अंतर्राष्ट्रीय चाय दिवस पर विशेष
-डॉ. सौरभ मालवीय
चाय केवल एक पेय नहीं है, अपितु यह एक परंपरा बन चुकी है। यह प्रत्येक व्यक्ति की आवश्यकता बन गई है। प्रातकाल: उठते ही सर्वप्रथम सबको चाय चाहिए। इसके बिना दिवस का प्रारंभ ही नहीं होता।
चाय का सामाजिक महत्व
जल के पश्चात् चाय विश्व का सर्वाधिक पिया जाने वाला पेय माना जाता है। चाय विभिन्न संस्कृतियों को जोड़ने का कार्य कर रही है। हमारे देश में ‘चाय पे चर्चा’ से कोई भी अनभिज्ञ नहीं है। भारत में चाय केवल प्रातःकाल का प्रारंभ ही नहीं, अपितु सामाजिक संवाद का माध्यम है। बेड टी एवं नुक्कड़ की चाय की दुकान से लेकर कॉर्पोरेट ऑफिस के ब्रेक रूम तक चाय लोगों को समीप लाती है। बहुत से लोग ऐसे हैं कि उन्हें नींद खुलते ही सर्वप्रथम चाय चाहिए। चाय पीने के पश्चात् ही वे अपना बिस्तर त्यागते हैं। इसीलिए इसे बेड टी कहा जाता है। वास्तव में चाय पीने से आलस्य दूर हो जाता है और शरीर में स्फूर्ति आ जाती है। जो लोग देर रात्रि तक कार्य करते हैं, उन्हें चाय की अत्यंत आवश्यकता होती है। चाय पीने से नींद नहीं आती और व्यक्ति सुचारू रूप से कार्य कर लेता है।
जिस प्रकार संबंधियों एवं मित्रों को भोजन पर आमंत्रित किया जाता है, उसी प्रकार लोगों को चाय पर भी आमंत्रित किया जाता है। अतिथियों को सर्वप्रथम चाय ही दी जाती है। अनेक लोग ऐसे हैं कि ग्रीष्मकाल में उन्हें श्व्वत्ल पेय दिया जाए, तो इसे पीने के पश्चात् वे चाय का आग्रह करते हैं और कहते हैं कि उन्हें चाय ही पीनी है। यदि किसी से पूछो कि वह ठंडा लेना पसंद करेगा अथवा गर्म, तो वह चाय ही मांगेगा।
चाय के विषय में समय-समय पर अनेक रोचक समाचार मिलते रहते हैं, जैसे जैसे इंग्लैंड के नागरिक प्रतिदिन 16 करोड़ चाय के कप पी जाते हैं। भारत भी इस विषय में कम नहीं है। यहां इससे अधिक ही चाय पिये जाने की संभावना है। यहां स्थान-स्थान पर चाय की दुकाने मिल जाती हैं। यह भी एक रोचक तथ्य है कि काली चाय का उपयोग कुल चाय का 75 है। काली चाय की सबसे सर्वाधिक खपत हमारे देश भारत में होती है। अमेरिका में 80 प्रतिशत चाय की खपत आइस टी के रूप में होती है।
कुल्हड़ चाय
अनेक प्रकरणों में भारतीय अपनी जड़ों की ओर लौट रहे हैं। चाय की बात करें, तो पूर्व में कांच के गिलास में चाय दी जाती थी। इसके पश्चात् प्लास्टिक और कागज से निर्मित कप आ गए। अब कुल्हड़ भी आ चुके हैं। इनमें चाय पीने का अपना ही स्वाद होता है।
चाय का स्वास्थ्य पर प्रभाव
चाय के विषय में शोध होते रहते हैं और इनकी रिपोर्ट्स आती रहती हैं। एक शोध के अनुसार चाय में एक 'एल थेनाइन' नाम का तत्व होता है, जो मस्तिष्क की शक्ति में वृद्धि करने में सहायक है। यह मानसिक तनाव को कम करता है। ऑस्ट्रेलिया में हुए एक शोध के अनुसार चाय पीने से अस्थियां सुदृढ़ होती हैं।
शोधों के अनुसार चाय में एंटी ऑक्सीडेंट्स होते हैं, जो बढ़ती आयु के प्रभाव को कम करते हैं। चाय खाली पेट नहीं पीनी चाहिए। ऐसे करने से एसिडिटी की समस्या हो सकती है। इससे भूख भी प्रभावित होती है अथवा भूख लगनी बंद हो जाती है। ऐसे में व्यक्ति भोजन नहीं करता, जिससे उसके स्वास्थ्य पर दुष्प्रभाव पड़ता है।
बहुत से लोग अत्यधिक उबाली हुई और अधिक पत्ती की चाय पीना पसंद करते हैं, वे इसे कड़क चाय कहते हैं। ऐसे चाय शरीर के लिए अत्यधिक हानिकारक होती है। इससे पेट में अल्सर हो सकता है। ऐसी अत्यधिक चाय पीने से कैंसर की आशंका भी बढ़ जाती है।
चाय दिवस
उल्लेखनीय है कि चाय दिवस का प्रारंभ 15 दिसंबर 2005 को नई दिल्ली से हुआ था। एक वर्ष पश्चात् श्रीलंका में चाय दिवस मनाया गया। इसके पश्चात् विश्वभर में अंतर्राष्ट्रीय चाय दिवस मनाया जाने लगा। वर्ष 2015 में भारत सरकार ने संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन के माध्यम से चाय दिवस को वैश्विक स्तर पर मनाने का प्रस्ताव रखा। संयुक्त राष्ट्र महासभा को यह प्रस्ताव पसंद आया और उसने इसे स्वीकार कर लिया। इस प्रकार 21 मई को आधिकारिक रूप से 'अंतर्राष्ट्रीय चाय दिवस' को घोषणा की गई। तब से प्रतिवर्ष 21 मई को विश्वभर में 'अंतर्राष्ट्रीय चाय दिवस' मनाया जाता है। वैश्विक स्तर पर चाय दिवस मनाने का उद्देश्य इसके उत्पादन एवं व्यापार से संबंधित श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा करना तथा चाय उत्पादन को प्रोत्साहित करना है।
चाय का इतिहास चाय का इतिहास अत्यंत रोचक है। मान्यता है कि चाय का प्रारंभ लगभग पांच हजार वर्ष पूर्व चीन में हुआ था।
कहा जाता है कि चीन के राजा शैन नुंग के समक्ष गर्म जल का प्याला रखा गया था। समीप में उगे एक पौधे की पत्तियां उसमें गिर गईं। इसके कारण जल का रंग बदल गया एवं उसमें से सुगंध आने लगी। राजा ने उसे पीया, तो उसे इसका स्वाद अत्यंत पसंद आया। इसे पीने के पश्चात् राजा ने नई ऊर्जा एवं स्फूर्ति का अनुभव किया। राजा ने कहा कि अब इसे प्रतिदिन उसे दिया जाए। इस प्रकार चाय पीने का प्रारंभ हुआ।
भारत में भी चाय का इतिहास अत्यंत प्राचीन है। अंग्रेजों ने 1830 के दशक में असम में इसकी बागवानी प्रारंभ की। इसके पश्चात् चाय का व्यवसाय बढ़ता गया। परिणाम स्वरूप आज भारत विश्व का द्वितीय सबसे बड़ा चाय उत्पादक देश है। चाय के उपभोक्ता के रूप में भारत द्वितीय स्थान पर है। अपनी उत्पादित कुल चाय का लगभग 70-80 प्रतिशत भाग घरेलू स्तर पर ही उपभोग हो जाता है। काली चाय के निर्यात के मामले में भारत तृतीय स्थान पर है। यह दो दर्जन से अधिक देशों में चाय निर्यात करता है। यहां से सर्वाधिक काली चाय का निर्यात किया जाता है।
भारत में चाय का उत्पादन मुख्य रूप से असम में होता है। असम के पश्चात् पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल एवं कर्नाटक में चाय का उत्पादन होता है। चाय कैमेलिया साइनेंसिस नामक पौधे की पत्तियों से बनाई जाती है। प्रसंस्करण के आधार पर चाय विभिन्न प्रकार की होती है, उदाहरण के लिए काली चाय, हरी चाय, सफेद चाय, ऊलोंग टी एवं हर्बल टी आदि।



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