Friday, September 4, 2026

शादी शगुन योजना : लड़कियां खुशहाल होंगी


मुस्लिम समाज में लड़कियों की स्थिति दयनीय है. शिक्षा के मामले में भी उनकी स्थिति अच्छी नहीं है.  गरीबी के कारण भी मुस्लिम लड़कियां अपनी शिक्षा जारी नहीं रख पातीं. किसी भी समाज की समृद्धि के लिए शिक्षा अति आवश्यक है. केन्द्र सरकार मुस्लिम लड़कियों को शिक्षित करना चाहती है, ताकि उनके जीवन स्तर में सुधार हो सके. 

मुस्लिम लड़कियों को उच्च शिक्षा के लिए प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने एक योजना को स्वीकृति दी है. शादी शगुन नामक इस योजना के अंतर्गत सभी ग्रेजुएट मुस्लिम लड़कियों को 51 हजार रुपये तक की आर्थिक सहायता विवाह के उपहार के रूप में प्रदान की जाएगी। यह योजना देश के सभी राज्यों में लागू की गई है। मुस्लिम लड़कियां जो अपनी शादी से पहले किसी भी वर्ग में अपनी ग्रेजुएट स्तर की पढ़ाई पूरी कर लेती हैं, वे इस शादी शगुन योजना का लाभ उठाने के लिए योग्य होंगी। ऐसी मुस्लिम वर्ग की लड़कियां जिन्होंने स्नातक स्तर की परीक्षाएं छोड़ दी हैं। उन्हें भी इस योजना का लाभ नहीं मिल पाएगा।

उल्लेखनीय है कि केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय की अधीनस्थ संस्था ‘मौलाना आजाद एजुकेशन फाउंडेशन’ द्वारा सरकार को शादी शगुन योजना का प्रस्ताव दिया गया था। इस योजना को अल्पसंख्यक मंत्रालय से भी स्वीकृति मिल गई है। इस योजना का उद्देश्य अल्पसंख्यक समूहों में उच्च शिक्षा को प्रोत्साहित करना है। केन्द्र सरकार की यह योजना विशेष रूप से मुस्लिम समुदाय की लड़कियों को उच्च शिक्षा के लिए प्रेरित करने के लिए एक अच्छा कदम है। अल्पसंख्यक समुदायों में से कई लड़कियां अपनी ग्रेजुएट स्तर की पढ़ाई पूरी करने का अवसर प्राप्त नहीं कर पाती हैं और 18 वर्ष की आयु पूरी करने से पहले शादी कर लेती हैं। मुस्लिम लड़कियों की शिक्षा को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने मौलाना आजाद शिक्षा फाउंडेशन की सिफारिश पर शादी शगुन योजना को प्रारंभ करने का निर्णय लिया है।

मुस्लिम लड़कियों में शिक्षा की स्थिति अच्छी नहीं है, लेकिन मौलाना आजाद शिक्षा फाउंडेशन और केंद्र सरकार के इस कदम से इस लक्ष्य को हासिल करने में सहायता मिलेगी। शादी शगुन योजना मौजूदा बेगम हजरत महल छात्रवृत्ति में एक अतिरिक्त लाभ है, जो छह अधिसूचित अल्पसंख्यक समुदायों– मुस्लिम, ईसाई, सिख, बौद्ध, जैन और पारसी से संबंधित छात्रों को दी जाती है।
इस योजना के योग्य होने के लिए मुस्लिम लड़कियों को शादी से पहले अपनी ग्रेजुएशन की शिक्षा पूरी करनी होगी। इस योजना के लिए एक मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय या  कॉलेज से उत्तीर्ण ग्रेजुएट डिग्री आवश्यक है। मौलाना आजाद फाउंडेशन द्वारा वित्त पोषित बेगम हजरत महल छात्रवृत्ति का लाभ लेने वाली लड़कियां भी इस योजना के लिए योग्य हैं। शादी शगुन योजना का लाभ लेने के लिए ऑनलाइन भी आवेदन किया जा सकता है. 

गरीबी के कारण भी मुस्लिम लड़कियां विद्यालय नहीं जा पातीं. जो लड़कियां विद्यालय जाती हैं, उन्हें भी बीच में पढ़ाई छोड़नी पड़ती है. ऐसे में वे चाहकर भी उच्च शिक्षा प्राप्त नहीं कर पातीं. उल्लेखनीय है कि कुछ समय पूर्व अल्पसंख्यक कार्य मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी की अध्यक्षता में हुई मौलाना आजाद शिक्षा फाउंडेशन  की बैठक में लड़कियों को दी जाने वाली छात्रवृत्ति के संदर्भ में कुछ निर्णय किए गए, जिनमें शादी शगुन योजना प्रमुख है। इसके अतिरिक्त यह भी निर्णय लिया गया कि अब नौंवी और दसवीं कक्षा में पढ़ाई करने वाली मुस्लिम बच्चियों को 10 हजार रूपये की राशि प्रदान की जाएगी। अब तक ग्यारहवीं और बारहवीं कक्षा में पढ़ाई करने वाली मुस्लिम लड़कियों को 12 हजार रूपये की छात्रवृत्ति मिल रही थी।

इस योजना से उन समुदायों की लड़कियों में शिक्षा को प्रोत्साहन मिलेगा, जो अब तक शिक्षा से वंचित थीं. इतना ही नहीं, लड़कियों के विवाह के समय उनके माता-पिता को आर्थिक सहायता भी प्राप्त होगी. देश मंा ऐसी योजनाओं की अति आवश्यकता है.


(डॉ सौरभ मालवीय की पुस्तक- 'विकास के पथ पर भारत' से)

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