Friday, August 21, 2026

महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम : बेरोजगारों को काम मिला

जीविकोपार्जन के लिए किसी भी व्यक्ति को कार्य की आवश्यकता होती है. देश में बेरोजगारी एक बड़ी समस्या है, जो दिन-प्रतिदिन बढ़ रही है। बेरोजगारी कई समस्याओं की जड़ है. बेरोजगार युवा मानसिक तनाव का शिकार हो जाते हैं, वे नशे की लत के आदी बन जाते हैं, अकसर युवा भटक जाते हैं. वे आपराधिक दलदल में फंस जाते हैं. इसके कारण उनका जीवन तो नष्ट होता ही है, साथ ही परिवार के मान-सम्मान पर भी बुरा प्रभाव पड़ता है. बेरोजगार युवकों द्वारा आत्महत्या करने के समाचार भी सुनने को मिलते रहते हैं. जनवरी 2018 में पंजाब के अमृतसर के निवासी रोहित ठाकुर ने फांसी लगाकर जान दे दी. बेरोजगार होने के कारण वह अपने परिवार का पालन-पोषण ठीक से नहीं कर पा रहा था. इसके कारण वह तनाव में रहता था. इसी महीने राजस्थान के अजमेर के किशन सिंह ने भी बेरोजगारी से तंग आकर फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली. इसी जनवरी के महीने में उत्तराखंड के बायखला सेलाकुई के निवासी प्रेम सिंह ने भी फांसी लगाकर अपनी इहलीला समाप्त कर ली. वह भी रोजगार न मिलने के कारण बहुत दुखी रहता था. बेरोजगारी के कारण उसके घर में कलेश रहता था. 

बेरोजगारी की समस्या से निपटने के लिए कांग्रेस नेतृत्व वाली संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार ने एक महत्वकांक्षी योजना आरंभ की थी. महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम एक रोजगार गारंटी योजना है. कांग्रेस नेतृत्व वाली संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार ने इसे लागू किया था. राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम 25 अगस्त 2005 को पारित हुआ. इसका पहला चरण 2 फरवरी 2006 से आंध्र प्रदेश के अनंतपुर जिले से शुरू हुआ. उस समय देश के 200 जिलों को इसमें सम्मिलित किया गया. इसके दूसरे चरण 2007- 08 से देश के 130 और जिलों को इसमें सम्मिलित किया गया. फिर इसके तीसरे चरण में 1 अप्रैल 2008 से देश के सभी जिलों में इस योजना को लागू कर दिया गया. शुरू में इसे राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम कहा जाता था, लेकिन 2 अक्टूबर 2009 को इसका पुनः नामकरण किया गया और इसे महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम कहा जाने लगा. 

यह योजना प्रत्येक वित्तीय वर्ष में किसी भी ग्रामीण परिवार के उन वयस्क सदस्यों को 100 दिन का रोजगार उपलब्ध कराती है, जो प्रतिदिन न्यूनतम मजदूरी पर सार्वजनिक कार्य-संबंधित अकुशल मजदूरी करने के लिए तैयार हैं. इस अधिनियम को ग्रामीण लोगों की क्रय शक्ति को बढ़ाने के उद्देश्य से शुरू किया गया था, मुख्य रूप से ग्रामीण भारत में रहने वाले लोगों के लिए अर्ध-कौशलपूर्ण या बिना कौशलपूर्ण कार्य, चाहे वे गरीबी रेखा से नीचे हों या ना हों. नियत कार्य बल का लगभग एक तिहाई महिलाओं से निर्मित है. 

यह अधिनियम, राज्य सरकारों को ’महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम योजनाओं’ को लागू करने के निर्देश देता है. इसके अंतर्गत केन्द्र सरकार मजदूरी की लागत, माल की लागत का तीन चौथाई और प्रशासनिक लागत का कुछ प्रतिशत वहन करती है. राज्य सरकारें बेरोजगारी भत्ता, माल की लागत का एक चौथाई और राज्य परिषद की प्रशासनिक लागत को वहन करती है. चूंकि राज्य सरकारें बेरोजगारी भत्ता देती हैं, उन्हें श्रमिकों को रोजगार प्रदान करने के लिए भारी प्रोत्साहन दिया जाता है. हालांकि बेरोजगारी भत्ते की राशि को निश्चित करना राज्य सरकार पर निर्भर है, जो इस शर्त के अधीन है कि यह पहले 30 दिनों के लिए न्यूनतम मजदूरी के एक चौथाई भाग से कम ना हो और उसके बाद न्यूनतम मजदूरी का आधे से कम ना हो. प्रति परिवार 100 दिनों का रोजगार या बेरोजगारी भत्ता सक्षम और इच्छुक श्रमिकों को हर वित्तीय वर्ष में प्रदान किया जाना चाहिए. दूसरे शब्दों में यदि योग्य आवेदक को मांग पर 15 दिनों के भीतर कार्य न मिल पाए तो बेरोजगारी भत्ता दिया जाएगा भत्ते की दर पहले 30 दिनों के लिए बेरोजगारी भत्ते की दर दूरी पर का 25 प्रतिशत होगा और उसके बाद 50 प्रतिशत हो जाएगी. स्थाई संपत्ति योजना का एक महत्वपूर्ण लक्ष्य है कि स्थाई संपत्ति का सृजन करना और ग्रामीण परिवारों की आजीविका का साधन आधार को मजबूत बनाना इस के कामों में ठेकेदारों द्वारा कार्य निष्पादन की अनुमति नहीं है. आवेदक के निवास से पांच किलोमीटर के भीतर काम उपलब्ध कराए जाएंगे. पांच किलोमीटर की परिधि से अधिक होने पर संबंधित व्यक्ति को परिवहन तथा आजीविका मद में 10 प्रतिशत अतिरिक्त मजदूरी प्रदान की जाएगी. मजदूरी भुगतान प्रति सप्ताह या अन्य मामलों में काम के पूरा होने के 15 दिनों के भीतर इस मजदूरी का आंशिक भाग नगद रूप से प्रतिदिन दिया जाएगा. यदि कोई व्यक्ति सूचित किए गए समय से 15 दिनों के भीतर कार्यस्थल पर रिपोर्ट नहीं करता, तो वह बेरोजगारी भत्ते का अधिकारी नहीं होगा, परंतु कार्य के लिए पुनः आवेदन दे सकेगा.

इसके अंतर्गत श्रमिकों को स्वच्छ पेयजल, बच्चों के लिए शेड, विश्राम के लिए समय, प्राथमिक उपचार बॉक्स के साथ कार्य के दौरान घटित किसी आकस्मिक घटना का सामना करने के लिए अनुसंधान उपलब्ध कराई जाएगी, कोई कामगार कार्यस्थल कार्य के दौरान घायल होता है, तो वह निशुल्क चिकित्सा सुविधा पाने का हकदार होगा. घायल श्रमिक के अस्पताल में भर्ती करवाने पर राज्य सरकार द्वारा निशुल्क चिकित्सा सुविधा दवा तथा घायल व्यक्ति की प्रतिदिन की मजदूरी राशि का 50 प्रतिशत पाने का अभी का अधिकारी होगा. कार्यस्थल पर दुर्घटना के कारण पंजीकृत मजदूर की स्थाई विकलांगता या मृत्यु हो जाने की स्थिति में मृत्यु या पूर्ण विकलांगता की स्थिति में केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित राशि या 25 हजार रुपये पीड़ित व्यक्ति के परिवार को दी जाएगी.

और पता जमा करते हैं. जांच के बाद पंचायत, घरों को पंजीकृत करता है और एक जॉब कार्ड प्रदान करता है. जॉब कार्ड में, पंजीकृत वयस्क सदस्य का ब्यौरा और उसकी फोटो शामिल होती है. एक पंजीकृत व्यक्ति निरंतर कार्य के कम से कम चौदह दिनों के लिए पंचायत या कार्यक्रम अधिकारी को लिखित रूप से आवेदन प्रस्तुत कर सकता है. आवेदन दैनिक बेरोजगारी भत्ता आवेदक को भुगतान किया जाएगा. इस अधिनियम के तहत पुरुषों और महिलाओं के बीच किसी भी प्रकार के भेदभाव की अनुमति नहीं है. इसलिए पुरुषों और महिलाओं को समान वेतन भुगतान किया जाना चाहिए. सभी वयस्क रोजगार के लिए आवेदन कर सकते हैं.

महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम ग्रामीण विकास और रोजगार के दोहरे लक्ष्य को प्राप्त करता है. इसके तहत कई कार्य कराए जाते हैं, जिनमें जल संरक्षण और जल संग्रहण, सुखा बचाओ, वनरोपण, वृक्षारोपण, सिंचाई नहरों के साथ शुक्ष्म एवं लघु सिंचाई कार्य, अनुसूचित जाति जनजाति समुदाय की भूमिका भूमि सुधार के लाभ लोगों की भूमिका इंदिरा आवास योजना के लाभ होगी परिवार के सदस्यों की भूमि के लिए सिंचाई की व्यवस्था परंपरागत जल स्रोतों का पुनरुद्धार, भूमि विकास बाढ़ नियंत्रण तथा सुरक्षा एवं प्रभावित क्षेत्र में जल निकासी की व्यवस्था, बारहमासी सड़क की सुविधा, सड़क निर्माण में जहां कहीं भी आवश्यक हो, वहां पर पुलिया का निर्माण करना, राज्य सरकार से परामर्श के बाद केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित अन्य कार्य सम्मिलित हैं.

पलायन को रोकने में भी महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम अत्यंय प्रभावी प्रमाणित हुआ है. ग्रामीण विकास राज्य मंत्री रामकृपाल यादव के अनुसार मंत्रालय ने सूखा प्रभावित क्षेत्रों में मनरेगा के तहत 50 दिन के लिए अतिरिक्त अकुशल रोजगार उपलब्ध कराने जैसे कदम उठाए हैं. वर्ष 2016-17 के दौरान मनरेगा के अंतर्गत सात सूखा प्रभावित राज्यों को 150 दिन के काम की अनुमति दी गई. वर्तमान वर्ष में इस प्रावधान के तहत केरल और पुद्दुचेरी को काम दिया गया है. मंत्रालय ग्रामीण और शहरी अंतर को पाटने तथा ग्रामीण क्षेत्रों से शहरी क्षेत्रों में होने वाले पलायन को रोकने के उद्देश्य से श्यामा प्रसाद मुखर्जी रूर्बन मिशन के अंतर्गत ग्रामीण केंद्रों का भी निर्माण कर रहा है. स्वतंत्र आकलनकर्ताओं के माध्यम से मंत्रालय द्वारा कराए गए अध्ययन में पाया गया कि महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम के परिणामस्वरूप विशेष मौसम में होने वाले पलायन में कमी आई है. अन्य अध्ययनों में भी दर्शाया गया कि घर के निकट काम देने और कार्यस्थल पर उचित माहौल उपलब्ध कराने से पलायन कम करने में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम का प्रत्यक्ष और सकारात्मक प्रभाव पड़ा है. उन्होंने कहा कि मंत्रालय द्वारा ऐसे अध्ययनों का सार ‘मनरेगा समीक्षा’ नामक प्रकाशन में दिया गया है.

ग्रामीण विकास मंत्रालय की सिफारिश पर राष्ट्रीय ग्रामीण विकास और पंचायती राज संस्थान ने पलायन की समस्या पर दो अध्ययन करवाए हैं. इनके नाम हैं- कठिन समय में होने वाले पलायन पर महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्यक्रम का प्रभाव : भारत के चयनित राज्यों का एक अध्ययन और जनजातीय लोगों के पलायन पर महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार अधिनियम का प्रभाव : पश्चिम बंगाल के जंगलमहल जिले में एक मामले का अध्ययन.

सरकार युवाओं को आत्मनिरभर बनाने पर विशेष बल दे रही है. राज्यसभा सांसद  महेश पोद्दार के अनुसार कि देश के युवा बेरोजगारों को बेरोजगारी भत्ता देकर आश्रित बनाने के स्थान पर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना ज्यादा श्रेयस्कर है. सरकार इसी दिशा में काम कर रही है. युवाओं को रोजगार के लिए तैयार करने की जरूरत पर है. देश के युवाओं को रोजगार के लिए तैयार करना चाहिए, उन्हें बेरोजगारी भत्ता देकर आश्रित नहीं बनाना चाहिए. देश की आबादी का एक बड़ा हिस्सा कृषि के माध्यम से रोजगार पाता है. केंद्र सरकार ने किसानों की आय दुगुनी करने का स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित किया है. स्पष्ट है कि सरकार ने जब किसानों की आय दुगुनी करने का लक्ष्य रखा है, तो कृषि क्षेत्र में रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे. रोजगार के अवसरों में यह बढ़ोतरी केवल परंपरागत कृषि कार्य में ही नहीं बल्कि मूल्य संवर्द्धन, प्रसंस्करण और विपणन के क्षेत्र में भी होगी. सरकार ने हर हाथ को हुनर, हर पेट को अनाज, हर घर में बिजली, हर घर तक पानी, हर घर तक सड़क और हर परिवार तक बैंक खाता के माध्यम से सामाजिक सुरक्षा का लक्ष्य भी निर्धारित किया है. ये तमाम योजनाएं प्रचुर मात्रा में रोजगार सृजन करेंगी, इसमें संदेह की कोई गुंजाइश नहीं है. 

वास्तव में बेरोजगारों को कार्य उपलब्ध कराने की यह एक प्रभावी योजना है. परंतु बढ़ती जनसंख्या के कारण लोगों को योजनाओं का उतना लाभ नहीं मिल पाता, जितनी उनसे अपेक्षा की जाती है. परंतु यह सत्य है कि इस योजना के कारण आज करोड़ों लोगों को रोजगार मिला है.


(डॉ सौरभ मालवीय की पुस्तक- 'विकास के पथ पर भारत' से)

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