'श्रेष्ठ भारत : आत्मबोध से राष्ट्रबोध' का अवलोकन
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मेरे द्वारा लिखित पुस्तक ‘श्रेष्ठ भारत : आत्मबोध से राष्ट्रबोध’ का उत्तर
प्रदेश सरकार के माननीय कैबिनेट मंत्री श्री स्वतंत्रदेव सिंह जी द्वारा
आत्मीय...
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डॉ. सौरभ मालवीय
झांसी,सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज, चिरगांव में आज दिनांक 23 मई 2026 से भारतीय शिक्षा समिति कानपुर प्रांत द्वारा नव चयनित आचार्य प्रशिक्षण वर्ग का शुभारंभ हुआ, जो 6 जून 2026 तक चलेगा। इस प्रशिक्षण वर्ग में कानपुर प्रांत के विभिन्न शिशु मंदिर एवं विद्या मंदिरों के लगभग 60 आचार्य एवं आचार्याएं सहभाग कर रहे हैं।
उद्घाटन सत्र में लखनऊ विश्वविद्यालय के पत्रकारिता विभागाध्यक्ष डॉ. सौरभ मालवीय का प्रेरक पाथेय प्राप्त हुआ। डॉ. मालवीय क्षेत्रीय विद्या भारती पूर्वी उत्तर प्रदेश के मंत्री तथा अखिल भारतीय प्रचार विभाग के सह-प्रभारी हैं।
कार्यक्रम की अध्यक्षता सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज, चिरगांव के प्रबंधक एवं रसायन विज्ञान के प्रवक्ता श्री राजेंद्र सिंह ने की। प्रस्ताविकी भारतीय शिक्षा समिति कानपुर प्रांत के प्रांत संगठन मंत्री श्री रजनीश जी ने प्रस्तुत की। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि 15 दिवसीय यह प्रशिक्षण वर्ग आचार्य एवं आचार्याओं को विद्या भारती का कुशल एवं समर्पित कार्यकर्ता बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
अपने उद्बोधन में डॉ. सौरभ मालवीय ने कहा कि “भारत” शब्द सुनते ही सुंदरता, श्रेष्ठता, पवित्रता, प्रकाश और प्रभाव का भाव मन में जागृत हो जाता है। इसी कारण हम भारत को माता के रूप में संबोधित करते हैं। उन्होंने कहा कि विश्व के संघर्षपूर्ण वातावरण में भारत शांति और संतोष का पर्याय है। इस स्वरूप को अक्षुण्ण बनाए रखने के लिए भारतीय ज्ञान परंपरा को आत्मसात करना आवश्यक है, जो प्राचीन वैज्ञानिक धरोहर और आधुनिक चरित्र निर्माण का अद्वितीय संगम है।
उन्होंने कहा कि स्वार्थ की बढ़ती प्रवृत्ति ने भारत को भी प्रभावित किया है, जिससे हमारी सांस्कृतिक श्रेष्ठता पर प्रभाव पड़ा है। इसी पीड़ा ने हमें शिक्षक बनने की प्रेरणा दी है। किसी भी राष्ट्र और समाज के निर्माण में शिक्षा की अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इसके लिए विद्या भारती के आलोक में भारतीय ज्ञान परंपरा को समझना आवश्यक है।
डॉ. मालवीय ने श्रवण कुमार की कथा और भगवान श्रीराम के जीवन प्रसंगों को भारतीय जीवन मूल्यों का प्रतीक बताते हुए कहा कि श्रीराम सम्राट होते हुए भी वनवासी बन जाते हैं। यही त्याग, मर्यादा और कर्तव्यबोध भारतीय ज्ञान परंपरा की आत्मा है। इसी परंपरा ने संघर्षों के बीच भी भारत को अपनी संस्कृति से विचलित नहीं होने दिया।
उन्होंने विद्या भारती के व्यापक मिशन पर प्रकाश डालते हुए “सा विद्या या विमुक्तये” की व्याख्या की तथा कहा कि आचार्य के पास अनेक कार्य दिखाई देते हैं, किंतु मूल रूप से उसका एक ही उद्देश्य है — आदर्श आचार्य बनना। इसके लिए आधुनिकता, ज्ञान और तकनीक से युक्त होना आवश्यक है। साथ ही उत्तम आचरण आचार्य जीवन की सबसे अमूल्य धरोहर है।
कार्यक्रम में अतिथियों का परिचय विद्यालय के प्रधानाचार्य श्री आनंद जी ने कराया तथा मंच संचालन सरस्वती विद्या मंदिर, खागा के प्रधानाचार्य श्री गजेंद्र सिंह ने किया। इस अवसर पर संकुल प्रमुख एवं प्रधानाचार्य श्री छत्रसाल स्वर्णकार जी सहित विभिन्न विद्यालयों के प्रधानाचार्य, विद्यालय समिति के पदाधिकारी तथा प्रांत के पदाधिकारी उपस्थित रहे।
Saturday, May 23, 2026
भारत केंद्रित शिक्षा व्यवस्था : विद्या भारती का उद्देश्य
डॉ. सौरभ मालवीय
झांसी,सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज, चिरगांव में आज दिनांक 23 मई 2026 से भारतीय शिक्षा समिति कानपुर प्रांत द्वारा नव चयनित आचार्य प्रशिक्षण वर्ग का शुभारंभ हुआ, जो 6 जून 2026 तक चलेगा। इस प्रशिक्षण वर्ग में कानपुर प्रांत के विभिन्न शिशु मंदिर एवं विद्या मंदिरों के लगभग 60 आचार्य एवं आचार्याएं सहभाग कर रहे हैं।
उद्घाटन सत्र में लखनऊ विश्वविद्यालय के पत्रकारिता विभागाध्यक्ष डॉ. सौरभ मालवीय का प्रेरक पाथेय प्राप्त हुआ। डॉ. मालवीय क्षेत्रीय विद्या भारती पूर्वी उत्तर प्रदेश के मंत्री तथा अखिल भारतीय प्रचार विभाग के सह-प्रभारी हैं।
कार्यक्रम की अध्यक्षता सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज, चिरगांव के प्रबंधक एवं रसायन विज्ञान के प्रवक्ता श्री राजेंद्र सिंह ने की। प्रस्ताविकी भारतीय शिक्षा समिति कानपुर प्रांत के प्रांत संगठन मंत्री श्री रजनीश जी ने प्रस्तुत की। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि 15 दिवसीय यह प्रशिक्षण वर्ग आचार्य एवं आचार्याओं को विद्या भारती का कुशल एवं समर्पित कार्यकर्ता बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
अपने उद्बोधन में डॉ. सौरभ मालवीय ने कहा कि “भारत” शब्द सुनते ही सुंदरता, श्रेष्ठता, पवित्रता, प्रकाश और प्रभाव का भाव मन में जागृत हो जाता है। इसी कारण हम भारत को माता के रूप में संबोधित करते हैं। उन्होंने कहा कि विश्व के संघर्षपूर्ण वातावरण में भारत शांति और संतोष का पर्याय है। इस स्वरूप को अक्षुण्ण बनाए रखने के लिए भारतीय ज्ञान परंपरा को आत्मसात करना आवश्यक है, जो प्राचीन वैज्ञानिक धरोहर और आधुनिक चरित्र निर्माण का अद्वितीय संगम है।
उन्होंने कहा कि स्वार्थ की बढ़ती प्रवृत्ति ने भारत को भी प्रभावित किया है, जिससे हमारी सांस्कृतिक श्रेष्ठता पर प्रभाव पड़ा है। इसी पीड़ा ने हमें शिक्षक बनने की प्रेरणा दी है। किसी भी राष्ट्र और समाज के निर्माण में शिक्षा की अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इसके लिए विद्या भारती के आलोक में भारतीय ज्ञान परंपरा को समझना आवश्यक है।
डॉ. मालवीय ने श्रवण कुमार की कथा और भगवान श्रीराम के जीवन प्रसंगों को भारतीय जीवन मूल्यों का प्रतीक बताते हुए कहा कि श्रीराम सम्राट होते हुए भी वनवासी बन जाते हैं। यही त्याग, मर्यादा और कर्तव्यबोध भारतीय ज्ञान परंपरा की आत्मा है। इसी परंपरा ने संघर्षों के बीच भी भारत को अपनी संस्कृति से विचलित नहीं होने दिया।
उन्होंने विद्या भारती के व्यापक मिशन पर प्रकाश डालते हुए “सा विद्या या विमुक्तये” की व्याख्या की तथा कहा कि आचार्य के पास अनेक कार्य दिखाई देते हैं, किंतु मूल रूप से उसका एक ही उद्देश्य है — आदर्श आचार्य बनना। इसके लिए आधुनिकता, ज्ञान और तकनीक से युक्त होना आवश्यक है। साथ ही उत्तम आचरण आचार्य जीवन की सबसे अमूल्य धरोहर है।
कार्यक्रम में अतिथियों का परिचय विद्यालय के प्रधानाचार्य श्री आनंद जी ने कराया तथा मंच संचालन सरस्वती विद्या मंदिर, खागा के प्रधानाचार्य श्री गजेंद्र सिंह ने किया। इस अवसर पर संकुल प्रमुख एवं प्रधानाचार्य श्री छत्रसाल स्वर्णकार जी सहित विभिन्न विद्यालयों के प्रधानाचार्य, विद्यालय समिति के पदाधिकारी तथा प्रांत के पदाधिकारी उपस्थित रहे।
मेरे प्रेरणास्रोत: स्वामी विवेकानंद
गिरकर उठना, उठकर चलना... यह क्रम है संसार का... कर्मवीर को फ़र्क़ न पड़ता किसी जीत और हार का... क्योंकि संघर्षों में पला-बढ़ा... संघर्ष ही मेरा जीवन है...
-डॉ. सौरभ मालवीय
डॉ. सौरभ मालवीय
अपनी बात
सामाजिक परिवर्तन और राष्ट्र-निर्माण की तीव्र आकांक्षा के कारण छात्र जीवन से ही सामाजिक सक्रियता। बिना दर्शन के ही मैं चाणक्य और डॉ. हेडगेवार से प्रभावित हूं। समाज और राष्ट्र को समझने के लिए "सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और मीडिया" विषय पर शोध पूर्ण किया है, परंतु सृष्टि रहस्यों के प्रति मेरी आकांक्षा प्रारंभ से ही है।
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मेरे द्वारा लिखित पुस्तक ‘श्रेष्ठ भारत : आत्मबोध से राष्ट्रबोध’ का उत्तर प्रदेश सरकार के माननीय कैबिनेट मंत्री श्री स्वतंत्रदेव सिंह जी द्वा...
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देश में अधिकतर जनजातीय जिले वन क्षेत्रों में हैं। जनजातीय समुदाय पारंपरिक प्रक्रियाओं से गैर-लकड़ी वनोत्पाद एकत्रित करने और उनके मूल्यवर्धन ...
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देश में ढाई करोड़ से अधिक दिव्यांगजन हैं। सरकार पूरी संवेदनशीलता के साथ उनके सशक्तिकरण और आर्थिक समावेश के लिए निरंतर कार्यरत है। केंद्र सरक...
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लखनऊ। शिक्षक दिवस के अवसर पर महामना सरस्वती विद्या मंदिर में शिक्षक सम्मान एवं समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप मे...
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सुखद भेंट। उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री माननीय श्री ब्रजेश पाठक जी के निज आवास पर आत्मीय भेंट का अवसर प्राप्त हुआ। इस दौरान अपनी पुस्तक ‘श...
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भोपाल। जन्माष्टमी के पावन अवसर पर विद्या भारती, प्रचार विभाग की केंद्रीय टोली की एक दिवसीय बैठक का आयोजन प्रज्ञादीप, भोपाल में सम्पन्न हुआ। ...
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जनता के कल्याण के लिए सरकार अनेक योजनाएं चला रही है, किन्तु लोगों को इनके बारे में जानकारी न होने के कारण वे इनका लाभ नहीं उठा पाते। इसीलिए ...
संप्रति
डॉ. सौरभ मालवीय
2/564, अवधपुरी खण्ड 2
खरगापुर, निकट प्राथमिक विद्यालय, गोमतीनगर विस्तार
2/564, अवधपुरी खण्ड 2
खरगापुर, निकट प्राथमिक विद्यालय, गोमतीनगर विस्तार
लखनऊ, उत्तर प्रदेश
पिन- 226010
मो- 8750820740
पिन- 226010
मो- 8750820740
ईमेल - malviya.sourabh@gmail.com
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डॉ. सौरभ मालवीय
एसोसिएट प्रोफेसर
पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग
लखनऊ विश्वविद्यालय
लखनऊ, उत्तर प्रदेश
मो- 8750820740
ईमेल - malviya.sourabh@gmail.com
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