निरालानगर - लखनऊ।
विद्या भारती पूर्वी उत्तर प्रदेश द्वारा आयोजित दो दिवसीय पाठ्यक्रम निर्माण हेतु कार्यशाला के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए डॉ. सौरभ मालवीय ने कहा कि लेखन मनुष्य को पूर्ण करता है। लेखन केवल शब्दों का संयोजन नहीं, बल्कि मनुष्य की संवेदनाओं, अनुभवों, ज्ञान और चिंतन की अभिव्यक्ति है।
उन्होंने कहा कि जब संवेदनाओं से भरा भाव ज्ञान और तर्क से निकलकर वैज्ञानिक सोच एवं प्रमाणिकता के आधार पर सिद्ध होता है, तब वह लेखन केवल अभिव्यक्ति नहीं रहता, बल्कि समाज और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक महत्वपूर्ण धरोहर बन जाता है।
डॉ. मालवीय ने कहा कि पाठ्यक्रम निर्माण में विषय की उपयोगिता, भारतीय ज्ञान परंपरा, आधुनिक विज्ञान, तकनीक और विद्यार्थियों की बदलती आवश्यकताओं का समन्वय आवश्यक है। ऐसा पाठ्यक्रम विद्यार्थियों में ज्ञान के साथ-साथ चिंतन, तर्क, संवेदना और सृजनात्मकता का विकास करता है।









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