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उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व एवं मार्गदर्शन में ग्रामीण क्षेत्र में स्थायी इन्फ्रास्ट्रक्चर और रोजगार सृजन के लिए ‘विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) अधिनियम-2025’ पारित किया गया है। प्रदेश सरकार इस कानून को पूर्ण संवेदनशीलता, पारदर्शिता तथा प्रभावशीलता के साथ राज्य में लागू कर रोजगार की नई गारंटी प्रदान करेगी। राज्य सरकार का संकल्प प्रत्येक पात्र को समय पर काम, प्रत्येक गांव में टिकाऊ परिसम्पत्तियों का निर्माण तथा प्रत्येक श्रमिक को सम्मान, सुरक्षा व खुशहाली प्रदान करना है।
मुख्यमंत्री 6 जनवरी 2026 को लखनऊ में विकसित भारत-जी राम जी कानून-2025 के संबंध में आयोजित पत्रकार वार्ता को सम्बोधित कर रहे थे। प्रधानमंत्री के प्रति आभार प्रकट करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह अधिनियम भारत के ग्रामीण विकास की दृष्टि से मील का पत्थर साबित होगा। देश के श्रमिकों, किसानों तथा गांवों के विकास के हित में उठाए गये इस कदम का स्वागत व समर्थन किया जाना चाहिए। इस अधिनियम के माध्यम से ग्रामीण भारत प्रधानमंत्री जी के विकसित भारत/2047 के विजन के अनुरूप राष्ट्र निर्माण में और अधिक सक्रिय भूमिका का निर्वहन कर सकेगा। उत्तर प्रदेश को विकसित भारत-जी राम जी से अत्यधिक लाभ प्राप्त होगा।
उन्होंने कहा कि अस्थायी और अधूरी सम्पत्तियों का दीर्घकालीन लाभ नहीं होता है। वी बी-जी राम जी अधिनियम-2025 रोजजगार गारंटी प्रदान करते हुए ग्रामीण क्षेत्रों में स्थायी परिसम्पत्तियों के निर्माण में सहायक सिद्ध होगा। यह कार्य विकसित भारत की आधारशिला मजबूत करेगा। विकसित भारत का सपना तभी साकार हो सकता है, जब राज्य विकसित होंगे। राज्य तब विकसित होंगे, जब हमारी आधारभूत इकाई गांव विकसित होंगे तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था सशक्त होगी, किसान आत्मनिर्भर होगा व श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा व सम्मान मिलेगा।
उन्होंने कहा कि इस अधिनियम में रोजगार गारंटी 100 दिन से बढ़ाकर 125 दिन की गई है। मानदेय का साप्ताहिक भुगतान होगा। भुगतान में देरी पर मुआवजे की भी व्यवस्था की गई है। समय पर काम न मिलने पर बेरोजगारी भत्ता अब कानूनी अधिकार बन चुका है। खेती के मौसम में किसानों को मजदूरों की कमी न हो, इसके लिए राज्यों को बुआई व कटाई के समय 60 दिन तक कार्य विराम का अधिकार प्रदान किया गया है। उस समय वी बी-जी राम जी के कार्य स्थगित रहेंगे। इसके माध्यम से किसान और मजदूर दोनों के हित सुरक्षित रहेंगे।
उन्होंने कहा कि ग्राम पंचायतें इस अधिनियम के अंतर्गत किए जाने वाले कार्यों की चार श्रेणियां निर्धारित कर सकेंगी। अधिनियम के तहत जल संरक्षण की स्थायी व्यवस्था के लिए रेन वाटर हार्वेस्टिंग, चेकडैम और उससे जुड़ी अन्य सुविधाओं को गांवों में विकसित किया जा सकता है। ग्रामीण बुनियादी इन्फ्रास्ट्रक्चर के अंतर्गत सड़क, नाली आदि का विकास किया जा सकता है। गांवों में खेल का मैदान, ओपन जिम, बाजार, दुकानों जैसे आजीविका संबंधी इन्फ्रास्ट्रक्चर का निर्माण किया जा सकता है। प्रतिकूल मौसम की घटनाओं से निपटने तथा आपदा प्रबंधन की तैयारी हेतु कार्य किए जा सकते हैं। परिणामस्वरूप, बाढ़ प्रबंधन के लिए किए जाने वाले छोटे -छोटे कार्यों के लिए ग्राम पंचायतों की शासन पर निर्भरता कम हो जाएगी।
उन्होंने कहा कि इस अधिनियम में टेक्नोलॉजी को कानूनी अधिकार के रूप में मान्यता प्रदान की गई है। इनमें बायोमैट्रिक उपस्थिति, जियो टैगिंग, रियल टाइम मोबाइल ऐप मानीटरिंग मॉनिटरिंग, एआई से निगरानी तथा डिजिटल भुगतान जैसी युक्तियां सम्मिलित हैं। अब हाजिरी भरने की औपचारिकताएं नहीं होंगी, बल्कि बायोमैट्रिक उपस्थिति अनिवार्य होगी। सेटेलाइट इमेजनरी के माध्यम से स्थायी परिसम्पत्तियों के निर्माण की निगरानी की जाएगी। डिजिटल भुगतान के माध्यम से श्रमिकों के खाते में मानदेय की धनराशि भेजी जाएगी।
उन्होंने कहा कि इस अधिनियम में कैग के मानकों के अनुरूप प्रत्येक छह माह में अनिवार्य सोशल ऑडिट, डिजिटल एवं बहुस्तरीय समयबद्ध शिकायत निवारण तथा जिला लोकपाल की व्यवस्था सम्मिलित है। यह अधिनियम वित्तीय अनुशासन के साथ-साथ संघीय संतुलन को बनाए रखने में बेहतर योगदान देगा। इसमें केंद्र व राज्य की साझेदारी 60:40 की होगी। स्पष्ट वार्षिक बजट के साथ कार्य मांग आधारित रहेगा। राज्यों को अधिक वित्तीय भागीदारी, स्वामित्व व गुणवत्ता सुधार का अधिकार दिया गया है। राज्यों को अब इस अधिनियम के माध्यम से 17 हजार करोड़ रुपये अधिक धनराशि प्राप्त हो सकती है।
उन्होंने कहा कि जिन राज्यों में श्रमिक वर्ग अधिक है, उन राज्यों को इस अधिनियम के अंतर्गत ज्यादा कार्य मिलेगा। श्रमिकों का अधिकार बढ़ेगा और भुगतान सुरक्षित होगा। किसान को समय पर श्रम उपलब्ध होगा। अब रोजगार केवल राहत का माध्यम नहीं है, अपितु विकास और आत्मनिर्भरता का भी आधार बनेगा।
Tuesday, January 6, 2026
विकसित भारत-जी राम जी कानून-2025
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व एवं मार्गदर्शन में ग्रामीण क्षेत्र में स्थायी इन्फ्रास्ट्रक्चर और रोजगार सृजन के लिए ‘विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) अधिनियम-2025’ पारित किया गया है। प्रदेश सरकार इस कानून को पूर्ण संवेदनशीलता, पारदर्शिता तथा प्रभावशीलता के साथ राज्य में लागू कर रोजगार की नई गारंटी प्रदान करेगी। राज्य सरकार का संकल्प प्रत्येक पात्र को समय पर काम, प्रत्येक गांव में टिकाऊ परिसम्पत्तियों का निर्माण तथा प्रत्येक श्रमिक को सम्मान, सुरक्षा व खुशहाली प्रदान करना है।
मुख्यमंत्री 6 जनवरी 2026 को लखनऊ में विकसित भारत-जी राम जी कानून-2025 के संबंध में आयोजित पत्रकार वार्ता को सम्बोधित कर रहे थे। प्रधानमंत्री के प्रति आभार प्रकट करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह अधिनियम भारत के ग्रामीण विकास की दृष्टि से मील का पत्थर साबित होगा। देश के श्रमिकों, किसानों तथा गांवों के विकास के हित में उठाए गये इस कदम का स्वागत व समर्थन किया जाना चाहिए। इस अधिनियम के माध्यम से ग्रामीण भारत प्रधानमंत्री जी के विकसित भारत/2047 के विजन के अनुरूप राष्ट्र निर्माण में और अधिक सक्रिय भूमिका का निर्वहन कर सकेगा। उत्तर प्रदेश को विकसित भारत-जी राम जी से अत्यधिक लाभ प्राप्त होगा।
उन्होंने कहा कि अस्थायी और अधूरी सम्पत्तियों का दीर्घकालीन लाभ नहीं होता है। वी बी-जी राम जी अधिनियम-2025 रोजजगार गारंटी प्रदान करते हुए ग्रामीण क्षेत्रों में स्थायी परिसम्पत्तियों के निर्माण में सहायक सिद्ध होगा। यह कार्य विकसित भारत की आधारशिला मजबूत करेगा। विकसित भारत का सपना तभी साकार हो सकता है, जब राज्य विकसित होंगे। राज्य तब विकसित होंगे, जब हमारी आधारभूत इकाई गांव विकसित होंगे तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था सशक्त होगी, किसान आत्मनिर्भर होगा व श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा व सम्मान मिलेगा।
उन्होंने कहा कि इस अधिनियम में रोजगार गारंटी 100 दिन से बढ़ाकर 125 दिन की गई है। मानदेय का साप्ताहिक भुगतान होगा। भुगतान में देरी पर मुआवजे की भी व्यवस्था की गई है। समय पर काम न मिलने पर बेरोजगारी भत्ता अब कानूनी अधिकार बन चुका है। खेती के मौसम में किसानों को मजदूरों की कमी न हो, इसके लिए राज्यों को बुआई व कटाई के समय 60 दिन तक कार्य विराम का अधिकार प्रदान किया गया है। उस समय वी बी-जी राम जी के कार्य स्थगित रहेंगे। इसके माध्यम से किसान और मजदूर दोनों के हित सुरक्षित रहेंगे।
उन्होंने कहा कि ग्राम पंचायतें इस अधिनियम के अंतर्गत किए जाने वाले कार्यों की चार श्रेणियां निर्धारित कर सकेंगी। अधिनियम के तहत जल संरक्षण की स्थायी व्यवस्था के लिए रेन वाटर हार्वेस्टिंग, चेकडैम और उससे जुड़ी अन्य सुविधाओं को गांवों में विकसित किया जा सकता है। ग्रामीण बुनियादी इन्फ्रास्ट्रक्चर के अंतर्गत सड़क, नाली आदि का विकास किया जा सकता है। गांवों में खेल का मैदान, ओपन जिम, बाजार, दुकानों जैसे आजीविका संबंधी इन्फ्रास्ट्रक्चर का निर्माण किया जा सकता है। प्रतिकूल मौसम की घटनाओं से निपटने तथा आपदा प्रबंधन की तैयारी हेतु कार्य किए जा सकते हैं। परिणामस्वरूप, बाढ़ प्रबंधन के लिए किए जाने वाले छोटे -छोटे कार्यों के लिए ग्राम पंचायतों की शासन पर निर्भरता कम हो जाएगी।
उन्होंने कहा कि इस अधिनियम में टेक्नोलॉजी को कानूनी अधिकार के रूप में मान्यता प्रदान की गई है। इनमें बायोमैट्रिक उपस्थिति, जियो टैगिंग, रियल टाइम मोबाइल ऐप मानीटरिंग मॉनिटरिंग, एआई से निगरानी तथा डिजिटल भुगतान जैसी युक्तियां सम्मिलित हैं। अब हाजिरी भरने की औपचारिकताएं नहीं होंगी, बल्कि बायोमैट्रिक उपस्थिति अनिवार्य होगी। सेटेलाइट इमेजनरी के माध्यम से स्थायी परिसम्पत्तियों के निर्माण की निगरानी की जाएगी। डिजिटल भुगतान के माध्यम से श्रमिकों के खाते में मानदेय की धनराशि भेजी जाएगी।
उन्होंने कहा कि इस अधिनियम में कैग के मानकों के अनुरूप प्रत्येक छह माह में अनिवार्य सोशल ऑडिट, डिजिटल एवं बहुस्तरीय समयबद्ध शिकायत निवारण तथा जिला लोकपाल की व्यवस्था सम्मिलित है। यह अधिनियम वित्तीय अनुशासन के साथ-साथ संघीय संतुलन को बनाए रखने में बेहतर योगदान देगा। इसमें केंद्र व राज्य की साझेदारी 60:40 की होगी। स्पष्ट वार्षिक बजट के साथ कार्य मांग आधारित रहेगा। राज्यों को अधिक वित्तीय भागीदारी, स्वामित्व व गुणवत्ता सुधार का अधिकार दिया गया है। राज्यों को अब इस अधिनियम के माध्यम से 17 हजार करोड़ रुपये अधिक धनराशि प्राप्त हो सकती है।
उन्होंने कहा कि जिन राज्यों में श्रमिक वर्ग अधिक है, उन राज्यों को इस अधिनियम के अंतर्गत ज्यादा कार्य मिलेगा। श्रमिकों का अधिकार बढ़ेगा और भुगतान सुरक्षित होगा। किसान को समय पर श्रम उपलब्ध होगा। अब रोजगार केवल राहत का माध्यम नहीं है, अपितु विकास और आत्मनिर्भरता का भी आधार बनेगा।
मेरे प्रेरणास्रोत: स्वामी विवेकानंद
गिरकर उठना, उठकर चलना... यह क्रम है संसार का... कर्मवीर को फ़र्क़ न पड़ता किसी जीत और हार का... क्योंकि संघर्षों में पला-बढ़ा... संघर्ष ही मेरा जीवन है...
-डॉ. सौरभ मालवीय
डॉ. सौरभ मालवीय
अपनी बात
सामाजिक परिवर्तन और राष्ट्र-निर्माण की तीव्र आकांक्षा के कारण छात्र जीवन से ही सामाजिक सक्रियता। बिना दर्शन के ही मैं चाणक्य और डॉ. हेडगेवार से प्रभावित हूं। समाज और राष्ट्र को समझने के लिए "सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और मीडिया" विषय पर शोध पूर्ण किया है, परंतु सृष्टि रहस्यों के प्रति मेरी आकांक्षा प्रारंभ से ही है।
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संप्रति
डॉ. सौरभ मालवीय
2/564, अवधपुरी खण्ड 2
खरगापुर, निकट प्राथमिक विद्यालय, गोमतीनगर विस्तार
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खरगापुर, निकट प्राथमिक विद्यालय, गोमतीनगर विस्तार
लखनऊ, उत्तर प्रदेश
पिन- 226010
मो- 8750820740
पिन- 226010
मो- 8750820740
ईमेल - malviya.sourabh@gmail.com
***
डॉ. सौरभ मालवीय
एसोसिएट प्रोफेसर
पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग
लखनऊ विश्वविद्यालय
लखनऊ, उत्तर प्रदेश
मो- 8750820740
ईमेल - malviya.sourabh@gmail.com
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