Saturday, January 31, 2026

हिन्दू सम्मेलन में संघ के विचारों से समाज को दिशा मिलती है : सौरभ मालवीय






गोमतीनगर (लखनऊ)। हिन्दू समाज की एकता, सांस्कृतिक चेतना और राष्ट्र के प्रति दायित्वबोध ही भारत की वास्तविक शक्ति है। संघ का कार्य व्यक्ति निर्माण से राष्ट्र निर्माण की दिशा में सतत् प्रयास है।
सौरभ मालवीय ने अपने वक्तव्य में कहा कि हिन्दू समाज एक जीवन दर्शन है, जो समरसता, सेवा, त्याग और लोकमंगल की भावना से संचालित होता है। आज आवश्यकता है कि समाज संगठित होकर अपनी सांस्कृतिक जड़ों को समझे और भावी पीढ़ी को राष्ट्रवादी संस्कार प्रदान करे।
उन्होंने कहा कि आरएसएस ने अपने शताब्दी-समीप यात्रा में बिना किसी भेदभाव के समाज के हर वर्ग को जोड़ने का कार्य किया है। सेवा कार्य, शिक्षा, सामाजिक समरसता और राष्ट्रभक्ति के क्षेत्र में स्वयंसेवकों का योगदान अतुलनीय है।
सम्मेलन में बड़ी संख्या में प्रबुद्ध नागरिक, सामाजिक कार्यकर्ता, युवा एवं मातृशक्ति उपस्थित रही। कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने हिन्दू समाज की भूमिका, सांस्कृतिक पुनर्जागरण और राष्ट्र की एकता पर अपने विचार रखे।

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