Tuesday, March 17, 2026

कैलाश मानसरोवर यात्रा


मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रदेश सरकार श्रद्धालुओं की सुविधाओं को बढ़ाने के लिए पूरी तरह संवेदनशील व प्रतिबद्ध है। श्री कैलाश मानसरोवर यात्रा प्राचीन काल से ही भारतीय सनातन धर्म की परम्परा, समाज तथा राष्ट्र की एकता व एकात्मता को सशक्त रूप से जोड़ने का माध्यम रही है। सुखद संयोग है कि ऋषि-मुनियों ने जिस भाव के साथ हमें जोड़ने का कार्य किया, आज हम सभी उसे बनाए रखने के दायित्व का निर्वहन कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री 17 मार्च 2026 को लखनऊ स्थित लोक भवन सभागार में श्री कैलाश मानसरोवर यात्रा करने वाले श्रद्धालुओं को अनुदान राशि वितरण कार्यक्रम में अपने विचार व्यक्त कर रहे थे। उन्होंने श्रद्धालुओं को एक-एक लाख रुपये की अनुदान राशि के प्रतीकात्मक चेक प्रदान किये। ज्ञातव्य है कि राज्य सरकार द्वारा प्रदेश के 555 तीर्थ  यात्रियों को एक लाख रुपये प्रति व्यक्ति यात्रा अनुदान राशि प्रदान की गई है।

उन्होंने कहा कि पहले तीर्थाटन जीवन का हिस्सा माना जाता था। लोग अपनी सामान्य दिनचर्या में से कुछ समय निकालकर यात्रा पर निकलते थे। लोगों के पास संग्रह की वृत्ति नहीं थी, बल्कि अपनी मेहनत व पुरूषार्थ से जो कुछ अर्जित करते थे, उससे किसी न किसी धार्मिक यात्रा पर निकलकर जरूरतमंदों की सहायता करते थे। उस यात्रा के माध्यम से पुण्य के भागीदार बनने के साथ समाज को जोड़ने, समझने का कार्य  करते थे। यह भाव आदिकाल से बना हुआ है। जब आदि शंकर ने केरल से निकलकर देश के चारों कोनों में चार पीठों की स्थापना की थी, तब देश में कोई सरकार नहीं थी। राजा-रजवाड़ों का शासन था। राजनीतिक इकाइयां अलग-अलग थीं, लेकिन सांस्कृतिक रूप से संपूर्ण भारत एक था। आज भी वह भाव प्रत्येक सनातन धर्मावलम्बी के मन में रहता है।

उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं ने श्री कैलाश मानसरोवर यात्रा की कठिनाइयां, चुनौतियों और आपदाओं का मुकाबला करते हुए गत वर्ष  इस यात्रा को सकुशल पूर्ण किया। प्रदेश के श्रद्धालुजनों को कोई समस्या न हो, इसके लिए प्रदेश सरकार ने वर्ष  2017-18 में गाजियाबाद में कैलाश मानसरोवर यात्रा भवन का निर्माण कराया है, जो निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण हुआ। विदेश मंत्रालय की औपचारिकताएं पूर्ण करने के दौरान यह भवन श्रद्धालुओं के ठहराव का प्रथम पड़ाव होता है। शेष समय इस यात्रा भवन का उपयोग अन्य धार्मिक यात्रा से संबंधित श्रद्धालुओं के लिए भी सुनिश्चित किया जाए। कैलाश मानसरोवर यात्रा भवन के उपयोग के साथ-साथ इसका संरक्षण व बेहतर रख-रखाव भी किया जाए, क्योंकि अपनी परम्परा व धार्मिक स्थलों के प्रति यही हमारी कृतज्ञता है।

उन्होंने कहा कि श्री कैलाश मानसरोवर की यात्रा में राज्य सरकार प्रदेश के अंदर तथा भारत सरकार संपूर्ण भारत में अच्छी सुविधाएं उपलब्ध कराती है। लेकिन यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं को दूसरे देशों से भी जुड़ना होता है और उनका व्यवहार जगजाहिर है। लेकिन उस असुविधा में भी हमारी आस्था भारी पड़ती है और लोग देवाधिदेव महादेव का दर्शन करते हैं। जब भाव होता है, तो व्यक्ति प्रत्येक कठिन चुनौती का सामना करते हुए भी मंजिल को प्राप्त कर लेता है। हमारी सरकार विदेश मंत्रालय के साथ समन्वय कर आने वाले समय में गाजियाबाद में ही श्रद्धालुओं के लिए सुविधाओं में और वृद्धि करने का प्रयास करेगी। पासपोर्ट कार्यालय जनपदों में बनाए जा रहे हैं। कई सुविधाएं ऑनलाइन उपलब्ध हैं।

उन्होंने कहा कि धार्मिक पर्यटन की मर्यादा को श्रद्धापूर्वक आगे बढ़ाने का दायित्व हम सबका होना चाहिए। धार्मिक यात्रा श्रद्धा भाव के साथ करनी चाहिए, पर्यटन व मनोरंजन गौण होना चाहिए। इससे हम धार्मिक स्थलों की पवित्रता, मर्यादा और गरिमा को बनाए रख सकेंगे। इन धार्मिक स्थलों की गरिमा के अनुरूप हमारा आचरण आगे आने वाली पीढ़ी को संस्कारित करने में भी सहायक होगा। प्रदेश सरकार का प्रयास रहा है कि प्रत्येक तीर्थस्थल पर श्रद्धालुओं को आज के समय के अनुरूप अच्छी सुविधाएं प्राप्त हों। डबल इंजन सरकार का इस पर विशेष फोकस है। वर्ष 2025 में प्रदेश में 164 करोड़ श्रद्धालु अलग-अलग धर्मस्थलों व तीर्थ स्थलों पर आए। इसमें 66 करोड़ श्रद्धालु केवल प्रयागराज महाकुम्भ-2025 में ही आए थे। काशी में श्री काशी विश्वनाथ धाम, अयोध्या में प्रभु श्रीराम जन्मभूमि, मथुरा-वृन्दावन सहित अलग-अलग क्षेत्रों में करोड़ों श्रद्धालुओं का आगमन हुआ। यह चुनौती होने के साथ-साथ एक अवसर भी है। सरकार अपने स्तर पर आवागमन व जनसुविधाओं से संबंधित अच्छी व्यवस्था देने का लगातार प्रयास कर रही है। पर्यटन क्षेत्र की सम्भावनाओं को तेजी से आगे बढ़ाया जाए। उन सम्भावनाओं के माध्यम से प्रदेश के विकास व रोजगार के नये अवसर भी उपलब्ध कराए जाएं। प्रदेश सरकार ने विगत नौ वर्षों में लखनऊ, काशी, अयोध्या, प्रयागराज, चित्रकूट, माँ विन्ध्यवासिनी धाम, नैमिषारण्य, मथुरा-वृन्दावन, शुकतीर्थ, बौद्ध व जैन पर्यटन से संबंधित केंद्रों व अन्य तीर्थ  स्थलों पर पर्यटकों के लिए अच्छी जनसुविधाएं उपलब्ध कराई हैं। इन सुविधाओं को और बेहतर करने का प्रयास किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में चार धाम हैं। इसके साथ देश में भी चार धाम हैं। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने उत्तर-दक्षिण को जोड़ने के अनेक प्रयास किए हैं। विगत चार-पांच वर्षों से काशी में काशी-तमिल संगमम् का कार्यक्रम चल रहा है। यह कार्यक्रम तमिलनाडु और उत्तर प्रदेश को जोड़ने का बेहतरीन माध्यम बना है। उत्तर प्रदेश में श्री काशी विश्वनाथ धाम है, तो तमिलनाडु में श्री रामेश्वरम धाम है। हमारा प्रयास होगा कि प्रदेश के श्रद्धालु काशी से गंगा जल लेकर बाबा विश्वनाथ का दर्शन कर रामेश्वरम की यात्रा पर जाएं। इस यात्रा को सुगम बनाने के लिए रेल मंत्रालय द्वारा अनेक सुविधाएं दी जाती हैं। उत्तर-दक्षिण के जुड़ने से ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ के निर्माण में सहायता प्राप्त होगी।

उन्होंने कहा कि पर्यटन, संस्कृति एवं धर्मार्थ कार्य विभाग का प्रयास होना चाहिए कि श्री कैलाश मानसरोवर यात्रा का सोशल, डिजिटल, विजुअल एवं प्रिंट मीडिया के माध्यम से व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए। यात्रा के समय हमारे पास एक ऐप हो। ऐसे नवाचारों से धार्मिक यात्राओं एवं प्रदेश के पर्यटन को एक नई पहचान प्राप्त होगी तथा अर्थव्यवस्था और मजबूत होगी।

वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री श्री सुरेश कुमार खन्ना ने कहा कि डबल इंजन सरकार ने देश व प्रदेश के गौरव को लौटाया है। मुख्यमंत्री जी ने प्रदेश में सनातन संस्कृति को मजबूत किया है। उन्होंने एक शायर की पंक्तियों को उद्धृत करते हुए कि ‘काबिले तारीफ है अन्दाज़ एक-एक काम का, और गा रहा है गीत यूपी योगी जी के नाम का’।
पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री जयवीर सिंह ने कहा कि देश और प्रदेश के श्रद्धालु श्री कैलाश मानसरोवर भवन के निर्माण के लिए मुख्यमंत्री जी के प्रति आभारी है। प्रदेश विरासत के सम्मान के साथ विकास की यात्रा को आगे बढ़ा रहा है।
इस अवसर पर प्रदेश की धार्मिक यात्रा वृत्तान्त पर आधारित लघु फिल्म प्रदर्शित की गई।
x

0 टिप्पणियाँ:

भारत की राष्‍ट्रीयता हिंदुत्‍व है