प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना : किसानों को आस बंधी
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भारत एक कृषि प्रधान देश है, जहां अधिकतक ग्रामीण कृषि पर आश्रित हैं। कृषि
किसानों का मुख्य व्यवसाय है, परंतु प्रतिवर्ष प्राकृतिक आपदाओं अथवा आगजनी के
कारण...
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देवरिया गंगा की साकार अनुभूति
कल शिवेश प्रताप के स्नेहिल आमंत्रण पर उनके गांव देवरिया गंगा जाने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। यह यात्रा केवल एक स्थान विशेष तक पहुंचना नहीं था, बल्कि अपनी जड़ों, अपनी संस्कृति और प्रकृति के समीप जाने का आत्मिक अवसर था।
गांव की पावन माटी, खेत-खलिहान, आम्र-वाटिकाएँ, स्वच्छ आकाश और शीतल समीर—सब मिलकर मानो जीवन का वास्तविक स्वरूप दिखा रहे थे। प्रकृति से संवाद सहज हो जाता है; न कृत्रिमता, न आडंबर—सिर्फ अपनापन और सरलता।
शिवेश प्रताप और उनके परिवार का आत्मीय स्वागत, बड़ों का आशीर्वाद और बच्चों की निष्कलुष मुस्कान ने मन को भाव-विभोर कर दिया। वास्तव में गांव संस्कारों का तीर्थ है—जहां रिश्ते औपचारिक नहीं, बल्कि आत्मिक होते हैं।
देवरिया गंगा की यह यात्रा स्मरण दिलाती है कि गांव हमारी पहचान है, हमारी जड़ है, और सच अर्थों में हमारा तीर्थ है।
Monday, March 2, 2026
मेरा गांव – मेरा तीर्थ
देवरिया गंगा की साकार अनुभूति
कल शिवेश प्रताप के स्नेहिल आमंत्रण पर उनके गांव देवरिया गंगा जाने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। यह यात्रा केवल एक स्थान विशेष तक पहुंचना नहीं था, बल्कि अपनी जड़ों, अपनी संस्कृति और प्रकृति के समीप जाने का आत्मिक अवसर था।
गांव की पावन माटी, खेत-खलिहान, आम्र-वाटिकाएँ, स्वच्छ आकाश और शीतल समीर—सब मिलकर मानो जीवन का वास्तविक स्वरूप दिखा रहे थे। प्रकृति से संवाद सहज हो जाता है; न कृत्रिमता, न आडंबर—सिर्फ अपनापन और सरलता।
शिवेश प्रताप और उनके परिवार का आत्मीय स्वागत, बड़ों का आशीर्वाद और बच्चों की निष्कलुष मुस्कान ने मन को भाव-विभोर कर दिया। वास्तव में गांव संस्कारों का तीर्थ है—जहां रिश्ते औपचारिक नहीं, बल्कि आत्मिक होते हैं।
देवरिया गंगा की यह यात्रा स्मरण दिलाती है कि गांव हमारी पहचान है, हमारी जड़ है, और सच अर्थों में हमारा तीर्थ है।
मेरे प्रेरणास्रोत: स्वामी विवेकानंद
गिरकर उठना, उठकर चलना... यह क्रम है संसार का... कर्मवीर को फ़र्क़ न पड़ता किसी जीत और हार का... क्योंकि संघर्षों में पला-बढ़ा... संघर्ष ही मेरा जीवन है...
-डॉ. सौरभ मालवीय
डॉ. सौरभ मालवीय
अपनी बात
सामाजिक परिवर्तन और राष्ट्र-निर्माण की तीव्र आकांक्षा के कारण छात्र जीवन से ही सामाजिक सक्रियता। बिना दर्शन के ही मैं चाणक्य और डॉ. हेडगेवार से प्रभावित हूं। समाज और राष्ट्र को समझने के लिए "सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और मीडिया" विषय पर शोध पूर्ण किया है, परंतु सृष्टि रहस्यों के प्रति मेरी आकांक्षा प्रारंभ से ही है।
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संप्रति
डॉ. सौरभ मालवीय
2/564, अवधपुरी खण्ड 2
खरगापुर, निकट प्राथमिक विद्यालय, गोमतीनगर विस्तार
2/564, अवधपुरी खण्ड 2
खरगापुर, निकट प्राथमिक विद्यालय, गोमतीनगर विस्तार
लखनऊ, उत्तर प्रदेश
पिन- 226010
मो- 8750820740
पिन- 226010
मो- 8750820740
ईमेल - malviya.sourabh@gmail.com
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डॉ. सौरभ मालवीय
एसोसिएट प्रोफेसर
पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग
लखनऊ विश्वविद्यालय
लखनऊ, उत्तर प्रदेश
मो- 8750820740
ईमेल - malviya.sourabh@gmail.com
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