स्वस्थ माताएं ही स्वस्थ शिशु को जन्म दे सकती हैं। यदि गर्भवती महिलाएं स्वयं कुपोषित होंगी और उन्हें समय पर उचित उपचार नहीं मिलेगा, तो इसका प्रभाव न केवल उन पर पड़ेगा, अपितु उनके बच्चे भी इससे बुरी तरह प्रभावित होंगे। गर्भवती महिलाओं की समुचित देखभाल की आवश्यकता होती है। किन्तु इस मामले में देश अभी पिछड़ा हुआ हैं। देश में शिशु मृत्यु और मातृ मृत्यु दर के मामले में देश की स्थिति अत्यंत चिंताजनक है। यूनिसेफ की रिपोर्ट के अनुसार नवजात शिशुओं की मृत्यु के मामले में बांग्लादेश, नेपाल और भूटान हमसे बेहतर हैं। शिशु मृत्यु दर में विश्व में भारत पांचवें स्थान पर है। यहां हर वर्ष जन्म लेने वाले दो करोड़ 60 लाखों बच्चों में से 40 हजार अपने जन्म के 28 दिनों के अंदर ही मर जाते हैं। यहां शिशु मृत्यु दर प्रति एक हजार पर 29 है। हर वर्ष सात लाख नवजात शिशुओं की मौत हो जाती है। वर्ष 2008 से 2015 के बीच प्रतिदिन औसतन 2137 नवजात शिशुओं की मृत्यु हुई। महिलाओं की स्थिति भी चिंताजनक है। भारत के रजिस्ट्रार जनरल-नमूना पंजीकरण प्रणाली की रिपोर्ट के अनुसार, देश में मातृ मृत्यु अनुपात प्रति एक लाख जीवित जन्मों में 167 है।
महिलाओं को सुरक्षित मातृत्व प्रदान करने के लिए केन्द्र सरकार प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान चला रही है। यह अभियान देश में तीन करोड़ से अधिक गर्भवती महिलाओं को प्रसव पूर्व देखभाल की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए प्रारंभ किया गया है। इसके अंतर्गत प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के अंतर्गत प्रजनन मातृ नवजात शिशु एवं किशोर स्वास्थ्य रणनीति के अंतर्गत निदान तथा परामर्श सेवाओं सहित गुणवत्तायुक्त प्रसव पूर्व देखभाल की कवरेज के लिए परिकल्पना की गई है। केन्द्र सरकार द्वारा प्रत्येक माह की निश्चित नौ तारीख को गर्भवती महिलाओं को व्यापक और गुणवत्तायुक्त प्रसव पूर्व देखभाल प्रदान करना सुनिश्चित किया गया है। एकल खिड़की प्रणाली के सिद्धांतों का उपयोग करते हुए यह सुनिश्चित किया गया है कि केन्द्र में आने वाली सभी गर्भवती महिलाओं को स्वास्थ्य केन्द्रों पर उनकी गर्भावस्था के दूसरी और तीसरी तिमाही के दौरान प्रसव पूर्व देखभाल सेवाओं का न्यूनतम पैकेज प्रदान किया जाएगा। इसमें अल्ट्रासाउंड व अन्य जांच तथा आइएफ़ए सप्लीमेंट, कैल्शियम सप्लीमेंट आदि दवाएं सम्मिलित हैं। इसके साथ ही गर्भवती महिलाओं को मातृ एवं बाल संरक्षण कार्ड तथा सुरक्षित मातृत्व पुस्तिकाएं दी जाएगी।
यदि किसी माह में नौ तारीख को रविवार या राजकीय अवकाश होने की स्थिति में अगले कार्य दिवस पर इसका आयोजन किया जाएगा। इन सेवाओं को शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में निर्धारित सार्वजनिक स्वास्थ्य केंद्रों पीएचसी/सीएचसी, डीएच/शहरी स्वास्थ्य केंद्रों आदि पर उपलब्ध कराया जाएगा। इसका लक्ष्य सभी गर्भवती महिलाओं तक पहुंचाने का प्रयास होगा।
इस कार्यक्रम की प्रमुख विशेषता यह हैं कि प्रसव पूर्व जांच सेवाएं ओबीजीवाई विशेषज्ञों/चिकित्सा अधिकारियों द्वारा उपलब्ध कराई जाएंगी। निजी क्षेत्र के ओबीजीवाई विशेषज्ञों/चिकित्सकों को, जहां सरकारी क्षेत्र के चिकित्सक उपलब्ध या पर्याप्त नहीं हैं, वहां सार्वजनिक स्वास्थ्य केंद्रों में स्वैच्छिक सेवाएं प्रदान करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।
हर गर्भवती महिला को विशेष रूप से जिनकी पहचान किसी भी जोखिम कारक या सहरुग्णता स्थिति में की गई हैं, उनके लिए उचित जन्म योजना और जटिलता की तैयारी की जाएगी। कुपोषण से पीड़ित महिलाओं में रोग का शीघ्र पता लगाने, पर्याप्त और उचित प्रबंधन पर विशेष बल दिया जाएगा। किशोर और जल्दी गर्भधारण पर विशेष ध्यान दिया जाएगा, क्योंकि इन गर्भधारणों में अतिरिक्त एवं विशेष देखभाल की आवश्यकता होती है। प्रसव पूर्व जांच के दौरान देखभाल की गुणवत्ता सुधारना इस अभियान में सम्मिलित है। इसके अंतर्गत रक्त की कमी, गर्भावस्था प्रेरित उच्च रक्तचाप, गर्भावधि मधुमेह आदि का उचित प्रबंधन किया जाएगा। उचित परामर्श सेवाएं एवं सेवाओं का उचित प्रलेखन रखा जाएगा। उन गर्भवती महिलाओं को अतिरिक्त अवसर प्रदान किया जाएगा, जो किसी भी कारण से अपनी प्रसव पूर्व जांच नहीं करा पाईं। प्रसूति/चिकित्सा के इतिहास और मौजूदा नैदानिक स्थिति के आधार पर उच्च जोखिम गर्भधारण की पहचान की जाएगी। उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं की पहचान एवं फॉलो-अप करना अभियान के महत्वपूर्ण घटकों में से एक है। स्टीकर, जो गर्भवती महिला की स्थिति एवं जोखिम के कारक को दर्शाएगा, इस स्टीकर को एमसीपी कार्ड पर हर जांच के दौरान जोड़ा जाएगा। सामान्य गर्भावस्था वाली महिला के लिए हरा स्टीकर और उच्च जोखिम वाली महिला के लिए लाल स्टीकर का प्रयोग किया जाएगा।
सरकारी केन्द्रों के साथ ही निजी क्षेत्र के विशेषज्ञों/चिकित्सकों को हर महीने की नौ तारीख को उनके जिलों में सरकारी चिकित्सकों के प्रयासों के साथ स्वैच्छिक सेवाएं प्रदान करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा हैं। इस अभियान का प्रारंभ इस आधार पर किया गया है कि यदि देश में हर एक गर्भवती महिला का चिकित्सा अधिकारी द्वारा परीक्षण एवं प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के दौरान उचित विधि से कम से कम एक बार जांच की जाए। इस अभियान का सही तरीके से पालन किया जाए, तो यह कार्यक्रम देश में होने वाली मातृ मृत्यु की संख्या को कम करने में महत्वपूर्ण एवं निर्णायक भूमिका निभा सकता हैं।
इस अभियान में निजी व स्वैच्छिक क्षेत्रों को सम्मिलित करने के लिए प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान एवं मोबाइल एप्लीकेशन को राष्ट्रीय पोर्टल पर विकसित किया गया है। इस अभियान के प्रचार-प्रसार को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। इसके लिए पुरस्कार दिए जाने की भी योजना है। देशभर के राज्यों एवं जिलों में प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के लिए ‘मैं शपथ लेता हूं’ के अंतर्गत व्यक्तिगत व समूह उपलब्धियों तथा स्वैच्छिक योगदान को सम्मानित करने के लिए पुरस्कार दिए जाएंगे।
निसंदेह, यह अभियान से शिशु और मातृ मृत्यु दर में कमी लाई जा सकेगी।
(डॉ सौरभ मालवीय की पुस्तक- 'विकास के पथ पर भारत' से)




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