उपजाऊ कृषि भूमि से ही अच्छी फसल मिलती है, लेकिन उर्वरकों और कीटनाशकों के अत्यधिक प्रयोग के कारण कृषि भूमि निरंतर बंजर होती जा रही है। मिट्टी में पोषक तत्वों की कमी हो गई है। मिट्टी की उत्पादन क्षमता कम होने लगी है। इसका सीधा प्रभाव कृषि उत्पाद पर पड़ रहा है। उत्तराखंड के देहरादून स्थित मृदा जल संरक्षण अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान के अनुसार एश में पिछले कुछ वर्षों में उर्वरकों, कीटनाशकों और कीटनाशक दवाइयों के अत्यधिक प्रयोग के कारण प्रत्येक वर्ष 5334 लाख टन मिट्टी नष्ट हो रही है। दूसरे शब्दों में औसतन 16.4 टन प्रति हेक्टेयर उपजाऊ मिट्टी प्रत्येक वर्ष समाप्त हो रही है। कृषि जगत के लिए यह बहुत चिंता का विषय है, क्योंकि जब मिट्टी ही नहीं होगी, तो खेती कैसे होगी।
ऐसी स्थिति में नियमित अंतरालों पर मिट्टी के स्वास्थ्य के बारे में आकलन करने की आवश्यकता है, ताकि मिट्टी में पहले से ही मौजूद पोषक तत्वों का लाभ उठाते हुए किसान अपेक्षित पोषक तत्वों का प्रयोग सुनिश्चित कर सकें। केंद्र सरकार राष्ट्रीय मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना नामक योजना चला रही है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 19 फरवरी, 2015 को राजस्थान के श्रीगंगानगर जिले के सूरतगढ़ में इस योजना का शुभारंभ किया था। उन्होंने ’स्वस्थ धरा, खेत हरा’ का नारा दिया है, जिसका अर्थ स्वस्थ भूमि और हरित खेत है। उन्होंने पूरे देश में कृषि क्षेत्र में मिट्टी के स्वास्थ्य पर ध्यान देने का आह्वान किया, ताकि उतपादका बढ़ाई जा सके और समृद्धि लाई जा सके। स्वथ्य भूमि के लिए उपजाऊ मिट्टी की आवश्यकता है। उन्होंने वंदे मातरम गान की चर्चा करते हुए कहा कि भूमि को सुजलाम-सुफलाम बनाने के लिए मिट्टी का पोषण आवश्यक है। मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना इस दिशा में लाई गई है। उन्होंने मिट्टी के नियमित परीक्षण का आह्वान करते हुए कहा कि छोटे शहरों में भी उद्यमी मृदा परीक्षण प्रयोगशाला स्थापित कर सकते हैं।
उल्लेखनीय है कि मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना के अंतर्गत किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड मिशन के रूप में उपलब्ध कराया जाएगा। इस कार्ड में खेतों के लिए अपेक्षित पोषण/ उर्वरकों के बारे में फसलवार सिफारिशें की जाएंगी, ताकि किसान उपयुक्त आदानों का उपयोग करते हुए उत्पादकता में सुधार कर सकें। फसल के लिए सबसे आवश्यक तत्व मिट्टी है। यदि मिट्टी की गुणवत्ता ही सही नहीं होगी, तो फ़सल भी उन्नत और भरपूर नहीं हो सकती। इसलिए सरकार ने किसानों के लिए यह कार्ड जारी किया है। इस योजना के अंतर्गत तीन वर्ष के अंदर पूरे भारत में लगभग 14 करोड़ किसानों को यह कार्ड जारी करने का उद्देश्य रखा गया है। इसके लिए अलग से 568.54 करोड़ रूपये का बजट भी रखा गया है।
सरकार बंजर हो रही भूमि के प्रति अत्यधिक गंभीर है। इस योजना के अंतर्गत मिट्टी के नमूने का पूरी तरह से निरिक्षण किया जाएगा। पूरा निरिक्षण करने के बाद मृदा स्वास्थ्य कार्ड में रिपोर्ट तैयार की जाएगी। सबसे पहले अलग-अलग खेतों की मिट्टी के नमूनों को एकत्रित किया जाएगा। इसके बाद इसे लैब में परिक्षण के लिए भेजा जाएगा और लैब के अंदर विशेषज्ञ इसकी अच्छी तरत से जांच करेंगे। इसके बाद विशेषज्ञ कांच के परिणाम का विश्लेषण करेंगे। फिर वे विभिन्न मिट्टी के नमूनों के गुणों और कमियों की सूची बनाएंगे। यदि मिट्टी में कुछ कमी है, तो उसके सुधार के लिए सुझाव देंगे और उसकी एक सूची बनाएंगे। इसके बाद सरकार किसानों के लिए मृदा स्वास्थ्य कार्ड में पूरी जानकारी छापेगी। यह जानकारी इस तरीके से दी जाएगी, जिससे किसान इसे आसानी से अच्छी तरह से समझ सकें। फिर किसानों को एक मृदा स्वास्थ्य कार्ड दिया जाएगा, जिसमें किसानों के भूमि की मिट्टी की विशेषताओं के बारे में जानकारी होगी कि मिट्टी की कार्यात्मक विशेषताएं क्या हैं, मिट्टी में पानी और विभिन्न पोषक तत्वों की उपलब्धता कैसी है। यदि मिट्टी में अतिरिक्त गुण पाए जाते हैं, तो कार्ड में उसकी अलग सूची दी जाएगी। कुछ सुधार के उपाय बताए जाएंगे, जिससे किसान अपनी मिट्टी की कमियों को सुधारने के लिए आवश्यक उपाय कर सकें। उन्हें एक सूची दी जाएगी कि उनकी भूमि में किस प्रकार की फसल अच्छे से उग सकती है, जिससे उन्हें अधिकतम लाभ हो। इसके अतिरिक्त उन्हें यह भी बताया जाएगा कि उनके खेत की मिट्टी में क्या सुधार करने की आवश्यकता है। वास्तव में मृदा स्वास्थ्य कार्ड, एक प्रकार का रिपोर्ट कार्ड है, जो मिट्टी के गुण के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान करेगा। यह मिट्टी के प्रकार के बारे में, पोषक तत्व सामग्री, आवश्यक खाद, फसल के लिए उपयुक्त तापमान और वर्षा की स्थिति आदि के बारे में भी जानकारी उपलब्ध कराएगा। इस योजना का मुख्य उद्देश्य खाद के उपयोग से मिट्टी के आधार और संतुलन को बढ़ावा देना है, जिससे किसानों को कम लागत में अधिक उत्पाद प्राप्त हो सके। यह रिपोर्ट किसानों को उनके खेत या भूमि के लिए तीन वर्ष में एक बार दी जाएगी।
यह योजना किसानों के लिए बहुत ही लाभदायक है। देश के कई राज्यों में किसानों को उनकी मिट्टी के बारे में रिपोर्ट पहले से ही दी जा रही थी। कुछ किसान शिक्षित थे, जो अपनी मिट्टी के गुण-दोषों को अच्छे समझ सकते थे। लेकिन देश में ऐसे बहुत से अशिक्षित किसान है, जो यह नहीं जानते कि उनके खेत की मिट्टी किस प्रकार की है। उन्हें अधिकतम उपज प्राप्त करने के लिए किस तरह की फसलों को विकसित करना चाहिए। इसलिए पूरे देश में इस योजना को लागू करना अत्यधिक आवश्यक था। इस योजना के कारण अब किसान मिट्टी की प्रकृति की जानकारी के साथ यह भी समझ पाएंगे कि उन्हें कौन-सी फसल उगानी चाहिए, उर्वरक और कीटनाशक की संतुलित मात्रा क्या होनी चाहिए। अधिकतर किसान अपने अनुभव के आधार पर ही मिट्टी के गुण-दोष, फसलों का बढ़ना आदि जानते हैं। मगर अधिकतर किसान यह नहीं जानते कि मिट्टी की स्थिति को कैसे सुधारा जा सकता है। इसके कारण उन्हें समस्या का सामना करना पड़ता है.
किसानों की मदद के लिए मृदा स्वास्थ्य कार्ड एप लांच किया गया है। इस ऐप से क्षेत्र स्तर के कार्यकर्ताओं को लाभ होगा। नमूना संग्रह के समय खेत से नमूना पंजीकरण विवरण इकट्ठा करने में यह मोबाइल ऐप स्वचालित रूप से जीआईएस समन्वय को एकत्रित करता है और उस स्थान को इंगित करता है, जहां से क्षेत्र के कार्यकर्ताओं द्वारा मिटटी का नमूना लिया जाता है। यह ऐप राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के लिए विकसित अन्य जियोटैंगिग ऐप की तरह काम करता है। ऐप में किसानों के नाम, आधार कार्ड नंबर, मोबाइल नंबर, लिंग, पता, फसल विवरण आदि दर्ज होता है। इसके अतिरिक्त स्वायल हेल्थ कार्ड पोर्टल को अब समेकित उर्वरक प्रबंधन सिस्टम से जोड़ दिया गया है और मृदा स्वास्थ्य कार्ड सिफारिश के अनुसार उर्वरकों के वितरण का कार्य पॉयलेट आधार पर कई जिलों में शुरू कर दिया गया है।
उल्लेखनीय है कि शुरू में मृदा स्वास्थ्य कार्ड 14 स्थानीय भाषाओं में तैयार किए जा रहे थे, लेकिन अब कुमाऊनी, गढ़वाली, खासी, गारो जैसी स्थानीय बोलियों में भी कार्ड तैयार किए जा रहे हैं, ताकि इन बोलियों को बोलने वाले किसानों को उनकी अपनी बोली में कार्ड मिल सकें।
नियमित रूप से मिट्टी की जांच होने से किसानों को लम्बे समय तक मिट्टी को स्वस्थ रखने का रिकॉर्ड पाने में सहायता मिलेगी। इसके अनुसार वे इसका अध्ययन कर अलग मिट्टी के प्रबंधन के तरीकों के परिणामों का मुल्यांकन कर सकेंगे। यह कार्ड किसानों के लिए बहुत लाभदायक सिद्ध हो सकता है। इससे किसान अपने खेत की मिट्टी को सुधार सकेंगे। उर्वरकों और केटनाशकों की संतुलित मात्रा का प्रयोग करते हुए अधिक पैदावार ले सकेंगे। समय पर खेत की मिट्टी का उपचार होने के कारण कृषि भूमि बंजर होने से भी बच जाएगी।
(डॉ सौरभ मालवीय की पुस्तक- 'विकास के पथ पर भारत' से)




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