उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने कहा कि संत शिरोमणि सद्गुरु रविदास जी महाराज जी का प्रकटीकरण काशी के सीर गोवर्धन में माघी पूर्णिमा के दिन हुआ था। उनकी दिव्य आभा से आलोकित होकर समाज ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ के निर्माण की दिशा में आगे बढ़ रहा है। सद्गुरु रविदास जी महाराज ने प्रत्येक नागरिक को वैष्णव परम्परा के अनुरूप जिस उपासना के लिए प्रेरित किया, वह जीवन में कर्म की प्रधानता व मन की शुद्धता को महत्व देता है तथा प्रत्येक नागरिक को लोक कल्याण के प्रति आग्रही बनाता है।
मुख्यमंत्री ने 1 फरवरी 2026 को लखनऊ में संत शिरोमणि सद्गुरु रविदास जी महाराज की 649वीं जयंती के अवसर पर सद्गुरु रविदास जी की प्रतिमा का अनावरण व सभागार का लोकार्पण किया। इस अवसर पर उन्होंने सद्गुरु रविदास जी की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें नमन किया। उन्होंने कहा कि रविदास जी का स्पष्ट मानना था कि ‘मन चंगा तो कठौती में गंगा’ अर्थात यदि आपका मन साफ है, तो सभी कुछ आपके कर्म पर निर्भर करता है। यदि आप अच्छा कर्म करेंगे, तो अच्छा फल पाएंगे तथा बुरा कर्म करेंगे, तो पाप से आपको कोई नहीं बचा सकता। जब सद्गुरु रविदास जी महाराज का इस धरा धाम पर प्रकटीकरण हुआ, वह गुलामी का कालखंड था। देश विदेशी आक्रान्ताओं से आतंकित व त्रस्त था। उस समय भी उन्होंने साधना की पवित्रता और साधना को कर्म की साधना के रूप में बदलने का कार्य किया।
उन्होंने कहा कि संत रामानंद जी से दीक्षा प्राप्त करने के उपरान्त सद्गुरु रविदास जी महाराज ने अपने कर्म की साधना के माध्यम से लोक कल्याण का मार्ग प्रशस्त किया। जगदगुरु रामानंदाचार्य ने मध्यकाल में 12 शिष्य बनाए, जो 12 अलग-अलग जातियों से थे। उन्होंने एक महिला को भी अपना शिष्य बनाया था। उस कालखंड में भी समाज को जोड़ने का जितना बड़ा कार्य हमारे इन संतों ने किया, वह अद्भुत था। उसी नींव पर वर्तमान भारत का निर्माण हुआ है। वही प्रेरणा गुलामी के बंधन को तोड़ने में हम सभी की प्रेरणा रही है।
उन्होंने कहा कि सद्गुरु रविदास जी महाराज ने 600 वर्ष पूर्व कहा था कि राज ऐसा होना चाहिए, जहां सभी को अन्न प्राप्त हो, अर्थात कोई भूखा न सोए और प्रत्येक व्यक्ति को सम्मानजनक जीवन जीने का अवसर मिल सके। कहा जाता है कि ‘वृथा न जाहिं देव ऋषि वाणी’ अर्थात एक संत की वाणी कभी व्यर्थ नहीं होती। इस भाव को मुगलों, ब्रिटिशर्स तथा आजादी के बाद में विभिन्न सरकारों ने भुला दिया, लेकिन वर्ष 2014 में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व एवं मार्गदर्शन में सबसे पहले देश के प्रत्येक गरीब के बैंक अकाउंट खुलवाए गये, जिससे शासन की योजनओं का लाभ सीधे उनके अकाउंट में प्राप्त हो सके।
विगत 6 वर्षों से प्रत्येक जरूरतमंद को निःशुल्क राशन और स्वास्थ्य सुविधा का लाभ ‘सबका साथ और सबका विकास’ के भाव से प्रदान किया जा रहा है। यह सतगुरु रविदास जी महाराज की प्रेरणा से सम्भव हो पाया है। प्रत्येक घर में शौचालय का निर्माण कराया गया, ताकि हर व्यक्ति को सम्मानजनक जीवन जीने की प्रेरणा दी जा सके। गरीबों को अपना सिर ढकने के लिए आवास उपलब्ध कराया गया। रसोई गैस तथा बिजली के निःशुल्क कनेक्शन उपलब्ध कराए गये। आज यहां सद्गुरु रविदास जी महाराज की भव्य प्रतिमा और सभागार के लोकार्पण का अवसर प्राप्त हुआ। अब सर्दी, गर्मी, बरसात आदि किसी भी मौसम में संत रविदास सेवा समिति को कष्ट नहीं उठाना पड़ेगा। यहां पर आराम से बैठकर कार्यक्रम सम्पन्न किए जा सकेंगे। भजन मंडली तथा भक्तगण आराम से बैठ पाएंगे। वक्तागण मंच से उद्बोधन कर सकेंगे। वर्ष 2017 के पूर्व संत रविदास जी महाराज की पावन जन्मभूमि सीर गोवर्धन, काशी में जाने का रास्ता नहीं था। लंगर का हॉल नहीं था। आज वहां देश भर से लगभग दो लाख श्रद्धालु आए हैं।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री जी की प्रेरणा से डबल इंजन सरकार ने सद्गुरु रविदास जी महाराज की जन्मभूमि सीर गोवर्धन को चार लेन सड़क से जोड़ा है। वहां संत रविदास जी महाराज के नाम पर भूमि क्रय कर विभिन्न कार्यक्रमों के लिए जमीन उपलब्ध करवाई गयी। लंगर हॉल का निर्माण किया गया, जहां 500 लोग एक साथ लंगर प्राप्त कर सकते हैं। संत रविदास जी महाराज की भव्य प्रतिमा स्थापित की गई, जिसे पांच किलोमीटर दूर से भी देखा जा सकता है। आज सीर गोवर्धन भव्य स्वरूप युक्त धाम बन गया है। उन्होंने कहा कि हमें अपने महापुरुषों व संतों के प्रति श्रद्धा और आदर का भाव रखना चाहिए। गुलामी के कालखंड का स्मरण कर विभाजनकारी ताकतों को फिर से सिर उठाने का अवसर नहीं देना चाहिए। हम सभी को एकजुट होकर समाज की संरचना को मजबूत करते हुए आगे बढ़ना है। हमारी एकता इन पूज्य संतों की दिव्य साधना और उससे प्राप्त सिद्धि का प्रतिफल इस देश को प्रदान करेगी। देश की एकता व सम्प्रभुता के लिए हम सभी को मिलकर कार्य करना होगा। यही सद्गुरु रविदास जी महाराज की प्रेरणा थी।
उन्होंने कहा कि डबल इंजन सरकार द्वारा प्रदेश भर में सनातन धर्म से जुड़े स्थलों के पुनरोद्धार का कार्य किया जा रहा है। इनमें लालापुर में महर्षि वाल्मीकि, राजापुर में संत तुलसीदास, चित्रकूट धाम, माँ विन्ध्यवासिनी धाम, अयोध्या धाम, नैमिषारण्य धाम, सुकतीर्थ, मथुरा- वृंदावन तथा भगवान बुद्ध से जुड़े बौद्ध सर्किट आदि 1200 से 1500 स्थानों पर किया गया कार्य सम्मिलित है। यह सभी कार्य प्रधानमंत्री जी के मंत्र ‘सबका साथ सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास’ मंत्र पर चलकर प्रदेश के प्रत्येक जनपद में बिना भेदभाव किए गये। इस मंत्र की प्रेरणा का प्रभाव आज यहां हम सभी को देखने को मिल रहा है। उन्होंने कहा कि आज माघी पूर्णिमा के पावन अवसर पर प्रयागराज त्रिवेणी में प्रातः 10 बजे तक लगभग एक करोड़ श्रद्धालु स्नान कर चुके हैं। प्रयागराज में लाखों की संख्या में कल्पवासी विगत एक माह से व्रत, साधना तथा भगवत भजन में लीन थे। आज उनकी साधना का एक माह पूर्ण हुआ है। कठिन परिस्थितियों में सर्दी, गर्मी तथा बरसात की परवाह किए बिना कठिन साधना से जूझते हुए तपा हुआ शरीर ही संकट के समय चुनौती का सामना करने के लिए स्वयं को तैयार कर पाएगा। श्रद्धालुजन माँ गंगा, माँ यमुना तथा माँ सरस्वती की त्रिवेणी में आस्था की डुबकी लगाकर अपने घर को प्रस्थान करेंगे। यह संतों की प्रेरणा तथा भारत की सनातन परम्परा है। माघी पूर्णिमा के अवसर पर दिव्य स्नान का लाभ लेने वाले श्रद्धालुजन को बधाई एवं मंगलमय शुभकामनाएं। माँ गंगा से प्रार्थना है कि वह उनकी मनोकामनाओं को पूर्ण करें। सद्गुरु रविदास जी महाराज से प्रार्थना है कि वह अपने सभी भक्तों का कल्याण करें।
उन्होंने सद्गुरु रविदास जी महाराज की दिव्य वाणी और दिव्य सिद्धि का उदाहरण देते हुए कहा कि जब रविदास जी के सहयोगी ने उनसे कहा कि चलो रविदास गंगा स्नान करते हैं, तो उन्होंने कहा कि मेरे पास आज ज्यादा काम है। इस कार्य को पूर्ण करना आवश्यक है। मेरी ओर से माँ गंगा को दमड़ी समर्पित कर देना। उनके सहयोगी संत ने माँ गंगा में स्नान कर उनकी पूजा अर्चना की, लेकिन इसका कोई प्रभाव परिलक्षित नहीं हुआ। लेकिन जैसे ही, उन्होंने रविदास जी द्वारा प्रदान की गई दमड़ी माँ गंगा को समर्पित की, तो माँ गंगा ने वह दमड़ी अपना हाथ बढ़ाकर स्वीकार की। जब उन्होंने माँ गंगा से पूछा कि यह कैसे सम्भव हुआ, तो उन्होंने उत्तर दिया कि रविदास मेरे सच्चे भक्त हैं।
उन्होंने कहा कि माँ गंगा भी अपने सच्चे भक्तों को पहचानती हैं। कहा गया है कि ‘जैसी चाह, वैसी राह’ अर्थात
हम जैसा भाव अपने मन में रखेंगे, हमें उसी प्रकार के परिणाम प्राप्त होंगे।
कार्यक्रम को उपमुख्यमंत्री श्री ब्रजेश पाठक ने भी सम्बोधित किया।



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