Thursday, June 18, 2026

मां और मातृभूमि की पवित्र भावना ही विद्या भारती का संस्कार है : डॉ. सौरभ मालवीय










भेंटुआ (अमेठी)। विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान से सम्बद्ध काशी प्रांत द्वारा आयोजित शिशु वाटिका प्रशिक्षण वर्ग एवं नव चयनित प्रशिक्षण वर्ग का समापन सत्र गुरुवार को सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम का शुभारम्भ क्षेत्रीय मंत्री डॉ. सौरभ मालवीय, सह क्षेत्रीय मंत्री अनुग्रह नारायण मिश्र तथा प्रदेश निरीक्षक राजबहादुर दीक्षित द्वारा मां सरस्वती एवं भारत माता के चित्र पर दीप प्रज्ज्वलन एवं पुष्पार्चन के साथ किया गया। अतिथियों का स्वागत अंगवस्त्र एवं श्रीफल भेंट कर किया गया।

कार्यक्रम में अतिथि परिचय पुष्पांजलि दीदी, वृत्त निवेदन मीरा पाठक, एकल गीत निशा दीदी तथा अनुभव कथन ज्योति सिंह द्वारा प्रस्तुत किया गया। प्रशिक्षण वर्ग में विद्या भारती के अनेक अधिकारी एवं शिक्षाविदों का मार्गदर्शन प्राप्त हुआ। शिशु वाटिका वर्ग में 74 बहनों तथा नव चयनित प्रशिक्षण वर्ग में 46 भैया-बहनों ने प्रशिक्षण प्राप्त किया। प्रशिक्षण उपरांत आयोजित परीक्षा में पूनम सिंह ने प्रथम, भरत शर्मा ने द्वितीय तथा दीक्षा राय ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। सभी प्रतिभागियों को सम्मानित किया गया।

अपने उद्बोधन में डॉ. सौरभ मालवीय ने कहा कि विद्या भारती का मूल संस्कार मां और मातृभूमि के प्रति श्रद्धा एवं समर्पण की भावना है। उन्होंने कहा कि शिशु जन्म के बाद सबसे पहले अनुभूति के स्तर पर मां को पहचानता है और उसके मुख से निकलने वाला पहला शब्द भी ‘मां’ ही होता है। यही भाव आगे चलकर परिवार, समाज और राष्ट्र के प्रति समर्पण का आधार बनता है।

उन्होंने कहा कि भारत को ज्ञान, परोपकार और प्रकाश का प्रतीक माना गया है। हमारी संस्कृति “वसुधैव कुटुम्बकम्” की भावना से सम्पूर्ण विश्व को परिवार मानती है। भारत की पहचान सत्य, शिव और सुंदर के रूप में है। यहां अतिथि को देवतुल्य माना जाता है तथा माता-पिता के सम्मान को सर्वोच्च स्थान दिया जाता है।
डॉ. मालवीय ने 
“अपि स्वर्णमयी लंका न मे लक्ष्मण रोचते।
जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी॥”
का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत ही वह देश है जहां मातृभूमि को मां के रूप में पूजने की परंपरा है। उन्होंने कहा कि शिक्षा सबसे बड़ी सेवा है और राष्ट्र निर्माण का सबसे प्रभावी माध्यम भी।
सह क्षेत्रीय मंत्री अनुग्रह नारायण मिश्र ने प्रशिक्षण वर्ग के सफल आयोजन हेतु सभी क्षेत्रीय एवं प्रांतीय अधिकारियों, पूर्णकालिक कार्यकर्ताओं, प्रधानाचार्यों, प्रदेश प्रचार प्रमुख संतोष मिश्र, व्यवस्था, भोजन, स्वच्छता, प्रकाश एवं अन्य व्यवस्थाओं में लगे सभी कार्यकर्ताओं और कर्मचारियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम का समापन वंदे मातरम् के सस्वर गायन के साथ हुआ।
भारत माता की जय।
18 जून 2026

Wednesday, June 17, 2026

जन्मदिन क़ी हार्दिक शुभकामनाएं बेटी सृष्टि


 जन्मदिन क़ी हार्दिक शुभकामनाएं बेटी सृष्टि!!
आप सभी का आशीर्वाद मिले सृष्टि को

Tuesday, June 16, 2026

टीवी पर लाइव




"श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से जुड़े प्रकरण में सरकार ने ट्रस्ट के आग्रह पर त्वरित रूप से एसआईटी (विशेष जांच दल) का गठन कर जांच प्रारंभ कर दी है। करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था और विश्वास सर्वोपरि हैं। सार्वजनिक जीवन में पारदर्शिता, सुचिता और उत्तरदायित्व बनाए रखना सरकार तथा ट्रस्ट दोनों का दायित्व है। जांच के माध्यम से तथ्यों को सामने लाना और जनविश्वास को सुदृढ़ बनाए रखना आवश्यक है।"

टीवी पर लाइव

  




उत्तर प्रदेश सरकार ने आरोप सामने आने के बाद विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है। यदि किसी स्तर पर अनियमितता हुई है तो उसकी जांच कर दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी
 श्री राम भक्तों की आस्था सर्वोपरि है, आरोपों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, दोषी कोई भी हो उसे बख्शा नहीं जाएगा, लेकिन जांच पूरी होने से पहले राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से बचना चाहिए।

Sunday, June 14, 2026

समाचार पत्रों में

  





Saturday, June 13, 2026

मातृ शक्ति ही राष्ट्र शक्ति : डॉ. सौरभ मालवीय
















उन्नाव - बालिका शिक्षा एवं शिशु वाटिका प्रशिक्षण वर्ग का समापन संपन्न
दिनांक 13 जून 2026 को भारतीय शिक्षा समिति द्वारा आयोजित बालिका शिक्षा प्रशिक्षण वर्ग के पंचम दिवस का कार्यक्रम सरस्वती पूजन एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ प्रारंभ हुआ। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता डॉ. सौरभ मालवीय, प्रदेश निरीक्षक श्री रामजी सिंह जी तथा भारतीय शिक्षा समिति के अध्यक्ष श्री हरेन्द्र श्रीवास्तव जी मंचासीन रहे। अतिथियों का परिचय एवं सम्मान विद्यालय के प्रधानाचार्य श्री श्रवण कुमार सिंह जी द्वारा किया गया।
पाँच दिनों से संचालित बालिका शिक्षा प्रशिक्षण वर्ग तथा दस दिनों से चल रहे शिशु वाटिका प्रशिक्षण वर्ग का आज विधिवत समापन हुआ। इस अवसर पर अपने उद्बोधन में डॉ. सौरभ मालवीय ने कहा कि भारत के जीवन-दर्शन का मूल आधार लोककल्याण और परोपकार है। वेदों की रचनाएँ प्रकृति के सर्वाधिक निकट हैं तथा भारतीय संस्कृति संपूर्ण मानवता के कल्याण का मार्ग प्रशस्त करती है।
उन्होंने कहा कि “मातृ शक्ति ही राष्ट्र शक्ति है।” बालिका शिक्षा का उद्देश्य केवल ज्ञान प्रदान करना नहीं, बल्कि संस्कारवान, सक्षम और समाजोपयोगी व्यक्तित्व का निर्माण करना है। भारत पुनः विश्वगुरु बनने की दिशा में अग्रसर है और उसके आध्यात्मिक मूल्यों ने ही उसे युगों-युगों तक अक्षुण्ण बनाए रखा है। शिक्षित, संस्कारित एवं आत्मविश्वासी बालिकाएँ भविष्य में राष्ट्र निर्माण और भारत के उत्थान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएँगी।
डॉ. मालवीय ने कहा कि मातृभूमि के प्रति प्रेम, समर्पण एवं राष्ट्रीय चेतना का विकास विद्या भारती की शिक्षा पद्धति का प्रमुख उद्देश्य है। ऐसी शिक्षा ही समाज और राष्ट्र को सशक्त बनाने का कार्य करती है।

तत्व ज्ञान

  


जो स्वयं को जान लेता है, वह संसार को भी सही दृष्टि से देख पाता है और जो स्वयं में स्थित हो जाता है, वही जीवन के यथार्थ को प्राप्त करता है।
भारत की राष्‍ट्रीयता हिंदुत्‍व है