Sunday, December 10, 2023

हमारे प्रेरणास्रोत सौरभ मालवीय


पत्रकारिता अगर ठीक से सीखी नहीं जाएगी तो प्रेषित नहीं की जा सकती है, और सीखने के लिए अच्छे शिक्षक का होना  ज़रूरी है… ऐसे ही शिक्षक हैं हमारे प्रेरणास्रोत सौरभ मालवीय सर 

लखनऊ विवि के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर बनने पर सर को बहुत बधाई
बता दें कि डॉ. सौरभ मालवीय 'राष्ट्रवादी पत्रकारिता के शिखर पुरुष अटल बिहारी बाजपेयी' और ‘भारत बोध’ किताब भी लिख चुके हैं। पत्रकारिता विधा में उनके रचना कौशल के लिए डॉ. सौरभ मालवीय को पंडित प्रताप नारायण मिश्र साहित्यकार सम्मान समेत तमाम अवॉर्ड्स से सम्मानित किया जा चुका है। 

उल्लेखनीय है कि डॉ.मालवीय पूर्व में वाजपेयी सरकार में बीजेपी मीडिया सेल से जुड़े थे और वर्ष 2010 तक मीडिया सेल में समन्वयक के रूप में खासे लोकप्रिय रहे। सांस्कृतिक राष्ट्रवाद पर पीएचडी करने वाले सौरभ मालवीय ने राष्ट्रवादी लेखक और वक्ता के नाते अपनी खास पहचान बनाई है। डॉ. सौरभ टीवी डिबेट में शामिल होते रहते हैं। कुछ समय तक वह ‘माखनलाल यूनिवर्सिटी’ के नोएडा कैंपस में भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं।
-शिवेंद्र सिंह बेघल 

Thursday, December 7, 2023

लखनऊ विवि के पत्रकारिता विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर बने डॉ.सौरभ मालवीय

   लखनऊ विवि के पत्रकारिता विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर बने डॉ.सौरभ मालवीय



एसोसिएट प्रोफेसर बने डॉ.सौरभ मालवीय

 


प्रभु श्री सीतारामजी की कृपा से बड़े भाई की भूमिका में सतत मेरा मार्गदर्शन कर बेहतर करने हेतु प्रेरित करने वाले डॉ. सौरभ मालवीय जी की लखनऊ विश्वविद्यालय में एसोसिएट प्रोफ़ेसर के रूप में नियुक्ति मेरे लिए किसी निजी उपलब्धि से कम नहीं है।
'जिमि सरिता सागर महुं जाही।
जद्यपि ताहि कामना नाहीं।।
तिमि सुख संपति बिनहिं बोलाएं।
धरमसील पहिं जाहिं सुभाएं।।'
भावार्थ: जैसे नदियां बहती हुई सागर की ओर ही जाती हैं, जबकि समुद्र को उसके जल की कामना नहीं होती। वैसे ही, यश (सुख-संपत्ति) भी बिना कामना के धर्मशील (विचारवान) लोगों के पास जाकर स्वयं सुशोभित होते हैं। (मानस बालकांड)
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लखनऊ विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर बने डॉ. सौरभ मालवीय 
लखनऊ विश्वविद्यालय ने लोकप्रिय मीडिया शिक्षक एवं राजनीतिक विश्लेषक डॉ. सौरभ मालवीय को पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर (सह आचार्य) के पद पर नियुक्त किया है। उन्होंने गुरुवार को विश्विद्यालय में अपना कार्यभार ग्रहण कर लिया है।
डॉ.सौरभ मालवीय इससे पहले माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल में वरिष्ठ सहायक प्राध्यापक के पद पर कार्यरत थे। डॉ. मालवीय को लखनऊ विश्वविद्यालय में एसोसिएट प्रोफेसर पद पर चुने जाने पर माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय में उनके लिए विदाई समारोह आयोजित किया गया था। इस मौके पर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. (डॉ.) के.जी सुरेश और कुलसचिव प्रो. अविनाश वाजपेयी ने एक कार्यक्रम में डॉ. सौरभ मालवीय को स्मृति चिह्न भेंट किया और संस्थान में उनके साथ बिताए तमाम सुखद स्मृतियों को साझा किया।
विदित हो कि डॉ. सौरभ मालवीय ने अपनी लिखित पुस्तक 'राष्ट्रवादी पत्रकारिता के शिखर पुरुष अटल बिहारी बाजपेयी' और ‘भारत बोध’ के माध्यम से लेखन क्षेत्र में भी ख्याति अर्जित किया है। पत्रकारिता विधा में उनके रचना कौशल के लिए डॉ. मालवीय को पं. प्रताप नारायण मिश्र साहित्यकार सम्मान समेत तमाम अवॉर्ड्स से सम्मानित किया जा चुका है। 
उल्लेखनीय है कि डॉ.मालवीय पूर्व में वाजपेयी सरकार में बीजेपी मीडिया सेल से जुड़े थे और वर्ष 2010 तक मीडिया सेल में समन्वयक के रूप में खासे लोकप्रिय रहे। सांस्कृतिक राष्ट्रवाद पर पीएचडी करने वाले श्री मालवीय, राष्ट्रवादी लेखक और वक्ता के रूप में अपनी खास पहचान बनाई है। डॉ. सौरभ तमाम टीवी चैनलों पर  डिबेट में शामिल होते रहते हैं तथा सरकार के नीतियों व कार्यों पर अपना विचार प्रकट करते हैं।
शिवेश प्रताप 

Thursday, October 12, 2023

हिन्दुत्व एक जीवन दर्शन है

हिन्दू शब्द का प्रयोग कब प्रारंभ हुआ यह बताना कठिन है. परंतु यह सत्य है कि हिन्दू शब्द अत्यंत प्राचीन वैदिक वाङ्मय के ग्रन्थों मे साक्षात् नहीं पाया जाता है. परन्तु यह भी निर्विवाद है कि हिन्दू शब्द का मूल निश्चित रूप से वेदादि प्राचीन ग्रन्थों में विद्यमान है.
भारत में हिन्दू नाम की उपासना पद्धति है ही नही यहां तो कोई वैष्णव है या शैव अथवा शक्य है कबीरपंथी है सिख है आर्यसमाजी है जैन और बौद्ध है. वैष्णवों में भी उपासना के अनेक भेद हैं. अर्थात् जितने व्यक्ति उपासना और आस्था की उतनी ही विधियां हर विधि को समाज से स्वीकारोक्ति प्राप्त है. पश्चिम के राजनीतिज्ञ व समाजशात्री  भारतीय संस्कृति और समाज के इस पक्ष को या तो समझ ही नहीं सके या उन्होने पश्चिमी अवधारणाओं के बने सांचों में ही भारत को ढ़ालने का प्रयास किया.

अनेक सज्जनों द्वारा विभिन्न प्रकार की व्याख्याओं से यह शब्द भी विवादित हो गया है. यद्यपि यह शब्द भारत का ही पर्याय है और यह जीवन पद्धति की ओर इंगित करता है. विख्यात स्तम्भकार पद्म श्री मुजफ्फर हुसैन कहते हैं -
‘‘भारतीयता तो भारत की नागरिकता है, भारत की राष्ट्रीयता हिन्दुत्व है.’’
ऐसा भी प्रचारित किया गया है कि हिन्दू नाम अपमानजनक   है जैसा कि भारतीय फारसी के शब्दकोशों में मिलता है. इनमें हिन्दू का अर्थ द्वेषवश, काला, चोर आदि किया गया है जो कि पूर्णतया असत्य है. अरबी व फारसी भाषा में ‘हिन्द’ का अर्थ है ‘सुन्दर’ एवं ‘भारत का रहने वाला’ आदि. हिंदू चिंतक श्री कृष्णवल्लभ पालीवाल बताते हैं कि जब 1980-82 में, मैं बगदाद में ईराक सरकार का वैज्ञानिक सलाहकार था तो मुझे वहां यह देखकर आश्चर्य हुआ कि अनेक युवक व युवतियों के नाम ‘अलहिन्द’ व ‘विनत हिन्द’ थे. तो मैंने आश्चर्यवश उनसे पूछा कि ये नाम तो हिन्दुओं जैसे लगते है जिसका अर्थ है ‘सुन्दर’ और इसी भाव में हमारे ये नाम है.
कुछ लोगों ने अपने को ‘हिन्दू’ न कहकर ‘आर्य‘ कहना ज्यादा उचित समझा है, किंतु रामकोश में सुस्पष्ट लिखा है कि-
हिन्दूर्दुष्टो न भवति नानार्याे न विदूषकः।
सद्धर्म पालको विद्वान् श्रौत धर्म परायणः।।
यानी ‘‘हिन्दू दुष्ट, दुर्जन व निन्दक नहीं होता है. वह तो सद्धर्म का पालक, सदाचारी, विद्वान, वैदिक धर्म में निष्ठावान और आर्य होता है.“ अतः हिन्दू ही आर्य है और आर्य ही हिन्दू है. समय की मांग है कि हम इस विवाद को भूलकर मिल जुलकर हिन्दू धर्म व हिन्दू संस्कृति को उन्नत करने और हिन्दू राज्य स्थापित करने प्रयास करें.

स्वामी विज्ञानानन्द ने हिन्दू नाम की उत्पति के विषय में कहा कि हमारा हिन्दू नाम हजारों वर्षों से चला आ रहा है जिसके वेदो संस्कृत व लौकिक साहित्य में व्यापक प्रमाण मिलते है. अतः हिन्दू नाम पूर्णतया वैदिक, भारतीय और गर्व करने योग्य है. वस्तुतः यह नाम हमें विदेशियों ने नहीं दिया है बल्कि उन्होंने अपने अरबी व फारसी भाषा के साहित्य में उच्च भाव में प्रयोग किया है.
शताब्दियों से सम्पूर्ण भारतीय समाज ‘‘हिन्दू“ नाम को अपने धार्मिक, सांस्कृतिक, राष्ट्रीय एवं जातिय समुदाय के सम्बोधन के लिए गर्व से प्रयोग करता रहा है. आज भारत ही नहीं, विश्व के कोने-कोने में बसे करोड़ों हिन्दू अपने को हिन्दू कहने में गर्व अनुभव करते हैं. वे जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में अपने धर्म एवं संस्कृति से प्रेरणा पाकर असीम सफलता प्राप्त कर रहे हैं. वे हिन्दू जीवन मूल्यों से स्फूर्ति पाकर समता और कर्मठता के आधार पर, भारत में ही नहीं, विदेशों में भी, अपनी श्रेष्ठता का परिचय दे रहे हैं. वे श्रेष्ठ मानवीय जीवन मूल्यों के आधार पर समाज में प्रतिष्ठित भी हो रहे है.

हिन्दू पुनर्जागरण के पुरोधा महर्षि दयानन्द सरस्वती, युवा हिन्दू सम्राट स्वामी विवेकानन्द, स्वामी श्रद्धानन्द, योगी श्री अरविंद, भाई परमानन्द, स्वातान्त्र्य वीर विनायक दामोदर सावरकर आदि महापुरुषों ने ‘हिन्दू’ नाम को गर्व के साथ स्वीकार कर आदर प्रदान किया है. स्वामी विवेकानन्द एवं स्वातन्त्र्य वीर सावरकर ने हिन्दू नाम के विरूद्ध चलाए जा रहे मिथ्या कुप्रचार का पूर्ण सामथ्र्य से विरोध किया. सावरकर जी ने प्राचीन भारतीय शास्त्रों के आधार पर इस नाम की मौलिकता को बड़ी प्रामाणिता के साथ पुनः स्थापित किया तथा बल देकर सिद्ध किया कि ‘‘हिन्दू नाम पूर्णतया भारतीय है जिसका मूल वेदों का प्रसिद्ध ‘सिन्धु’ शब्द है.’
हिन्दू शब्द का प्रयोग कब प्रारम्भ हुआ, इसकी निश्चित तिथि बताना कठिन अथवा विवादास्पद होगा. परन्तु यह सत्य है कि हिन्दू शब्द अत्यन्त प्राचीन वैदिक वाङ्मय के ग्रन्थों में साक्षात् नहीं पाया जाता है. परन्तु यह भी निर्विवाद है कि हिन्दू शब्द का मूल निश्चित रूप से वेदादि प्राचीन ग्रन्थों में विद्यमान है. औपनिषदिको काल के प्राकृत, अपभ्रंश, संस्कृत एवं मध्यकालीन साहित्य में हिन्दू शब्द पार्यप्त मात्रा में मिलता है. अनेक विद्वानों का मत है कि हिन्दू शब्द प्राचीन काल से सामान्य जनों की व्यावहारिक भाषा में प्रयुक्त होता रहा है. जब प्राकृत एवं अपभ्रंश शब्दों का प्रयोग साहित्यिक भाषा के रूप में होने लगा, उस समय सर्वत्र प्रचलित हिन्दू शब्द का प्रयोग संस्कृत ग्रन्थों में होने लगा. ब्राहिस्र्पत्य कालिका पुराण, कवि कोश, राम कोश, कोश, मेदिनी कोश, शब्द कल्पद्रुम, मेरूतन्त्र, पारिजात हरण नाटक, भविष्य पुराण, अग्निपुराण और वायु पुराणादि संस्कृत ग्रंन्थों में हिन्दू शब्द जाति अर्थ में सुस्पष्ट मिलता है.

इससे यह स्पष्ट होता है कि इन संस्कृत ग्रन्थों के रचना काल से पहले भी हिन्दू शब्द का जन समुदाय में प्रयोग होता था.
संस्कृत साहित्य में ‘हिन्दू’ शब्द
संस्कृत साहित्य में पाए गए हिन्दू शब्द प्रस्तुत है-
हिंसया दूयते यश्च सदाचरण तत्परः।
वेद… हिन्दू मुख शब्दभाक्।।
(वृद्ध स्मृति)
‘‘जो सदाचारी वैदिक मार्ग पर पर चलने वाला, हिंसा से दुःख मानने वाला है, वह हिन्दू है.“
बलिना कलिनाच्छन्ने धर्मे कवलिते कलौ।
यावनैर वनीक्रान्ता, हिन्दवो विन्ध्यमाविशन्।।
(कालिका पुराण)
‘जब बलवान कलिकाल ने सबको प्रच्च्छन्न कर दिया और धर्म उसका ग्रास बन गया तथा पृथ्वी यवनों से आक्रान्त हो गई, तब हिन्दू खिसककर विन्ध्याचल की ओर चले गए.’’
इसी प्रकार का भाव यह श्लोक भी प्रकट करता हैः
यवनैरवनी क्रान्ता, हिन्दवो विन्ध्यमाविशन्।
बलिना वेदमार्र्गायं कलिना कवलीकृतः।।
(शार्ङ्धर पद्धति)
‘यवनों के आक्रमण से हिन्दू विन्ध्याचल पर्वत की ओर चले गए.’
हिन्दूः हिन्दूश्च प्रसिद्धौ दुष्टानां च विघर्षणे.
(अमर कोश)
‘हिन्दू’ और ‘हिन्दू’ दोनों शब्द दुष्टों को विघर्षित करने वाले अर्थ में प्रसिद्ध हैं.’
‘‘हिन्दू सद्धर्म पालको विद्वान् श्रौत धर्म परायणः।
(राम कोश)
हिन्दूः हिन्दूश्च हिन्दवः।
(मेदिनी कोश)
“हिन्दू, हिन्दू और हिन्दुत्व तीनों एकार्थक है.’
हिन्दू धर्म प्रलोप्तारौ जायन्ते चक्रवर्तिनः।
हीनश्च दूषयप्येव स हिन्दूरित्युच्यते प्रिये।।
(मेरु तन्त्र)
‘‘हे प्रिये! हिन्दू धर्म को प्रलुप्त करने वाले चक्रवर्ती राजा उत्पन्न हो रहे हैं. जो हीन कर्म व हीनता का त्याग करता है, वह हिन्दू कहा जाता है.’’
हिनस्ति तपसा पापान् दैहिकान् दुष्टमानसान्।
हेतिभिः शत्रुवर्गः च स हिन्दूः अभिधीयते।।
(परिजातहरण नाटक)
‘जो अपनी तपस्या से दैहिक पापों को दूषित करने वाले दोषों का नाश करता है, तथा  अपने शत्रु समुदाय का भी संहार करता है, वह हिन्दू है.’
हीनं दूषयति इति हिन्दू जाति विशेषः
(शब्द कल्पद्रुमः)
‘हीन कर्म का त्याग करने वाले को हिन्दू कहते हं.’
इन प्रमाणों से यह स्पष्ट है कि प्राचीन एवं अर्वाचीन संस्कृत साहित्य में हिन्दू शब्द का पर्याप्त उल्लेख के साथ  साथ हिन्दू के लक्षणों को भी दर्शाया गया है.

*लेखक ने सांस्कृतिक राष्ट्रवाद पर शोध किया है। 

Saturday, August 12, 2023

सुखद सानिध्य



सुखद सानिध्य
मा. कुलपति 
प्रो.के एन सिंह जी
केंद्रीय विश्विद्यालय दक्षिण बिहार -गया
Central University of South Bihar A++ University

Friday, August 11, 2023

समाचार-पत्रों में

 





Wednesday, August 9, 2023

देवरिया गौरव सम्मान से सम्मानित हुए डॉ.सौरभ मालवीय

 

धर्मराज सिंह शिक्षण संस्थान, पिपरा लार में आयोजित देवरिया गौरव सम्मान समारोह में  डॉ.मालवीय को शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ठ कार्य के लिए सम्मानित किया गया। डॉ.मालवीय का जन्म ग्राम-पटनेजी, जनपद- देवरिया में हुआ। प्रारम्भिक शिक्षा सरस्वती शिशु मंदिर लार में हुई।
 माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विवि. भोपाल में सहायक प्राध्यापक सौरभ मालवीय अनेक पुस्तकों का लेखन किया है जिसमें राष्ट्रवादी पत्रकारिता के शिखरपुरुष अटल बिहारी बाजपेयी, अंत्योदय को साकार करता उत्तर प्रदेश, विकास के पथ पर भारत एवं भारत बोध प्रमुख है। 
कार्यक्रम में मुख्य विकास अधिकारी देवरिया- श्री रविंद्र कुमार जी, उप पुलिस अधीक्षक श्री राजेश सोनकर, पूर्व विधायक श्री सत्य प्रकाश मणि, पूर्व विधायक श्री काली प्रसाद जी, प्रबंधक श्री संतोष सिंह लारी समेत अनेक गणमान्य उपस्थित थे।

Saturday, August 5, 2023

पुस्तक भेंट



भारतीय जानता पार्टी की प्रदेश मंत्री आदरणीया श्रीमती मीना चौबे जी प्रभारी, प्रकाशन प्रकोष्ठ. पूर्व सदस्य - राज्य महिला आयोग,, लखनऊ

Monday, July 31, 2023

पुस्तक भेंट

 

सुखद भेंट
श्रीमती रीता बहुगुणा जी पूर्व मंत्री उत्तर प्रदेश एवं सांसद प्रयागराज
पुस्तक अंत्योदय को साकार करता उत्तर प्रदेश

Thursday, July 27, 2023

पुस्तक भेंट




सुखद सानिध्य ! पुस्तक भेंट !!
मा. उपमुख्यमंत्री श्री ब्रजेश पाठक जी को अपनी पुस्तक 'अंत्योदय को साकार करता उत्तर प्रदेश' भेंट की. 
लखनऊ, उत्तर प्रदेश

Wednesday, July 26, 2023

गप-शप आनंद ही आनंद

 



Tuesday, July 25, 2023

सानिध्य सुख






सानिध्य सुख !
स्नेह, मार्गदर्शन,आशीर्वाद का वटवृक्ष मा.कुलपति प्रो.केजी सुरेश जी का आत्मीय आशीष पाकर मन आनंदित हो जाता। 

Thursday, July 20, 2023

सार्थक दिन

सार्थक दिन !! शिक्षक संवाद !!
लखनऊ विश्वविद्यालय - लखनऊ



Monday, July 17, 2023

समाचार-पत्र में

  


Saturday, July 15, 2023

चिकित्सक बन्धुओं के साथ

 

आज की सुबह 
National Homoeopathic medical College, Gomti Nagar Lucknow चिकित्सक बन्धुओं के साथ 

Thursday, July 13, 2023

समाचार-पत्रों में

  



Saturday, July 8, 2023

बौद्धिक चर्चा




बौद्धिक चर्चा 
समाज जीवन 
राष्ट्र जीवन

Monday, June 26, 2023

प्रयागराज

  




Sunday, June 25, 2023

आपातकाल पर लेख

 

आपातकाल लोकतंत्र को समाप्त करने का एक भयावह घटना थी उस परिस्थिति में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने लोकतंत्र की रक्षा के लिए आगे बढ़कर राष्ट्र की जय हो का मंत्र दिया। आइये जाने हम इस काला इतिहास को। सादर 

Wednesday, June 21, 2023

योग दिवस

  


योग दिवस

  


Saturday, June 17, 2023

सानिध्य



सौरभ मालवीय सर का सानिध्य 
सलाहकार, उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा परिषद, लखनऊ
आपसे मिलना हमेशा सुखद होता है सर 
एमसीयू की बहुत सी यादे ताज़ा हो गई 
आपका प्रेम और आशीर्वाद युही बना रहे
निरंतर आपका मार्गदर्शन ऐसे ही प्राप्त होता रहे.
-यजत  

Sunday, June 11, 2023

अवकाश में यादों को सजोना

 

बीजेपी के तत्कालीन अध्यक्ष श्री वेंकैया नायडू जी एवं पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी वाजपेयी जी।

Sunday, May 28, 2023

भारतीय लोकतंत्र में लोकमंगल का दिन हमारा संसद भवन हमारा स्वाभिमान !!

  





Wednesday, May 24, 2023

आनंद की अनुभूति

  





मंच + माईक + विचार + ज्ञान + भाव +तर्क + तथ्य +सत्य + सुंदर + कर्म + धर्म + अभिव्यक्ति = आनंद की अनुभूति


भारत की राष्‍ट्रीयता हिंदुत्‍व है