Sunday, August 30, 2026

प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना : महिलाओं को मिलेगा लाभ


स्वास्थ्य और पोषण के मामले में महिलाओं की स्थिति अच्छी नहीं है। गर्भावस्था और स्तनपान कराने वाली महिलाओं को पौष्टिक भोजन की आवश्यकता होती है। एक महिला के पोषण की स्थिति और उसके स्वास्थ्य प्रभावों के साथ-साथ उसके शिशु के स्वास्थ्य और विकास के लिए भी महत्त्वपूर्ण है। यदि माता स्वस्थ होगी, तो उसका बच्चा भी स्वस्थ होगा। एक कुपोषित महिला अधिकांश तौर पर एक कम भार वाले शिशु को जन्म देती है। जब इस कुपोषण का प्रारंभ गर्भाशय से होता है, तो विशेष रूप से इसका प्रभाव महिला के सम्पूर्ण जीवन चक्र पर पड़ता है। 
आर्थिक और सामाजिक दबाव के कारण बहुत सी महिलाओं को अपनी गर्भावस्था के अंतिम समय तक परिवार के लिए परिश्रम करना पड़ता है। वे घर और बाहर दोनों स्थानों पर कार्य करती हैं। इसका बुरा प्रभाव उनके स्वास्थ्य पर पड़ता है। कुपोषित महिलाओं के बच्चे भी कुपोषित होते हैं। कई बार नवजात की मृत्यु तक हो जाती है। 

बाल विकास मंत्रालय ने राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम की धारा-4 (बी) के प्रावधानों के अनुसार गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं के लाभ के लिए सशर्त नकद हस्तांतरण योजना मातृत्व लाभ कार्यक्रम का गठन किया था। इस प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना के अंतर्गत गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं को नकद प्रोत्साहन प्रदान किया जाता है। यह इंदिरा गांधी मातृत्व सहयोग योजना ही है। यह योजना अक्टूबर 2010 में प्रायोगिक आधार पर प्रारंभ की गई थी। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इस योजना को और अधिक आकर्षक बनाने के लिए प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना का नया नाम दिया है। महिला और बाल कल्याण विभाग के अनुसार पहले की गर्भावस्था सहायता योजना इतनी सफल नहीं थी, यहां तक कि बहुत से लोग इसके बारे में जानते भी नहीं थे। इसीलिए इसका नाम बदलना पड़ा। इस योजना के अंतर्गत सरकार द्वारा गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं को पहले जीवित जन्म के लिए छह हजार रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी। इस योजना का कार्यान्वयन जनवरी 2017 और मार्च 2020 के बीच होगा और इसका कुल बजट 12,661 करोड़ रुपये  निर्धारित किया गया है। इस योजना के 12,661 करोड़ कुल रुपये में से 7,932 करोड़ रुपये केंद्र सरकार द्वारा वहन किए जाएंगे, जबकि शेष राशि संबंधित राज्य सरकारों द्वारा वहन की जाएगी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 31 दिसम्बर, 2016 को राष्ट्र को दिए गए अपने संबोधन में सभी जिलों में मातृत्व लाभ कार्यक्रम के अखिल भारतीय विस्तार की घोषणा की थी और यह 1 जनवरी, 2017 से लागू है। इससे करीब 51।70 लाख लाभार्थियों को प्रतिवर्ष लाभ मिलने की आशा है। 
गर्भावस्था सहायता योजना कई तरह से गर्भवती महिलाओं की सहायता करेगी, किन्तु इस योजना के दो मुख्य उद्देश्य हैं। पहला, काम करने वाली महिलाओं की मजदूरी के नुकसान की भरपाई करने के लिए मुआवजा देना और उनके उचित आराम और पोषण को सुनिश्चित करना। दूसरा, गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं के स्वास्थ्य में सुधार और नकदी प्रोत्साहन के माध्यम से अधीन-पोषण के प्रभाव को कम करना। 

कांग्रेस के नेतृत्व वाली संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन के शासनकाल में प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना को इंदिरा गांधी मातृत्व सहयोग योजना के रूप में नामित किया गया था, पर अब फिर से इसको दूसरा नाम दिया गया है। यह योजना महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा लागू की जाएगी। इस योजना से गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली महिलाओं को लाभ होगा। योजना की लाभ राशि लाभार्थी के बैंक खाते में सीधे भेज दी जाएगी। इस राशि का भुगतान किस्तों में किया जाएगा। पहली किस्त एक हजार रुपये गर्भावस्था के पंजीकरण के समय दिए जाएंगे। दूसरी किस्त में दो हजार रुपये छह महीने की गर्भावस्था के बाद कम से कम एक प्रसव पूर्व जांच करने के बाद लाभार्थी को दिए जाएंगे। तीसरी किस्त में शेष राशि बच्चे का जन्म पंजीकृत होने और बच्चे को बीसीजी, ओपीवी, डीपीटी और हेपेटाइटिस-बी सहित पहले टीके का चक्र शुरू होने पर दी जाएगी। यह योजना निम्न श्रेणी की गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली उन महिलाओं के लिए लागू नहीं होगी, जो केंद्रीय या राज्य सरकार या किसी सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम के साथ नियमित रोजगार में हैं। जो महिलाएं किसी अन्य योजना या कानून के तहत समान लाभ प्राप्तकर्ता हैं। 

इस योजना से महिलाओं को कुछ राहत मिल पाएगी।



(डॉ सौरभ मालवीय की पुस्तक- 'विकास के पथ पर भारत' से)

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