ठान, लोकगीत और सामूहिक परंपराएं हमारी सांस्कृतिक धरोहर को जीवित रखे हुए हैं। यहां के लोग सरलता, श्रद्धा, सेवा और अपनत्व की भावना से ओतप्रोत हैं।
आज जब आधुनिकता की दौड़ में गांवों की पहचान बदल रही है, तब पटनेजी ग्राम अपनी आध्यात्मिक विरासत और सांस्कृतिक मूल्यों को संजोए हुए नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का कार्य कर रहा है। यह ग्राम हमें यह संदेश देता है कि भारतीय संस्कृति की वास्तविक शक्ति गांवों की पवित्र चेतना और ऋषि परंपरा में निहित है।
पटनेजी ग्राम केवल मेरा जन्मस्थान नहीं, बल्कि मेरी आस्था, मेरी संस्कृति और मेरा गौरव है। यह मेरे लिए तीर्थ के समान पवित्र है। यहां की मिट्टी, यहां की नदी, यहां के मंदिर और यहां की आध्यात्मिक ऊर्जा मेरे जीवन को प्रेरणा और संस्कार प्रदान करते हैं।
Saturday, May 16, 2026
भारतीय बालिका शिक्षा ज्ञान परंपरा, संबंध मूल्य एवं जीवन मूल्यों पर आधारित है
सरस्वती बालिका विद्यालय, सूर्यकुंड, गोरखपुर में आयोजित चार दिवसीय प्रांतीय बालिका शिक्षा कार्यशाला का समापन सत्र माँ सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन, पुष्पार्चन एवं सरस्वती वंदना के साथ सम्पन्न हुआ।
इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में विद्या भारती पूर्वी उत्तर प्रदेश के मंत्री एवं अखिल भारतीय सह-प्रभारी, प्रचार विभाग प्रोफेसर सौरभ मालवीय तथा क्षेत्रीय बालिका शिक्षा प्रभारी श्री उमाशंकर जी उपस्थित रहे।
डॉ.सौरभ मालवीय ने कहा कि भारतीय शिक्षा व्यवस्था का मूल उद्देश्य संबंध मूल्यों एवं जीवन मूल्यों की स्थापना करते हुए नारी को पूज्य भाव प्रदान करना है। भारतीय जीवन शिक्षा पद्धति के माध्यम से बालिकाओं में संस्कारों का संवर्धन कर श्रेष्ठ, सशक्त एवं प्रबल भारत की संकल्पना को साकार किया जा सकता है.
🌸 संस्कारयुक्त बालिका शिक्षा ही सशक्त राष्ट्र निर्माण का आधार है।
लेबल:
चित्र पेटिका से,
विद्या भारती
Friday, May 15, 2026
Wednesday, May 13, 2026
वैवाहिक जीवन के 19 वर्ष
प्रिय सुमन मालवीय!
वैवाहिक जीवन के 19 सफल, सुखमय और प्रेमपूर्ण वर्षों की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ।
ईश्वर से प्रार्थना है कि दाम्पत्य जीवन सदैव प्रेम, विश्वास, सम्मान और मधुरता से परिपूर्ण रहे। जीवन के हर पड़ाव पर खुशियों, समृद्धि और सौहार्द का प्रतीक बना रहे।
“स्नेह, समर्पण और विश्वास से सजा यह पावन बंधन
हर वर्ष और अधिक मजबूत एवं अमृतमय होता रहे।”
वैवाहिक वर्षगाँठ की हार्दिक शुभकामनाएँ। 🌹💐
आप सभी का स्नेह-प्यार सदैव बना रहें
पुस्तक भेंट
आज लखनऊ विश्वविद्यालय लखनऊ (उत्तर प्रदेश) के पत्रकारिता एवम जनसंचार विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर, विभागाध्यक्ष (HOD),मंत्री विद्या भारती (पूर्वी उत्तर प्रदेश) एवम राजनीतिक विश्लेशक प्रोफेसर डॉक्टर श्री सौरभ मालवीय जी से सौभाग्यवश मिलने का शुभ अवसर प्राप्त हुआ.
इस अवसर पर प्रोफेसर साहब ने स्वलिखित पुस्तक 'भारतीय संत परंपरा: धर्मदीप से राष्ट्रदीप' पुस्तक उपहार स्वरूप भेंट की एवम विभिन्न विषयों पर प्रेरक सुझाव देकर उत्साहवर्धन तथा मार्गदर्शन प्रदान किया
आपके व्यक्तित्व एवं सरल स्वभाव तथा विद्वता से हम अत्यंत प्रभावित हैं .
-ज्ञान प्रकाश सैनी
Tuesday, May 12, 2026
सम्पर्क से सशक्त संगठन – विद्या भारती का सतत प्रयास
लखनऊ। विद्या भारती पूर्वी उत्तर प्रदेश की क्षेत्रीय सम्पर्क टोली की बैठक दिनांक 11 मई 2026 को अखिल भारतीय शिक्षा शोध संस्थान में सफलतापूर्वक सम्पन्न हुई।
इस अवसर पर विद्या भारती पूर्वी उत्तर प्रदेश के क्षेत्रीय मंत्री डॉ. सौरभ मालवीय जी के मार्गदर्शन में “सम्पर्क विभाग” को निरंतर चलने वाली सशक्त प्रक्रिया के रूप में आगे बढ़ाने का प्रेरक संदेश प्राप्त हुआ। 🌿
यह बैठक संगठन, समाज और राष्ट्र के प्रति उत्तरदायित्व को और अधिक सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम रही।
मेरे प्रेरणास्रोत: स्वामी विवेकानंद
गिरकर उठना, उठकर चलना... यह क्रम है संसार का... कर्मवीर को फ़र्क़ न पड़ता किसी जीत और हार का... क्योंकि संघर्षों में पला-बढ़ा... संघर्ष ही मेरा जीवन है...
-डॉ. सौरभ मालवीय
डॉ. सौरभ मालवीय
अपनी बात
सामाजिक परिवर्तन और राष्ट्र-निर्माण की तीव्र आकांक्षा के कारण छात्र जीवन से ही सामाजिक सक्रियता। बिना दर्शन के ही मैं चाणक्य और डॉ. हेडगेवार से प्रभावित हूं। समाज और राष्ट्र को समझने के लिए "सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और मीडिया" विषय पर शोध पूर्ण किया है, परंतु सृष्टि रहस्यों के प्रति मेरी आकांक्षा प्रारंभ से ही है।
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उत्तर प्रदेश सूचना एवं जनसंपर्क विभाग की पत्रिका 'उत्तर प्रदेश संदेश' में प्रकाशित मेरा लेख
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लखनऊ। विद्या भारती पूर्वी उत्तर प्रदेश की क्षेत्रीय सम्पर्क टोली की बैठक दिनांक 11 मई 2026 को अखिल भारतीय शिक्षा शोध संस्थान में सफलतापूर्वक...
संप्रति
डॉ. सौरभ मालवीय
2/564, अवधपुरी खण्ड 2
खरगापुर, निकट प्राथमिक विद्यालय, गोमतीनगर विस्तार
2/564, अवधपुरी खण्ड 2
खरगापुर, निकट प्राथमिक विद्यालय, गोमतीनगर विस्तार
लखनऊ, उत्तर प्रदेश
पिन- 226010
मो- 8750820740
पिन- 226010
मो- 8750820740
ईमेल - malviya.sourabh@gmail.com
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डॉ. सौरभ मालवीय
एसोसिएट प्रोफेसर
पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग
लखनऊ विश्वविद्यालय
लखनऊ, उत्तर प्रदेश
मो- 8750820740
ईमेल - malviya.sourabh@gmail.com
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नमो-नमो.....आंखों ने जो देखा ! - अपन गांधी, लोहिया और दीनदयाल उपाध्याय को आदर्श राजनेता मानकर राजनीति में सक्रिय हैं। सादगी, शुचिता, विनम्रता, अध्ययनशीलता...ये सब गुण ऐसे हैं, जो ज्यादा आ...12 years ago











































