Sunday, April 12, 2026

हिंदी पत्रकारिता ने ही स्वाभिमान का भाव जगाया : प्रो. सौरभ मालवीय









वाराणसी, बीएचयू।
काशी हिंदू विश्वविद्यालय में आयोजित “हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्ष : ऐतिहासिकता, परिवर्तन और चुनौतियां” विषयक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के द्वितीय दिवस के प्रथम सत्र में लखनऊ विश्वविद्यालय के पत्रकारिता विभागाध्यक्ष प्रो. सौरभ मालवीय मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
अपने संबोधन की शुरुआत उन्होंने बाबा काशी विश्वनाथ और महामना पंडित मदन मोहन मालवीय को नमन करते हुए कहा कि हिंदी पत्रकारिता ने ही हमारे भीतर स्वाभिमान का भाव उत्पन्न किया है। जो समाज अपनी सभ्यता और संस्कृति से कट जाता है, वह अंततः नष्ट हो जाता है। उन्होंने युवाओं को प्रेरित करते हुए कहा कि जिस देश की युवा पीढ़ी अपनी संस्कृति पर गर्व करती है, वह देश कभी अस्थिर या कमजोर नहीं हो सकता।
हिंदी पत्रकारिता की ऐतिहासिक भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इसने भारत को समृद्ध बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। महात्मा गांधी, बाल गंगाधर तिलक, महामना मालवीय, गणेश शंकर विद्यार्थी, विष्णु पराड़कर और भारतेंदु हरिश्चंद्र जैसे महान पत्रकारों और विचारकों ने पत्रकारिता के माध्यम से जनजागरण किया और स्वतंत्रता आंदोलन को जन आंदोलन में परिवर्तित कर दिया। स्वतंत्रता आंदोलन का सबसे बड़ा हथियार हिंदी पत्रकारिता थी, जिसने समाज के सभी वर्गों में चेतना जागृत कर कुप्रथाओं के खिलाफ आवाज उठाई और देश को स्वतंत्रता के लिए तैयार किया।
काशी की पत्रकारिता परंपरा का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि पत्रकारिता का काशी घराना हमेशा से समृद्ध और प्रभावशाली रहा है। भारतीय चिंतन की विशेषता को रेखांकित करते हुए कहा कि “जहां सत्य है, सुंदर है, वहीं भारत है।” उन्होंने ‘राम राज्य’ की अवधारणा का जिक्र करते हुए कहा कि सभी को साथ लेकर चलने की भावना भारत की पहचान है।
वर्तमान पत्रकारिता पर टिप्पणी करते हुए कहा कि आज भारत में दो प्रकार की पत्रकारिता देखने को मिल रही है, एक ‘भारत’ की पत्रकारिता और दूसरी ‘इंडिया’ की पत्रकारिता। उन्होंने इसे दृष्टिकोण और विचारधारा के स्तर पर उभरती हुई दो अलग धाराएं बताया।

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