Monday, May 27, 2019

पुस्तक समीक्षा

 

पुस्तक समीक्षा
भाजपा मुखपत्र-कमल सन्देश
'विकास के पथ पर भारत'
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के पहले कार्यकाल के कार्यों का दस्तावेज है।

Wednesday, May 22, 2019

सांस्‍कृतिक राष्‍ट्रवाद और मीडिया'

   बौद्धिक बैठकी जाने-माने स्‍तंभकार  Awadhesh Kumar जी अवधेश जी ने  समसामयिक गतिविधियों के बारे में विस्‍तार से बताया। 

मीडिया की दृष्टि "तथ्य और सत्य"



मुक्तांगन के आंगन से
मीडिया की दृष्टि "तथ्य और सत्य"
सईद अंसारी (आजतक),सुजीत ठाकुर (इंडिया टुडे),सरोज सिंह(बीबीसी), सन्तोष कुमार(दैनिक भास्कर),नीलू रंजन(दैनिक जागरण )

मोदी सरकार की योजनाओं पर जमीनी नजर डालने वाली किताब है 'विकास के पथ पर भारत'

'विकास के पथ पर भारत' तथ्यात्मक सामग्री एवं गहन आंकड़ों के अध्ययन के आधार पर लिखी गई किताब है। समसामयीक विषयों पर नजर रखने वाले पाठकों के लिए यह किताब किसी गोल्डन सोर्स से कम नहीं है।

किताब में लेखक ने मोदी सरकार की 34 योजनाओं की जमीनी हकीकत का विश्लेषण किया है। सभी योजनाओं पर संबंधित मंत्रालयों से मिले आंकड़ों के आधार पर विस्तार से प्रकाश डाला गया है।

किताब को डॉक्टर सौरव मालवीय ने लिखा है जो माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय के सहायक प्राध्यापक हैं। लेखक का मानना है कि अक्सर अज्ञानता और अशिक्षा के कारण लोगों को सरकार की जन हितैशी योजनाओं की जानकारी नहीं मिल पाती, जिसके कारण वे इन योजनाओं का लाभ उठाने से वंचित रह जाते हैं। किताब, इसी अज्ञानता की खाई को भरने के लिए लिखी गई है। इस पुस्तक का उद्देश्य यही है कि लोग उन सभी योजनाओं का लाभ उठाएं, जो सरकार उनके कल्याण के लिए चला रही हैं।

'विकास के पथ पर भारत' में वर्तमान सरकार द्वारा चलाई जा रही 34 प्रमुख योजनाओं का विस्तृत उल्लेख है। यह किताब सरकारी योजनाओं की प्लैनिंग से लेकर क्रियान्वयन और जमीनी हकीकत पर प्रकाश डालती है। अलग-अलग योजनाओं पर पैनी नजर रखते हुए उससे लोगों के होने वाले लाभ को रेखांकित करने साथ-साथ पुस्तक उपयुक्त  योजनाओं की समीक्षा भी करती है। कुल मिला कर यही कहा जा सकता है कि यह किताब सरकारी योजनाओं के सूचनात्मक, व्याख्यात्मक विवरण और तथ्यों पर आधारित है।

पुस्तक में डॉ मालवीय ने राष्ट्रीय मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना, परंपरागत खेती विकास योजना, दीनदयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, राष्ट्रीय कृषि बाजार यानी ई-नाम, महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम, दीनदयाल अंत्योदय योजना, दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्य योजना, राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन, राष्ट्रीय आयुश मिशन, आयुष्मान भारत, प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान, प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना, प्रधानमंत्री महिला शक्ति केंद्र योजना, बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ, प्रधानमंत्री उज्जवला योजना, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, सेतु भारतम योजना, ग्राम उदय से भारत उदय अभियान, प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना, स्मार्ट सिटी योजना, शादी शगुन योजना, हज नीति, नमामि गंगे योजना, स्मार्ट गंगा सिटी परियोजना, श्रमिक कल्याण की योजनाएं, पूर्वोत्तर के लिए योजनाएं, प्रधानमंत्री खनिज क्षेत्र कल्याण योजना, वन धन योजना, दिव्यांगों के लिए योजनाएं, राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान और संकल्प से सिद्धी योजनाओं का उल्लेख किया है।

 
पुस्तकः विकास के पथ पर भारत
लेखकः डॉ सौरभ मालवीय
प्रकाशकः यश पब्लिकेशंस
मूल्यः 395 रुपए
पृष्ठ संख्याः 160

पुस्तक समीक्षाः विकास के पथ पर भारत, केंद्र-राज्य सरकारों की योजनाओं का ब्योरा

माखनलाल चतुर्वेदी राष्‍ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्‍वविद्यालय के सहायक प्राध्यापक डॉ. सौरभ मालवीय ने गहन अध्ययन के बाद 'विकास के पथ पर भारत' नामक किताब के माध्यम से केंद्र व राज्य सरकारों की 36 प्रमुख योजनाओं को समझाने की पहल की है.

जय प्रकाश पाण्डेय
लोकसभा चुनाव के दौर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का समर्थन करने वाले लेखकों में उनकी तारीफ करने की होड़ सी लगी है. उन पर लिखी किताबों की बाढ़ सी आ गई है. कुछ लोग उनके व्यक्तित्व पर लिख रहे, तो कुछ कृतित्व पर, कुछ जीवनी लिख रहे तो कुछ उनके व्याख्यान सहेज रहे. पर माखनलाल चतुर्वेदी राष्‍ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्‍वविद्यालय के सहायक प्राध्यापक डॉ. सौरभ मालवीय की किताब 'विकास के पथ पर भारत' इससे  थोड़ी अलग है. हालांकि किताब के कवर पर संसद भवन के साथ प्रधानमंत्री मोदी की खिलखिलाती तस्वीर देख यह लगता है कि यह किताब भी उनका प्रचार करने वाली ही है, पर इसके अध्याय व पृष्ठ पलटने के बाद यह मान्यता बदलती सी लगती है, और यह स्पष्ट सा हो जाता है कि यह किताब सरकारी योजनाओं के सूचनात्मक, व्याख्यात्मक विवरण और तथ्यों पर आधारित है न कि तारीफ पर. सौरभ मालवीय ने गहन अध्ययन के बाद इस किताब के माध्यम से केंद्र व राज्य सरकारों की 36 प्रमुख योजनाओं को समझाने की पहल की है.
इस किताब की प्रस्तावना में सौरभ मालवीय ने लिखा भी है कि 'देश के लोगों के सामाजिक, आर्थिक और शैक्षिक विकास के लिए सरकार अनेक योजनाएं चला रही हैं. हर योजना का उद्देश्य होता है कि उसका लाभ हर व्यक्ति तक पहुंचे. जब योजना का लाभ व्यक्ति तक पहुंचता है, वह योजना सफल होती है. इस समय देश में लगभग डेढ़ सौ योजनाएं चल रही हैं. इनमें अधिकतर पुरानी योजनाएं हैं. इनमें कई ऐसी पुरानी योजनाएं भी हैं, जिनके नाम बदल दिए गए हैं. इनमें कई ऐसी योजनाएं भी हैं, जो लगभग बंद हो चुकी थीं और उन्हें दोबारा शुरू किया गया है. इनमें कुछ नई योजनाएं भी सम्मिलित हैं. देश में दो प्रकार की सरकारी योजनाएं चल रही हैं. पहली योजनाएं वे हैं, जो केंद्र सरकार द्वारा चलाई जाती हैं. इस तरह की योजनाएं पूरे देश या देश के कुछ विशेष राज्यों में चलाई जाती हैं. दूसरी योजनाएं वे हैं, जो राज्य सरकारें चलाती हैं. इस पुस्तक के माध्यम से सरकारी की कुछ महत्वपूर्ण योजनाओं पर प्रकाश डालते हुए उन्हें पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास किया गया है. अकसर ऐसा होता है कि अज्ञानता और अशिक्षा के कारण लोगों को सरकार की जन हितैषी योजनाओं की जानकारी नहीं होती, जिसके कारण वे इन योजनाओं का लाभ उठाने से वंचित रह जाते हैं. इस पुस्तक का उद्देश्य यही है कि लोग उन सभी योजनाओं का लाभ उठाएं, जो सरकार उनके कल्याण के लिए चला रही है।. इन योजनाओं की जानकारी संबंधित मंत्रालयों से प्राप्त जानकारी पर आधारित है. उल्लेखनीय है कि समय-समय पर योजनाओं में आंशिक रूप से परिवर्तन भी होता रहता है.
प्रकाशक यश पब्लिकेशंस ने भी अपनी बात कही है. प्रकाशक ने लिखा है कि देश की केंद्र सरकार और राज्य सरकारें जनता के कल्याण के लिए अनेक योजनाएं चला रही हैं. इन योजनाओं का मुख्य उद्देश्य जनता के जीवन स्तर में सुधार लाना तथा सभी क्षेत्रों का समान विकास सुनिश्चित बनाना है. सरकार द्वारा विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं को लक्षित समूहों की स्थिति के अनुरूप तैयार किया जाता है, ताकि लक्षित वर्ग इन से लाभान्वित हो सके. सरकार महिला सशक्तिकरण पर विशेष ध्यान दे रही है और इसके लिए विभिन्न योजनाएं चलाई जा रही हैं. सरकार द्वारा  बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, प्रधानमंत्री उज्जवला योजना, जन धन योजना, प्रधानमंत्री जीवन ज्योति योजना, डिजीटल इंडिया तथा स्वच्छ भारत मिशन आदि महत्वकांक्षी योजनाएं चलाई जा रही हैं. यह पुस्तक केंद्र और राज्य सरकारों की ऐसी ही कुछ योजनाओं पर प्रकाश डालती है. इस पुस्तक के माध्यम से सरकार की जनहितैषी योजनाओं की जानकारी जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास किया गया है. निश्चित रूप से यह पुस्तक  अपने उद्देश्य में सफलता प्राप्त करेगी.
किताब की भूमिका में वरिष्ठ पत्रकार शिशिर सिन्हा ने लिखा है कि विकास के आंकड़ों में आम आदमी हमेशा ही एक सवाल का जवाब ढ़ूंढता है. सवाल ये है कि इन आंकड़ों का 'मेरे' लिए क्या मतलब है? सवाल तब और भी अहम बन जाता है कि एक ही दिन अखबार की दो सुर्खियां अलग-अलग कहानी कहती हैं. पहली सुर्खी है, 'भारत दुनिया में सबसे तेजी से विकास करने वाला देश बना' या फिर 'भारत अगले दो वर्षों तक सबसे तेजी से विकास करने वाला बना रहेगा देश,' वहीं दूसरी सुर्खी है 'अरबपतियों की संपत्ति रोजाना औसतन 2200 करोड़ रुपए बढ़ी, भारी गरीबी में जी रही 10 फीसदी आबादी लगातार 14 सालों से कर्ज में है डूबी.' ऐसे में ये सवाल और भी अहम बन जाता है कि 7.3, 7.5 या 7.7 फीसदी की सालाना विकास दर के मायने आबादी के एक बहुत ही छोटे हिस्से तक सीमित है, या फिर इनका फायदा समाज में आखिरी पायदान के व्यक्ति को भी मिल पा रहा है या नहीं?
ऐसे ही सवालों का जवाब जानने के लिए ये जरुरी हो जाता है कि विकास को सुर्खी से आगे जन-जन तक पहुंचाने के लिए आखिरकार सरकार ने किया क्या, या फिर जो किया वो पहले से किस तरह से अलग था?.... इस सवाल का जवाब जानने की कोशिश यह किताब करती है...अपनी भूमिका में उन्होंने आगे लिखा है कि सच तो यही है कि किसी भी सरकारी योजना की सार्थकता इस बात पर निर्भर करती है कि कितनी जल्दी वो सरकारी सोच से आम आदमी की सोच में अपनी जगह बना पाती है. साथ ही जरुरी ये भी है कि सरकारी योजनाओं को महज पैसा बांटने का एक माध्यम नहीं माना जाए, बल्कि ये देखना भी जरुरी होगा कि वो किस तरह व्यक्ति से लेकर समाज, राज्य और फिर देश की बेहतरी मे योगदान कर सके. ये भी बेहतर होगा कि मुफ्त में कुछ भी बांटने का सिलसिला बंद होना चाहिए. क्या ऐसा सब कुछ पिछले साढ़े चार साल के दौरान शुरु की गयी योजनाओं में देखने को मिला है, इसका जवाब काफी हद तक हां में होगा. एक और बात. राज्यों के बीच भी नए प्रयोगों के साथ योजनाएं शुरु करने की प्रतिस्पर्धा चल रही है और सुखद निष्कर्ष ये है कि चाहे वो किसी भी राजनीतिक दल की सरकार ने शुरु की हो, उसकी उपयोगिता को दूसरी राजनीतिक दलों की सरकारों ने पहचाना. तेलंगाना की रायतु बंधु योजना और ओड़िशा की कालिया योजना को ही ले लीजिए. किसानों की जिंदगी बदलने की इन योजनाओं का केंद्र सरकार अध्ययन कर रही है, ताकि राष्ट्रीय स्तर की योजना में इन योजनाओं की कुछ खास बातों को शामिल किया जा सके.
विभिन्न सरकारी योजनाओं को शुरू करने का लक्ष्य यही है कि विकास का फायदा हर किसी को मिले यानी विकास समावेशी हो. कुछ ऐसे ही पैमानों के आधार पर यहां उल्लेखित 36 योजनाओं का आंकलन किया जाना चाहिए. फिर ये सवाल उठाया जा सकता है कि क्या ये योजनाएं कामयाब हैं? अगर सरकार कहे कामयाब तो असमानता को लेकर जारी नई रिपोर्ट को सामने रख चर्चा करने से नहीं हिचकना चाहिए. एक बात तो तय है कोई कितना भी धर्म-जाति-संप्रदाय को आधार बनाकर राजनीति कर ले लेकिन मतदाता ईवीएम पर बटन दबाने के पहले एक बार जरुर सोचता है कि अमुक उम्मीदवार ने विकास के लिए क्या कुछ किया है, या फिर क्या वो आगे विकास के बारे में कुछ ठोस कर सकेगा. मत भूलिए सरकारी योजनाएं आपके ही पैसे से चलती हैं और इन योजनाओं की सार्थकता पर अपना पक्ष रखने के लिए हर पांच साल में आपको एक मौका तो मिलता ही है. ऐसी सोच विकसित करने के लिए जरुरी है कि आपके समक्ष सरकारी योजनाओं का ब्यौरा सरल और सहज तरीके से पेश किया जाए. पुस्तक 'विकास के पथ पर भारत' इस काम में मदद करेगी.
पुस्तकः विकास के पथ पर भारत
लेखकः डॉ सौरभ मालवीय
प्रकाशकः यश पब्लिकेशंस
मूल्यः 395 रुपए
पृष्ठ संख्याः 159

त्वमेव माता च पिता त्वमेव

 

त्वमेव माता च पिता त्वमेव
त्वमेव सर्वम मम देव देव।

पुस्तक समीक्षाः विकास के पथ पर भारत, केंद्र सरकार की योजनाओं का तथ्यात्मक विवरण

भोपाल. माखनलाल चतुर्वेदी राष्‍ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्‍वविद्यालय के सहायक प्राध्यापक डॉ. सौरभ मालवीय ने 'विकास के पथ पर भारत' नाम की किताब लिखी है। इसमें उन्होंने केंद्र और राज्य सरकारों की 36 प्रमुख योजनाओं का व्याख्यात्मक और तथ्यों पर आधारित विवरण प्रस्तुत किया है। यश पब्लिकेशंस ने किताब को प्रकाशित किया है। 

प्रस्तावना में लेखक ने बताया कि वर्तमान में देश में करीब 150 योजनाएं चल रही हैं। ज्यादातर पुरानी हैं। कई के नाम भी बदले गए। कई करीब-करीब बंद हो चुकी योजनाओं को दोबारा शुरू किया गया। देश में दो प्रकार की सरकारी योजनाएं हैं। इन्हें केंद्र और राज्य सरकार की तरफ से चलाया जाता है। इस पुस्तक के माध्यम से लेखक ने कुछ महत्वपूर्ण योजनाओं पर प्रकाश डाला है और उन्हें पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास किया।
वरिष्ठ पत्रकार शिशिर सिन्हा ने किताब की भूमिका में लिखा है कि विकास के आंकड़ों में आम आदमी हमेशा ही एक सवाल का जवाब तलाश करता है। इन आंकड़ों का 'मेरे' लिए क्या मतलब है? इस किताब की मदद से आम आदमी के इन जवाबों का तलाश करने की कोशिश करती है।
विभिन्न सरकारी योजनाओं को शुरू करने का लक्ष्य लक्षित वर्ग तक लाभ पहुंचाना है। हालांकि, सरकार के दावों के अतिरिक्त ये सवाल भी उठता है कि आम आदमी के नजरिए से क्या ये योजनाएं कामयाब हैं? एक अहम बात यह भी है कि वोटर जब वोट देने जाता है तो उसके दिमाग में कहीं न कहीं यह बात जरूर होती है कि फलां उम्मीदवार ने विकास के लिए क्या किया? ऐसे में इस किताब के माध्यम से लेखक ने सरकारी योजनाओं का ब्यौरा सरल तरीके से पेश किया है।
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भारत की राष्‍ट्रीयता हिंदुत्‍व है