Tuesday, September 1, 2026

प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना : राह हुई आसान


किसी की क्षेत्र के विकास के लिए सड़क का होना बहुत आवश्यक है। जहां सड़कें होंगी, वहां यातायात के साधन भी होंगे। इससे उस क्षेत्र के लोगों का आवागमन सुगम होगा। देश में आज भी ऐसे बहुत से क्षेत्र हैं, जहां सड़कें नहीं हैं। ऐसे भी क्षेत्रों की कमी नहीं है, जहां सड़कों की स्थित अच्छी नहीं है। इन क्षेत्र के निवासियों को यातायात में असुविधा का सामना करना पड़ता है। ग्रामीण विकास मंत्रालय के अनुसार ग्रामीण सड़क संपर्क आर्थिक और सामाजिक सेवाओं तक पहुंच का संवर्धन करते हुए और फलस्वरूप भारत में कृषि आय और उत्पादक रोजगार अवसरों का अधिक मात्रा में सृजन करते हुए ग्रामीण विकास का न केवल एक मुख्य घटक है, अपितु स्थायी रूप से गरीबी निवारण कार्यक्रम का भी एक मुख्य भाग है। पिछले वर्षों में विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से राज्य और केन्द्र स्तरों पर किए गए प्रयासों के बावजूद देश में अभी भी लगभग 40 प्रतिशत बसावटें बारहमासी सड़कों से जुड़ी हुई नहीं हैं। यह सर्वविदित है कि जहां पर सड़क संपर्क उपलब्ध भी कराया गया है, वहां निर्मित सड़कों की स्थिति ऐसी नहीं है कि उन्हें बारहमासी सड़कों के रूप में वर्गीकृत नहीं किया जा सके। 

इस स्थिति को सुधारने के लिए केन्द्र सरकार ने 25 दिसम्बर, 2000 को प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना शुरू की थी। यह शत-प्रतिशत केन्द्र द्वारा प्रायोजित योजना है। इस कार्यक्रम के लिए हाई स्पीड डीजल पर 50 प्रतिशत उपकर निर्धारित है। इस योजना का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में सड़कों से न जुड़ी बसावटों को बारहमासी सड़कों से जोड़ना है, जिसमें आवश्यक पुलियां और क्रास-ड्रेनेज भी सम्मिलित हैं। इस योजना के अंतर्गत उन जिलों में मौजूदा सड़कों को सुधारने की अनुमति दी जाएगी, जहां निर्दिष्ट जनसंख्या वाली सभी बसावटों को बारहमासी सड़क संपर्कता प्रदान की गई है। यह सुधार-कार्य कार्यक्रम का केन्द्र बिन्दु नहीं है और इस स्थिति में यह उन राज्यों के राज्य आवंटन के 20 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकता है, जहां वे बसावटें मौजूद हैं,  जो अभी भी सड़कों से जुड़ी हुई नहीं हैं। सुधार कार्य में कोर नेटवर्क में सामान्य और सभी सड़कों को बारहमासी सड़कों में बदलने को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। इसके कई मार्गदर्शक सिद्धांत और परिभाषाएं हैं, जैसे प्रधानमंत्री सड़क योजना की भावना और उद्देश्य सड़क से न जुड़ी बसावटों को बेहतर बारहमासी सड़कें प्रदान करना है। यह सुनिश्चित किया जाए कि नये सड़क संपर्क के प्रावधान को कार्यक्रम के उद्देश्य को ध्यान में रखकर वरीयता दी जाएगी, यानी वे बसावटें जो अभी सड़कों से जुड़ी हुई नहीं हैं। 
 
बसावटों की जनसंख्या के आकार से संबंधित है। जनगणना 2001 में दर्ज की गई जनसंख्या बसावट के जनसंख्या आकार को निर्धारित करने का आधार होनी चाहिए तथा इसी के आधार पर जिला ग्रामीण सड़क योजनाएं और कोर नेटवर्क बनाए/संशोधित किए जाने चाहिए। सड़कों से न जुड़ी बसावट, वह बसावट है जिसमें निर्दिष्ट आकार की जनसंख्या है, जो बारहमासी सड़क अथवा सड़क से जुड़ी बसावट से कम से कम 500 मीटर या इससे अधिक की दूरी पर स्थित है। पहाड़ों के मामले में 1।5 किलीमीटर पैदल दूरी पर हैं। सड़कों से न जुड़ी बसावटों को बारहमासी सड़क अथवा अन्य मौजूदा बारहमासी सड़क से पहले से ही जुड़ी समीपवर्ती बसावटों से जोड़ा जाना होता है, जिससे सड़कों से न जुड़ी बसावट में प्राप्त न होने वाली शिक्षा, स्वास्थ्य, विपणन आदि सुविधाएं  निवासियों को मिल सकें। इस कार्यक्रम के लिए इकाई राजस्व गांव अथवा पंचायत न होकर एक बसावट है। क्षेत्र में रहने वाली जनसंख्या के समूह, जो लंबे समय तक स्थान नहीं बदलते हैं, बसावट करते हैं। देद्गाम, धानिस, तोलास, माजरस, हैम्लिट आदि बसावटों की व्याख्या के लिए सामान्य रूप से प्रयोग में आने वाले शब्द हैं। एक राजस्व गांव/ग्राम पंचायत में एक या इससे अधिक बसावटें हो सकती हैं। जनसंख्या आकार को निर्धारित करने के प्रयोजनार्थ 500 मीटर की दूरी के भीतर (पहाड़ों के मामले में 1।5 कि।मी। पैदल दूरी) सभी बसावटों की जनसंख्या को एक साथ शामिल किया जा सकता है। समूहगत नीति अनेक बसावटों खासकर पहाड़ी/पर्वतीय क्षेत्रों के लिए सड़क संपर्क के प्रावधान को सक्षम बनाएगी।

कोर नेटवर्क सड़कों का ऐसा अल्प नेटवर्क है, जो कम से कम एक बारहमासी सड़क संपर्कता के  माध्यम से चुनिंदा क्षेत्रों में सभी पात्र बसावटों को अनिवार्य सामाजिक आर्थिक सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए जरूरी है। कोर नेटवर्क में थ्रू रूट्स और लिंक रूट्स सम्मिलित हैं। थ्रू रूट वे हैं, जिनसे कई संपर्क सड़कों या कई गांवों से यातायात आकर चलता है और यह उच्च श्रेणी की सड़कों अर्थात् जिला सड़कों या राज्य अथवा राष्ट्रीय राजमार्ग के माध्यम से सीधे विपणन  केन्द्रों से जुड़े होते हैं। लिंक रूट वे सड़कें हैं, जो किसी एक बसावट या बसावटों के एक समूह को थ्रू रूटों या जिला सड़कों से जोड़ती हैं और ये विपणन केन्द्रों तक जाती हैं। लिंक रूट सामान्यतः किसी बसावट की सीमा खत्म होने पर समाप्त हो जाते हैं। हालांकि थ्रू रूट दो या अधिक लिंक रूटों को मिलाकर तथा मुख्य सड़क या विपणन केन्द्र से उत्पन्न होते हैं। यह सुनिश्चित किया जाए कि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत शुरू किया गया प्रत्येक सड़क कार्य कोर नेटवर्क का भाग है। सड़क संपर्क के उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए उन सड़कों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए, जो संयोगवद्गा अन्य बसावटों के काम आती हैं। इस योजना के अंतर्गत उन सड़कों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए, जो अधिक आबादी के काम आती है। यद्यपि मैदानी क्षेत्रों में सड़क से 500 मीटर की दूरी वाली बसावटों को सड़क से जुड़ा हुआ माना गया है, पर्वतीय क्षेत्रों यह दूरी 1।5 किलोमीटर होनी चाहिए।

प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना केवल ग्रामीण क्षेत्रों को कवर करेगी। द्राहरी सड़कें इस कार्यक्रम के क्षेत्र से बाहर हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में भी यह योजना केवल उन्हीं ग्रामीण सड़कों को कवर करती है, जो पहले से ही ’अन्य जिला सड़कों’ तथा ’ग्राम सड़कों’ के रूप में वर्गीकृत थीं। अन्य जिला सड़कें ऐसी सड़कें हैं, जो उत्पादन वाले ग्रामीण क्षेत्रों में काम में आती हैं और बाजार केन्द्रों, तालुका मुख्यालयों, ब्लाक मुख्यालयों या अन्य मुख्य सड़कों तक जाने का मार्ग देती हैं। ग्राम सड़कें ऐसी सड़कें हैं, जो गांवों / बसावटों या बसावट के समूहों को एक-दूसरे से तथा उच्च श्रेणी की समीपवर्ती सड़क से जोड़ती हैं। इस योजना के अंतगर्त मुख्य जिला सड़कों, राज्य राजमार्ग और राष्ट्रीय राजमार्ग को शामिल नहीं किया जा सकता है, चाहे वे ग्रामीण क्षेत्रों में ही आती हों। यह नई सड़क संपर्कता या उन्नयन कार्यों पर लागू है। इस योजना में केवल एकल सड़क संपर्कता की ही व्यवस्था है। यदि कोई बसावट पहले ही बारहमासी सड़कों के माध्यम से किसी अन्य सड़क से जुड़ी बसावट से जुड़ी हुई है, तो उस बसावट में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत कोई अन्य कार्य शुरू नहीं किया जा सकता है।

सड़कों से न जुड़ी बसावटों के लिए सड़क संपर्क का प्रावधान नये सड़क संपर्क के रूप में माना जाएगा। नये सड़क संपर्क में मिट्टी कार्य स्तर से वांछित विनिर्देद्गान तक सड़कों का निर्माण समाविष्ट है तथा इसलिए उसमें निरपवाद रूप से कुछ मिट्टी कार्य शामिल होगा। पहाड़ी क्षेत्रों के मामले में काट-छांट शामिल होगा। मौजूदा बजरी या पक्की सड़कें नये सड़क संपर्क कार्य के रूप में स्वीकार करने के योग्य नहीं होगी, चाहे वहां पर कैरेज-वे और सड़क को चौड़ा करने का कुछ मिट्टी कार्य हुआ है। ऐसे सड़क, जिस पर केवल मिट्टी कार्य किया गया है, उसे नये सड़क संपर्क के रूप में माना जाएगा। सुधार में अनुमति मिलने पर सड़क को चौड़ा किया जाएगा। क्रास ड्रैनेज कार्य का प्रावधान ही इस योजना के अंतर्गत उन्नयन कार्य के रूप में माना जाएगा।  ग्रेवल की सड़क वह सड़क होती है जिस का निर्माण सुसंघटित बजरी तथा रोड़ी सामग्री का उपयोग करके किया जाता है, जो पक्की होती है और गीली होने पर फिसलनदार नहीं होती है। वाटर बांऊड मैकेडम सड़क की वह परत है, जो मशीब द्वारा बारीक या टुकड़े वाली सामग्री से रिक्त स्थान को पूरी तरह भर कर तैयार की जाती है।

प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना का मुख्य लक्ष्य सम्पर्क विहीन बसावटों को बारहमासी सम्पर्क सड़क प्रदान करना है। बारहमासी सड़क वह है जो सभी मौसम में प्रयोग के योग्य होती है। इसका तात्पर्य यह है कि सड़क के अंतगर्त उपयुक्त आर-पार नालियों जैसे पुलियों, छोटे पुलों एवं सेतुकों का निर्माण किया गया हो और जिसमें उचित संख्या एवं अवधि में यातायात की बाधा को  स्वीकृति दी गई हो। पैदल पथ पर हर मौसम में काम में आने योग्य होना चाहिए, परन्तु इसमें यह आवश्यक नहीं है कि इस पर खड़ंजा लगाया जाए या चौरस बनाया जाए या तारकोल बिछाकर पक्का किया जाए। ऐसी सड़कें भी हो सकती हैं, जिन्हें सामान्य मौसम की सड़कें मानी जाती हों। दूसरे शब्दों में, आरपार नालियों के कार्यों के अभाव में वे मात्र मौसम में उपयोगी होती हैं। ऐसी सड़कों का बारहमासी सड़कों में बदलाव सुधार माना जाएगा। मात्र आरपार नालियों के कार्यों के प्रावधान को भी सुधार माना जाएगा। परन्तु यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के समस्त सड़क कार्यों में अपेक्षित आरपार नालियों के कार्यों का प्रावधान एक अत्यावश्यक तत्व समझा गया है।

इस योजना में तारकोल बिछी या सीमेंट से बनी सड़कों की मरम्मत करने की अनुमति नहीं दी गई है, भले ही सतह की स्थिति खराब हो गई हो। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत बनाई गई ग्रामीण सड़कें तकनीकी विशिष्टताओं के अनुरूप हों। इसमें ग्रामीण सड़क नियम-पुस्तिका में बताए अनुसार इंडियन रोड्स कांग्रेस द्वारा निर्धारित विशिष्टताओं को अपनाया जाएगा।

सरकार की इस योजना से अनेक क्षेत्रों में पक्की सड़कें बन गईं। दूर-दराज के क्षेत्रों को मुख्य मार्गों से जोड़ दिया गया, जिससे ग्रामीणों को आवागमन में आसानी हो गई। इस क्षेत्र में अभी बहुत काम होना शेष है।




(डॉ सौरभ मालवीय की पुस्तक- 'विकास के पथ पर भारत' से)

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