डॉ. सौरभ मालवीय
उत्तर प्रदेश सरकार राज्य के कलाकारों को पूर्ण सादर-सम्मान दे रही है। इसका नवीनतम उदाहरण हिन्दी साहित्य एवं लोकनाट्य परंपरा के महान नाटककार एवं सुप्रसिद्ध कथावाचक पंडित राधेश्याम कथावाचक हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने 30 जून 2026 को बरेली में पंडित राधेश्याम कथावाचक स्मृति भवन ऑडिटोरियम में पंडित राधेश्याम कथावाचक की प्रतिमा का अनावरण किया।
ज्ञातव्य है कि पंडित राधेश्याम कथावाचक का जन्म 25 नवम्बर 1890 को बरेली के बिहारीपुर मोहल्ले में पंडित बांकेलाल के परिवार में हुआ था। पंडित राधेश्याम हिन्दी साहित्य के महान नाटककार एवं प्रसिद्ध कथावाचक थे। उनकी सर्वाधिक लोकप्रिय कृति ‘राधेश्याम रामायण‘ है, जिसे उन्होंने खड़ीबोली और लोकनाट्य शैली में 25 खंडों में पद्यबद्ध किया। मात्र 17 वर्ष की आयु में रचित इस अमर कृति ने देशभर में अभूतपूर्व लोकप्रियता प्राप्त की। उनके जीवनकाल में ही इसकी हिन्दी एवं उर्दू में कुल मिलाकर लगभग पौने दो करोड़ से अधिक प्रतियां प्रकाशित एवं विक्रय हुईं। पंडित राधेश्याम कथावाचक को स्वतंत्र भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेन्द्र प्रसाद ने भी राष्ट्रपति भवन आमंत्रित कर 15 दिनों तक श्रीराम कथा का श्रवण किया था। काशी हिन्दू विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए धन संग्रह के दौरान उन्होंने अपनी एक वर्ष की संपूर्ण आय महामना मदन मोहन मालवीय जी को समर्पित कर दी थी। अपनी आत्मकथा ‘मेरा नाटक काल‘ का लेखन भी पंडित राधेश्याम ने अपने जीवन के अंतिम चरण में किया।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि विरासत का सम्मान हमारी प्रगति का आधार है। जो समाज अपनी विरासत का सम्मान व संरक्षण करता है, उसी समाज के विकास का मार्ग भी प्रशस्त होता है। जो अपने पूर्वजों तथा अपनी विरासत की दुर्गति करता है, वह अपनी उन्नति की दुर्गति करता है। आज पंडित राधेश्याम कथावाचक की प्रतिमा के अनावरण का सौभाग्य उनके लिए अत्यंत प्रसन्नता की बात है। उनकी कथा सुनते-सुनते हम बड़े हुए हैं।
उन्होंने कहा कि महर्षि वाल्मीकिकृत रामायण ने देश को जोड़ने का कार्य किया। संत तुलसीदास जी ने श्रीराम नाम की ताकत का एहसास हमें कराया। जब तुलसीदास जी से लोगों ने कहा कि आप राज दरबार में जाएंगे, तो आपको भी नवरत्नों में शामिल किया जाएगा, तब उन्होंने कहा कि ‘मेरे राजा एक ही हैं और वह प्रभु श्रीराम हैं। जो कार्य संत तुलसीदास ने श्रीरामचरितमानस के माध्यम से लोगों को जोड़कर किया, वहीं कार्य पंडित राधेश्याम ने किया। उनके संवाद रामलीला मंचन का आधार बने। सनातन धर्म में पंडित राधेश्याम की महत्वपूर्ण भूमिका है, उनके प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करना हमारा दायित्व है। जटायु हों या हनुमान जी, प्रभु श्रीराम की भक्ति जिसने भी की, उसका उद्धार हुआ है।
उन्होंने कहा कि त्रेतायुग में जो कार्य महर्षि वाल्मीकि और मध्यकाल में जो कार्य संत तुलसीदास ने किया, वही कार्य आधुनिक काल में पंडित राधेश्याम कथावाचक ने किया है। सनातन भारत की आत्मा है। पंडित राधेश्याम का सनातन धर्म के प्रति बहुत बड़ा योगदान है। पंडित राधेश्याम जी ने राम नाम की महत्ता से हम सबको बहुत ही सरल भाषा में, सहजता के साथ संवादों के माध्यम से जागरूक किया। रामायण को लोक व्यवहार की बहुत सरल भाषा में प्रस्तुत किया। आज हमें उनकी मूर्ति के अनावरण के माध्यम से उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है।
उन्होंने कहा कि पंडित राधेश्याम ने अपनी लेखनी और कथावाचन से भारतीय संस्कृति, श्रीराम कथा एवं सनातन मूल्यों को जन-जन तक पहुंचाने का कार्य किया। उनका साहित्यिक योगदान भावी पीढ़ी के लिए सदैव प्रेरणास्रोत बनेगा। ऐसे महान साहित्यकारों और सांस्कृतिक विभूतियों का सम्मान करना समाज और शासन, दोनों का दायित्व है।
उन्होंने कहा कि वर्ष 1963 में पंडित राधेश्याम कथावाचक ने अपने भौतिक व नश्वर देह से मुक्ति प्राप्त की, लेकिन उनको वह सम्मान नहीं मिल सका, जो आज मिला है। पंडित राधेश्याम के घरको पर्यटन विभाग के माध्यम से म्यूजियम बनाया जाए। इस कार्य में राज्य सरकार पूरा सहयोग करेगी। इस म्यूजियम में पंडित जी की समस्त स्मृतियां संग्रहीत की जाएगी, जिससे आने वाली पीढ़ियां भी उसका लाभ प्राप्त कर सकती हैं।
इस अवसर पर वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री श्री सुरेश कुमार खन्ना, पशुधन एवं दुग्ध विकास मंत्री श्री धर्मपाल सिंह, वन एवं पर्या वरण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री अरुण कुमार सक्सेना, सहकारिता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री जेपीएस राठौर, बरेली के महापौर डॉ. उमेश गौतम सहित अन्य जनप्रतिनिधिगण, पंडित राधेश्याम कथावाचक के परिजन तथा अन्य सदस्यगण उपस्थित थे।


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