मनुस्मृति की आड़ में राहुल गांधी समाज को खांचों में बांटने की राजनीति कर रहे हैं। भारत का संविधान आज के भारत का आधार है और सामाजिक न्याय तथा समानता की गारंटी देता है। सदियों पुराने किसी ग्रंथ के चुनिंदा अंशों को लेकर आज के समाज, भाजपा या राष्ट्रवादी विचारधारा को कठघरे में खड़ा करना ऐतिहासिक और वैचारिक सरलीकरण है।
समाज को अतीत के विवादों में बांटने के बजाय शिक्षा, रोजगार, महिला सशक्तीकरण और अवसर की समानता पर संवाद होना चाहिए। भारत की शक्ति विभाजन में नहीं, सामाजिक समरसता और सबके विकास में है।





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