खेतों के लिए सिंचाई जल अति आवश्यक है। जहां नहरें नहीं हैं, वहां नलकूप के माध्यम से सिंचाई की जाती है। किसानों को सिंचाई जल उपलब्ध कराने के लिए मध्य प्रदेश सरकार ने नलकूप खनन योजना आरंभ की है। इस योजना के अन्तर्गत अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के किसानों के खेतों में अशासकीय एजेंसी अथवा ठेकेदारों द्वारा नलकूप खनन कराया जाता है। नलकूप खनन उन्हीं किसानों के यहां कराया जाएगा, जिन्होंने पूर्व में नलकूप नहीं लगवाया है। अनुदान की पात्रता अनुसूचित जाति एवं जनजाति के उन्हीं किसानों को होगी, जिन्होंने सहकारी अथवा व्यवसायिक बैंको से ऋण लिया हो या स्वयं के व्यय से नलकूप खनन किया हो। उपसंचालक कृषि कार्यालय में हितग्राही का पंजीयन कराना आवश्यक है।
आवेदक द्वारा निर्धारित प्रारूप में आवेदन करने के उपरान्त ग्राम सभा एवं जिला पंचायत की कृषि स्थाई समिति से अनुमोदन पश्चात योजना के तकनीकी मापदंडों का पालन करने पर राज्य शासन से निर्धारित अनुदान दिया जाता है। सफल या असफल नलकूप खनन पर अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति के कृषकों के लिए लागत का 75 प्रतिशत अधिकतम 15 हजार रुपये जो भी कम हो अनुदान देय है। सफल नलकूप पर पंप स्थापना के लिए अनुसूचित जाति/जनजाति के किसानों के लिए लागत का 75 प्रतिशत अधिकतम 9 हजार रुपये, जो भी कम हो अनुदान देय है। अनुदान की मात्रा भिन्न हो सकती है। नलकूप खनन योजना के लिए प्रमाण-पत्र होने आवश्यक हैं, जिनमें आधार कार्ड, पहचान प्रमाण, निवास प्रमाण, आय प्रमाण पत्र, बैंक विवरण, बीपीएल राशन कार्ड यदि उपलब्ध हो, जाति प्रमाण पत्र, खेत से संबंधित पत्र सम्मिलित हैं।
राज्य के सभी किसान निवास इस योजना का लाभ उठा सकते हैं, किन्तु शाजापुर और इंदौर के किसान आवेदन करने के लिए पात्र नहीं हैं।
राज्य के अनुसूचित जाति/जनजाति के किसान इस योजना का लाभ उठा रहे हैं। इससे उन किसानों को विशेष लाभ हो रहा है, जिनके पास सिंचाई की व्यवस्था नहीं है और जो आर्थिक स्थिति अच्छी न होने के कारण नलकूप नहीं लगवा पा रहे हैं।
(डॉ सौरभ मालवीय की पुस्तक- 'विकास के पथ पर भारत' से)




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