Thursday, August 20, 2026

दीन दयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना : गांवों में उजियारा होगा


देश के अधिकतर गांवों में आज भी विद्युत संकट एक चुनौती बना हुआ है। ग्रामीण क्षेत्रों में उपभोक्ताओं के बदलते आधार, जीवन स्तर में सुधार के कारण बिजली की मांग दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है, जिसके लिए ग्रामीण मूलभूत ढांचे में वृद्धि की आवश्यकता है। देश के ग्रामीण कृषि और गैर-कृषि उपभोक्ताओं को आमतौर पर स्थानीय वितरण नेटवर्क से सेवाएं मिलती हैं। देश के अनेक ग्रामीण क्षेत्रों को अपर्याप्त विद्युत आपूर्ति का सामना करना पड़ रहा है। परिणामस्वरूप जन उपयोगी वितरण सेवाओं को लोड शेडिंग करने के लिए बाध्य होना पड़ता है, जिसके कारण कृषि और गैर-कृषि उपभोक्ताओं के लिए विद्युत की आपूर्ति प्रभावित होती है। ग्रामीण क्षेत्रों में पर्याप्त विद्युत न मिलने के कारण कृषि कार्य बुरी तरह प्रभावित होते हैं। इससे किसानों को बहुत हानि होती है।

ग्रामीण क्षेत्रों की विद्युत समस्या से छुटकारा दिलाने के लिए केन्द्र सरकार ने दीन दयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना बनाई है। इसका उद्देश्य देश के ग्रामीण क्षेत्रों के उपभोक्ताओं को निरंतर बिजली की आपूर्ति प्रदान करना है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 20 नवंबर, 2014 को इसे प्रारंभ किया। इस योजना के अंतर्गत सरकार ने 1000 दिनों के भीतर 1 मई,  2018 तक 18,452 अविद्युतीकृत गांवों का विद्युतीकरण करने का निर्णय लिया है। इस योजना के लिए कुल 43 हजार 33 करोड़ के निवेश की आवश्यकता है। योजना की पूरी अवधि में केन्द्र सरकार 33 हजार 4 सौ 53 करोड़ रुपये की सहायता देगी। यह योजना मौजूदा राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना को प्रतिस्थापित करेगी, किन्तु राजीव गांधी विद्युतीकरण योजना की सुविधाओं को दीन दयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना की नई योजना में सम्मिलित किया गया है और राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना की बची हुई राशि को इसमें सम्मिलित किया जाएगा। यह योजना विद्युत मंत्रालय के प्रमुख कार्यक्रमों में से एक है और बिजली की निर्बाध आपूर्ति की सुविधा को बेहतर बनाएगी। इसससे 24 घंटे बिजली की आपूर्ति में सहायता मिलेगी।

इस योजना के अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि एवं गैर कृषि उपभोक्ताओं की आपूर्ति को सही तरीके से बहाल करने के लिए कृषि और गैर कृषि फीडरों का पृथक्करण किया जाएगा। ग्रामीण क्षेत्रों में ट्रांसफार्मर / फीडरों / उपभोक्ताओं की नपाई सहित उप-पारेषण और वितरण की आधारभूत संरचना का सुदृढ़ीकरण एवं आवर्धन होगा। इसके अतिरिक्त राजीव गांधी विद्युतीकरण योजना के अंतर्गत पहले से ही स्वीकृत माइक्रो ग्रिड और ऑफ ग्रिड वितरण नेटवर्क एवं ग्रामीण विद्युतीकरण परियोजनाओं को पूरा किया जाना है।

मौजूदा राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना को दीन दयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना में समाहित किया गया है। सभी डिस्कॉम इस योजना के तहत वित्तीय सहायता के पात्र हैं। इस योजना के अंतर्गत निजी डिस्कॉम और राज्य के विद्युत विभागों सहित सभी डिस्कॉम वित्तीय सहायता के पात्र हैं। डिस्कॉम ग्रामीण बुनियादी ढांचे को मजबूत बनाने लिए विशिष्ट नेटवर्क की आवश्यकता को प्राथमिकता देंगे और योजना के तहत कवरेज के लिए परियोजनाओं की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार करेंगे। ग्रामीण विद्युतीकरण निगम लिमिटेड योजना के कार्यान्वयन और संचालन के लिए नोडल एजेंसी है। यह विद्युत मंत्रालय और केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण को इस योजना के कार्यान्वयन पर वित्तीय और भौतिक दोनों प्रगति को दर्शाते हुए मासिक प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करेगा। समय-समय पर इस परियोजना के कार्यान्वयन के लिए आवश्यक सभी दिशा निर्देशों और स्वरूपों को अधिसूचित किया जाएगा। निगरानी समिति को प्रस्तुत करने से पूर्व विस्तृत परियोजना रिपोर्ट का मूल्यांकन करना होगा। स्वीकृति के लिए निगरानी समिति की बैठकों का आयोजन करने के लिए संबंधित सभी काम संचालित करना होगा। विस्तृत परियोजना रिपोर्ट के प्रस्तुतीकरण और परियोजनाओं के मासिक आय योजना को संधारित करने के लिए एक समर्पित वेब पोर्टल का विकास किया जाएगा। साथ ही कार्यों की गुणवत्ता सहित परियोजनाओं की भौतिक और वित्तीय प्रगति की निगरानी भी सुनिश्चित की जाएगी। 

इस योजना से ग्रामीणों विशेषकर किसानों को बहुत लाभ होगा। सभी गांवों और घरों का विद्युतीकरण किया जाएगा। किसानों को पर्याप्त विद्युत उपलब्ध होने से वे समय पर कृषि कार्य कर पाएंगे। समय पर खेतों की सिंचाई हो सकेगी, जिससे कृषि उपज में वृद्धि होगी। इसके साथ ही छोटे और कुटीर उद्यमों का विकास होगा और इससे रोजगार के नये अवसर उपलब्ध होंगे। विद्युत से स्वास्थ्य, शिक्षा, बैंकिंग सेवाओं में सुधार होगा। विद्युत होगी, तो गांवों में रेडियो, टेलीफोन, टेलीविजन, इंटरनेट सेवाओं का भी विस्तार होगा। इसके अलावा स्कूलों, पंचायतों, अस्पतालों और पुलिस स्टेशनों को भी पर्याप्त बिजली उपलब्ध कराई जा सकेगी। बिजली पर्याप्त की उपलब्धता के कारण सामाजिक विकास होगा।  

निगरानी समिति परियोजनाओं को स्वीकृति देगी और इस योजना के कार्यान्वयन की निगरानी करेगी। योजना के अंतर्गत निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुसार इस योजना के कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए विद्युत मंत्रालय, राज्य सरकार और डिस्कॉम के बीच उपयुक्त त्रिपक्षीय समझौते को निष्पादित किया जाएगा। राज्य विद्युत विभागों के मामलों में द्विपक्षीय समझौते को निष्पादित किया जाएगा।  परियोजना को टर्नकी आधार पर लागू किया जाएगा। खुली प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया के अनुसार निर्धारित मूल्य के आधार पर टर्नकी अनुबंध प्रदान किया जाएगा। निगरानी समिति द्वारा अनुमोदन की सूचना के तीन महीने के भीतर परियोजनाओं को सम्मानित किया जाना है। असाधारण परिस्थितियों में निगरानी समिति के अनुमोदन के साथ आंशिक टर्नकी / विभागीय आधार पर निष्पादन अनुमति दी जाएगी। इस योजना के अंतर्गत परियोजनाओं को कार्य पत्र जारी होने की तिथि से 24 महीने की अवधि के भीतर पूरा कर लिया जाना सुनिश्चत किया गया है।

इस योजना का अनुदान भाग विशेष श्रेणी के राज्यों के अलावा अन्य राज्यों के लिए 60 प्रतिशत (निर्धारित मील के पत्थर की उपलब्धि पर 75 प्रतिशत तक) और विशेष श्रेणी के राज्यों के लिए 85 प्रतिशत (निर्धारित मील के पत्थर की उपलब्धि पर 90 प्रतिशत तक) है। अतिरिक्त अनुदान के लिए मील के पत्थर योजना को समय पर पूरा करना, प्रति प्रक्षेपवक्र समग्र तकनीकी एवं वाणिज्यिक हानि में कमी और राज्य सरकार द्वारा अनुदान का अग्रिम रिलीज हैं। सभी पूर्वोत्तर राज्यों सिक्किम, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड सहित को विशेष राज्यों की श्रेणी में सम्मिलित किया गया हैं।

इस परियोजना को मिशन मोड के आधार पर लिया गया है और विद्युतीकरण के लिए कार्यान्वयन सारणी को 12 महीने की समय सीमा में सीमित करना एवं ग्राम विद्युतीकरण प्रक्रिया को निगरानी के लिए निर्धारित समय सीमा के 12 चरणों के मील के पत्थर में विभाजित किया गया है। अप्रैल 2015 से 14 अगस्त, 2015 तक कुल 1654 गांवों को विद्युतीकृत किया गया और केन्द्र सरकार द्वारा मिशन मोड रूप में पहल करने के बाद 15 अगस्त, 2015 से 17 अप्रैल, 2016 तक 5689 अतिरिक्त गांवों को विद्युतीकृत किया गया। प्रगति में और तेजी लाने के लिए ग्राम विद्युत अभियंता के माध्यम से निगरानी की जा रही है एवं मासिक आधार पर प्रगति की समीक्षा, योजना और निगरानी की बैठक आयोजित की जा रही है। राज्य डिस्कॉम के साथ विद्युतीकरण के स्तर पर वाले गांवों की सूची साझा करने का कार्य भी चल रहा है। ऐसे गांवों की पहचान की जा रही है, जहां प्रगति में देरी हो रही है। 

वास्तव में ग्रामीण क्षेत्रों में विद्युत की आपूर्ति करने वाली वितरण कम्पनियों की वित्तीय हालत खराब होने के कारण वितरण नेटवर्क में निवेश कम हुआ है। विश्वसनीयता और गुणवत्ता बढ़ाने के लिए आपूर्ति-वितरण नेटवर्क को सुदृढ़ बनाने की आवश्यकता है। बिजली वितरण की व्यावसायिक व्यवहारिकता में सुधार के लिए उपभोक्ताओं की सभी श्रेणियों की मीटरिंग करने की आवश्यकता है।
निसंदेह दीन दयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना से ग्रामीण क्षेत्रों में पर्याप्त विद्युत पहुंचाई जा सकेगी और ग्रामों में उजियारा हो जाएगा।



(डॉ सौरभ मालवीय की पुस्तक- 'विकास के पथ पर भारत' से)

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