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वन्देमातरम!!
“पश्चिम बंगाल में रामराज्य स्थापित होगा।
रक्त-रंजीत बंगाल अब समृद्ध, सुरक्षित और भयमुक्त होगा।
सांस्कृतिक गौरव, सुशासन और विकास के नए युग का...
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सपा (समाजवादी पार्टी), कांग्रेस, और ओवैसी (AIMIM) मुसलमानों को “वोट बैंक” के रूप में इस्तेमाल करते हैं। यह एक आम राजनीतिक आरोप है, और इस पर कई तरह की राय मौजूद हैं और सच के करीब है.
“वोट बैंक राजनीति” का मतलब होता है — किसी समुदाय, जाति या धर्म विशेष को एक समूह के रूप में ट्रीट करके, उनके मुद्दों की बात करना मुख्यतः चुनावी समर्थन पाने के लिए, न कि जरूरी तौर पर उनके सामाजिक या आर्थिक विकास के लिए।
यूपी की राजनीति में सपा ने परंपरागत रूप से मुसलमान + यादव (MY) समीकरण पर फोकस किया है। पार्टी खुद को “सेक्युलर” बताती है, पर विरोधी दलों का कहना है कि वह मुसलमानों को सिर्फ वोट बैंक की तरह इस्तेमाल करती है।
आज़ादी के बाद लंबे समय तक कांग्रेस ने खुद को सभी धर्मों का प्रतिनिधि बताया, लेकिन उसने मुसलमानों के सामाजिक-आर्थिक विकास पर ठोस नीति की बजाय केवल सुरक्षा और सेक्युलरिज़्म के वादे किए।
ओवैसी खुद को मुसलमानों की आवाज़ बताते हैं, जबकि उनकी राजनीति मुख्यतः पहचान की राजनीति (identity politics) पर आधारित है,
भारत में मुसलमानों की शिक्षा, रोज़गार, और सामाजिक स्थिति पर ध्यान अपेक्षाकृत कम रहा है।
अंत में सबका साथ सबका विकास मोदी ने सभी के सपनों में पँख लगाया है....!
Sunday, November 2, 2025
टीवी पर लाइव
सपा (समाजवादी पार्टी), कांग्रेस, और ओवैसी (AIMIM) मुसलमानों को “वोट बैंक” के रूप में इस्तेमाल करते हैं। यह एक आम राजनीतिक आरोप है, और इस पर कई तरह की राय मौजूद हैं और सच के करीब है.
“वोट बैंक राजनीति” का मतलब होता है — किसी समुदाय, जाति या धर्म विशेष को एक समूह के रूप में ट्रीट करके, उनके मुद्दों की बात करना मुख्यतः चुनावी समर्थन पाने के लिए, न कि जरूरी तौर पर उनके सामाजिक या आर्थिक विकास के लिए।
यूपी की राजनीति में सपा ने परंपरागत रूप से मुसलमान + यादव (MY) समीकरण पर फोकस किया है। पार्टी खुद को “सेक्युलर” बताती है, पर विरोधी दलों का कहना है कि वह मुसलमानों को सिर्फ वोट बैंक की तरह इस्तेमाल करती है।
आज़ादी के बाद लंबे समय तक कांग्रेस ने खुद को सभी धर्मों का प्रतिनिधि बताया, लेकिन उसने मुसलमानों के सामाजिक-आर्थिक विकास पर ठोस नीति की बजाय केवल सुरक्षा और सेक्युलरिज़्म के वादे किए।
ओवैसी खुद को मुसलमानों की आवाज़ बताते हैं, जबकि उनकी राजनीति मुख्यतः पहचान की राजनीति (identity politics) पर आधारित है,
भारत में मुसलमानों की शिक्षा, रोज़गार, और सामाजिक स्थिति पर ध्यान अपेक्षाकृत कम रहा है।
अंत में सबका साथ सबका विकास मोदी ने सभी के सपनों में पँख लगाया है....!
मेरे प्रेरणास्रोत: स्वामी विवेकानंद
गिरकर उठना, उठकर चलना... यह क्रम है संसार का... कर्मवीर को फ़र्क़ न पड़ता किसी जीत और हार का... क्योंकि संघर्षों में पला-बढ़ा... संघर्ष ही मेरा जीवन है...
-डॉ. सौरभ मालवीय
डॉ. सौरभ मालवीय
अपनी बात
सामाजिक परिवर्तन और राष्ट्र-निर्माण की तीव्र आकांक्षा के कारण छात्र जीवन से ही सामाजिक सक्रियता। बिना दर्शन के ही मैं चाणक्य और डॉ. हेडगेवार से प्रभावित हूं। समाज और राष्ट्र को समझने के लिए "सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और मीडिया" विषय पर शोध पूर्ण किया है, परंतु सृष्टि रहस्यों के प्रति मेरी आकांक्षा प्रारंभ से ही है।
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संप्रति
डॉ. सौरभ मालवीय
2/564, अवधपुरी खण्ड 2
खरगापुर, निकट प्राथमिक विद्यालय, गोमतीनगर विस्तार
2/564, अवधपुरी खण्ड 2
खरगापुर, निकट प्राथमिक विद्यालय, गोमतीनगर विस्तार
लखनऊ, उत्तर प्रदेश
पिन- 226010
मो- 8750820740
पिन- 226010
मो- 8750820740
ईमेल - malviya.sourabh@gmail.com
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डॉ. सौरभ मालवीय
एसोसिएट प्रोफेसर
पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग
लखनऊ विश्वविद्यालय
लखनऊ, उत्तर प्रदेश
मो- 8750820740
ईमेल - malviya.sourabh@gmail.com
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