- खेती भारत का बुनियादी उद्योग है.
- अन्न उत्पादन द्वारा आत्मनिर्भरता के बिना हम न तो औद्योगिक विकास का सुदृढ़ ढांचा ही तैयार कर सकते है और न विदेशों पर अपनी खतरनाक निर्भरता ही समाप्त कर सकते हैं.
- हमारा कृषि-विकास संतुलित नहीं है और न उसे स्थायी ही माना जा सकता है.
- कृषि-विकास का एक चिंताजनक पहलू यह है कि पैदावार बढ़ते ही दामों में गिरावट आने लगती है.
मां और मातृभूमि की पवित्र भावना ही विद्या भारती का संस्कार है : डॉ. सौरभ
मालवीय
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भेंटुआ (अमेठी)। विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान से सम्बद्ध काशी
प्रांत द्वारा आयोजित शिशु वाटिका प्रशिक्षण वर्ग एवं नव चयनित प्रशिक्षण वर्...



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