- खेती भारत का बुनियादी उद्योग है.
- अन्न उत्पादन द्वारा आत्मनिर्भरता के बिना हम न तो औद्योगिक विकास का सुदृढ़ ढांचा ही तैयार कर सकते है और न विदेशों पर अपनी खतरनाक निर्भरता ही समाप्त कर सकते हैं.
- हमारा कृषि-विकास संतुलित नहीं है और न उसे स्थायी ही माना जा सकता है.
- कृषि-विकास का एक चिंताजनक पहलू यह है कि पैदावार बढ़ते ही दामों में गिरावट आने लगती है.
सपनों को साकार करने का नया वर्ष
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सपनों को साकार करने का नया वर्ष
युवाओं के लिए वार्षिक योजना स्पष्टता, ध्यान एवं नियंत्रण प्रदान करती है। यह
केवल एक सूची नहीं है अपितु यह आपके भविष्य को...



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