Saturday, October 17, 2026

श्रेष्ठ विचारों से सशक्त समाज का निर्माण होता है : डॉ. सौरभ मालवीय

  










फतेहपुर। भारतीय शिक्षा समिति, कानपुर प्रान्त के तत्वावधान में विद्वत परिषद संगोष्ठी का आयोजन सरस्वती विद्या मंदिर, खागा, फतेहपुर में सम्पन्न हुआ। संगोष्ठी में समाज के प्रबुद्धजनों एवं बुद्धिजीवियों ने भारतीय ज्ञान परम्परा, सामाजिक मूल्यों और राष्ट्र निर्माण में विचारों की भूमिका पर अपने विचार व्यक्त किए।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. सौरभ मालवीय ने कहा कि श्रेष्ठ विचार ही सशक्त समाज के निर्माण का आधार हैं। भारतीय ज्ञान परम्परा पर आधारित भारतीय समाज का जीवन दर्शन परोपकार, सेवा, सह-अस्तित्व और लोकमंगल की भावना से प्रेरित है। हमारी परम्परा में ज्ञान का उद्देश्य केवल व्यक्तिगत उन्नति नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के कल्याण का मार्ग प्रशस्त करना भी है।

उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान परम्परा के मूल्यों को आत्मसात कर समाज में सकारात्मक विचारों, नैतिकता और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना को मजबूत किया जा सकता है। विद्वत परिषद जैसी संगोष्ठियां वैचारिक जागरण के साथ ही भारतीय संस्कृति और जीवन मूल्यों के संरक्षण एवं संवर्धन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कृष्ण स्वरूप सिंह ने की तथा विशिष्ट अतिथि के रूप में रजनीश पाठक उपस्थित रहे। संगोष्ठी में समाज के अनेक बुद्धिजीवियों एवं प्रबुद्धजनों ने सहभागिता की।

पुस्तक भेंट





लखनऊ। ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविद्यालय, लखनऊ के कुलपति प्रो. अजय तनेजा जी के साथ एक सुखद एवं आत्मीय मुलाकात हुई।
इस अवसर पर उन्हें अपनी पुस्तक ‘श्रेष्ठ भारत : आत्मबोध से राष्ट्रबोध’ भेंट की। 

टीवी पर लाइव

  




माफिया की जमीन पर गरीबों के आशियाने, यही है बदलते उत्तर प्रदेश की तस्वीर!
जिस जमीन पर कभी माफिया का कब्जा था, वहाँ आज गरीबों के सपनों का घर आकार ले रहा है।
अतीक अहमद की जमीन पर गरीबों के लिए आवास—यह सत्ता के संरक्षण से नहीं, कानून के राज और जनकल्याण की सोच से बदलाव का संदेश है।
यही है योगी राज—अवैध कब्जे से मुक्ति, गरीबों को आशियाना और सुशासन की नई पहचान!

Friday, October 16, 2026

शिक्षा, संस्कार और सेवा के लिए समर्पित विद्या भारती के बढ़ते कदम : डॉ. सौरभ मालवीय














लखनऊ। शिक्षा के साथ संस्कार और कौशल विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से विद्या भारती निरंतर नए आयाम स्थापित कर रही है। इसी क्रम में आज सरस्वती विद्या मंदिर वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, सेक्टर-क्यू, अलीगंज, लखनऊ में भाऊराव देवरस कौशल विकास केंद्र का उद्घाटन विद्या भारती पूर्वी उत्तर प्रदेश के क्षेत्रीय मंत्री डॉ. सौरभ मालवीय ने किया।

विद्यार्थियों को व्यावहारिक ज्ञान प्रदान करने, उनकी प्रतिभा को निखारने तथा उन्हें विभिन्न कौशलों में दक्ष बनाने के उद्देश्य से विद्या भारती ने अपने विद्यालयों में कौशल विकास कार्यक्रम संचालित करने का संकल्प लिया है। इस केंद्र के माध्यम से विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीक और व्यावहारिक कौशल से परिचित कराने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की गई है।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि डॉ. सौरभ मालवीय, संभाग निरीक्षक, कोषाध्यक्ष श्री के. आर. कनौजिया तथा विद्यालय के प्रधानाचार्य श्री संतोष कुमार सिंह ने फीता काटकर केंद्र का उद्घाटन किया। इसके उपरांत मां सरस्वती एवं मां दुर्गा के नौ स्वरूपों के समक्ष दीप प्रज्वलित कर सांस्कृतिक कार्यक्रमों का शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर डॉ. मालवीय ने विद्यालय की एआई लैब का भी निरीक्षण किया और विद्यार्थियों के लिए आधुनिक तकनीक आधारित शिक्षा के प्रयासों का अवलोकन किया।

विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए डॉ. सौरभ मालवीय ने ध्यान, योग और प्रार्थना के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि प्रार्थना और वंदना हमारी भारतीय संस्कृति एवं जीवन मूल्यों से जुड़ने का माध्यम हैं। विद्यार्थियों को अपनी भारतीय पहचान, संस्कृति और ज्ञान परंपरा पर गर्व करना चाहिए। शिक्षा का उद्देश्य केवल रोजगार प्राप्त करना नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण, आत्मविश्वास, कौशल और राष्ट्र के प्रति उत्तरदायित्व की भावना विकसित करना भी है।

उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक के साथ भारतीय संस्कारों का समन्वय विद्यार्थियों को जीवन की चुनौतियों का सामना करने के लिए सक्षम बनाएगा। कौशल विकास केंद्र जैसी पहल विद्यार्थियों को आत्मनिर्भर बनाने और उनके उज्ज्वल भविष्य के निर्माण में सहायक सिद्ध होगी।

कार्यक्रम के प्रारंभ में प्रधानाचार्य श्री संतोष कुमार सिंह ने अतिथियों का परिचय कराते हुए उनका स्वागत एवं अभिनंदन किया। कार्यक्रम में विद्यालय परिवार के सदस्य एवं अन्य गणमान्यजन उपस्थित रहे।

विद्या भारती का यह प्रयास शिक्षा, संस्कार और कौशल के समन्वय से आत्मनिर्भर, चरित्रवान एवं राष्ट्रनिष्ठ युवा पीढ़ी के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। 

Tuesday, October 13, 2026

विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास की आधारशिला हैं विद्या भारती के विद्यालय : डॉ. सौरभ मालवीय















 देवरिया। विद्या भारती पूर्वी उत्तर प्रदेश क्षेत्र की 37वीं खेलकूद प्रतियोगिता का शुभारंभ उत्साह एवं खेल भावना के साथ हुआ। कार्यक्रम में देवरिया सदर के विधायक डॉ. शलभ मणि त्रिपाठी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।

इस अवसर पर डॉ. सौरभ मालवीय ने कहा कि विद्या भारती के विद्यालय विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास की आधारशिला हैं। इन विद्यालयों में शिक्षा के साथ संस्कार, अनुशासन, राष्ट्रप्रेम और नेतृत्व क्षमता के विकास पर विशेष ध्यान दिया जाता है। खेलकूद विद्यार्थियों के शारीरिक, मानसिक एवं बौद्धिक विकास का सशक्त माध्यम है। खेलों से विद्यार्थियों में आत्मविश्वास, परिश्रम, अनुशासन और टीम भावना का विकास होता है।

मुख्य अतिथि डॉ. शलभ मणि त्रिपाठी ने कहा कि विद्या भारती के विद्यालय संस्कारों की पाठशाला हैं। यहां निर्भीक, साहसी और देशभक्ति से ओतप्रोत विद्यार्थियों का निर्माण होता है। ऐसे आयोजन विद्यार्थियों की प्रतिभा को निखारने के साथ उनमें प्रतिस्पर्धा की स्वस्थ भावना भी विकसित करते हैं।

विद्या भारती पूर्वी उत्तर प्रदेश क्षेत्र के क्षेत्रीय संगठन मंत्री हेमचंद्र जी ने कहा कि स्वस्थ भारत के निर्माण के लिए बालकों में खेल भावना को प्रोत्साहित करना आवश्यक है। बच्चे खेलेंगे तो स्वस्थ और निरोग रहेंगे। खेलकूद से उनके शरीर के साथ मन और बुद्धि का भी विकास होता है। उन्होंने विद्यार्थियों को खेलों में उत्साहपूर्वक भाग लेने तथा खेल भावना और अनुशासन को जीवन में अपनाने का संदेश दिया।

विद्या भारती द्वारा आयोजित यह खेलकूद प्रतियोगिता विद्यार्थियों की प्रतिभा को मंच प्रदान करने, उनमें स्वस्थ प्रतिस्पर्धा की भावना विकसित करने तथा शारीरिक और मानसिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।

इस प्रतियोगिता का समापन 16 अक्टूबर को होगा।

Sunday, October 11, 2026

टीवी पर लाइव




लोकतंत्र में विपक्ष को धरना-प्रदर्शन करने और सरकार की नीतियों का विरोध करने का पूरा अधिकार है, लेकिन यह विरोध सदन, संविधान और लोकतांत्रिक मर्यादाओं के प्रति विश्वास बनाए रखते हुए होना चाहिए।

सड़क पर दबाव बनाकर राजनीति करने के बजाय सदन में तथ्यों, तर्कों और प्रमाणों के साथ अपनी बात रखना अधिक प्रभावी लोकतांत्रिक प्रक्रिया है। विरोध के ऐसे तरीकों से बचना चाहिए, जिनसे आमजन का जनजीवन प्रभावित हो, यातायात बाधित हो और नागरिकों को अनावश्यक परेशानियों का सामना करना पड़े।

लोकतंत्र में असहमति का सम्मान आवश्यक है, लेकिन जनहित और जनसुविधा की रक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।

विरोध का उद्देश्य व्यवस्था को बाधित करना नहीं, बल्कि व्यवस्था को बेहतर बनाना होना चाहिए।

सदन में संवाद, संविधान में विश्वास और जनहित को सर्वोपरि रखना ही सशक्त लोकतंत्र की पहचान है।

पुस्तक ‘श्रेष्ठ भारत : आत्मबोध से राष्ट्रबोध’ का लोकार्पण






लखनऊ। भारतीय संस्कृति, राष्ट्रीय चेतना और राष्ट्रबोध के विचारों को केंद्र में रखकर लिखी गई पुस्तक ‘श्रेष्ठ भारत : आत्मबोध से राष्ट्रबोध’ के लेखक डॉ. सौरभ मालवीय हैं। यह पुस्तक आत्मचिंतन से राष्ट्रचिंतन की ओर अग्रसर होने तथा व्यक्ति के भीतर राष्ट्रीय चेतना का विकास करने के विचार को प्रमुखता देती है।

पुस्तक का शीर्षक ‘आत्मबोध से राष्ट्रबोध’ इस विचार को अभिव्यक्त करता है कि राष्ट्र के प्रति दायित्वबोध की शुरुआत व्यक्ति के स्वयं के बोध, सांस्कृतिक जड़ों की पहचान और सामाजिक उत्तरदायित्व से होती है। भारतीय ज्ञान परंपरा, सांस्कृतिक मूल्यों और राष्ट्रीय दृष्टिकोण के संदर्भ में यह विषय समकालीन विमर्श के लिए महत्वपूर्ण है।

लेखक डॉ. सौरभ मालवीय लखनऊ विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यक्ष हैं। पत्रकारिता, लेखन और वैचारिक विमर्श के क्षेत्र में सक्रिय डॉ. मालवीय की यह पुस्तक भारत की सांस्कृतिक पहचान, राष्ट्रीय अस्मिता और समाज के प्रति नागरिकों के दायित्वों पर विचार करने का अवसर प्रदान करती है।

‘श्रेष्ठ भारत : आत्मबोध से राष्ट्रबोध’ का मूल भाव व्यक्ति निर्माण से राष्ट्र निर्माण की दिशा में आगे बढ़ना है। यह कृति आत्मचेतना, सांस्कृतिक गौरव और राष्ट्र के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण को प्रोत्साहित करने की वैचारिक पहल के रूप में प्रस्तुत है।

इस पुस्तक का प्रकाशन - शिल्पायन पब्लिशर्स नयी दिल्ली ने लिया हैं.

भारत की राष्‍ट्रीयता हिंदुत्‍व है