Thursday, August 6, 2026

पंडित नेहरू अटलजी से स्नेह करते थे

   


देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू अटलजी से बहुत स्नेह करते थे. उन्हें नेहरू जी का आशीष प्राप्त था. उस समय की बात है, जब पंडित जवाहरलाल नेहरू प्रधानमंत्री थे और अटल बिहारी वाजपेयी जी जनसंघ के सांसद थे. संसद में किसी बहस के दौरान अटलजी अधिक बोल रहे थे, तब नेहरू जी ने उन्हें डांटते हुए कहा कि तुम अभी बच्चे हो. संध्या के समय नेहरू जी अपने कार्यालय निकलकर अटलजी के निवास पर पहुंच गए. उस समय अटलजी स्टोव जला रहे थे. अटलजी ने उन्हें देखकर अभिवादन किया और कहा कि वे चाय बना रहे हैं. नेहरू जी ने पूछा कि कॊफी है ? अटलजी ने कहा कि हां, है. इस पर नेहरू जी ने कहा कि तुम बैठो, मैं कॊफी बनाता हूं. अटलजी नेहरू जी की सादगी देखकर अवाक रह गए.  कॊफी के कुछ घूंट लेने के बाद नेहरू जी ने कहा कि आज मैंने तुम्हें डांट दिया था, बुरा तो नहीं लगा. इस पर अटलजी ने कहा कि बिल्कुल नहीं. मैं नया तो हूं ही, किंतु अब मैं पूरी तैयारी से आया करूंगा, ताकि डांट न खानी पड़े. नेहरू जी जब जाने लगे, तो अटलजी उन्हें उनकी गाड़ी तक छोड़ने गए और उनके चरण स्पर्श कर आशीर्वाद भी लिया.

उनकी भाषा आकर्षित करती है : बिरजू महाराज
कला जगत के सभी लोग अटल बिहारी वाजपेयी जी का बहुत मान-सम्मान करते हैं. उनकी कविताओं में गहरे विचारों को जाना जा सकता है. उनकी भाषा में बड़ी मिठास है, जो हर व्यक्ति को अपनी ओर आकर्षित करती है. संगीतकारों लिए उनके मन में उच्च स्थान है. मुझे कई बार उनके साथ बैठने का सौभाग्य मिला. 

अटलजी मधुर भाषी हैं : आशा भोंसले
अटल बिहारी वाजपेयी जी की बहुत साफ छवि है. मैं उनसे केवल एक बार मिली हूं. सी.बी.एस. के श्री पंडित जी के साथ उनसे मिलने गई. उस समय वे ताज होटल में ठहरे हुए थे. वे सफेद लुंगी-कुर्ता पहने हुए थे. उनके चेहरे पर मुस्कान थी. वे बहुत मधुर भाषी हैं. वे कम बोलते हैं. उनकी स्मरण शक्ति अच्छी है. उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री बनने के बाद मिलने वाले बधाई संदेशों में मेरा टेलीग्राम उन्हें सबसे पहले मिला था. वे अध्ययनशील व्यक्ति हैं. हमने साहित्य और संगीत पर खूब बातें कीं. साहित्य विशेषकर कविताओं में उन्हें गहरी रुचि है. मैंने उनकी जितनी कविताएं सुनीं, मुझे सब बहुत अच्छी लगीं. उन्होंने मुझे देशभक्ति गीत गाने का सुझाव दिया. मैंने कहा कि मैं देशभक्ति गीतों के अलावा उनकी कविताएं भी गाना चाहूंगी. मैं उनका बहुत मान-सम्मान करती हूं. हमें राजनीति में उन जैसे लोगों की जरूरत है.

हेमा मालिनी के प्रसंशक हैं अटल बिहारी वाजपेयी
अटल बिहारी वाजपेयी को फिल्मों में भी रुचि रही है. वह अपने समय की प्रसिद्ध सिने अभिनेत्री के प्रशंसक रहे हैं.  सिने अभिनेत्री एवं भारतीय जनता पार्टी की सांसद हेमा मालिनी ने भारतीय जनता पार्टी के स्थापना दिवस समारोह में स्वयं यह बात बताई थी. उन्होंने बताया था कि पूर्व प्रधानमंत्री एवं भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठतम नेता अटल बिहारी वाजपेयी को उनकी एक फिल्म इतनी अधिक पसंद आई कि उन्होंने 25 बार देखी थी. उन्होंने यह भी बताया, मुझे राजनीति में, वह भी विशेषकर भारतीय जनता पार्टी में लाने का श्रेय एक प्रकार से मेरे पूर्व सहकर्मी अभिनेता एवं गुरुदासपुर से सांसद रहे विनोद खन्ना को जाता है, क्योंकि 1999 में गुरुदासपुर से दूसरी बार लोकसभा का चुनाव लड़ रहे खन्ना ने अपने यहां प्रचार के लिए बुलाया था. 
तब तत्कालीन पार्टी अध्यक्ष लालकृष्ण आडवाणी ने उनके लिए प्रचार के लिए कहा था. मां ने भी उनका नाम सुनकर प्रचार करने की अनुमति दे दी थी. तब पहला भाषण मां ने लिखकर दिया था. सभा में बहुत भीड़ थी, जिससे प्रसन्न होकर आडवाणी ने बिहार में प्रचार का न्यौता दे दिया.
उसके बाद तो भारतीय जनता पार्टी के प्रचार में अकसर जाने लगी. वर्ष 2003 में उन्होंने राज्यसभा सदस्य बनाकर एक बड़ा दायित्व भी दे दिया. उन्होंने बताया, मुझे याद है एक बार मैंने पदाधिकारियों से कहा कि मैं भाषणों में अटल बिहारी वाजपेयी का उल्लेख करती हूं, परंतु उनसे कभी मिली नहीं, मिलवाइए. तब वे मुझे उनसे मिलाने ले गए, परंतु मैंने अनुभव किया कि अटल बिहारी वाजपेयी बात करने में कुछ हिचकिचा रहे हैं. इस पर मैंने वहां उपस्थित एक महिला से पूछा, क्या बात है. अटल जी, ठीक से बात क्यों नहीं कर रहे. उन्होंने बताया, वास्तव में ये आपके बहुत बड़े प्रशंसक रहे हैं. उन्होंने 1972 में आई आपकी फिल्म 'सीता और गीता' 25 बार देखी थी. आज अचानक आपको सामने पाकर हिचकिचा रहे हैं'.

हेमा मालिनी ने बताया, इसके बाद तो मैं गुजरात में नरेंद्र मोदी के लिए, तो छत्तीसगढ़ में डॉ. रमण सिंह के लिए, जहां भी पार्टी ने बुलाया प्रचार के लिए जाती रही. परिणाम भी अच्छे ही रहे. संयोग ही था कि सभी जगह भारतीय जनता पार्टी विजयी हुई. लेकिन बिहार में ऐसा न हो सका. उन्होंने कहा, 'कोई बात नहीं अब यूपी में जीते हैं.
-डॉ. सौरभ मालवीय

(पुस्तक- 'राष्ट्रवादी पत्रकारिता के शिखर पुरुष अटल बिहारी वाजपेयी' से)

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