Tuesday, September 1, 2026

प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना : धुएं से मुक्ति


भोजन पकाने के लिए ईंधन की आवश्यकता होती है। ग्रामीण परिवारों में आज भी महिलाएं मिट्टी के चूल्हे पर भोजन पकाती हैं। ईंधन के रूप में लकड़ियों का प्रयोग किया जाता है। इन चूल्हों से धुआं होता है। धुएं के कारण जहां वायु प्रदूषण फैलता है, वहीं महिलाएं कई प्रकार के रोगों की चपेट में आ जाती हैं। धुएं के कारण उन्हें फेफड़ों और नेत्र संबंधी रोग हो जाते हैं। ईंधन के रूप में लकड़ियों का प्रयोग करने से ग्रामीण क्षेत्रों में लगातार पेड़ कम हो रहे हैं।

ग्रामीण महिलाओं को धुएं से मुक्ति दिलाने के लिए केंद्र सरकार प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना शुरू की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 1 मई, 2016 को उत्तर प्रदेश के बलिया से प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना का शुभारंभ किया। इससे पहले 29 फरवरी, 2016 को केंद्रीय बजट में 8000 करोड़ रुपये के आवंटन के साथ तीन वर्षों की अवधि के दौरान बीपीएल परिवारों को पांच करोड़ एलपीजी कनेक्शन जारी करने की घोषणा की गई थी। इस योजना के अंतर्गत गरीब महिलाओं को निशुल्क गैस कनेक्शन उप्लब्ध कराए जाएंगे। वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार जो परिवार गरीब श्रेणी में रखे गए थे या बीपीएल श्रेणी में रखे गए थे, उन्हें इस योजना का लाभ दिया जाएगा। 

इस योजना के क्रियान्वयन के लिए प्राथमिकता वाले राज्यों के रूप में राष्ट्रीय औसत से कम एलपीजी कवरेज वाले 14 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों, जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड एवं हिमाचल प्रदेश के पहाड़ी राज्यों और सभी पूर्वोत्तर राज्यों की पहचान की गई थी। अधिकतम कनेक्शनों वाले शीर्ष पांच राज्यों में उत्तर प्रदेश (46 लाख), पश्चिम बंगाल (19 लाख), बिहार (19 लाख), मध्य प्रदेश (17 लाख) और राजस्थान (14 लाख) सम्मिलित हैं। दिसंबर, 2016 तक जारी किए गए कुल कनेक्शनों में लगभग 75 प्रतिशत भाग इन्हीं पांचों राज्यों का था। लाभार्थियों में बड़ी संख्या एससी/एसटी परिवारों की ही है। 35 प्रतिशत कनेक्शन इन्हीं परिवारों को जारी किए जा रहे हैं। अब यह योजना 35 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में क्रियान्वित की जा रही है।

प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना की ओर से सभी बीपीएल परिवारों को 1600 रूपये की वित्तीय सहायता देने का प्रावधान रखा गया है। इस योजना का लाभ लेने के लिए सबसे पहले 2011 की जनगणना की सूची में अपना नाम देखना होगा। यदि वहां पर उनका नाम आया है, तो वे गैस कनेक्शन के लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। इच्छुक बीपीएल परिवार की महिला सदस्य निर्धारित आवेदन पत्र भरकर अपने नजदीकी एलपीजी वितरण केंद्र में जमा करा सकती है। याद रहे कि जिन बीपीएल परिवारों के पास योजना के आरंभ के समय तक एलपीजी कनेक्शन नहीं है, केवल वही योजना के लिए आवेदन कर सकते हैं। इस योजना का लाभ लेने के लिए सभी दस्तावेज को आवेदन पत्र के साथ संलग्न करना होगा और उसके बाद उन्हें अपने नजदीकी एलपीजी गैस वितरक के पास जाकर जमा कराना होगा। इस दस्तावेजों में दो पासपोर्ट साइज फोटो, बीपीएल राशन कार्ड, एक फोटो पहचान पत्र जैसे आधार कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, मतदाता पहचान पत्र, पासपोर्ट की प्रति, राजपत्रित अधिकारी द्वारा सत्यापित स्व-घोषणा पत्र, जीवन बीमा पॊलिसी, बैंक स्टेटमेंट, बीपीएल सूची में नाम का प्रिंट आउट आदि शामिल हैं। आवेदन पत्र को संबंधित वेबसाइट से डाउनलोड किया जा सकता है। आवेदन पत्र हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में मिल जाएगा। इच्छुक अपनी भाषा के अनुसार आवेदन को डाउनलोड कर सकते हैं और आवेदन पत्र को भरकर और सभी दस्तावेजों को एक साथ जोड़ कर अपने नजदीकी किसी भी एलपीजी वितरक के पास जमा करके इस योजना का लाभ उठा सकते हैं। 

पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) धर्मेंद्र प्रधान के अनुसार गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन कर रहे परिवारों के लिए इस योजना को शुरू करने के प्रथम वर्ष में 2।20 करोड़ से अधिक एलपीजी कनेक्शन दिए गए हैं। एसईसीसी 2011 के डेटा से यह जानकारी उभर कर सामने आई है। यह वित्त वर्ष के लिए तय 1।5 करोड़ कनेक्शनों के लक्ष्य से अधिक है। वित्त वर्ष 2016-17 में तेल विपणन कंपनियों ने देश भर में 3।25 करोड़ नये कनेक्शन दिए हैं। यह किसी भी वर्ष में अब तक जारी किए गए सर्वाधिक कनेक्शन हैं। अप्रैल, 2017 तक सक्रिय एलपीजी उपभोक्ताओं की कुल संख्या 20 करोड़ के पार चली गई है। यह वर्ष 2014 में आंके गए 14 करोड़ सक्रिय एलपीजी उपभोक्ताओं की तुलना में काफी अधिक है। देश में एलपीजी की मांग में 10 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई है। पिछले तीन वर्षों में 4600 से अधिक नये वितरक बने हैं, जो मुख्य रूप से ग्रामीण क्षेत्रों से संबंधित हैं।

50 प्रतिशत नये उपभोक्ता रिफिल के लिए वापस आ चुके हैं। इस योजना को भागीदारी मोड में क्रियान्वित किया गया है, जिनमें लाभार्थी, निर्वाचित प्रतिनिधि, प्रतिष्ठित हस्तियां, स्थानीय प्रशासन इत्यदि शामिल हैं। इस योजना को लोकप्रिय बनाने और लाभार्थियों को सुरक्षा मानकों के बारे में जागरूक करने के लिए क्षेत्रीय भाषाओं में प्रचार-प्रसार की विशेष संचार रणनीति पर अमल किया गया। इसमें संचार के समस्त माध्यमों का उपयोग किया गया और इस योजना के क्रियान्वयन की निगरानी की भी व्यवस्था की गई है। इस योजना ने एक सामाजिक आंदोलन का रूप ले लिया है और बड़ी संख्या में लाभार्थी अपने यहां एलपीजी सिलेंडर की सुविधा सुनिश्चित करने के लिए आवेदन कर रहे हैं।

सुरक्षा एवं एलपीजी के सुरक्षित उपयोग पर विशेष बल दिया जा रहा है। योजना के समस्त लाभार्थियों के घरों में मैकेनिक के माध्यम से एलपीजी सिलेंडर लगवाने जैसे उपाय किए जा रहे हैं, ताकि लाभार्थियों को एलपीजी के सुरक्षित एवं समुचित उपयोग के बारे में सही ढंग से बताया जा सके। इसी तरह योजना के लाभार्थियों के लिए देश भर में नियमित रूप से सुरक्षा शिविर आयोजित किए जा रहे हैं, जिससे उन्हें एलपीजी के सुरक्षित उपयोग के बारे में अवगत कराया जा सके।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक वर्ष के भीतर प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों की संख्या दो करोड़ को पार करने पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा था, ''बहुत खुशी और गर्व की बात है कि एक वर्ष के भीतर प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों की संख्या दो करोड़ को पार कर गई है।'' 

वास्तव में इस योजना से गरीब महिलाओं के जीवन में गुणात्मक बदलाव आने लगा है। उन्हें धुएं से मुक्ति मिली है और भोजन पकाने में उन्हें अब असुविधा का सामना भी नहीं करना पड़ता।



(डॉ सौरभ मालवीय की पुस्तक- 'विकास के पथ पर भारत' से)

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