भारत की ज्ञान परंपरा एवं ऋषि परंपरा को बाल मन में संजोना : डॉ. सौरभ मालवीय
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सुल्तानपुर। सरस्वती विद्या मन्दिर वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, विवेकानन्द नगर,
सुल्तानपुर में विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान, पूर्वी उत्तर प्रदेश...
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उदय सिन्हा (समूह संपादक, अमर उजाला)
मौका था प्रवक्ता. काॅम के 10 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में रखे गए विमर्श का और विमर्श का विषय था 'न्यू मीडिया के आगे नतमस्तक मेनस्ट्रीम मीडिया' जिसकी अध्यक्षता डॉ सच्चिदानंद जोशी (सदस्य सचिव आईजीएनसीए) कर रहे थे, बतौर विशिष्ट अतिथि उदय सिन्हा (समूह संपादक अमर उजाला) और शिवाजी सरकार (डीन, पत्रकारिता विभाग मंगलापतन विश्वविद्यालय) मौजूद थे। वहीं इस विषय पर वरिष्ठ पत्रकार ब्रजेश सिंह, बालेन्दु शर्मा दाधीच और वरिष्ठ पत्रकार विनीता यादव को सुनने का अवसर प्राप्त हुआ।
पूरे कार्यक्रम के माॅडरेटर हमारे गुरूदेव डॉ Sourabh Malviya सर थे और मैं इस बात को लेकर आश्वस्त रहता हूँ कि जिस कार्यक्रम में सौरभ सर हों वो निश्चित रूप से सार्थक और उत्साह से भरा होगा और आज भी एैसा ही हुआ।
भारत के प्रिंट मीडिया ने वेब मीडिया से दोस्ती कर ली, वेब मीडिया के माध्यम से लोगों तक सूचनाएं तेजी से पहुँच रही हैं और यहीं से मेनस्ट्रीम मीडिया के लिए चुनौती खड़ी हो जाती है। भारत में एक समय एैसा भी रहा जब लोग न्यू मीडिया को गंभीरता से नहीं लेते थे पर 2008 के बाद स्थितियों में बदलाव आया और न्यू मीडिया ने ना सिर्फ खुद को स्थापित किया बल्कि मेनस्ट्रीम मीडिया कई सारी चुनौतियां भी खड़ा रहा है। पर ये सुखद है कि भारत के मेनस्ट्रीम मीडिया ने न्यू मीडिया से दोस्ती कर ली।
(बालेन्दु शर्मा दाधीच)
जब न्यू मीडिया शुरू में आया था तब हमें ये अनुमान नहीं था कि ये इतना आगे जाएगा। मैं एक टीवी पत्रकार हूँ पर इमानदारी से कहना चाहूंगीं कि मैं खुद टीवी नहीं देखती क्योंकि फोन पे आसानी से सूचनाएं मिल जाती है। न्यू मीडिया ने टीवी और अखबार के सामने एक चुनौती पेश की है।
(वरिष्ठ पत्रकार, विनीता यादव)
आज के समय में अखबार की हार्ड कॉपी पढ़ने वाले लोग कम मिलते हैं क्योंकि उनके फेन पर आसानी से खबरें पहुंच जाती हैं। मैं ये मानता हूँ कि न्यू मीडिया ने मेनस्ट्रीम मीडिया के सामने एक चुनौती पेश की है। 5 साल बाद मीडिया डिजिटल होगा और मेजर इनवेस्टमेंट डिजिटल में होगा।
(वरिष्ठ पत्रकार, ब्रजेश सिंह)
हमें इस बहस में नहीं पड़ना चाहिए कि मेनस्ट्रीम मीडिया के सामने न्यू मीडिया कितनी चुनौती पेश कर रही है। हम सब कुल मिलाकर एक व्यापक मीडिया परिदृश्य का हिस्सा है।
(सच्चिदानंद जोशी)
Tuesday, October 16, 2018
अखबार अगर अपनी विश्वसनीयता कायम रखेंगे तो कभी खत्म नहीं होंगे
उदय सिन्हा (समूह संपादक, अमर उजाला)
मौका था प्रवक्ता. काॅम के 10 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में रखे गए विमर्श का और विमर्श का विषय था 'न्यू मीडिया के आगे नतमस्तक मेनस्ट्रीम मीडिया' जिसकी अध्यक्षता डॉ सच्चिदानंद जोशी (सदस्य सचिव आईजीएनसीए) कर रहे थे, बतौर विशिष्ट अतिथि उदय सिन्हा (समूह संपादक अमर उजाला) और शिवाजी सरकार (डीन, पत्रकारिता विभाग मंगलापतन विश्वविद्यालय) मौजूद थे। वहीं इस विषय पर वरिष्ठ पत्रकार ब्रजेश सिंह, बालेन्दु शर्मा दाधीच और वरिष्ठ पत्रकार विनीता यादव को सुनने का अवसर प्राप्त हुआ।
पूरे कार्यक्रम के माॅडरेटर हमारे गुरूदेव डॉ Sourabh Malviya सर थे और मैं इस बात को लेकर आश्वस्त रहता हूँ कि जिस कार्यक्रम में सौरभ सर हों वो निश्चित रूप से सार्थक और उत्साह से भरा होगा और आज भी एैसा ही हुआ।
भारत के प्रिंट मीडिया ने वेब मीडिया से दोस्ती कर ली, वेब मीडिया के माध्यम से लोगों तक सूचनाएं तेजी से पहुँच रही हैं और यहीं से मेनस्ट्रीम मीडिया के लिए चुनौती खड़ी हो जाती है। भारत में एक समय एैसा भी रहा जब लोग न्यू मीडिया को गंभीरता से नहीं लेते थे पर 2008 के बाद स्थितियों में बदलाव आया और न्यू मीडिया ने ना सिर्फ खुद को स्थापित किया बल्कि मेनस्ट्रीम मीडिया कई सारी चुनौतियां भी खड़ा रहा है। पर ये सुखद है कि भारत के मेनस्ट्रीम मीडिया ने न्यू मीडिया से दोस्ती कर ली।
(बालेन्दु शर्मा दाधीच)
जब न्यू मीडिया शुरू में आया था तब हमें ये अनुमान नहीं था कि ये इतना आगे जाएगा। मैं एक टीवी पत्रकार हूँ पर इमानदारी से कहना चाहूंगीं कि मैं खुद टीवी नहीं देखती क्योंकि फोन पे आसानी से सूचनाएं मिल जाती है। न्यू मीडिया ने टीवी और अखबार के सामने एक चुनौती पेश की है।
(वरिष्ठ पत्रकार, विनीता यादव)
आज के समय में अखबार की हार्ड कॉपी पढ़ने वाले लोग कम मिलते हैं क्योंकि उनके फेन पर आसानी से खबरें पहुंच जाती हैं। मैं ये मानता हूँ कि न्यू मीडिया ने मेनस्ट्रीम मीडिया के सामने एक चुनौती पेश की है। 5 साल बाद मीडिया डिजिटल होगा और मेजर इनवेस्टमेंट डिजिटल में होगा।
(वरिष्ठ पत्रकार, ब्रजेश सिंह)
हमें इस बहस में नहीं पड़ना चाहिए कि मेनस्ट्रीम मीडिया के सामने न्यू मीडिया कितनी चुनौती पेश कर रही है। हम सब कुल मिलाकर एक व्यापक मीडिया परिदृश्य का हिस्सा है।
(सच्चिदानंद जोशी)
मेरे प्रेरणास्रोत: स्वामी विवेकानंद
गिरकर उठना, उठकर चलना... यह क्रम है संसार का... कर्मवीर को फ़र्क़ न पड़ता किसी जीत और हार का... क्योंकि संघर्षों में पला-बढ़ा... संघर्ष ही मेरा जीवन है...
-डॉ. सौरभ मालवीय
डॉ. सौरभ मालवीय
अपनी बात
सामाजिक परिवर्तन और राष्ट्र-निर्माण की तीव्र आकांक्षा के कारण छात्र जीवन से ही सामाजिक सक्रियता। बिना दर्शन के ही मैं चाणक्य और डॉ. हेडगेवार से प्रभावित हूं। समाज और राष्ट्र को समझने के लिए "सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और मीडिया" विषय पर शोध पूर्ण किया है, परंतु सृष्टि रहस्यों के प्रति मेरी आकांक्षा प्रारंभ से ही है।
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लोक दृष्टि
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पृथ्वी दिवस 22 अप्रैल पर विशेष -डॉ. सौरभ मालवीय पृथ्वी हमारा निवास स्थान है। मनुष्य सहित सभी प्राणी इसी धरती पर जन्म लेते हैं और इसी पर ज...
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सुल्तानपुर। सरस्वती विद्या मन्दिर वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, विवेकानन्द नगर, सुल्तानपुर में विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान, पूर्वी उ...
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सुप्रभात! काशी विश्वनाथ मंदिर में बाबा भगवान शिव के दर्शन का सौभाग्य मिला—यह वास्तव में अत्यंत पवित्र और आनंददायक क्षण है। काशी की महिमा ही ...
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लखीमपुर खीरी। सामाजिक समरसता मंच द्वारा डॉ. भीमराव अम्बेडकर की जयंती की पूर्व संध्या पर जिला पंचायत सभागार में एक विचार गोष्ठी का आयोजन किया...
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सान्निध्य सुख ! पुस्तक भेंट ! भारतीय ज्ञान परम्परा : धर्मदीप से राष्ट्रदीप प्रो. रवींद्रनाथ श्रीवास्तव संयोजक, राजभाषा हिन्दी विभाग, नव न...
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डॊ. सौरभ मालवीय हमारे देश में अनेक धर्म, अनेक भाषाएं भी हैं, लेकिन हमारी संस्कृति एक ही है। हर भारतीय का प्रथम कर्त्यव्य है की वह अपने द...
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संप्रति
डॉ. सौरभ मालवीय
2/564, अवधपुरी खण्ड 2
खरगापुर, निकट प्राथमिक विद्यालय, गोमतीनगर विस्तार
2/564, अवधपुरी खण्ड 2
खरगापुर, निकट प्राथमिक विद्यालय, गोमतीनगर विस्तार
लखनऊ, उत्तर प्रदेश
पिन- 226010
मो- 8750820740
पिन- 226010
मो- 8750820740
ईमेल - malviya.sourabh@gmail.com
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डॉ. सौरभ मालवीय
एसोसिएट प्रोफेसर
पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग
लखनऊ विश्वविद्यालय
लखनऊ, उत्तर प्रदेश
मो- 8750820740
ईमेल - malviya.sourabh@gmail.com
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