Friday, March 11, 2016

भारतीय समाज और मीडिया


डॉ. सौरभ मालवीय
आज सम्पूर्ण विश्व विज्ञान की प्रगति और संचार माध्यमों के कारण ऐसे दौर में पहुंच चुका है कि मीडिया अपरिहार्य बन गई है। बड़ी-बड़ी और निरंकुश राज सत्ताएं भी मीडिया के प्रभाव के कारण धूल चाट रही है वरना किसको अनुमान था कि लीबिया के कर्नल मुअम्मद अल गद्दाफी भी धूल चाट लेंगे। मिश्र, यमन और सूडान में जो जन विद्रोह हुए वह कल्पनातीत ही था। सर्व शक्ति संपन्न अमेरिका के ग्वांतानामो और अबू गरीब जेल में जो अमानुषिक यंत्रणा दी जाती है वह मीडिया के द्वारा ही तो जाना गया। आस्टे्रलिया के जूलियस असाँत्जे की विकीलीक्स में विश्व राजनीतिक संबंधों पर पुर्नविचार के लिए बाध्य हो गया। कुल मिलाकर यह अघोषित सत्य हो गया है कि मीडिया को दरकिनार करके जी पाना अब असंभव है। लोकतांत्रिक देशों में तो मीडिया चतुर्थ स्तंभ के रूप में ही जाने जाते हैं। इस खबर पालिका को कार्यपालिका, विधायिका, न्यायापालिका के समकक्ष ही रखा जाता है। खबर पालिका के अभाव में वह लोकतंत्र लंगड़ा व तानाशाह भी हो जाता है। बहुत पहले प्रयाग के एक शायर अकबर इलाहाबादी ने खबर पालिका की ताकत को राज सत्ता की तोपों से भी ज्यादा शक्तिशाली माना था। उनका यह शेर खबर पालिका में ब्रम्ह बाक्य बन गया कि
”खींचों न कमाने व न तलवार निकालो।
जब तोप मुकाबिल हो तो अखबार निकालो॥”
इन सारी बुलंदियों के बीच खबर पालिका को एक मिशन बनकर उभरना चाहिए। खबर पालिका से जुड़े लोग स्वयं निर्मित एवं स्वयं चयनित होते हैं। ऐसे में राष्ट्र और समाज के प्रति उनका उत्तरदायित्व और गहरा हो जाता है। यदि वह अपने इस कर्तव्य बोध को ठीक से न समझे तो उनके पतीत होने की संभावना पग-पग बनी रहती है। भारत के दुर्भाग्य से भारत में दो प्रकार की खबर पालिका है जो समानांतर जी रही हैं। एक भारत का प्रतिनिधित्व करता है जिसकी पहुंच भारत की भाषा और बोली में 90 प्रतिशत जनता तक है लेकिन 90 प्रतिशत यह लोग कम शिक्षित और चकाचौंध से दूर रहने वाले ही हैं। दूसरी मीडिया जो इंडिया का प्रतिनिधित्व करती है वह 3 प्रतिशत से भी कम लोगों की है लेकिन वह तीसरे पेज पर छाये रहने वाले लोगों के बूम से चर्चित रहती है। यह तीसरे पेज वाले लोग स्वयंभू शासक है और उन्होंने मान लिया है कि भारत पर शासन करने, इसकी दशा और दिशा तय करने और भारतियों को हांकने की मोरूसी लाठी उन्हीं के पास है और यह लोग खबरों को मनमाने ढंग से तोड़ते-मरोड़ते और प्लाटिंग करते रहते हैं। पिछले साल संपन्न हुए कामन बेल्थ खेलों के दौरान और 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले की अनियमित्ता में नीरा राड़िया के सामने इस इंडिया के अनेक मीडियाकर नंगे पाये गये। कहां पत्रकारिता का आदर्श गणेश शंकर विद्यार्थी, बाबू विष्णु पराडकर, पूर्णचन्द्र गुप्त, महावीर प्रसाद आदि और कहां आज सर्व सुविधायुक्त जमाने में नीरा राडिया का आदर्श। यह तो होना ही था। जब पत्रकार अपने आदर्शों से चूकता है तो वह पूरी व्यवस्थाओं को लेकर डूबता है। पहले ऐसे पत्रकार ‘पीत पत्रकार’ की सूची में जाति भ्रष्ट होते थे। अब तो इन कुजातियों को एक अवसर ही ‘पेड न्यूज’ में दे दिया गया है। लेकिन बात सबसे अधिक तब अखरती है जब पत्रकार दलाल पत्रकारिता और सुपारी पत्रकारिता के स्तर पर पतित होता है।
आज हिन्दी पत्रकारिता में दैनिक जागरण और दैनिक भास्कर समूह की यह स्थिति है कि इनमें से किसी एक के बराबर भी पूरे भारत की सारी प्रिंट मीडिया मिलकर भी नहीं है। लेकिन दुर्भाग्य है भारत का कि 2 प्रतिशत लोगों के लिए छपने वाले अंग्रेजी समाचार पत्र भारत का नेतृत्व संभालने का दाबा करते हैं। दृश्य पत्रकारिता में अनेक ऐसे ग्रुप आ गये हैं जो अपने राजनैतिक आका की जी-हजूरी को अपना धर्म मानते हैं। अन्यथा सन टीवी और मलयालम मनोरमा का उदय भी कैसे होता? यह तो भला हो 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले का कि इन लोगों का कुकर्म सामने आ गया। उत्तर भारत के समाचारपत्रों में भी एक-दो छोड़कर ऐसा कोई समाचार समूह नहीं है जो अपने राजनैतिक देवताओं की जी-हजूरी न बताता हो। सहारा समूह, नेशनल हेराल्ड, ऐशियन ऐज, नई दुनिया, टाईम्स ग्रुप आदि की स्वामी भक्ति के आगे तो शर्म भी शर्मशार होने लगी है। ‘इंडिया एक्सप्रेस’ ने जब-जब सहास किया, तब-तब सत्ताधारियों ने उसकी कमर तोड़ने में कोई कसर नहीं छोड़ी। वह तो रामनाथ गोयनका और अरूण शौरी की इतनी प्रभुत्य तपस्या थी कि उनका कुछ भी नहीं बिगड़ा। आज भी सत्ता समर्थक मीडिया को सरकारी विज्ञापनों से मालामाल कर दिया जाता है और सत्य समर्थक मीडिया पर सरकारी पुलिसिया रौब के डंडे फटकारे जाते हैं, उनका जीना दुभर कर दिया जाता है। उन्हें संसदीय या विधानसभाई कार्यवाहियों के प्रवेश पत्र भी नहीं दिये जाते हैं, जबकि सरकारी भौपूओं को देश-विदेश की असमिति यात्राओं सहित फ्लेटस और अनन्यान्य प्रकार की सभी सुविधाओं से सजाकर दामाद जी जैसी आवभगत की जाती है।

संपर्क
डॉ. सौरभ मालवीय
सहायक प्राध्यापक
माखनलाल चतुर्वेदी
राष्‍ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल (मध्य प्रदेश)
मो. +919907890614

ईमेल : drsourabhmalviya@gmail.com                                                                             

7 टिप्पणियाँ:

Vaneet Nagpal said...

सौरभ जी,
नमस्कार,
आपके ब्लॉग को "सिटी जलालाबाद डाट ब्लॉगपोस्ट डाट काम"के "हिंदी ब्लॉग लिस्ट पेज" पर लिंक किया जा रहा है|

Radhika said...

good but don't be over confident, there is 3rd law is also working againt media

ईं.प्रदीप कुमार साहनी said...

शानदार लेख |

कृपया मेरी भी रचना देखें और ब्लॉग अच्छा लगे तो फोलो करें |
सुनो ऐ सरकार !!
और इस नए ब्लॉग पे भी आयें और फोलो करें |
काव्य का संसार

Mahendra Yadav said...

सौरभ जी,
बहुत अच्छे शब्दों में आपने मीडिया की शक्ति को व्यक्त किया है. मीडिया चाहे कुछ न करे, पर बाकी लोगों तक बात पहुंचाता तो है ही, फिर इसके बाद जन दबाव अपनेआप काम करने लगता है.
- महेंद्र यादव
www.thirdfrontindia.blogspot.com

DR.MANISH KUMAR MISHRA said...

प्रिय हिंदी ब्लॉगर बंधुओं ,
आप को सूचित करते हुवे हर्ष हो रहा है क़ि आगामी शैक्षणिक वर्ष २०११-२०१२ के दिसम्बर माह में ०९--१० दिसम्बर (शुक्रवार -शनिवार ) को ''हिंदी ब्लागिंग : स्वरूप, व्याप्ति और संभावनाएं '' इस विषय पर दो दिवशीय राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित की जा रही है. विश्विद्यालय अनुदान आयोग द्वारा इस संगोष्ठी को संपोषित किया जा सके इस सन्दर्भ में औपचारिकतायें पूरी की जा चुकी हैं. के.एम्. अग्रवाल महाविद्यालय के हिंदी विभाग द्वारा आयोजन की जिम्मेदारी ली गयी है. महाविद्यालय के प्रबन्धन समिति ने संभावित संगोष्ठी के पूरे खर्च को उठाने की जिम्मेदारी ली है. यदि किसी कारणवश कतिपय संस्थानों से आर्थिक मदद नहीं मिल पाई तो भी यह आयोजन महाविद्यालय अपने खर्च पर करेगा.

संगोष्ठी की तारीख भी निश्चित हो गई है (०९ -१० दिसम्बर२०११ ) संगोष्ठी में आप की सक्रीय सहभागिता जरूरी है. दरअसल संगोष्ठी के दिन उदघाटन समारोह में हिंदी ब्लागगिंग पर एक पुस्तक के लोकार्पण क़ी योजना भी है. आप लोगों द्वारा भेजे गए आलेखों को ही पुस्तकाकार रूप में प्रकाशित किया जायेगा . आप सभी से अनुरोध है क़ि आप अपने आलेख जल्द से जल्द भेजने क़ी कृपा करें . आलेख भेजने की अंतिम तारीख २५ सितम्बर २०११ है. मूल विषय है-''हिंदी ब्लागिंग: स्वरूप,व्याप्ति और संभावनाएं ''
आप इस मूल विषय से जुड़कर अपनी सुविधा के अनुसार उप विषय चुन सकते हैं

जैसे क़ि ----------------
१- हिंदी ब्लागिंग का इतिहास

२- हिंदी ब्लागिंग का प्रारंभिक स्वरूप

३- हिंदी ब्लागिंग और तकनीकी समस्याएँ
४-हिंदी ब्लागिंग और हिंदी साहित्य

५-हिंदी के प्रचार -प्रसार में हिंदी ब्लागिंग का योगदान

६-हिंदी अध्ययन -अध्यापन में ब्लागिंग क़ी उपयोगिता

७- हिंदी टंकण : समस्याएँ और निराकरण
८-हिंदी ब्लागिंग का अंतर्राष्ट्रीय परिदृश्य

९-हिंदी के साहित्यिक ब्लॉग
१०-विज्ञानं और प्रोद्योगिकी से सम्बंधित हिंदी ब्लॉग

११- स्त्री विमर्श से सम्बंधित हिंदी ब्लॉग

१२-आदिवासी विमर्श से सम्बंधित हिंदी ब्लॉग

१३-दलित विमर्श से सम्बंधित हिंदी ब्लॉग
१४- मीडिया और समाचारों से सम्बंधित हिंदी ब्लॉग
१५- हिंदी ब्लागिंग के माध्यम से धनोपार्जन

१६-हिंदी ब्लागिंग से जुड़ने के तरीके
१७-हिंदी ब्लागिंग का वर्तमान परिदृश्य
१८- हिंदी ब्लागिंग का भविष्य

१९-हिंदी के श्रेष्ठ ब्लागर

२०-हिंदी तर विषयों से हिंदी ब्लागिंग का सम्बन्ध
२१- विभिन्न साहित्यिक विधाओं से सम्बंधित हिंदी ब्लाग
२२- हिंदी ब्लागिंग में सहायक तकनीकें
२३- हिंदी ब्लागिंग और कॉपी राइट कानून

२४- हिंदी ब्लागिंग और आलोचना
२५-हिंदी ब्लागिंग और साइबर ला
२६-हिंदी ब्लागिंग और आचार संहिता का प्रश्न
२७-हिंदी ब्लागिंग के लिए निर्धारित मूल्यों क़ी आवश्यकता
२८-हिंदी और भारतीय भाषाओं में ब्लागिंग का तुलनात्मक अध्ययन
२९-अंग्रेजी के मुकाबले हिंदी ब्लागिंग क़ी वर्तमान स्थिति

३०-हिंदी साहित्य और भाषा पर ब्लागिंग का प्रभाव

३१- हिंदी ब्लागिंग के माध्यम से रोजगार क़ी संभावनाएं
३२- हिंदी ब्लागिंग से सम्बंधित गजेट /स्वाफ्ट वयेर


३३- हिंदी ब्लाग्स पर उपलब्ध जानकारी कितनी विश्वसनीय ?

३४-हिंदी ब्लागिंग : एक प्रोद्योगिकी सापेक्ष विकास यात्रा

३५- डायरी विधा बनाम हिंदी ब्लागिंग

३६-हिंदी ब्लागिंग और व्यक्तिगत पत्रकारिता

३७-वेब पत्रकारिता में हिंदी ब्लागिंग का स्थान

३८- पत्रकारिता और ब्लागिंग का सम्बन्ध
३९- क्या ब्लागिंग को साहित्यिक विधा माना जा सकता है ?
४०-सामाजिक सरोकारों से जुड़े हिंदी ब्लाग

४१-हिंदी ब्लागिंग और प्रवासी भारतीय


आप सभी के सहयोग क़ी आवश्यकता है . अधिक जानकारी के लिए संपर्क करें



डॉ. मनीष कुमार मिश्रा
हिंदी विभाग के.एम्. अग्रवाल महाविद्यालय

गांधारी विलेज , पडघा रोड
कल्याण -पश्चिम, ,जिला-ठाणे
pin.421301

महाराष्ट्र
mo-09324790726
manishmuntazir@gmail.com
http://www.onlinehindijournal.blogspot.com/
http://kmagrawalcollege.org/

Anonymous said...

http://rockrockeumpoucoderock.blogspot.com/

Anonymous said...

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भारत की राष्‍ट्रीयता हिंदुत्‍व है